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ग्राउंड रिपोर्ट : बलिया में हुई किसान-मज़दूर महापंचायत का रूख क्या है?

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          किसान आंदोलन के समर्थन में सिकंदरपुर तहसील के चेतन किशोर में हुई किसान मज़दूर महापंचायत की ग्राउंड रिपोर्ट।

सिकंदरपुर । पूर्वांचल के बलिया में राकेश टिकैत ने किसान-मजदूर महापंचायत की। दिल्ली के बॉर्डरों पर जमें किसानों की खबरों के बाद पूर्वांचल के दोआब में संयुक्त किसान  मोर्चा का आंदोलन से जुड़ा हुआ यह पहला बड़ा कार्यक्रम था। बलिया के तहसील सिकंदरपुर में आयोजित इस महापंचायत में हज़ारों की भीड़ जुटी।

बैठने के लिए लगाई गईं कुर्सियों और बाकी की खाली जगहों पर भी लोग मौजूद रहे। लोग राकेश टिकैत और बाकी नेताओं को सुनने आए थे। महापंचायत में आए लोगों को मालूम था कि यहां दिल्ली के किसान आंदोलन से जुड़े लोग आ रहे हैं। हमने वहां मौजूद लोगों से बात की। कृषि कानूनों को लेकर ठीक-ठाक समझ रखे वहां आए लोग इस बात से भी आश्वस्त थे कि जो बातें कही जाएंगी उसे सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।

(किसान महापंचायत में 12 बजे तक पांडाल भर चुका था। )

80 साल की लीलावती भारती महिला दीर्घा में 60-70 महिलाओं के साथ बैठी थीं। पांचवी तक पढ़ी लीलावती चार दशकों से कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) से जुड़ी हुई हैं। लीलावती खेतहीन हैं। दो बेटों और तीन बेटियों के परिवार वाली लीलावती के परिवार का हरेक व्यक्ति मजदूरी करता है। तीनों कानूनों पर काफी विस्तृत बात करने के बाद लीलावती ने कहा,

‘इस कानून से किसान तो प्रभावित होंगे ही, भारी संख्या में मजदूर प्रभावित होंगे। लॉकडाउन में यह कानून लाकर किसानों की जमीन और जिंदगी के साथ धोखा किया जा रहा है। आज हम अपने गांव की महिलाओं के साथ यहां आए हैं, पूरी बात सुनेंगे और फिर आगे की लड़ाई लडे़ंगे।’

लीलावती के भीतर कमाल का आत्मविश्वास है, वो पांचवी तक पढ़े होने का जिक्र करके खुश हो जाती हैं।

पंजाब के पटियाला के मूल निवासी और 1979 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े सरदार केसर सिंह किसान-मजदूर महापंचायत में मौजूद थे। गंभीर हाव-भाव वाले सरदार केसर सिंह बलिया के बिल्थरा से मोटर पार्ट्स की दुकान संचालित करते हैं। अपने गृह जनपद में सरदार केसर सिंह छ: एकड़ की खेती भी करते हैं। किसान-मजदूर महापंचायत के सकारात्मक प्रभाव को लेकर आश्वस्त केसर सिंह कहते हैं,

‘पूर्वांचल में मजदूर-किसानों की समस्या पर अब देश के बाकी हिस्सों का भी ध्यान जाएगा। यहां MSP जितने जरूरी मुद्दे और भी हैं। जैसे, खाद-बीज की आपूर्ति, बिचौलियों का पूर्ण हस्तक्षेप वगैरह। पूर्वांचल की समस्याओं पर इस महापंचायत में आ रहे किसान नेताओं की आगे की रणनीति भी इस किसान आंदोलन को प्रभावित करेगी। इस सरकार की नीतियों से किसान, मजदूर और व्यापारी सभी परेशान है।‘अजीत राय; अपने आधे से अधिक खेतों में मछलीपालन करने लगे हैं।

