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बलिया स्पेशल

बलिया को क्यों याद आते हैं एसपी प्रभाकर चौधरी

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राहुल राज को बलिया का एसपी बनाया गया था। बलिया ही उनका गृह जनपद था। इस लिए आईपीएस राहुल राज का तबादला निरस्त कर अब बलिया की नई एसपी श्रीपर्णा गांगुली को जिले का कप्तान बनाया गया है ।

यूँ तो आईपीएस अधिकारीयों के तब्दाले के बाद हलचल होना लाजमी है। नया कप्तान नियुक्त होते ही नए कप्तान को लेकर हर जगह चर्चा का दौर शुरू हो जाता  है। अधिकारी आते हैं और कुछ दिनों, कुछ सालों में वो दुसरे जिले को चले जाते हैं लेकिन कुछ ही अधिकारी बलिया को मिले जिनके काम आज भी बलिया के लोगों को याद  है।

चर्चित  नरही कांड के जिले में  तैनात एसपी मनोज कुमार झा को शासन द्वारा सस्पेंड कर दिया गया था, उसके बाद ही जनपद में नए पुलिस अधीक्षक के रूप में प्रभाकर चौधरी ने कमान संभाला था।

प्रभाकर चौधरी जब बलिया में एसपी रहे थे लेकिन इतने चर्चित की आज भी लोग  इन्हें दिल से याद करते हैं । इस जिले में प्रभाकर चौधरी ने काफी काम किया था बलिया सहित कई जिले में एसएसपी के पद पर अपनी सेवा दे चुके है 

जिस किसी भी जिले में इन्होंने SP पद पर अपना कार्यभार संभाला वहां की जनता उनके काम करने के अंदाज को देख उनकी दीवानी हो गई। प्रभाकर चौधरी वर्ष 2010 बैच के आईपीएस है।

जब वह एसपी बलिया के पद पर तैनात थे, तब उनका तबादला कानपुर देहात जिले के एसपी पद पर कर दिया गया था। जिसके बाद नये  जिले का चार्ज लेने लखनऊ से रोडवेज की सरकारी बस से पहुंचे। इस बारे में चौधरी ने कहा था कि इसमें कौन से नयी बात है जब मैं सरकारी डयूटी पर नही होता हूं तो मैं सरकारी बस से ही यात्रा करता हूं लेकिन जब क्षेत्र में दौरा करने जाता हूं तो मैं सरकारी वाहन का प्रयोग करता हूं, आखिर क्यों मैं अपनी पर्सनल यात्रा के लिये सरकारी वाहन का इस्तेमाल करूं।

सादगी पसंद और मृदुभाषी चौधरी व्यवहार में जहां बहुत ही कोमल है वहीं अपराधियों और बदमाशों के खिलाफ बहुत ही सख्त।

प्रभाकर चौधरी युवा होने के चलते पुलिस महकमे में नए प्रयोग भी करने के लिए जाने जाते हैं। 2010 बैच के आईपीएस देवरिया में बतौर एसपी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने जोड़-जुगाड़ की जगह योग्य थानेदारों की तैनाती का सिस्टम तैयार किया।

इसके लिए दारोगाओं की परीक्षा ली जाती थी। मेरिट के आधार पर थाने बंटते थे। किसी नेता विधायक या मंत्री की कोई सिफारिश नहीं चलती थी, जिससे थानों से जनता को काफी हद तक न्याय मिलने लगा था।  इस वक्त प्रभाकर चौधरी एसएसपी मथुरा  मे तैनात हैं ।

वही सोशल मीडिया पर भी लोग जब भी जिले का नया कप्तान बदला जाता है लोग प्रभाकर चौधरी को याद करने से नहीं चुकते। राकेश पाण्डेय नाम के फसबुक यूजर ने लिखा है ”  कुछ साल पहले यहाँ प्रभाकर चौधरी यहाँ आये थे जिले का बहुत तेज़ी से किया लेकिन कुछ नेताओं को बलिया का बदलाव पसंद नहीं आया जिससे उनका ट्रान्सफर करा दिया गया ।

