क्या बलिया सीट से भाजपा बदलेगी चेहरा ? जानें क्या हैं सांसद भरत सिंह का रिपोर्ट कार्ड !

BALLIA SPECIAL

बलिया – लोकसभा चुनावों में कुछ ही महीने हैं इस चुनाव में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें पर संघर्ष होता है. प्रदेश में अधिक सीट हैं इसलिए सभी बड़ी पार्टी यहां पर चुनाव प्रचार में बड़ी मेहनत करती हैं. वहीं साल 2014 में बलिया लोकसभा सीट पर हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार भरत सिंह ने जीत कर भगवा लहराया था.

2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले भरत सिंह ने स्नातक तक की शिक्षा हासिल की है. उनका पेशा मूल रूप से खेती है. उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी है.

भरत सिंह पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं. लोकसभा में उनकी उपस्थिति भी बेहद शानदार रही है. वह हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं.

8 जनवरी, 2019 तक चले सत्रों में उनकी उपस्थिति 94 फीसदी रही है. 16 में से 6 सत्रों में उनकी उपस्थिति 100 फीसदी रही जबकि अन्य 9 सत्रों में 90 फीसदी से ज्यादा संसद में उपस्थित रहे.

उनकी सबसे खराब उपस्थिति 2016 के बजट सत्र के दूसरे चरण में रही जहां उनकी उपस्थिति 69 फीसदी रही. जहां तक बहस में भाग लेने का सवाल है तो उन्होंने 51 बहस में हिस्सा लिया.

हालांकि इस मामले में वह राष्ट्रीय औसत (65.3%) और राज्य औसत (107.2%) से कम है. संसद सत्र के दौरान सवाल पूछने के मामले में सवालों की झड़ी लगा दी. उन्होंने 425 सवाल पूछे.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले बलिया से 2014 में बीजेपी ने पहली बार अपनी जीत का खाता खोला था. 5 साल बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा-बसपा गठबंधन के बाद बीजेपी के लिए अपनी यह सीट बचाए रख पाना आसान नहीं होगा.

क्योंकि दूसरी भाजपा के ही कई नेता टिकट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं. अब ये देखना दिलचस्प होगा की क्या भाजपा इस बार किसी नए चेहरे के साथ मैदान में आती है या फिर भरत सिंह पर ही दावं खेलेगी. हालांकि बलिया खबर को बीजेपी के एक सूत्र ने बताया की बलिया लोकसभा सीट पर फ़िलहाल अभी कोई फ़ैसला नहीं हुआ है.

वही दूसरी तरफ चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर पिछली बार सपा के टिकट पर दूसरे नंबर पर रहे थे और इस बार वो कड़ी चुनौती दे सकते हैं. लेकिन वहां भी इस बार नारद रॉय को लेकर चर्चा का बाज़ार गर्म है. अब देखना होगा कि बीजेपी अपनी सीट बचा पाती है या फिर नए समीकरण का फायदा उठाते हुए सपा -बसपा गठबंधन के उमीदवार लोकसभा पहुंच पाते हैं या नहीं.

 

 

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