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बलिया स्पेशल

Opinion: ठंड से कांपते किसानों के लिए जब उमड़ पड़ा था बलिया का समाज

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दिल्ली की सीमाओं पर हो रहे किसान आंदोलन के बहाने सिसौली के बाबा इन दिनों खूब याद आ रहे हैं. मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव के ही निवासी थे भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक और उत्तर भारत के दिग्गज किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत. 32 साल पहले 25 अक्टबर 1988 को दिल्ली के वोट क्लब को घेरकर उन्होंने तब की अपार बहुमत वाली राजीव सरकार को एक तरह से झुका दिया था. हालांकि तब उनकी जो मांगें थी, मौजूदा किसान आंदोलन में शामिल उनके बेटे राकेश और नरेश टिकैत उसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं. बहरहाल इस विषय में बहुत कुछ लिखा और पढ़ा जा चुका है. लेकिन उस आंदोलन की कुछ बातें इन दिनों फिर से याद करने की जरूरत है.

दिल्ली के वोट क्लब को घेरने का महेंद्र सिंह टिकैत ने तब लिया, जब उत्तर प्रदेश के जिला मुख्यालयों और कमिश्नरियों के घेराव के बावजूद कोई बात नहीं बनी. उन दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह थे. किसानों की उपज के लिए खुले बाजार की मांग को लेकर टिकैत के नेतृत्व ने पहले उत्तर प्रदेश के जिला मुख्यालयों और कमिश्नरियों का घेराव किया था. भारतीय किसान यूनियन का यह धरना 27 जनवरी 1988 से 19 फरवरी 1988 तक चला था. चूंकि भारतीय किसान यूनियन का जबरदस्त प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में था, लिहाजा इसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों और कमिश्नरी मुख्यालयों पर ज्यादा दिखा. मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी उस आंदोलन की गूंज तो थी, लेकिन असर ना के बराबर था.

उन दिनों इन पंक्तियों का लेखक उत्तर प्रदेश के सुदूर पूर्वी छोर पर स्थित बलिया में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था. घर से जिला मुख्यालय स्थित कॉलेज की यात्रा छोटी लाइन की ट्रेन से होती थी. एक दिन सुबह की ट्रेन से बलिया पहुंचे तो वहां का नजारा अलग था. बलिया रेलवे स्टेशन के दक्षिणी निकास द्वार के बाहर करीब एक सौ की संख्या में अलग ही नजर आ रहे किसान थे. वातावरण माघ की ठंड से सराबोर था. लेकिन ज्यादातर किसानों की देह पर गरम चादरें नहीं थीं. ज्यादातर ठंड में सिकुड़े हुए थे. उन्हें ठंड से बचाने और उनके खाना-पानी के लिए कुछ स्थानीय समाजसेवी संस्थाएं आगे आ चुकी थीं. उनके लिए चादरें और कंबल के लिए पैसे का चंदा किया जा रहा था. किसी व्यवसायी ने जाड़े की उस सुबह में उन किसानों के लिए चाय का इंतजाम कर दिया था. कहीं से नाश्ते के लिए पूड़ी-सब्जी और जलेबी का इंतजाम हो गया. जिला मुख्यालय के कुछ व्यवसायियों ने अपनी दुकानों से गर्म चादरें और कंबल दान कर दिए थे.

जाड़े की सुबह बलिया में ठिठुर रहे वे किसान दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के थे. कमिश्नरियां घेर रहे किसानों से छुटकारा पाने का तत्कालीन प्रशासन को उस समय का सबसे ज्यादा प्रचलित अहिंसक तरीका रास आया था. उन दिनों पुलिस आंदोलनकारियों से निबटने का बहुत ही शानदार अहिंसक तरीका अख्तियार करती थी.

आंदोलन स्थल से आंदोलनकारियों की ट्रकों-बसों में उठा लेना और आंदोलन की जगह से दो-चार-पांच सौ किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ देना. उत्तर प्रदेश की पुलिस ने यही काम किया था. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम किसानों को बलिया, देवरिया आदि जगहों पर रातोंरात छोड़ गई थी. आंदोलन से निबटने के इस तरीके के पीछे संभवत: य़ह सोच रही होगी कि बिना पैसे-रूपए आंदोलन में शामिल होने आए लोग अपने परिचित माहौल और इलाके से सैकड़ों किलोमीटर दूर होंगे तो सबसे पहले वे अपनी भूख-प्यास से ही निजात पाने की कोशिश में जुटेंगे, आंदोलन की जगह पर जल्द लौट भी नहीं पाएंगे.

