क़यामत की सबसे बड़ी निशानी, जब ज़हूर होगा इस फितने का तो दुनिया में मच जायेगा हाहाकार…

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दोस्तों इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जिसमे क़यामत के दिन के ताल्लुक से बहुत साड़ी जानकारी दी गयी है क़यामत को इस्लाम ने बहुत जोर देकर बयान किया है है और कहा है कि जो भी शख्स दुनिया में जो कुछ भी करता है वो दुनिया में भले ही बुरे काम करके मज़े उठा ले लेकिन एक दिन उसे अल्लाह के सामने अपना हिसाब किताब देना ही होगा मेरे दोस्तों इस क़यामत की बात तो इस्लाम में है ही बल्कि क़यामत के पहले की भी कई निशानियों को बता दिया गया है जिसमे से कुछ आज हम आपको बताएँगे आपको बता दें कि क़यामत की निशानियों को एक बार में लिखकर बताना तो लगभग नामुमकिन है लेकिन उसमे से कुछ बड़ी निशानियाँ आज हम आपको बताएँगे.

रसूल सल्लाo ने इरशाद फ़रमाया बैतुल्मुकद्दस कि आबादी मदीना की वीरानी होगी मदीना की वीरानी के बाद फ़ितनो और लड़ाइयों का दौर शुरू होगा फ़ितनो के बाद कुस्तुन्तुनिया (इन्स्ताम्बुल) की फतह होगी और इस फतह के बाद दज्जाल का ज़हर होगा फिर आप सल्लाo ने अपना हाथ माज़ बिन जबल रज़ीo के काँधे या जांघ पर मारा जिनसे आप ये बयान फार्म रहे थे फिर फ़रमाया कि ये ऐसे ही यकीनी है जैसे तुम्हारा यहाँ बैठना या होना यकीनी है.

रसूल सल्लाo ने इरशाद फ़रमाया कि (दज्जाल से) जंग के वक़्त मुसलमान गौता में जमा होंगे जो इस शहर की जानिब में है जिसको दमिश्क कहा जाता है जो कि मुल्क-ए-शाम (सीरिया) के बेहतरीन शहरों में से एक है आपको बता दें कि ये जो हदीसे हमने आपको बताई हैं ये उस वक़्त की हैं जब दुनिया में बहुत बड़ा फितना सामने आएगा जिसे दज्जाल कहते हैं.

इस वक़्त पूरी दुनिया में हाहाकार मच जायेगा और मुसलमानों के लिए ज़िन्दगी बहुत तंग हो जाएगी लोग एक-एक ज़रुरत के सामान के लिए तरस जायेंगे दज्जाल का फितना इस उम्मत पर कुछ ही दिन रहेगा लेकिन वो काटे न कटेंगे और ऐसा लगेगा कि दिन कितना बड़ा हो गया है दोस्तों आपको एक बात और बताते हैं कि जब नमाज़ पढ़े तो अल्लाह से फ़ितनो की आज़माईश से पनाह मांगे क्योंकि वो वक़्त ऐसा रहेगा कि पता नहीं हम साबित कदम रह पाए या नहीं.

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