मानसिक रोग को छुपाएं नहीं आगे आएं और कराएं समुचित इलाज: डा. ए. कुमार

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बलिया। जनपद में मानसिक व सामाजिक कष्टकर रहे लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब उन्हें इसके इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। मानसिक विकृति का इलाज अब बलिया शहर के हासपिटल रोड स्थित मेयो मेडिकल कालेज लखनउ सहायक प्रोफेसर, पूर्व किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्वालय लखनउ के पूर्व सीनियर रेजीडेन्ट व न्यूरो, मानसिक रोग विशेषज्ञ डा.अनिल कुमार द्वारा सफलता पूर्वक इलाज कर स्कोलियोसिस समस्या से छुटकारा दिलाया है।

डा. ए कुमार ने बलिया खबर से खास बातचीत के दौरान बताया कि किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की वह स्थिति है। जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर ‘सामान्य’ नहीं कहा जाता। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त व्यक्तियों का व्यवहार असामान्‍य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) निर्धारित किया जाता है और जिसमें महत्‍वपूर्ण व्‍यथा अथवा असमर्थता अन्‍तर्ग्रस्‍त होती है। इन्हें मनोरोग, मानसिक रोग, मानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार भी कहते हैं।

डा. ए कुमार ने कहा कि मनोरोग अब अभिशाप नहीं है, मानसिक स्वास्थ्य व शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं। शारीरिक बीमारियों का तो उपचार मिल जाता है लेकिन मानसिक बीमारियों का बलिया जैसे जिले में कोई साधन नहीं था और तो और तनाव और अवसाद की स्थिति में कोई राय देने वाला तक नहीं था। ऐसे में मरीजों की काउंसिलिग के साथ साथजरूरत पड़ने पर उसका उपचार भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि कई ऐसी बीमारियां हैं जिसका बहुत ही हल्का उपचार है लेकिन गलतफहमियों के चलते दिक्कत बढ़ती जाती है।

मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन की वजह से पैदा होते हैं तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की जरूरत होती है।

कहा कि मानसिक रोग को छुपाएं नहीं। आगे आएं और रोग का समुचित इलाज कराएं। देर करने पर मामला घातक बीमारी तरह बिगड़ सकता है। समय रहते मरीज को चिकित्सक के पास ले जाएं। जरूरत है कि समाज में मानसिक बीमारी को लेकर जागरूकता लाई जाए।

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