राष्ट्रीय किसान मोर्चा से पूर्वांचल के पदाधिकारी और आयोजनकर्ताओं में शामिल अजीत राय इस महापंचायत के प्रभाव को लेकर आश्वस्त दिखे। चार एकड़ की खेती कर रहे अजीत राय पूर्वांचल में बलिया को महापंचायत के लिए चुनने के पीछे का कारण बताते हुए कहते हैं, ‘चूंकि यह बिहार से सटा हुआ जिला है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे आखिरी छोर पर होने के कारण यहां से बिहार के सटे हुए जिलों में भी आंदोलन की सुगबुगाहट जाएगी। इसके अलावा भी  बलिया ‘बागी’ धरती है, यहां से शुरुआत हुई है तो लड़ाई लंबी चलेगी।’

11 बजे की तय समय तक लोगों का आना शुरू हो ही रहा था कि करीब 25-30 युवाओं का एक जत्था आया। उर्जा से भरे इन युवाओं ने राकेश टिकैत और जय जवान जय किसान का नारा लगाया और मंच के पास कुर्सियां ले लीं। इनमें दुरौंधा गांव के अजीत यादव भी थे। 22 साल अजीत ने बीए तक की पढ़ाई पूरी कर ली है और प्रतियोगी परीक्षाएं दे रहे हैं। बलिया में संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यक्रम की जानकारी अजीत को सोशल मीडिया से मिली। अजीत ने बताया,

‘हम लोगों ने गांव में तय किया कि चला जाएगा और फिर किसान महापंचायत थी तो ट्रैक्टर-ट्राली से आने को सोचा। सब लोगों ने चंदा लगाकर तेल डलाया और आ गए’ आगे क्या करने है के सवाल पर अजीत ने कहा, ‘आज यहां जो सुना वो जाकर गांव में लोगों को बताएंगे’ अजीत के पिता दो एकड़ की खेती करते हैं। पिता के  साथ धान, गन्ना और गेंहू उपजा रहे अजीत नौकरी को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हैं। SSC और उत्तर प्रदेश पुलिस की भर्ती परीक्षा के परिणामों का इंतज़ार कर रहे अजीत वर्तमान सरकार से नाराज़ हैं।

1985 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े अहसन सहवर्ती सुबह 9 बजे से यहां मौजूद थे। चार बीघे की खेती वाले अहसन बिल्थरा के अकोप ग्रामसभा के ईकाई अध्यक्ष हैं। 1985 से संगठन के लिए काम कर रहे अहसन बताते हैं कि इस जनसभा की जिम्मेदारी भी थी इसलिए जल्दी आए।  धान और गेंहू की खेती करने वाले अहसन अपनी फसल MSP पर नहीं बेंच पाते हैं। उन्होंने बताया,

‘हम लोग के लिए फसल का उचित दाम पाना संभव नहीं है। क्रय केंद्र पर ले जाने से पहले ही बिचौलिये आ जाते हैं और कुछ मजबूरी किसान की भी होती है। हमारी मांग यही है कि एक रेट हो जाए। उसी पर बनिया भी खरीददारी करे और सरकार भी। हमारी बस यही मांग है कि छोटा-बड़ा किसान सब एक समान रेट पर बिक्री कर सकें।’

किसान महापंचायत में सिकंदरपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर से आईं अनीता देवी स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। अनीता खेतहीन हैं लेकिन गांव की कुछ महिलाओं के साथ मिलकर स्वरोजगार में लगी थीं। अनीता ने हमसे बातचीत में बताया कि उनके समूह पर कर्ज है और लॉकडाउन की वजह से महिलाएं कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। अब उनके घरों पर बैंक नोटिस दे रहे हैं। सरिता ने कहा, ‘जब बड़े-बड़े पूंजिपतियों का कर्ज माफ हो जा रहा है तो हम समूह की महिलोओं का कुछ हज़ार का कर्ज मोदी जी क्यों नहीं माफ कर सकते हैं।’अनीता अपने पति के साथ आईं थीं, कर्ज न चुकने से चिंतित थीं

इसी सबके बीच छोटे-बड़े जत्थों में महापंचायत में लोग आते रहे। और करीब 1:30 पर राकेश टिकैत की गाड़ी आई। बनारस से सड़क मार्ग से गाज़ीपुर में प्रेसवार्ता करके सिकंदरपुर पहुंचे राकेश टिकैत के साथ 6-7 गाड़ियां थीं। उनके पहुंचते ही किसी समान्य राजनैतिक रैली में होने वाली भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई और मंच तक आते-आते सेल्फियों का दौर शुरू हो गया। पत्रकार दीर्घा में नौजवानों सहित तमाम लोग सेल्फियां लेते रहे। और फिर मंच से घोषणा की गई,