हम गरीबी का लाख रोना रोएं, लेकिन यह भी सच है कि उदारीकरण के दौर में आर्थिक तरक्की के मोर्चे पर देश, समाज और व्यक्ति ने इन तीन दशकों में लंबी यात्रा की है.

आज आंदोलन से निबटने के लिए पुलिस शायद ही यह तरीका अख्तियार करे और कर भी ले तो उसका सफल होना मौजूदा संचार क्रांति के दौर में संभव भी नहीं है. आज ऑन लाइन बात ही नहीं, भुगतान की सुविधा है, फिर पहले की तुलना में लोगों क पास कहीं ज्यादा सामर्थ्य है.

बहरहाल उन किसानों को दोपहर तक बलिया की समाजसेवी संस्थाओं, किसान संगठन की राजनीति करने वाले लोगों और स्थानीय व्यवसायियों के साथ ही कॉलेजों के छात्रों ने खाने-पीने का इंतजाम कर दिया था. उनके लिए गरम चादरों का इंतजाम किया गया और सबके लिए रेलवे के दूसरे दर्जे के टिकट का इंतजाम करने के साथ ही उन्हें राह में खाने के लिए पूड़ी-सब्जी बांधकर शाम को वाराणसी और शाहगंज जाने वाली ट्रेनों से विदा किया था.

दिल्ली में चल रहे आंदोलन और वहां जुटे किसानों के लिए जुटाए जा रहे सरंजामों, भोजन-पानी के बेहतर इंतजामों के साथ ही थकान उतारने के लिए फुट मसाज वाली मशीनों के साथ ही ठंड के दिनों में गरमी देने वाले गद्दों की व्यवस्था इन दिनों खूब चर्चा में है. इस संदर्भ में करीब तीन दशक पुराना वह किसान आंदोलन और उसमें शामिल लोगों की बेबसी का याद आना स्वाभाविक है. आज अच्छा हो रहा है या पहले अच्छा हुआ, पहले का आंदोलन सही था कि आज का, इस पर भी खूब चर्चा हो रही है. लेकिन मौजूदा आंदोलन के संदर्भ में इस घटना को याद कर लेना चाहिए, तभी हमें पता चल पाएगा कि तब से लेकर अब तक किसान आंदोलन और किसान ने कहां तक की यात्रा पूरी कर ली है. (डिस्केलमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)

ब्लॉग- उमेश चतुर्वेदी ( पत्रकार और लेखक)

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय. देश के तकरीबन सभी पत्र पत्रिकाओं में लिखने वाले उमेश चतुर्वेदी इस समय आकाशवाणी से जुड़े है. भोजपुरी में उमेश जी के काम को देखते हुए उन्हें भोजपुरी साहित्य सम्मेलन ने भी सम्मानित किया है.

Source: News18Hindi

बलिया स्पेशल

थानाध्यक्ष पर हाथ छोड़ने के आरोप में जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी के पति गिरफ्तार

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बलिया। चितबड़ागांव थानाध्यक्ष के साथ हाथापाई-मारपीट करने के आरोप में जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी के पति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। खबर के मुताबिक बैरिया थाना क्षेत्र के नौरंगा गांव निवासी रविंद्रनाथ ठाकुर मंगलवार की सुबह करीब 11.30 बजे नामांकन कराने पहुंचे था आरोप है कि पत्नी के साथ अंदर जाने के लिए रविंद्रनाथ ने समर्थकों के साथ पुलिस के साथ हाथापाई की।

मामला इतना बढ़ गया कि कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य गेट पर तैनात चितबड़ागांव थानाध्यक्ष पर उन्होंने हाथ छोड़ दिया और वर्दी फाड़ दी। इसके बाद पुलिस ने हल्का बल का प्रयोग कर उसे हिरासत में ले लिया और उसके समर्थकों को खदेड़ा। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने थानाध्यक्ष की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्जकर जेल भेज दिया।

