औरत का खुशबू लगाना जायज़ है ? गुनाह…

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असस्सलामोअलैकुम भाइयो और बहनों। औरत खुदा की नेमतों में से 1 बड़ी नेमत है औरत दीनदारी में मर्दो के समान है औरत आदम अलैहिस्सलाम और दादी हव्वा के सिवा तमाम इंसानो की मां है इस लिए वो सबके लिए क़ाबिल एहतराम है इस्लाम में औरतो का एक अलग ही मुक्काम है उनको अलग जिन्नत बनाया है, इस्लाम आने से पहले औरतो की कोई कीमत नहीं थी.

अरब ऐसे मुअलिक देशो में बच्चीओ को ज़िंदा दफ़न कर दिया जाता था इस्लाम आने के बाद रोका गया क़ुरान में अल्लाह का हुक्म आया अल्लाह इन ज़िंदा बच्चियो से पूछेगा की किस ज़ुल्म में तुम्हे दफनाया गया. औरत का वजूद इंसानी तमद्दुन के लिए बहुत ज़रूरी है अगर औरत ने होती तो। मर्दों की ज़िंदगी जानवर से बदतर होती।

औरत बचपन मे भाई बहनो से मोहब्बत करती बड़े होकर शादी बाद शौहर से मोहब्बत करती उसकी इज़्ज़त करती। माँ बनकर औलाद से मोहब्बत करती।औरत अल्लाह ने बहोत बुलंद बनाया है।आइये जानते है उन औरतो के बारे में जो खुशबू लगाकर घरो से बाहर जाती है । घर से बाहर खुशबु लगाकर औरतो को बाहर निकलने पर सख्त मनाई है। जो औरते घर से बाहर खुशबू लगाकर निकलती ऐसी औरो को हुज़ूरे पाक सल्लाहुअलैवसल्ल ने ज़ानिया औरत कहा है ज़ानिया का मतलब है ज़िना करने वाली, जो औरते घर से बाहर खुशबू वाली क्रीम पावडर देवडरेन्ट परफ़्यूम लगाकर बाहर निकलती इसकी सख्त मनाई है।

आज की औरते अपने खाविंद के सामने बुरे हाल में रहती बेचारा खाविंद दिन भर के बाद बाहर से आता तो मैली कुचैली कपड़ो से बदबू आती हुई बीवी को देखता।वही औरत को किसी शादी पार्टी वगैरह में जाना हो तो बढ़िया कपड़े अचे मेकअप और खुशबूदार परफ्यूम लगाकर जाती ताकि लोग उनसे मोतासिर हो और उनकी तारीफे करे।ये 1 अच्छीऔरत की निशानी नही है .

अबदुल्ला बिन मसूद रज़ियल्लाहु अनो फ़रमाते हैजो और औरत खखुशबू लगाकर बाकर निकलती हम उससे ग़ुस्ले जनाबत कराते।असकी खुशबू ज़ीने के दरवाजे खोलती।लोगो को अट्रैक्ट करती ऐसी औरते जानिया है।इस्लाम भे औरतो का खुशबू लगाना हराम है। औरतो को सज सवर के घर से बहर निकलना जैसे शादी में पार्टी में जाना सख्त माना है उनका श्रृंगार सिर्फ और सिर्फ अपने शौहर के लिए ही जायज़ है.

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