Connect with us

देश

रविश कुमार का ब्लॉग – यह तो हद दर्ज़े का घोटाला चल रहा, एक किस्म की डकैती है

Published

on

बैंक कर्मचारियों के सैंकड़ों मेसेज पढ़ गया. उनकी व्यथा तो वाकई भयानक है. क्या किसी को डर नहीं है कि दस लाख लोगों का यह जत्था उसे कितना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है? कई दिनों से हज़ारों मेसेज पढ़ते हुए यही लगा कि बैंक के कर्मचारी और अधिकारी भयंकर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. उनके भीतर घुटन सीमा पार कर गई है.

आज जब बैंकों को बेचने की बात हो रही है तो याद आया है कि तब क्यों नहीं हो रही थी जब नोटबंदी हो रही थी. जब बैंक कर्मचारी रात-रात तक बैंकों में रूक कर देश के साथ किए एक राष्ट्रीय अपराध से लोगों को बचा रहे थे. कोरपोरेट का कप्तान तब क्यों नहीं बैंकों को बेचने की बात करता है जब वह दबाव बनाकर सरकारी बैंकों से लोन लेता है. तब बैंकों को बेचने की बात क्यों नहीं हुई जब प्रधानमंत्री के नाम से बनी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना था?

एक बैंक ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि अपने बैंक का शेयर खरीदें. पहले भी बैंक कर्मचारियों को अपने शेयर देते रहे हैं, मगर इस बार उनसे जबरन खरीदने को कहा जा रहा है. कुछ मामलों में सैलरी की क्षमता से भी ज़्यादा शेयर खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है. क्या इस तरह से बैंकों के गिरते शेयर को बचाया जा रहा है? ज़ोनल हेड के जरिए दबाव डाला जा रहा है कि शेयर खरीदे गए या नहीं.

उस बैंक कर्मचारी ने बताया कि सैलरी की क्षमता से तीन गुना ज़्यादा दाम पर शेयर खरीदने के लिए मजबूर किया गया है. इसके लिए उनसे ओवर ड्राफ्ट करवाया जा रहा है. उनकी एफ डी और एल आई सी पर लोन दिया जा रहा है ताकि वे एक लाख डेढ़ लाख रुपये का शेयर खरीदें. यहां तक कि 7000 कमाने वाले स्वीपर पर भी दबाव डाला जा रहा है कि वह 10,000 रुपये का शेयर खरीदे.

यह तो हद दर्ज़े का घोटाला चल रहा है. एक किस्म की डकैती है. किसी को शेयर ख़रीदने के विकल्प दिये जा सकते हैं, उनसे ज़बरन ख़रीदने को कैसे बोला जा सकता है. आज बैंक बैंक का काम नहीं कर रहे हैं. बैंक का काम होता है पैसों की आवाजाही को बनाए रखना. उन पर दूसरे काम लादे जा रहे हैं. इसे क्रास सेलिंग कहते हैं. इस क्रास सेलिंग ने बैंकों को खोखला कर दिया है.

बैंकों के काउंटर से insurance, life insurance, two wheeler insurance, four wheeler insurance, mutual fund बेचे जा रहे हैं. इन में 20% कमीशन होता है. जब तक कोई इन उत्पादों को नहीं ख़रीदता है, उसका लोन पास नहीं होता है. इसके लिए  ब्रांच मैनेजर से लेकर प्रबंध निदेशक तक का कमीशन बंधा है. कुछ मामलों में ऊपर के लोगों को कमीशन 10-20 करोड़ तक हो जाते हैं. ऐसा कई मेसेज से पता चला है.

एक महिला बैंक की बात सही लगी कि कमीशन का पैसा पूरे ब्रांच या बैंक के कर्मचारियों में बराबर से क्यों नहीं बंटता है? क्यों ऊपर के अधिकारी को ज़्यादा मिलता है, नीचे वाले को कम मिलता है? यही नहीं, इन उत्पादों को बेचने के लिए रीजनल आफिस से दबाव बनाया जाता है. डेली रिपोर्ट मांगी जाती है. इंकार करने पर डांट पड़ती है और तबादले का ख़ौफ़ दिखाया जाता है.