बता दें कि पंचायत चुनाव में नामांकन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए डीएम कार्यालय के मुख्यगेट पर चितबड़ागांव थानाध्यक्ष राकेश सिंह की तैनाती थी। करीब 11.30 बजे जिला पंचायत सदस्य की प्रत्याशी एवं पत्नी का नामांकन करने जिलाधिकारी कार्यालय पर बैरिया थाना क्षेत्र के नौरंगा गांव निवासी रविंद्रनाथ ठाकुर पहुंचे। जहां पत्नी के साथ अंदर जाने के लिए समर्थकों के साथ जिद करने लगे। जिन्हें थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों ने नियम का उल्लंघन का हवाला देते हुए अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद वह भड़क गए और चितबड़ागांव थानाध्यक्ष पर हाथ छोड़ दिया और वर्दी फाड़ दी। इसके बाद पुलिस ने हल्का बल का प्रयोग कर उसे हिरासत में ले लिया और समर्थकों को खदेड़ा।

इस मामले पर एएसपी संजय कुमार ने बताया कि एक प्रत्याशी के साथ एक समर्थक को अंदर जाना था, लेकिन वह समर्थकों के साथ अंदर जाने की जिद कर रहा था। थानाध्यक्ष द्वारा रोका गया तो वह उनसे भीड़ गया। आरोपी को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया गया और जेल भेज दिया गया।

 

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महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं बलिया की ये बेटी, बीडीसी का चुनाव लड़ पेश कर रही नजीर !

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बलिया डेस्क: बलिया के नरही थाना क्षेत्र के पिपरा कलां गांव में चुनावी रंजिश में कहासुनी के बाद ईंट पत्थर चलने के साथ ही फायरिंग हो गई वाली घटना तो आपको याद ही होगी। अगर नहीं जानते हैं तो हम आपको इस घटना के बारे में बताएंगे। दरअसल जिले का पंचायती चुनाव में बवाल का यह सबसे चर्चित मामला है। जिसने पुलिस प्रशासन तक पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया था। घटना को हम आपको बताएंगे लेकिन जिले में इस घटना ने महिला सशक्तिकरण का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो जिले की हर बेटी के लिए नजीर बन सकता हैं।

इस घटना में घायल चंद्रभान सिंह की बेटी में महिला सशक्तिकरण के लिए वास्तव में एक मिसाल पेश की किया। उनके पिता के साथ हुए मारपीट के बावजूद भी इस लड़की ने हार नहीं मानी और आज अपना बीडीसी चुनाव के लिए पर्चा भरा। हालांकि दबंगों ने इनको चुप कराने के लिए अपने स्तर से कोई प्रयास नहीं छोड़ा। परंतु इस गांव की बेटी ने बिल्कुल हार नहीं मानी। दिलचस्प बात यह है जिले की पिपरा कला गांव की इस बेटी ने एक ऐसा मिसाल कायम किया। जिसे जानकर आपको गर्व की अनुभूति होगी। दरअसल अमृता सिंह आजादी के बाद इस गांव की पहली बेटी हैं जिन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। जो वास्तव में सराहनीय है।

अब आप यह भी जान लीजिए कि मामला क्या था?

विकासखंड सोहांव में ब्लाक प्रमुख पद इस बार अनारक्षित है। इसको लेकर सम्भावित प्रमुख पद के प्रत्याशी क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) का चुनाव जीतने को अपने क्षेत्र में डटे थे। दावतों का भी दौर चल रहा था। इसी कड़ी में पिपरा कलां गांव में शुक्रवार की रात क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के दो दावेदारों की पार्टी अलग-अलग चल रही थी। दोनों दावेदार क्षेत्र पंचायत सदस्य की एक ही सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों का घर पास में ही है।

एक पक्ष के आकाश सिंह की दावत रात के 9:00 बजे खत्म हो गई, जबकि दूसरे पक्ष के मनीष सिंह धीरज की दावत विक्रमा सिंह के दरवाजे पर चल रही थी। आरोप हैं कि उसी दौरान मनीष सिंह धीरज की तरफ से छींटाकशी की गई, जिसका प्रतिरोध आकाश सिंह के समर्थकों ने किया तो दोनों पक्ष में कहासुनी होने के बाद ईंट पत्थर चलने लगे। इसमें आकाश सिंह के पिता चंद्रभान सिंह को सिर पर गंभीर चोटें आई। इसके बाद हो-हल्ला मचने पर फायरिंग शुरू हो गई। सूचना मिलते ही नरही थाना प्रभारी योगेंद्र बहादुर सिंह मौके पर पहुंच गये। तब तक चितबड़ागांव और फेफना थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। इसी समय पुलिस अधीक्षक विपिन टाडा भी मौके पर पहुंच गए।

