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बलिया में आज कोरोना के 10 नए मामले सामने आये

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बलिया में मंगलवार को दस  नया कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया हैं। जिलें में कुल मरीजों की संख्या 122 हो गई है। जिले में अब तक कुल 112 पॉजिटिव केस थे। इसमे से 75 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं।

उन्हें होम क्वॉरंटीन रहने की सलाह दी गई है। मंगलवार को आई रिपोर्ट में नगर के ओकडेनगंज चौकी के बगल में स्थित लक्ष्मी मार्केट में 9 तथा नगरा में एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव मिला है।

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जानिए अधिकारियों और नाराज़ व्यापारियों के बीच बैठक की वो बातें, जो सामने नहीं आईं

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बलिया डेस्क : बलिया में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। महामारी के इस ख़तरे को देखते हुए ज़िला प्रशासन एक्टिव मोड में आ गया है। नगर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में अधिशासी अधिकारी (ईओ) दिनेश कुमार विश्वकर्मा अपनी टीम के साथ मिलकर बाज़ारों का निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान उन दुकानदारों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जा रही है, जो कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

प्रशासन की इस कार्रवाई में दुकानदारों से जुर्माने की रकम वसूली गई है। जिससे व्यापारी संगठन बेहद नाराज़ हैं। व्यापारी संगठनों ने ईओ दिनेश कुमार विश्वकर्मा के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि ईओ उन्हें अनावश्यक ही परेशान कर रहे हैं, जबकि वह सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। साथ ही नाराज व्यापारियों ने ईओ समेत कई अधिकारीयों पर कारवाई करने की मांग भी मंत्री से की।

क्या बोले आनन्द स्वरूप शुक्ल ? व्यापारियों की नाराज़गी के मद्देनज़र रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यापारियों की एक बैठक भी हुई। बैठक में व्यापारियों की नाराज़गी को देखते हुए संसदीय कार्य व ग्राम विकास राज्यमन्त्री आनन्द स्वरूप शुक्ल भी उनके समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने व्यापारियों को आश्वासन दिया है कि प्रशासन द्वारा वसूला गया जुर्माना उन्हें वापस लौटा दिया जाएगा।

ईओ ने रखा अपना पक्ष- इस बैठक में ईओ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सिर्फ इसलिए की ताकि कोरोना संक्रमण के ख़तरे की रोकथाम हो सके। उन्होंने कहा कि कड़ा कदम उटाए बिना कोरोना के ख़तरे को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता। बैठक में मौजूद रहे ज़िलाधिकारी श्री हरि प्रताप शाही ने इस दौरान ईओ की बातों का समर्थन किया।

बैठक में डीएम ने क्या कहा? बलिया खबर के सूत्रों के मुताबिक, शांति से तकरीबन आधे घंटे तक सभी को सुनने के बाद डीएम ने इशारो इशारों में कई बड़ी बातें भी कही। उन्होंने बैठक में कहा कि शुरुआत में कोरोना संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए आप में से ही कई व्यापारी सख्ती की मांग कर रहे थे। लेकिन अब प्रशासन की ओर से सख्ती की जा रही है तो आप इसका विरोध कर रहे हैं। जबकि आपको भी पता है कि कोरोना की रोकथाम के लिए सख्ती ज़रूरी है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण सबसे ज़्यादा बाज़ारों से ही फैल रहा है। इसलिए इसे अनुशासित किया जाना आवश्यक है।

डीएम ने कहा कि आज बलिया नगर में 500 से ज़्यादा कोरोना पाज़िटिव केस हैं, इनमें से 300 से ज़्दाया प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से व्यापारियों और उनके परिवार से जुड़े केस हैं। उन्होंने कहा कि बलिया नगर में पहला केस 25 जून को लक्ष्मी मार्केट से ही सामने आया था। इसके साथ ही उन्होंने उस कोरोना पॉज़िटिव सेल्स गर्ल का भी उदाहरण दिया जिसके सम्पर्क में आने से 21 लोग कोरोना पाज़िटिव हो गए थे। डीएम ने कहा हैरानी की बात ये है कि जिस दिन उस सेल्स गर्ल के दुकान की बैरिकेटिंग हो रही थी उसी दिन उस दूकान के स्वामी वहां बैठ कर ग्राहकों से पैसे का लेंन देंन कर रहे थे, ये संवेदनशीलता है हमारी ?

शाही ने कहा कि इन्हीं सब तथ्यों को देखते हुए मार्केट में ख़ास अनुशासन की ज़रूरत है। जिसका पालन नहीं किया गया तो ख़तरा बढ़ सकता है। व्यापारियों को चाहिए कि वह कोरोना के खिलाफ़ इस जंग में प्रशासन का साथ दें।

बलिया में कोरोना की स्थिति-  10 अगस्त की सुबह तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बलिया में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस संक्रमण के 83 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही अब बलिया में कुल दर्ज मरीज़ों की संख्या 2410  के पार हो गई है। बलिया में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी। वहीं अब जिले में ऐक्टिव 933 हैं।

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बलिया में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 83 नए मामले सामने आए

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बलिया डेस्क:  बलिया में में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों  की रफ्तार रोजाना बढ़ती ही जा रही है. बलिया में बीते 24 घंटे के भीतर 83 मामले आए हैं. 10 अगस्त की सुबह तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बलिया में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस संक्रमण के 83  नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही अब बलिया में कुल दर्ज मरीज़ों की संख्या 2410  के पार हो गई है.  बलिया में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी .वहीं अब जिले में ऐक्टिव 933 हैं.