बैंक कर्मचारी प्रधानमंत्री के नाम से बनी बीमा योजनाओं को भी बेचने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं. किसान को पता नहीं मगर उसके खाते से बीमा की रकम काटी जा रही है. इसका सीधा लाभ किसे हुआ? बीमा कंपनी को. बीमा कंपनी कहां तो इन कामों के लिए हज़ारों को रोज़गार देती मगर बैंकों के स्टाफ का ही ख़ून चूस कर अपनी पॉलिसी बेच गईं. शुक्र मनाइये कि हिन्दू मुस्लिम की हवा चलाई गई वरना इन मुद्दों पर चर्चा होती तो पता चलता कि आपके खजाने पर कैसे-कैसे डाके डाले गए हैं.

बैंक शाखाओं में स्टाफ की भयंकर कमी है. नई भर्ती नहीं हो रही है. बेरोज़गार सड़क पर हैं. जहां 6 लोग होने चाहिए वहां 3 लोग काम कर रहे हैं. ज़ाहिर है दबाव में कर्मचारियों से गलती होती है. एक मामले में दो कर्मचारियों को अपनी जेब से 9 लाख रुपये भरने पड़ गए. सोचिए उनकी क्या मानसिक हालत हुई होगी.

बैंकों में नोटबंदी के समय कैशियर नहीं थे. सबको बिना काउंटिग मशीन के नोट लेने और देने के काम में लगा दिया गया. गिनती में अंतर आया तो बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों ने अपनी जेब से भरपाई की. काश ऐसे लोगों की संख्या और रकम का अंदाज़ा होता तो इनका भी नाम एक फर्ज़ी युद्ध के शहीदों में लिखा जाता.

बैंक कर्मचारियों से कहा जा रहा है कि आप म्यूचुअल फंड भी बेचें. आम लोगों को समझाया जा रहा है कि एफ डी से ज़्यादा पैसा फंड में हैं. एक कर्मचारी ने अपने पत्र में आशंका जाहिर की है कि आम लोगों की बचत का अरबों रुपया शेयर बाज़ार में पंप किया जा रहा है. जिस दिन यह बाजार गिरा आम लोग लुट जाएंगे.

बैंकों के बुनियादी ढांचे ख़राब हैं. कई शाखाओं में शौचालय तक ढंग के नहीं हैं. महिलाओं के लिए अलग से शौचालय तक नहीं है. कूलर नहीं है. इंटरनेट की स्पीड काफी कम है. बैंकों को 64 केबीपीएस की स्पीड दी जाती है और डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटा जाता है. बैंक कर्मचारी भयंकर तनाव में हैं. वे तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, मोटापा, विटामिन डी की कमी के शिकार हो रहे हैं.

बैंक कर्मचारियों की सैलरी नहीं बढ़ाई जा रही है. हालत ये हो गई है कि केंद्र सरकार का चपरासी भी अब बैंकों के क्लर्क से ज़्यादा कमा रहा है. काम ज़्यादा क्लर्क कर रहे हैं. दिल्ली जैसे शहर में बैंक का क्लर्क 19000 में कैसे परिवार चलाता है, हमने तो कभी सोचा भी नहीं. भयावह है.

सैंकड़ों मेसेज में बैंक कर्मचारियों अधिकारियों ने लिखा है कि सुबह 10 बजे से रात के 11 बजे तक काम करते हैं. छुट्टी नहीं मिलती है. रविवार को भी सरकार का टारगेट पूरा करने के लिए आना पड़ता है. ऊपर से अब ज़िलाधिकारी भी टारगेट को लेकर धमकाते हैं. जेल भेजने की धमकी देते हैं.