पुलिस ने रात में ही दबिश देनी शुरू कर दी। इसमें दोनों पक्षों से 7 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसमें प्रथम पक्ष से विजय सिंह उर्फ बागी पुत्र परमात्मा सिंह, रविशंकर सिंह उर्फ सीटू पुत्र हरिशंकर सिंह, धर्मेंद्र नाथ सिंह पुत्र स्व. प्रसिद्ध नाथ सिंह निवासी पिपरां कलां तथा दूसरे पक्ष से लक्ष्मण सिंह पुत्र स्व. रामचंद्र सिंह, संतोष सिंह पुत्र स्व. गुप्तेश्वर सिंह, दिग्विजय सिंह पुत्र स्व. चंद्रबली सिंह निवासी पिपरा कला एवं संजय सिंह यादव पुत्र रामराज सिंह यादव निवासी खैराबारी थाना भांवरकोल गिरफ्तार किए गए।

घटना में बुरी तरह से घायल चंद्रभान सिंह को इलाज के लिए रात में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरही पर लाया गया, जहां उनकी हालत को गंभीर देख चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन वहां से भी उन्हें वाराणसी रेफर किया गया है। उनका इलाज ट्रामा सेंटर वाराणसी में चल रहा है।

इस घटना में घायल चंद्रभान सिंह की पुत्री ने बलिया के एसपी को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाया था

इस घटना के बाद घायल चंद्रभान सिंह की पुत्री ने बलिया के एसपी को पत्र लिखकर दूसरे पक्ष पर गंभीर आरोप लगाने के साथ-साथ अपने जीवन की सुरक्षा की भी मांग की थी । दरअसल चंद्रभान सिंह की पुत्री अमृता सिंह ने बलिया एसपी को पत्र लिखते हुए कहा कि दूसरे पक्ष के लोगों ने हमारे घर वालों के ऊपर लाठी-डंडों के साथ गोलीबारी, फरसा से हमला किये। जिसे मेरे पिता चंद्रभान सिंह बुरे तरीके से घायल हो गये।

जिनका इलाज बीएचयू के ट्रामा सेंटर में चल रहा है जो जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने पत्र लिखते हुए आरोप लगाया कि मेरे पिताजी जब घायल हुए थे तो, उनके एंबुलेंस को रोका गया और एंबुलेंस में तोड़फोड़ की गई। उन्होंने आगे अपनी सुरक्षा की मांग करते हुए कहा, कि मेरे घर में अभी कोई पुरुष इस वक्त मौजूद नहीं है , उन्होंने पत्र में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाना नरही को लेकर विपक्षी हमारे घर आते हैं और अश्लील हरकत हम बच्चियों के साथ करते हैं घर में तोड़फोड़ और अपमान भी करते हैं।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि छत के ऊपर से लोग घर में प्रवेश कर करते हैं और तोड़फोड़ करते हैं उन्होंने यह भी कहा कि मेरे घर में मेरी बहन के बक्से को तोड़कर 35000 की नगदी एवं ज्वेलरी भी चुरा ले गए हैं, पुलिस की उपस्थिति में इस कार्य के होने से मेरे परिवार के औरतों का जीवन जीना दुर्लभ हो गया है इसके साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया कि इस चुनाव से दूरी बनाने हेतु उनसे सभी कारगुजारी भी कर रहे हैं। जिससे मेरे जीवन को भी खतरा है ऐसी स्थिति में उन्होंने पुलिस से न्याय संगत जांच करने की मांग करती हैं।

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बलिया

बलिया- जिले के करम्मर गांव से प्रधान पद के लिए किन्नर मदन ने भी भरा पर्चा

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बलिया डेस्क: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल करने आये किन्नर उम्मीदवार करम्मर गांव के मदन ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मदन पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित सीट से नामांकन दाखिल करने के लिए आये थे।

नामांकन के प्रथम दिन बेरूआरबारी स्थानीय विकासखंड से प्रधान,बीडीसी तथा ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए 564 लोगों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

आरो डा. जगदीश लाल ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम दिन ब्लॉक बेरुआरबारी के विभिन्न गांव में क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए 246,प्रधान पदों के लिए 227 एवं ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए 91 लोगों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किया गया। एसडीएम दुष्यंत कुमार मौर्य,सीओ अशोक कुमार नामांकल स्थल का जायजा लिए।

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