क्या बारात में जाना और खाना जायज़ है? मुफ़्ती साहब ने दिया जवाब…

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दोस्तों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाहि व बरकातहू दोस्तों आज हम आपको बारात के खाने के बारे में बताएंगे कि क्या इस्लाम में बारात का खाना खाना जायज है या नहीं दोस्तों आइए आपको बताते हैं कि इस्लाम में बारात का खाना जायज है या नहीं दोस्तों मौलाना तारिक मसूद साहब से एक शख्स ने पूछा कि क्या बारात खाना जायज है बाज़ हजरत इसमें गुंजाइश निकालते हैं और बॉस बिल्कुल नहीं निकालते और साफ तौर पर मना करते हैं मौलाना तारिक मसूद साहब ने जवाब दिया कि इस बारात एक गैर शरई चीज है जिसमें लड़की वालों का खर्चा होता है और इस्लाम ने शादी में यह किया है कि जितना भी हर चाहो वह लड़के वालों की तरफ से हो.

क्योंकि अल्लाह ने मर्द को कमाने की जिम्मेदारी दी है मेहर है वलीमा है यह सारे खर्चे अल्लाह ने मर्द के ऊपर डाले हैं मौलाना तारिक मसूद साहब ने जवाब दिया कि यह खाना हराम नहीं होगा क्योंकि यह हलाल पैसे से बना हुआ है इसलिए खाना हराम नहीं है लेकिन बारात में शिरकत करना यह जायज नहीं है मौलाना कहते हैं कि आज लोग यानी कि लड़की वाले इसलिए खाना खिला रहे हैं क्योंकि बाद में लड़के वाले उनको ताना ना दे.

इसलिए उन्हें बारात बुलाना पड़ रहा है और खाना खिलाना पड़ रहा है और जैसे कि जुल्म से बचने के लिए रिश्वत देना जायज है उस वक्त में रिश्वत लेने वाले को ही सिर्फ गुना पड़ेगा देने वाले को नहीं पड़ेगा उसी तरह यहां पर भी जुल्म से बचने के लिए लड़की के बाप को यह गुंजाइश है कि वह बारात कर ले। क्योंकि लड़के वाले उसको तंग ना करें.

बाद में पानी ना दें क्योंकि बेटियों के घर तबाह हो जाते हैं इन सब बातों से और इसके अलावा लड़की के बहुत करीबी लोग ही बारात में जा सकते हैं क्योंकि लड़के वाले यह ना समझे कि इन की चाचा मामा से बनती नहीं है उन लोगों का बारात में जाना चल जाएगा लेकिन और कोई जो बाहरी हो उसके लिए गुंजाइश नही है।। आगे देखें वीडियो में।।

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