रेलवे भर्ती परीक्षा में आईटीआई की अनिवार्यता खत्म,ऐसे करें अप्लाई

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रेलवे भर्ती परीक्षा में आईटीआई की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब ग्रुप डी परीक्षाओं के लिए आटीआई या एनसीटी योग्यता की दरकार नहीं रहेगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर इस फैसले की जानकारी दी है। रेल मंत्री ने एक के बाद कई ट्वीट किए हैं। इस निर्णय से उन लाखों छात्रों का प्रयास रंग लाया है जो पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ITI की अनिवार्यता को समाप्त करने पर रेलमंत्री पीयूष गोयल को बधाई देते हुए कहा कि इस फैसले से बिहार के हजारों छात्र लाभान्वित होंगे। रेल मंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि इस पूरे विषय में सरकार से युवक-युवतियों की, जनता जनार्दन की उम्मीदें हैं। सबको समान मौका मिले, रेलवे भर्ती की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिले, इसलिए जनहित में फैसले लिए हैं। बताया कि कक्षा 10 या ITI या NCVT का प्रमाणपत्र रखने वाले सभी अभ्यर्थी अब लेवल-1 की परीक्षा के योग्य माने जायेंगे। वे वह इन पदों के लिये आवेदन कर सकते हैं। एक अन्य ट्वीट में कहा कि पहले 10वीं कक्षा पास विद्यार्थी लेवल-1 परीक्षा में भाग ले सकते थे। हम इस स्थिति को पुनः स्थापित कर रहे हैं। अब इस परीक्षा के लिये 10वीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। Railways has decided for this exam, there is no insistence on ITI or NTC qualification for the entire group D, we are reverting back to the criteria which were existing earlier: @PiyushGoyal पूरे बिहार में चल रहा था आंदोलन : पिछले कई दिनों से ग्रुप डी परीक्षाओं में उम्र सीमा बढ़ाने, आईटीआई अनिवार्यता हटाने और 10वीं शैक्षणिक योग्यता रखने को पूरे बिहार में आंदोलन चल रहा था। पटना में पिछले चार दिनों से लगातार छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। गुरुवार को भी पटना के बहादुरपुर में रेलवे की ग्रुप डी परीक्षाओं में आईटीआई की अनिवार्यता समाप्त करने को लेकर छात्रों ने रेलवे ट्रैक को जाम किया। भारी संख्या में पहुंचे छात्रों ने आगजनी की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कटिहार इंटरसिटी एक्सप्रेस को घंटे भर रोक रखा। इसके साथ ही जयपुर एक्सप्रेस को भी रोका गया। बता दें कि मंगलवार को इसी मुद्दे को लेकर पटना के राजेंद्रनगर में बवाल किया गया था। नया टोला में भी छात्रों ने खूब हंगामा किया था। कोचिंग सेंटर में तोड़फोड़ और पथराव के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। सबसे ज्यादा विरोध औरंगाबाद के रफीगंज में देखने को मिला था। इसी तरह आरा में भी छात्रों का आक्रोश रहा था।

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