हर मुसलमान को इस कुरान की आयत पर अमल ज़रूर करना चाहिए…

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दोस्तों आजकल मुसलमानों के हालात दुनिया में बहुत ही अफसोसनाक हैं जहाँ एक तरफ मुसलमानों को ज़ुल्म का निशाना बनाया जाता है तो दूसरी तरफ इसके लिए मुसलामानों को ही ज़िम्मेदार ठहरा दिया जाता है वैसे तो इस ज़ुल्म के लिए बहुत सी चीज़े ज़िम्मेदार हैं लेकिन एक मुसलमान की अपनी क्या ज़िम्मेदारी होती है हम आज आपको बताएँगे सबसे बड़ी बात तो ये है कि आज का मुसलमान फिरकेबाज़ियों में इस तरह उलझ गया है कि वो अपने आलावा दुसरे मसलक के मुसलमानों को काफ़िर समझता है मेरे दोस्तों ये वो सोच है जिससे मुसलमानों की बर्बादी का रास्ता खुल जाता है और इस बात से बचने के लिए कुरान और हदीस में मुसलमानों को कई बार चेताया गया है.

कुरान में सुरह रूम में अल्लाह ताला इरशाद फरमाता है कि “उसी (अल्लाह) की तरफ रुजू किये रहो उस से डरते रहो और मुशरिको में से न होना (और ना) उन लोगो में से जिन्होंने अपने दीं को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और (खुद) फिरके-फिरके हो गए हर फिरका उसी से खुश है जो उनके पास है” मेरे भाईयों इस आयत को पढ़ने के बाद किसी को कुछ भी ज्यादा समझाने की ज़रूरत नहीं है और इस आयत में फिरका बनाने से मन किया गया है.

अक्सर हमारे मुसलमान नौजवान ये सवाल करते हैं कि भला हम क्या करे और किस तरफ जाये क्या पढ़े तो दोस्तों इसका जवाब ये है कि सबसे पहले कुरान का इल्म हासिल करे क्योंकि इस वक़्त मुसलमानों की पकड़ जिस किताब पर सबसे कमज़ोर है तो वो है कुरान इसलिए मेरे भाईयों कुरान का इल्म हासिल करे हदीस का भी इल्म हासिल करे ये दोनों इल्म किसी आलिम की सरपरस्ती मे हसिल करें और अपने आलावा सभी मुसलमान भाई को मुसलमान समझे उसे जहन्नुमी न कहें.

मेरे भाइयों इस ज़िम्न में एक हदीस भी बताना चाहता हूँ जो कि इस तरह है “अर्फजाह बिन शुरेह रज़ीo से रवायत है कि रसूल सल्लाo ने फ़रमाया कि मेरे बाद फितने और फसाद का ज़माना आएगा तो ऐसे शख्स को देखो जो (मुसलमानों की) जमात को छोड़ दे और मुहम्मद सल्लाo की उम्मत में फूट डाले तो उसको क़त्ल कर दो क्योंकि अल्लाह का हाथ (यानी मदद) जमात पर है और शैतान उसके साथ हो जाता है जो जमात से अलग हो जाता है और उसको हांकता रहता है सुनन नसाई,जिल्द 3,322 -सही.

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