एक बैंक कर्मचारी ने वाजिब बात बताई. सरकारी बैंक के कर्मचारी जो राष्ट्रीय सेवा करते हैं क्या कोई दूसरा बैंक करेगा. क्या कोई प्राइवेट बैंक किसी ग़रीब मज़दूर का मनरेगा अकाउंट रखेगा? क्या प्राइवेट बैंक स्कूल फंड का खाता खोलेंगे? इन खातों में 200-300 रुपये जमा होता है. वृद्धा पेंशन से लेकर आंगनवाड़ी वर्क की सैलरी इन्हीं बैंकों में आती है जो 200 से 2500 रुपये से ज़्यादा नहीं होती है. जो गरीब बच्चा 1000 रुपये स्कॉलरशिप के लिए हर रोज बैंक के चक्कर लगता है, क्या वो 500 रुपये हर साल ATM चार्ज कटवा पाएगा.

उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक RRBs में शाखाओ की संख्या की से दृष्टि भारत का सबसे बड़ा बैंक हैं और RRBs में व्यवसाय की दृष्टि से 8वां सबसे बड़ा बैंक है. लेकिन यहां मानव संसाधन की भयंकर कमी है. 1032 शाखाओं में से 900 के आसपास शाखों में सिर्फ 2 कर्मचारी मिलेंगे जिसमें एक कार्यालय सहायक दूसरा BM. जबकि हर शाखा में औसतन 12,000 खाते हैं. जिसमें ग्राहकों को सारी सुविधाएं देने की जिम्मेवारी अकेला कार्यालय सहायक का है BM KCC renewal और अन्य ऋण खाताओ के ऋण वसूली के नाम पर 10 से 5 बजे तक क्षेत्र भ्रमण में रहते हैं. जबकि बैंकिंग नियमानुसार सभी शाखाओं में makers-checker concept पर कार्य होनी चाहिये. इस प्रकार से पूर्णत इस नियम की धज्जियां उड़ाई जाती हैं. बिहार के हिन्दुस्तान अखबार में 20 फरवरी की खबर है कि युवा बैंक कर्मी ग्रामीण बैंक छोड़ रहे हैं. 15 ने इस्तीफा दे दिया है.

सरकार को तुरंत बैंकरों की सैलरी और काम के बारे में ईमानदारी से हिसाब रखना चाहिए. आवाज़ दबा देने से सत्य नहीं दब जाता है. वो किसी और रास्ते से निकल आएगा. बैंकों का गला घोंट कर उसे प्राइवेट सेक्टर के हाथों थमा देने की यह चाल चुनाव जीतवा सकती है मगर समाज में ख़ुशियां नहीं आएंगी. बहुत से लोगों ने अपने मेसेज के साथ बैंक कर्मचारियों की आत्महत्या की ख़बरों की क्लिपिंग भेजी है. पता नहीं इस मुल्क में क्या क्या हो रहा है. मीडिया के ज़रिए जो किस्सा रचा जा रहा है वो कितना अलग है. दस लाख बैंकरों के परिवार में चालीस लाख लोग होंगे. अगर चालीस लाख के सैंपल की पीड़ा इतनी भयावह है तो आप इस तस्वीर को किसानों और बेरोज़गार नौजवानों के साथ मिलाकर देखिए. कुछ कीजिए. कुछ बोलिए. डरिए मत.

नोट: यह लेख बैंकरों की बताई पीड़ा का दस्तावेज़ है. उन्होंने जैसा कहा, हमने वैसा लिख दिया. एक हिन्दू-मुस्लिम सनक के पीछे देश के लोगों को क्या क्या सहना पड़ रहा है.