‘आप सब से अनुरोध है कि ऐसी स्थिति न लाएं, हम पुलिस को नहीं बुलाएंगे लेकिन आपलोगों को खुद पीछे जाना होगा’। मंच से कुछ लोगों ने पुलिस का हस्तक्षेप चाहा भी लेकिन संचालक दो टूक में मना कर दिया। भीड़ थोड़ी देर में सेल्फियों से थकी और राकेश टिकैत मंच पर ही एकदम पीछे चले गए। टिकैत आयोजनकर्ताओं से अपनी बारी आने तक बात करते रहे। अपने साथ आए लोगों को लगातार कुछ लिख कर देते रहे।राकेश टिकैत की इस एंट्री के बाद लगभग 15 मिनट तक माहौल में अफरातफरी रही

लोग शांत होते तब तक मंच पर चहलकदमी बढ़ चुकी थी। इसी बीच किसान नेता युद्धवीर सिंह अचानक से मंच पर आए और शांत रहने की एक भावुकता से भरी अपील की। इसके बाद युद्धवीर सिंह ने अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कांट्रेक्ट फार्मिंग को लेकर पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा,

इन प्राइवेट कंपनियों ने पंजाब के आलू किसानों के साथ कांट्रेक्ट किया और लिखा कि कंपनी आलू के साइज़ ठीक न होने पर कांट्रेक्ट रद्द कर सकती हैं। अब बताइये, घर के दो बच्चों के हाथ पैर एक जैसे नहीं होते, गेंहू कैसे एक जैसे पैदा कर देगा? फसल के दाने मौसम पर निर्भर करते हैं। ये कहते हैं कि कांट्रेक्टर किसान की जमीन पर कब्जा नहीं ली पाएगा, ठीक बात है। लेकिन कांट्रेक्टर किसान की जिस जमीन पर फसल उगवाएगा उसपर लोन ले सकता है। अब बताइए जब कांट्रेक्टर लोन लेगा तो वो चढ़ेगा कहां? वो किसान की जमीन के खाते में जाएगा। कांट्रेक्टर तो भाग जाएगा, लेकिन लेखपाल और पटवारी तो कहेगा कि ये लोन भरो, सरकार को क्या मतलब कांट्रेक्टर कौन था।’

(युद्धवीर सिंह के भाषण को वहां मौजूद लोगों ने काफी सराहा। उन्होंने बहुत प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी)

युद्धवीर सिंह ने अपने 15 मिनट के वक्तव्य में  किसान कानूनों और किसान आंदोलन से जुड़ी सारी बातें बहुत आसान भाषा में समझायीं। लोगों ने बहुत जिम्मेदारी से सुना। पूरी बातचीत में किसान कानूनों और खेतहीन मजदूर-किसानों का जिक्र आता रहा। संघ और भाजपा पर सीधा टिप्पणी करते हुए युद्धवीर सिंह ने 26 जनवरी की लालकिला की घटना पर भी बात रखी।

इसके बाद दो तीन वक्ताओं ने अपनी बात रखी और राकेश टिकैत मंच पर आए। पत्रकार दीर्घा में फिर अफरातफरी मची लेकिन कुछ तस्वीरों के साथ मामला शांत हो गया। राकेश टिकैत ने ‘भिर्गु बाबा की जय’ का उद्घोष किया और अपने पहले ही वाक्य में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, शहीद मंगल पांडेय का जिक्र कर दिया। बलिया को एक विचारधारा बताते हुए राकेश टिकैत ने लगभग 16 मिनट का भाषण दिया। किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए राकेश टिकैत ने कहा, ‘अगर पॉलिटकल पार्टियों को भी अपनी मीटिंग करनी होगी तो किसान महापंचायत का नाम देना होगा। वो ऐसा करेंगे तो ही किसान उनकी पंचायत में जाएंगे। यह हमारी ताकत है और इसे बनाए रखना है।’ उन्होंने कहा, ‘आपके इस आंदोलन के चलते दुनिया भर में भारत के किसानों की  चर्चा है।

