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उत्तर प्रदेश

यूपी सरकार करेगी जिले स्तर पर ‘लोक कल्याण मित्र’ की भर्ती, 30 हज़ार सैलरी

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने और पब्लिक फीडबैक की जानकारी की रणनीति तैयार कर ली है।

प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को प्रदेश के सभी 822 विकास खंडों में एक-एक और राज्य मुख्यालय पर दो, कुल 824 लोक कल्याण मित्रों की नियुक्ति के लिए लोक कल्याण मित्र इंटरर्नशिप प्रोग्राम को मंजूरी दे दी। इनका चयन जिला स्तर पर होगा। इसमें 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।

अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि ब्लाक स्तर पर एक-एक लोक कल्याण मित्र तथा प्रदेश स्तर पर दो कल्याण मित्र तैनात किए जाएंगे। इनका चयन एक वर्ष केलिए होगा। कार्यक्रम की लाभप्रदता और उपयोगिता के मद्दनेजर मुख्यमंत्री के अनुमोदन से कार्यक्रम को एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा।

चयनित युवाओं को 25 हजार रुपये मानदेय और 5000 रुपये ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता के रूप में मिलेंगे। उन्हें प्रतिमाह 30 हजार रुपये का भुगतान हो सकेगा।

अवस्थी ने बताया कि इस प्रोग्राम के क्रियान्वयन के लिए अब नियमावली तैयार कर मंजूरी ली जाएगी। अक्तूबर तक इसे लागू कर दिया जाएगा।

अवस्थी ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं व कार्यक्रमों केव्यापक प्रचार-प्रसार व फीडबैक मेकेनिज्म को पुख्ता बनाने के लिए लोक कल्याण मित्र इंटर्नशिप प्रोग्राम लागू की जा रही है। इसमें ऐसे उत्साही व अनुभवी युवाओं को शामिल करना है जो वास्तव में सामाजिक परिवर्तन लाने के इच्छुक हैं।

डीएम की अध्यक्षता वाली समिति करेगी चयन
जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति लोक कल्याण मित्रों का चयन करेगी। इसमें मुख्य विकास अधिकारी और सूचना विभाग के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए जा सकेंगे।

प्रदेश स्तरीय दो कल्याण मित्रों का चयन मंडलायुक्त लखनऊ की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों वाली समिति करेगी। इनके चयन में आरक्षण के नियमों का पालन करना होगा।

लिखित परीक्षा से होगा चयन

अवस्थी ने बताया कि लोक कल्याण मित्रों का चयन लिखित परीक्षा से होगा। इसमें 21 से 40 वर्ष के युवा शामिल हो सकेंगे। कला, विज्ञान, कृषि विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन आदि में स्नातक युवा आवेदन कर सकेंगे। कंप्यूटर की जानकारी जरूरी होगी। एमएस ऑॅफिस और एमएस वर्ल्ड आदि की जानकारी उपयोगी रहेगी।

गिरि इंस्टीट्यूट, आईआईएम में मिलेगा प्रशिक्षण
चयनित लोक कल्याण मित्रों को गिरि इंस्टीट्यूट लखनऊ, आईआईएम लखनऊ, बीएचयू, टाटा इंस्टीट्यूट आदि संस्थाओं में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। ये गांव-गांव जाएंगे और सरकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे। लाभार्थियों के फार्म भरवाएंगे। योजनाओं का लाभ पाने में कोई मुश्किल है तो उसका फीडबैक देंगे।

इसलिए यह प्रयोग

सरकार का मानना है कि केंद्र व प्रदेश सरकार की कई योजनाएं हैं जिसका बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिला है लेकिन तमाम लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती। जन-धन योजना, उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास और किसान ऋण माफी योजना का लाभ लाखों लोगों को मिला है।

केंद्र की आयुष्मान भारत योजना का लाभ बड़ी संख्या में पहुंचाने पर काम चल रहा है। घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए उजाला योजना पर काम चल रहा है। ये लोक कल्याण मित्र सरकारी योजनाओं के प्रचार दूत की तरह काम करेंगे।

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गों’ड जा’ति को लेकर छि’ड़ी बहस ने पकड़ा तूल, अब इलाहाबाद HC ने ये कहा