साभार- khabar.ndtv.com

Advertisement src="https://kbuccket.sgp1.digitaloceanspaces.com/balliakhabar/2022/08/14144116/Milkiana.jpg" alt="" width="1280" height="1280" class="alignnone size-full wp-image-47492" />
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code

देश

बलिया में पहली ‘ऐशप्रा’ लगा रहा हीरे के आभूषणों की प्रदर्शनी, बम्पर आफर का उठायें लाभ

Published

on

बलिया। अगर आप हीरे के आभूषणों के शौकीन हैं तो आपके पास अच्छा मौका है। जी हाँ बलिया (Ballia) जिले में पहली बार 6 अगस्त से लेकर 10 अगस्त तक हीरे के आभूषणों की प्रदर्शनी लगने जा रही है। ऐशप्रा जेम्स एण्ड ज्वैलर्स  (Aisshpra Gems & Jewels) द्वारा इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।  पाँच दिन तक चलने वाली हीरे के आभूषणों की डायमंड “ज्वेलरी फ़ेस्ट” सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। ग्राहकों को ऐशप्रा बम्पर आफर भी दे रहा है जिसका लाभ आम लोग उठा सकेंगे।

ऐश्प्रा के प्रोपराइटर राहुल सर्राफ (Rahul Sarraf) ने  मीडिया को बताया कि बलिया में आयोजित होने वाली आभूषणों की ये अबतक की सबसे बड़ी प्रदर्शनी होने जा रही है। प्रदर्शनी में डायमंड के नेकपिस, ब्रेसलेट, झुमके, पेंडेंट, पोल्की, सोने और कुंदन से लेकर अनूठा संग्रह आदि प्रदर्शित किया जाएगा। राहुल सराफ (Rahul Sarraf) ने बताया कि इन आफर्स में गोल्ड और कुंदन की ज्वेलरी के मेकिंग चार्जेज पर 20 प्रतिशत की छूट, आभूषण में लगे डायमंड के कुल मूल्य पर 20 फीसदी छूट और ग्राहकों द्वारा खरीदे गये सोने के वजन के बराबर चांदी मुफ्त दी जाएगी। साथ ही इस प्रदर्शनी में खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया भी चलेगी। ऐसा पहली बार हो रहा है जब बलिया में इतने बडे पैमाने पर हीरों, रत्नों एवं आभूषणों को तवज्जो देने के लिए किसी प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।

Continue Reading

featured

बलिया के यात्रियों से भरी बस ऋषिकेश में पलटी, 1 की मौत, 67 घायल, सांसद ने DM से की बात

Published

on

बलिया। उतराखंड में गुरुवार को यात्रियों से भरी डबल डेकर बस ब्रेक फेल होने के कारण पलट गई। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि बस में सवार यात्री घायल हो गए. बस में सवार सभी यात्री बलिया के निवासी हैं। यात्रियों को ऋषिकेश नीलकंठ घूमने के बाद जम्मू कश्मीर के माता वैष्णो देवी के मंदिर जाना था।

घायल सभी यात्रियों को राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। इस घटना की सूचना मिलते ही बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने दोनों जिलों के डीएम से तत्काल बात की और घायल यात्रियों को हर संभव मदद करने को कहा। सांसद ने बलिया खबर से बताया की मैंने बलिया और ऋषिकेश के डीएम से बात की है उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। बता दें कि गुरुवार की शाम 5:30 बजे हरिद्वार से ऋषिकेश लक्ष्मण झूला पहुंची यात्रियों से भरी बस (UP 54T 8131) थाना मुनिकीरेती क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी तिराहे पर पलट गई. बस में 65 यात्री सवार थे।

बलिया निवासी घायल प्रकाश चंद मेहता ने बताया कि बस थाना मुनिकीरेती क्षेत्र के भद्रकाली से मुनी की रेती की ओर आ रही थी।  तभी अचानक पीडब्ल्यूडी चौराहे पर बस के ब्रेक फेल होने के कारण पलट गई। ऋषिकेश नीलकंठ घूमने के बाद जम्मू कश्मीर के माता वैष्णो देवी के मंदिर जाना था।  वहीं, दर्दनाक हादसे में एक 50 साल की महिला इंदू पत्नी भरत की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर घायल तीन लोगों को एम्स में उपचार के लिए रेफर किया गया है, जबकि बाकी सभी लोगों का उपचार राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में जारी है।

Continue Reading

देश

पढ़ें असिस्टेंट प्रोफेसर अखिलेश कुमार पाण्डेय का लेख- ‘अज़ान बनाम हनुमान चालीसा’