 

 

 

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आज ही के दिन 10 अगस्त 1942 की कहानी, जब बलिया में जनक्रांति का बिगुल बजा

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देश भले ही 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ लेकिन बलिया पांच साल पहले 1942 में ही आजाद हो गया था।  हालांकि यह आजादी महज 13 दिनों तक ही रही लेकिन बलिया की धरती से आजादी के दिवानों ने ब्रिटिश हुकूमत के छक्के छुड़ा दिए थे। नौ अगस्त को शुरू हुई क्रांति ज्वाला धीरे-धीरे धधकने लगी थी।

आंदोलन करने वाले बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। बम्बई में महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल आदि नेताओं को पकड़ कर आगा खां महल में नजरबंद कर दिया गया था। इसकी जानकारी होने के बाद 10 अगस्त को भोर में ही लोग घरों से लालटेन लेकर निकल पड़े।

सुबह के चार भी नही बजे थे कि अंधेरे में लालटेन लिए पैदल, साइकिल से बीसों कार्यकर्त्ता एलान करने लगे। कुछ तेज तर्रार युवक अपने भोंपू से चौराहे पर भाषण भी दिए। दो घण्टें के अन्दर पूरे बलिया “शहर को मालूम हो गया कि आज गांधी जी की गिरफ्तारी के विरोध में “शहर बन्द रहेगा, जुलूस निकलेगा।

प्रात: ठीक आठ बजे ओक्डेनगंज चौराहे पर (जहां वर्तमान में श्री उमाशंकर जी की प्रतिमा लगी है) सभी कार्यकर्त्ता पहुंच गए। बलिया “शहर के डिक्टेटर श्री उमाशंकर जी ने साथियों के साथ ‘महात्मा गांधी की जय, भारतमाता की जय, इन्कलाब जिन्दाबाद ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे लगाने लगें। कुछ ही देर में शहर के सैकड़ो लोग इस क्रांति के शंखनाद में जुट गए। जनता की बढ़ती जा रही भीड़ को देखकर उत्साहित हुए उमाशंकर जी ने अपने भोंपू से संक्षिप्त ओजस्वी भाषण दिया। साथ ही जुलूस निकाल कर पूरे शहर में हड़ताल कराने के कार्यक्रम का एलान किया।

इस जुलूस के संचालन मे उमाशंकर के प्रमुख साथी श्रीकान्त पाण्डेय और सूरज प्रसाद तथा अवध किशोर सहयोग दे रहे थे। जुलूस में अब भीड़ भी अच्छी हो गयी थी। तभी स्टे्शन पर एक ट्रेन आ गई, उन दिनों ट्रेन से काफी युवक बलिया में पढ़ने आते थे। जुलूस जब रेलवे स्टे्शन पर नारे लगाता पहुंचा तो ट्रेन से उतरे सभी विद्यार्थी स्वयं ही जुलूस मे शामिल हो गए। यहां से यह जुलूस चौक की ओर चल दिया।

चौक पहुचने पर जुलुस में काफी अधिक लोग शामिल हो गए। अब इन लोगों ने स्कूलों को बन्द कराने लिए लोहापट्टी, शनिचरी मंदिर का रास्ता पकड़ा। बालेश्वर घाट के आगे टाउन स्कूल (अब गुलाब देवी इण्टर कॉलेज एवं डिग्री कॉलेज) पहुचे । टाउन स्कूल के विद्यार्थी जुलुस में शामिल हो गए ।

यहां से यह जूलूस मेस्टन हाईस्कूल (अब लक्ष्मीराज देवी इण्टर कालेज) की ओर बढ़ा, स्कूल बन्द करके तो विद्यार्थी तो आए ही स्कूल के छात्रावास के बच्चे भी जुलूस में शामिल हो गए जिनका नेतृत्व योगेन्द्र नाथ मिश्र , गौरीशंकर राय (जो बाद में सांसद बने) तथा श्री बासुदेव राय कर रहे थे। यहां से जन सैलाब बनकर यह जूलूस जब मालगोदाम पहुंचा तो कम्युनिस्ट नेता श्री विश्वनाथ प्रसाद ‘‘मर्दाना’’ मिल गए, उन्होंने अपने अंदाज में इस जन सैलाब को ललकारा नतीजन मालगोदाम के मोटिहा मजदूर भी जूलूस में शामिल हो गए। गर्वमेन्ट स्कूल होकर यह जूलूस कचहरी में जाकर समाप्त हुआ।

साभार – उ0प्र0 राजकीय अभिलेखागार लखनऊ के क्षेत्रीय अभिलेखागार वाराणसी द्वारा प्रकाशित पुस्तक ” 1942 की अगस्त क्रांति और बलिया ” लेखक: शिवकुमार सिंह कौशिकेय, चित्रकार – राघवेन्द्र प्रताप सिं

 

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