Pictures credit- Nirbhay Yadav

सरकार MSP पर कानून नहीं बना सकी लेकिन दुनिया में बात पहुंच रही है।’ जाते-जाते राकेश टिकैत ने क्षेत्रवाद से बचने की सलाह दी और पूर्वांचल को दिल्ली की तरफ चलने के लिए तैयार रहने को कहा, ये आंदोलन आपको चलाना है। 2021 आंदोलन का साल है। आप नहीं जगेंगे तो आपको भूमहीन होना होगा। जैसे आदिवासी जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं, हमारी स्थिति भी ऐसी हो जाएगी। बलिया आंदोलन की धरती है, यहां टिकैत साहब भी आ चुके हैं। यहां से बड़ी क्रांतियां हुई हैं। इसलिए जब जरूरत पड़ेगी अपने ट्रैक्टर-ट्राली के साथ में आपको निकलना पड़ेगा। जिस दिन दिल्ली से यहां संदेश आये और आपके बीच किसान यूनियनों के लोग दिल्ली चलने का आह्वान करने आएं, आप जो भी साधन मिले, उससे पहुंचें।’

अंतत: राकेश टिकैत का काफीला गुज़रा। लोग अपने घरों को लौटने लगे। यहां मौजूद लोग चुनावी दौर में भी रैलियों में आते रहे हैं लेकिन इस बार कुछ अलग रहा। जैसे, राजनैतिक रैलियों में राजनीतिक दलों के द्वारा भीतरखाने से लोगों को साधन और धन मुहैया कराया जाता है। मौजूद लोगों ने चंदा जुटाकर गाड़ीयां बुक की आयोजन स्थल के बाहर कार्यक्रम खत्म होने के बाद चाय या फल की दुकानों पर अफरातफरी नहीं थी। लोग घर जाते रहे, दुकानें आंख तकती रहीं। कोई सफेद कुर्ते में अपने साथ आए लोगों को नाश्ता पानी की चिंता में नहीं दिखा। यह सकारात्मक सी एक आखिरी बात थी।  इसके इतर इस महापंचायत का जिक्र मेन स्ट्रीम मीडिया में कहीं नहीं था जबकि पूर्वांचल की इस महापंचायत को इतना आसानी से नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता है।

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बलिया : पुलिस मुठभेड़ में 50 हजार का इनामिया बदमाश गिरफ्तार

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बलिया : बलिया के उभाव पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक डा0 विपिन ताडा के निर्देशन में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अवैध शराब की तस्करी के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में स्वाट टीम और उभाव थाने की संयुक्त टीम ने अंतर्जनपदीय 50 हजार के इनामिया बदमाश को गिरफ्तार किया।

मुखबीर की सूचना पर पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार इनामिया बदमाश के कब्जे से कई अवैध शस्त्र, कारतूस तथा अर्ध निर्मित शस्त्र व शस्त्र बनाने के उपकरण बरामद हुए हैं।

बता दें कि SHO उभांव ज्ञानेश्वर मिश्रा मय फोर्स व स्वाट टीम प्रभारी संजय सरोज मय फोर्स की संयुक्त टीम द्वारा मुखबिर की सूचना पर घाघरा नदी के किनारे से रात्रि करीब 03.05 बजे इनामिया अभियुक्त टेंगर नट पुत्र हरेन्द्र नट निवासी खरहाटार थाना गड़वार जनपद बलिया को पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया।

बता दें कि अभियुक्त बलिया ,देवरिया और गोरखपुर में वांछित था तथा काफी दिनों से फरार चल रहा था जिसकी गिरफ्तारी पर गोरखपुर पुलिस ने  50,000/- रू0 का इनाम घोषित किया था ।

पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से तमंचा, रिवाल्वर, कारतूस, अर्ध निर्मित तमंचा तथा शस्त्र बनाने के उपकरण आदि बरामद किया है ।
पूछताछः-
अभियुक्त टेंगर द्वारा बताया गया कि वह घाघरा नदी के नीचे एकांत व निर्जन स्थान में छिपकर असलहा बनाता था तथा अपने गिरोह के सदस्यों को सप्लाई करता था ।