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बलिया : गोंड जा’ति को लेकर छिड़ी बहस तूल पकड़ती जा रही है। गोंड जाति एस’टी या ओबी’सी वर्ग के अंतर्गत आती है, इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और अन्य विप’क्षियों से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने उमाशंकर राम की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में चार हफ़्ते के अंदर जवाब देने का आदेश दिया है। दरअसल, उमाशंकर राम ने अपनी याचिका में मंडलीय जा’ति समीक्षा समिति के 29 जून 2020 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गोंड को अन्य पिछ’ड़ा वर्ग का बताया गया है।

उमाशंकर ने अपनी याचिका में गोंड को अनुसूचित जनजाति का बताया है। बता दें कि याची के खिलाफ बलिया के सुभाष चंद्र तिवारी ने जिला स्तरीय जाति समीक्षा समिति में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में एक दीवानी मुक़दमा भी दाखिल किया, जो अभी विचाराधीन है। ज़िला स्तरीय समिति ने याची के जाति प्रमाणपत्र को सही करार देते हुए गोंड को अनुसूचित जनजाति का बताया है।

वहीं सुभाष चंद्र तिवारी के वकील निर्भय भारती गिरि ने दावा किया था कि बलिया में अनुसूचित जन’जा’ति नहीं है। उनका कहना था कि वास्तव में यह गोंड यानी भुज’वां जा’ति के हैं, जो ओबीसी में आती है। ज़िला स्तरीय समिति के आदेश को मंडलीय समिति में चुनौती दी गई। जिसके बाद मंडलीय समिति ने जिला समिति के निर्णय को गलत करार देते हुए रद्द कर दिया और कहा कि याची गोंड यानी भुजवां जा’ति का है, जो ओबीसी में दर्ज है।

कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए प्रदेश सरकार और सुभाष चंद्र तिवारी के वकील को चार हफ़्ते में जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया है। ग़ौरतलब है कि इससे पहले सडीएम रहे शयाम बाबू की नियुक्ति उनकी गोंड जाति की वजह से निरस्त कर दी गई थी। उन्होंने नियुक्ति के लिए लगाए गए प्रमाण पत्र में ख़ुद को अनुसूचित जनजाति का बताया था। जबकि बैरिया के तहसीलदार ने अपनी आख्या में श्याम बाबू को एसटी का नहीं माना।

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उत्तर प्रदेश

आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश में रावण राज स्थापित कर दिया- स्वामी अभिषेक

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युवा चेतना के संरक्षक स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने शुक्रवार को अयोध्या में योगी सरकार पर निशाना साधा । अयोध्या में प्रेस को संबोधित करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की उत्तर प्रदेश में रामराज स्थापित करते करते योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रावण राज स्थापित कर दिया।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की 6 साल से अधिक समय से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और 3 साल से अधिक समय से योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं ना तो गंगा साफ हुई और ना गौ रक्षा हेतु राष्ट्रीय क़ानून बना।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की धन्यवाद है सुप्रीम कोर्ट का की प्रभु राम के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया नहीं तो भाजपा सरकार यह पुनीत कार्य भी नहीं करती।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की युवा चेतना उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने हेतु संघर्ष शुरू किया है जनता को युवा चेतना का सहयोग करना चाहिए।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की लखनऊ में उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा जी के भांजे और दामाद के साथ लूट की घटना हो गई तो फिर आम जनता के सुरक्षा की गारंटी कैसी समझी जाएगी।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की धर्म आस्था का विषय है परंतु धर्म के नाम पर भाजपा राजनीति कर जनता को दिग्भ्रमित कर रही है।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की गाँव,गरीब,किसान,मजदूर और नौजवान की स्थिति बदत्तर हो गई है एसी स्थिति में जनता को एकजुट होकर युवा चेतना को मज़बूत करना होगा।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की अपराधी-पुलिस गठबंधन की सरकार चल रही है सबों को एकजुट होकर 2022 में परिवर्तन हेतु संकल्पित होना होगा।

 

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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम की तबियत बिगड़ी, मेदांता में हुए भर्ती

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लखनऊ। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तबियत शुक्रवार की शाम अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। मेदांता के डॉक्टरों के मुताबिक, मुलायम सिंह की हालत फिलहाल ठीक है। बता दें कि मुलायम सिंह माह भर पहले भी मेदांता में भर्ती हुए थे। उस वक्त उन्हें आंत में समस्या थी।

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