 

 

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बलिया: प्रसव के बाद डिस्चार्ज कराने के लिए बेच था मंगलसूत्र, जांच के आदेश

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बलिया डेस्क : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरही पर आज एक शर्मनाक मामला सामने आया था.  जिसका विडियो भी वायरल हुआ.  इस मामले पर बलिया खबर ने विस्तृत खबर चलाई थी. इस मामले पर अब बलिया प्रसाशन ने जांच के आदेश दिए हैं.  मामला कुछ यूँ था कि नरही स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी और नवजात बच्ची को छुट्टी दिलाने के लिए मजबूरन उसका मंगलसूत्र बेचना पड़ा.

शख्स ने एक वीडियो के जरिए यह पूरी घटना बताई. उसका वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. इटही गांव का निवासी बबलू गिरि विडियो में यह कहते दिख रहे हैं कि बुधवार दोपहर करीब दो बजे उन्होंने इस स्वास्थ्य केंद्र में अपनी पत्नी को प्रसव के लिए भर्ती कराया था. भर्ती के तकरीबन डेढ़ घंटे के बाद एक बच्ची का जन्म हुआ.

बबलू आरोप लगाता सुनाई पड रहा है कि एएनएम पुष्पा राय ने पत्नी को भर्ती करते वक्त ही उससे दो हजार रुपये वसूल लिये थे. प्रसव के बाद एएनएम ढाई हजार रुपये और मांग रही है. इस अवैध वसूली के लिए उसकी पत्नी और नवजात बच्ची को अस्पताल से जाने नहीं दिया जा रहा है. परेशान होकर उसने पत्नी का मंगलसूत्र पांच हजार रुपये में बेचकर एएनएम की मांग पूरी की.

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एसके तिवारी ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है. मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी को दंडित किया जाएगा. साथ ही बबलू द्वारा दी गई धनराशि वापस करायी जाएगी.

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बलिया स्पेशल

स्वतंत्रता दिवस से पहले जिलाधिकारी ने की बलिया के लोगों से यह अपील

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बलिया डेस्क : बलिया के जिलाधिकारी एसपी शाही ने स्वतंत्रता दिवस के मद्देनज़र बलिया की जनता से अपील की है। एसपी शाही ने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए परंपरागत रूप से सादगी, हर्षोल्लास एवं आकर्षक ढंग से स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर 15 अगस्त को सुबह 9 बजे सभी सरकारी तथा गैर सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। झंडा अभिवादन के साथ राष्ट्रगान का भावपूर्ण गायन होगा।

इससे पहले 14 व 15 अगस्त की रात्रि में सभी सरकारी कार्यालय भवनों, अन्य इमारतों एवं स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्मारकों को रोशन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय एकता अखंडता, सांप्रदायिक सौहार्द की भावना को बलवती बनाने को प्रेरित किया है। कहा है कि शांति एवं सद्भाव का वातावरण बनाने के लिए इस अवसर पर लोगों को प्रेरित और जागरूक किया जाए। बताया कि कोविड-19 के चलते इस वर्ष मानव श्रृंखला कहीं नहीं बनाई जाएगी।

विद्यालयों में छात्रों को नहीं बुलाया जाए-  डीएम श्री शाही ने कहा है कि विद्यालयों में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन हो। ध्यान रहे कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों को नहीं बुलाया जाए। उनको ऑनलाइन तरीके से स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ पर देशभक्तों, अमर बलिदानी एवं महापुरुषों के जीवन संघर्ष के बारे में बताया जाए। स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बताया जाए। शहीद हुए देशभक्तों के जीवन के प्रेरक प्रसंग दोहराए जाएं। शासन द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के साथ शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देने से संबंधित कार्यक्रम हो। इस महामारी का दौर में सभा करना उचित नहीं होगा।

