बलिया- योजनाओं का काम पूरा नहीं लेकिन गायब हो गये लाखों के सामान

बलिया- शहर का कचरा निपटाने के लिये शासन व स्थानीय स्तर से योजनाएं तो बहुत बनी, लेकिन वह फाईलों से निकलकर धरातल पर नहीं उतर सकी। कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था के लिये अब तक करोड़ों खर्च होने के बाद भी समस्या का सामाधान नहीं हो सका।

कूड़ा प्रबंधन के लिये साल 2007 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना के तहत दस करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इस पैसे से शहर से करीब सात किमी दुर बसंतपुर गांव के पास सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण शुरु हुआ। हालांकि एक दशक बाद भी निर्माण कार्य पुरा नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो प्लांट में लगायी गयी मशीनों में जंग लग रहा है तथा दीवारे आदि भी गिरने की कगार पर पहुंच चुके है। कुछ उपकरण तो चोरी हो चुके है जिसकी जानकारी शायद जिम्मेदारों को भी नहीं है। शहर से निकलने वाले कूड़ा-कचरा को कुछ साल पहले तक शहर में जहा-तहा रखा जाता था। हालांकि उस दौर में वह इलाके पुरी तरह से विरान थे, तथा लोगों का भी उस ओर आना-जाना कम होता था।

समय के साथ शहर का दायरा बढ़ा तो कई गड्ढ़ों, जलाशयों व कुओं को कचरा से पाटकर लोगों ने कोठियां खड़ी कर ली। इसके बाद नगर पालिका की ओर से शहर से सटे महावीर घाट के पास गंगा तट की ओर जाने वाली सड़क के किनारे कचरा डम्प होने लगा जो सिलसिला अब भी जारी है। शासन की ओर से कूड़ा निस्तारण के लिये प्लांट निर्माण की योजना बनायी गयी। कूड़ा निस्तारण की जिम्मेदारी ए-टू-जेड संस्था को तथा निर्माण का जिम्मा जल निगम की इकाई सीएनडीएस को सौपी गयी। प्लांट निर्माण शुरु हुआ तथा चाहरदीवारी के बाद टीन शेड लगाकर उसमें मशीने भी लग गयी। कुछ दिनों पहले जल निगम व नगर पालिका के अफसर बसंतपुर निरीक्षण करने के लिये पहुंचे तो लाखों रुपये के उपकरण गायब मिले। उन्होंने इस मामले से अधिकारियों को भी अवगत करा दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here