जुमा के दिन ये दुरूद शरीफ पढ़ी उसके 80 साल के गुनाह होंगे माफ…

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दोस्तों आप सभी जानते है कि इस्लाम में हमेशा शांति और अमन का पैगाम दिया जाता है इस्लाम धर्म कि स्थापना लगभग 1400 साल पहले हुई थी, हमारे आखिरी नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ला० ने इस्लाम को फैलाया था, हमारे नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ला० ने इस्लाम का परचम लहराया था, हमारे नबी ने अपने एखलाक और मोहब्बत से लोगो का दिल जीता था और उनको इस्लाम कबूल करवाया था .

हमेशा हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ला० ने लोगो को अच्छे एखलाक कि दावत दी थी, हमारे नबी पर लोगो ने कूड़े फेके, उनको तकलीफ देते पर फिर भी हमारे नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्ला० उनसे मोहब्बत कि उनकी हाल चाल पूछी कूड़ा फेकने वाली बुढ़िया जब बीमार हुई तो उसके घर जाकर उसका हाल चाल पूछा खैरियत मालूम की उनकी इसी एखलाक कि वजह से बुढ़िया ने इस्लाम कबूल कर लिया था.

इस्लाम में गुनाहो की माफ़ी के लिए बहुत सारे अमल बताए गए है एक अमल ऐसा भी बताया गया जिसको करने से 80 साल कि गुनाह (गुनाह ए सगीरा) माफ़ हो जाती है. और ख़ास तौर पर जुमे के दिन ज़्यादा अमल बताया गया है क्यों कि जुमे कि दिन कि फ़ज़ीलत बहुत ज़ायदा है इसलिए जुमे के दिन के अमल कि फ़ज़ीलत ज़्यादा अफ़ज़ल बताया गया .

जुमा के दिन असर बाद 80 बार ये दरूद पढ़े 80 साल के गुनाह (सगीरा गुनाह ) माफ होंगे :
अल्लाहुम्मा सल्ली अला मुहम्मदिन निन नबीय्यिल उम्मिययी व’अला आलिहि वसललिम तस्लीमा

इस अमल को करने वालो कि 80 सालो कि गुनाहे माफ़ हो जाती है और भी कुछ ऐसे अमल जुमे के दिन के बताए गए है जिसकी फ़ज़ीलत बहुत ज़ायदा है-
➤ जो शख्स जुमा के दिन अपने *नाखून* काटता है, अल्लाह पाक उससे बीमारी निकालकर शिफा दाखिल कर देता है .(मुसन्नफ़ इब्ने अभी शैबा जिल्द -2 )
➤ जुमा के दिन सूरेह कहफ़ तिलावत करेगा अगले जुमा तक के गुनाह (सगीरा छोटे गुनाह) माफ़ होंगे.(अत्तरगीब वाल तर्हिब जिल्द -1 )
➤ प्यारे नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ला० ने फ़रमाया-
जिसने जुमा के दिन मुझ पर 200 बार दरूद पाक पढ़ा, उसके 200 साल के गुनाह (छोटे गुनाह) मुआफ होंगे.(कंज़ुल उम्माल जिल्द -1 हदीस:2238 )

अल्लाह हम सब को कहने सुनने और अमल कि तौफीक दे.

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