पंजीकृत अभियोगः-
1. मु0अ0सं0- 48/20 धारा 307 भादवि थाना उभांव बलिया ।
2. मु0अ0सं0- 49/20 धारा 3/5/25 आर्म्स एक्ट थाना उभांव बलिया ।
3. मु0अ0सं0- 50/20 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट थाना उभांव बलिया ।

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पता:-
1. टेंगर नट पुत्र हरेन्द्र नट निवासी खरहाटार थाना गड़वार जनपद बलिया (HS)

बरामदगी का विवरण:-
1. 02 अदद तमंचा .315 बोर
2. 04 अदद जिन्दा कारतूस .315 बोर
3. 01 अदद खोखा कारतूस .315 बोर
4. 01 अदद रिवाल्वर (5 फायरा)
5. 03 अदद अर्ध निर्मित तमंचा .12 बोर
6. 05 अदद जिन्दा कारतूस .12 बोर
7. शस्त्र बनाने के उपकरण- (पिलास,सड़सी,हथौड़ी,हेक्सा ब्लेड, रेती,छिन्नी,पाइप, कांटी, लोहे की पत्ती , शिकंजा ,निहाई लोहे की , लोहे का U आकार का ठिहा, लकड़ी का बट रिंच ,अर्ध निर्मित बाडी लोहे की, बैरल लोहे की अर्ध निर्मित पाईप 02 फीट लम्बा,सुम्मी, स्क्रू छोटा बड़ा ,रिपिट छोटी बड़ी , फुलथ्रू आदि )

अभियुक्त HS टेंगर नट का आपराधिक इतिहासः-
1. मु0अ0सं0-104/11 धारा 395/397 भादवि थाना पकड़ी बलिया ।
2. मु0अ0सं0- 156/11 धारा 395/397 भादवि थाना पकड़ी बलिया ।
3. मु0अ0सं0- 66/16 धारा 395 भादवि थाना मनियर बलिया ।
4. मु0अ0सं0- 789/14 धारा 380/506 भादवि थाना मनियर बलिया ।
5. मु0अ0सं0- 707/16 धारा 380/457 भादवि थाना रसड़ा बलिया ।
6. मु0अ0सं0- 58/17 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट थाना रसड़ा बलिया ।
7. मु0अ0सं0- 01/18 धारा 272/273 भादवि व 60 आब0 अधि0 थाना कोतवाली बलिया ।
8. मु0अ0सं0- 01/18 धारा 457/380 भादवि थाना पकड़ी बलिया ।
9. मु0अ0सं0- 46/18 धारा 307 भादवि थाना पकड़ी बलिया ।
10. मु0अ0सं0- 736/20 धारा 395/354/342 भादवि व 7/8 पाक्सो एक्ट थाना गगहां जिला गोरखपुर
11. मु0अ0सं0- 286/20 धारा 395/411 भादवि थाना लार जिला देवरिया ।
12. मु0अ0सं0- 156/11 धारा 395/397 भादवि थाना पकड़ी बलिया ।

गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीमः-
1. प्र0नि0 ज्ञानेश्वर मिश्रा थाना उभांव बलिया मय फोर्स ।
2. उ0नि0 संजय सरोज प्रभारी स्वाट टीम बलिया ।
3. हे0का0 अनूप सिंह SOG टीम बलिया
4. हे0का0 अतुल सिंह SOG टीम बलिया
5. हे0का0 वेदप्रकाश दूबे SOG टीम बलिया
6. कां0 विजय राय SOG टीम बलिया
7. चालक अनिल पटेल SOG टीम बलिया
8. हे0का0 शशि प्रताप सिंह सर्विलांस बलिया ।
9. का0 रोहित यादव सर्विलांस बलिया ।
10. हे0कां0 संजीव कुमार सिंह थाना उभांव बलिया
11. कां0 बृजेश सिंह थाना उभांव बलिया
12. कां0 रणजीत सिंह यादव थाना उभांव बलिया
13. चालक हे0कां0 घनश्याम मिश्रा थाना उभांव बलिया

 

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बलिया में भरपूर मात्रा में है ऑक्सीजन सिलेंडर, जानें किस अस्पताल में कितने उपलब्ध ?