कोरोना योद्धाओं को कर सकते हैं आमंत्रित-  जिलाधिकारी ने कहा है कि इस अवसर पर यही उचित होगा कि कोविड-19 के योद्धाओं जैसे चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, स्वच्छता कर्मियों को ऑनलाइन कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाए। कोरोना से स्वस्थ हुए व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत बनाने के संदेश का जनमानस में व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। इसके लिए विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों को सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए।

आर्थिक व सामाजिक स्वाधीनता नई पीढ़ी का दायित्व– जिलाधिकारी ने कहा है कि स्वाधीनता की वर्षगांठ पर लोगों को यह याद दिलाया जाए कि हमारे अनगिनत देशभक्तों तथा अमर बलिदानियों ने जीवन भर संघर्ष करके अपना सब कुछ न्योछावर कर के राजनीतिक स्वाधीनता हासिल की थी, उसकी रक्षा करते हुए आर्थिक और सामाजिक स्वाधीनता लाने का दायित्व विशेष तौर पर नई पीढ़ी पर है। महापुरुषों के कार्यों का भी आदरपूर्वक स्मरण किया जाए, ताकि समाज में इंसान और इंसानियत की अहमियत बढ़े। राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव के प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज के महत्व के बारे में भी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बताया जाए।

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बेल्थरा रोड

15-20 दिन से जले पड़े हैं ट्रांसफार्मर, सरकार के आदेश के बावजूद नहीं बदला गया

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बेल्थरा रोड डेस्क : बलिया के बिल्थरारोड में बिजली संकट गहरा गया है। विद्युत दुव्र्यवस्था से उमस भरी गर्मी में अफरा-तफरी का माहौल है। आवश्यक कार्य बाधित हैं और कई इलाकों में बिजली कई घंटे गुल होने के कारण पेयजल संकट भी गहरा गया है। जिससे लेगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत सप्लाई की ये समस्या कई जगहों पर ट्रांसफार्मर के जलने से खड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से बिल्थरारोड नगर में चार ट्रांस्फार्मर जले पड़े हैं। जिन्हें सरकार के फरमान के बावजूद नहीं बदला गया।

हालांकि आज गुरुवार को चार में से एक ट्रांसफार्मर को बदल दिया गया है। अभी भी नगर में 400 केवीए का एक और 250 केवीए के दो ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, 250 केवीए वाले दोनों ट्रांसफार्मर को जले हुए 15-20 दिन बीत चुके हैं। उपभोक्ता इसको लेकर विद्युत विभाग में कई बार शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें बदला नहीं गया है। हैरानी की बात तो ये है कि उपभोक्ताओं की फरियाद तब नहीं सुनी जा रही, जब सरकार 24 घंटे के भीतर ट्रांसफार्मर बदलने का आदेश जारी कर चुकी है।

संसदीय कार्य राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने पिछले महीने ही बिजली विभाग निरीक्षण कर अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि जो ट्रांसफार्मर जल जा रहे हैं उनको बदलने में देरी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर ऐसी शिकायत मिलती है तो उसपर संबंधित की जवाबदेही तय की जाएगी। लेकिन इस आदेश के बावजूद जले ट्रांसफार्मर्स को बदलने में देरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आलम ये ही कि ज़िले में कई ट्रांसफार्मर्स तो महीनों से खराब जले पड़े हैं और कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद इन्हें बदला नहीं गया है।

वहीं काफी शिकायतों के बाद हफ्ते या महीने भर में ट्रांसफार्मर बदल भी दिया जाता है तो एक दो दिन में ही पुन: जल जाता है। यानी उपभोक्ताओं के सामने लगातार ये समस्या बनी रहती है। विद्युत सप्लाई की इस दुर्व्यवस्था के कारण यहां कई छोटे-छोटे उद्योग ठप पड़ गए हैं और लोगों के सामने पेयजल संकट भी गहरा गया है।

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