Published

on

डॉ.अखिलेश कुमार पाण्डेय

भारतीय समाज एक धर्म प्रधान समाज है जहां पर कई धर्मों के लोग रहते हैं।सामान्यत:परंपरानुमोदित अवसरों पर संपन्न किए जाने वाले संस्कृति सम्मत व्यवहारों के पुंज को अनुष्ठान या कर्मकांड कहते हैं।अनुष्ठानकिसी समूह अथवा व्यक्ति के किहीं मूल्यों की वाह्य अभिव्यक्ति होते हैं।धर्म सामाजिक जीवन का प्रमुखक्षेत्र हैं जिसमें अनेक अवसरों पर धार्मिक कृत्य और अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं और अनुष्ठान संपन्नता मेंकहीं ना कहीं आए दिन धार्मिक उन्माद, पथराव,सामूहिक हत्या, आदि घटनाएं अखबारों की सुर्खियां बनतीहै।

इस समय की प्रमुख सुर्खियां “अजान बनाम हनुमान चालीसा” लगातार कौतुहल का विषय बनता जा रहाहै।इस्लाम अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है “शांति में प्रवेश करना” हजरत मोहम्मद का जन्म 570ई॰ मे मक्के मे हुआ था(मृत्य 632 ई॰) ।अजान का अर्थ खुदा को पुकारने या फरियाद करने का संकेत है। अजान इस बात की जानकारी देता है बल्कि यह भी संकेत देता है कि अपनी मौजूदगी दर्ज करवाएं कि नमाज का समय हो गया। इस प्रकार हम कह सकते हैं अजान साधन है और नमाज साध्य है। अज़ान के इतिहास को देखा जाए तो इसकी शुरुआत मक्का में “बिलाल ” के द्वारा शुरुआत की गई।

प्रारंभ में नमाजव्यक्तिगत रूप से की जाती थी लेकिन कालांतर में अजान के साथ नमाज की सामूहिकता की शुरुआत हुई और धर्मावलंबियों का मानना था कि सामूहिकता में नमाज अदा करना ज्यादा प्रभावी होगा। भारत में ही नहीं इस्लाम धर्म को मानने वाले सभी देशों में सामूहिक अजान और नमाज की शुरुआत हुई।हनुमान चालीस एक धार्मिक पाठ है।इसको पढ़ने से व्यक्ति को मन और आत्मा को शांतिप्राप्ति होती है। हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी हैं। हनुमान चालीसा समझने के पहलेहमें हनुमान जी को समझना पड़ेगा। हिंदू धर्म के मान्यता के अनुसार भगवान शिव जी के 11वें रुद्रावतार,भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त एवं कलयुग के सबसे ज्यादा हिंदुओं के दिलों में बसने वाले हनुमान परमेश्वरकी भक्ति की सबसे लोकप्रिय अवधारणाओं और भारतीय महाकाव्य रामायण में सबसे महत्वपूर्ण पात्रों मेंएक हैं भगवान शिव जी के सभी अवतारों में सबसे बलवान और बुद्धिमान माने जाते हैं।

रामायण केअनुसार वे श्रीराम के अत्यधिक प्रिय हैं इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्तहै।उनमें बजरंगबली भी है।हनुमान जी का अवतार भगवान राम की सहायता के लिए हुआ। हनुमान जी कीपराक्रम की असंख्य गाथाऐं प्रचलित है।इसलिए उन्होंने जिस तरह से राम के साथ सुग्रीव की मैत्री कराईऔर वानरों की मदद से असुरों का मर्दन किया। वह अत्यंत प्रसिद्ध है। हनुमान जी शक्ति,ज्ञान,भक्ति एवंविजय के भगवान,बुराई के सर्वोच्च विध्वंसक, भक्तों के रक्षक, कलयुग के सबसे महत्वपूर्ण देवता है। लेकिनहनुमान चालीसा का पाठ भारतीय समाज में इस्लाम के आगमन के पहले से हो रहा है अगर देखा जाए तोभारतीय समाज में इस्लाम के बाद की स्थितियों की विवेचना एक विवादित विषय रहा है इस्लाम के पक्षकारतथा सम्यक दृष्टि से विवेचना करने वालों के बीच सदैव मतभेद रहा।