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बलिया। कोरोना महामारी में प्रदेश में ऑक्सीजन की खपत ज्यादा बढ़ गई है। इसका फायदा उठाते हुए दुकानदार ऑक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी करने में लगे हैं। लेकिन बलिया में फिलहाल ऑक्सीजन सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है और जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी के साथ ही एल-2 अस्पतालों में भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं।

जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी व एल-2 अस्पताल मिलाकर कुल 231 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। इसमें मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन छोटा और बड़ा मिलाकर कुल 166 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। इसमें 16 बड़ा और 150 छोटा सिलेंडर है। वहीं, जिला अस्पताल में कुल 53 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। इसमें 10 बड़ा और 43 छोटा सिलेंडर है। जिला महिला अस्पताल में कुल 12 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं जिसमें दो बड़ा और 10 छोटा है।

इस प्रकार, जिले में प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी नहीं है। वर्तमान में ऑक्सीजन सिलेंडरों का बलिया और मऊ से भरवाया जा रहा है। ऑक्सीजन समाप्त होते ही त्वरित भरवाकर मंगा लिया जा रहा है, ताकि कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी ना हो सके। वर्तमान में छोटा सिलेंडर भरवाने में करीब 200 रुपये और जीएसटी तथा बड़ा को भरवाने में करीब 336 रुपये और जीएसटी लग रहा है, जो पहले की अपेक्षा मामूली अधिक है।

108 और 102 एंबुलेंस में उपलब्ध है ऑक्सीजन सिलेंडर
बलिया के 108 और 102 एंबुलेंस प्रभारी अविनाश चंद्र मिश्रा के मुताबिक जिले में संचालित एंबुलेंस में प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। इस दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत 20 से 25 हो रही है। आलम यह है कि प्रतिदिन बलिया से 15 से 20 कोरोना मरीज रेफर किए जा रहे हैं। बताया कि 10 सिलेंडर को अतिरिक्त में भरवाकर रख दिया गया है।

इसके अलावा, अगर किसी एंबुलेंस में ऑक्सीजन समाप्त हो गया तो उसे वेंडर के यहां भेजने के बजाए दूूरी गाड़ी से उपलब्ध करा दिया जाता है और उस गाड़ी को वेंडर के यहां सिलेंडर के लिए भेज दिया जाता है। एंबुलेंस में ए, बी और सी तीन ऑक्सीजन सिलेंडर होते हैं। बताया कि जिले में 108 की 38 और 102 की 38 एंबुलेंस संचालित हैं। इसके अलावा, चार एडवांस लाइफ सिस्टम एंबुलेंस हैं। इसमें वेंटिनेटर की सुविधा आदि उपलब्ध है।

 

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बलिया में कोरोना कर्फ्यू का समय ख़त्म होते ही लोग लापरवाह, हर जगह दिखी भीड़

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बलिया : बलिया में कोरोना के तकरीबन रोज़ 450 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इस पर ब्रेक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने 35 घंटे का कोरोना कर्फ्यू  भी लागू किया था। जिसकी अवधि सोमवार सुबह 7 बजे समाप्त हो गई। अवधि समाप्त होते ही लोग पहले की तरह लापरवाह हो गए। बाजार से लेकर चौराहों तक पर भीड़ रही, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग भी तार-तार रहा। हालांकि अधिकांश लोगों के चेहरे पर मास्क और गमछा जरूर देखा गया।

पिछले कई दिनों से जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण को लेकर जिला प्रशासन की ओर से शनिवार की रात से सोमवार की सुबह तक 35 घंटे का कोराना कर्फ्यू लागू किया गया।

इस दौरान अभूतपूर्व बंदी रही तो लगा कि शायद लोगों को कोरोना की गंभीरता का एहसास हो गया है लेकिन सोमवार की सुबह कोरोना कर्फ्यू की अवधि समाप्त होते ही लोग एक बार फिर बेपरवाह दिखे। शहर का कोई मार्ग नहीं था, जहां सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार न होता रहा और खरीदारी के साथ ही आवाजाही की भीड़ न हो। अगर लोगों की लापरवाही इसी तरह बदस्तूर जारी रही तो आने वाले दिनों कोरोना संक्रमण को रोकना भी चुनौती भरा हो जाएगा।

 

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