हिन्दुओं का देखा-देखी मुसलमान जनता भी गाजी मिया,पाॅचपीर,ख्वाजा आदि कल्पित देवताओं की पूजा करनेलगी।मुसलमानों के पीर अधिकांश ग्राम देवता बन बैठे।दशहरा एवं रथयात्रा की तर्ज पर मोहर्रम में ताजियानिकालने लगे। ताजियों का रिवाज भारत को छोड़कर और किसी देश में नहीं है।मुगल काल आते-आते शबेबरात का पर्व सारे भारत के मुसलमानों में मनाया जाने लगा। यह शायद शिवरात्रि का अनुकरण था। क्योंकि शिवरात्रि उस समय बड़ी धूमधाम से बनाई जाती थी।सौभाग्यवती मुस्लिम स्त्रियों की मांग में सिंदूर लगानेतथा नाक में नथ एवं हाथ में चूडिय़ां पहनने लगी ,अरब के लोग पानी की कमी के कारण स्नान कम करतेथे।कालांतर में मुसलमानों ने कम स्नान नहाना अपना धर्म बना लिया ।

किंतु भारत में स्नान के आनन्द सेमुसलमान अपने को वंचित नहीं किया ।भारत की परंपरागत विद्या, ग्रह,नक्षत्र आदि की महिमा भीमुसलमानों के बीच कायम हुई हुमायूं और अकबर हर रोज पोशाक उस रंग की पहनते थे।जो जिस दिन केस्वामीग्रह का रंग होता है ।इस प्रकार हम कह सकते हैं कि धार्मिक विचारधारा के अनुसार सभी धर्मों कोअपना अनुष्ठान या कर्मकांड (उपासना पद्धति) को करने की स्वातंत्र्ता है।और जिसके द्वारा ही समाज केसांस्कृतिक मूल्यों और प्रतिमानों का अनुरक्षण किया जा सकता है इस सन्दर्भ में बैरिया( बलिया ) केसमाजशास्त्री डाँ॰ अखिलेश कुमार पाण्डेय(असिस्टेंट प्रोफेसर,समाजशास्त्र विभाग, श्री सुदृष्टि बाबा पीजीकॉलेज सुदिष्टपुरी,रानीगंज बलिया) ने कहा है कि

“वर्तमान समय में ध्वनि विस्तारक के अनुप्रयोग की परंपराने समाज में कटुता का संचार किया है जो हिंदू और मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच विषाक्त बनता जा रहाहै।हिंदू और मुस्लिम धर्मावलंबियों ,राजनेताओं को अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बारे में गहराई से  समझना होगा । धर्म और राजनीति दोनों अलग-अलग विषय है। राजनेताओं को गरीबी उन्मूलन और मुद्रास्फीति को कम करने, अमीरी और गरीबी की खाई को कम करने ,सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य,रोजगार के बारे में बात करनी चाहिए।

धर्म की देखभाल पुजारियों और आध्यात्मिक लोगों द्वारा की जा सकती है। कुछ लोग धार्मिक या अन्य मुद्दों को उठाकर समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं। गुणात्मक (अर्थपूर्ण) शिक्षा के अभाव के कारण लोग भ्रष्ट,राजनेताओं के जाल में फंस जाते हैं सार्थक और प्रासंगिक शिक्षा ही लोगों को गुमराह होने से बचा सकती है तभी समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सकता है”

लेखक श्री सुदृष्टि बाबा पीजी कॉलेज रानीगंज, बलिया में समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं

(डिस्क्लेमर-लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं . ईटी का इससे सहमत होना जरूरी नहीं है.)

Continue Reading

TRENDING STORIES

error: Content is protected !!