Connect with us

देश

रविश कुमार का ब्लॉग – यह तो हद दर्ज़े का घोटाला चल रहा, एक किस्म की डकैती है

Published

on

बैंक कर्मचारियों के सैंकड़ों मेसेज पढ़ गया. उनकी व्यथा तो वाकई भयानक है. क्या किसी को डर नहीं है कि दस लाख लोगों का यह जत्था उसे कितना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है? कई दिनों से हज़ारों मेसेज पढ़ते हुए यही लगा कि बैंक के कर्मचारी और अधिकारी भयंकर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. उनके भीतर घुटन सीमा पार कर गई है.

आज जब बैंकों को बेचने की बात हो रही है तो याद आया है कि तब क्यों नहीं हो रही थी जब नोटबंदी हो रही थी. जब बैंक कर्मचारी रात-रात तक बैंकों में रूक कर देश के साथ किए एक राष्ट्रीय अपराध से लोगों को बचा रहे थे. कोरपोरेट का कप्तान तब क्यों नहीं बैंकों को बेचने की बात करता है जब वह दबाव बनाकर सरकारी बैंकों से लोन लेता है. तब बैंकों को बेचने की बात क्यों नहीं हुई जब प्रधानमंत्री के नाम से बनी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना था?

एक बैंक ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि अपने बैंक का शेयर खरीदें. पहले भी बैंक कर्मचारियों को अपने शेयर देते रहे हैं, मगर इस बार उनसे जबरन खरीदने को कहा जा रहा है. कुछ मामलों में सैलरी की क्षमता से भी ज़्यादा शेयर खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है. क्या इस तरह से बैंकों के गिरते शेयर को बचाया जा रहा है? ज़ोनल हेड के जरिए दबाव डाला जा रहा है कि शेयर खरीदे गए या नहीं.

उस बैंक कर्मचारी ने बताया कि सैलरी की क्षमता से तीन गुना ज़्यादा दाम पर शेयर खरीदने के लिए मजबूर किया गया है. इसके लिए उनसे ओवर ड्राफ्ट करवाया जा रहा है. उनकी एफ डी और एल आई सी पर लोन दिया जा रहा है ताकि वे एक लाख डेढ़ लाख रुपये का शेयर खरीदें. यहां तक कि 7000 कमाने वाले स्वीपर पर भी दबाव डाला जा रहा है कि वह 10,000 रुपये का शेयर खरीदे.

यह तो हद दर्ज़े का घोटाला चल रहा है. एक किस्म की डकैती है. किसी को शेयर ख़रीदने के विकल्प दिये जा सकते हैं, उनसे ज़बरन ख़रीदने को कैसे बोला जा सकता है. आज बैंक बैंक का काम नहीं कर रहे हैं. बैंक का काम होता है पैसों की आवाजाही को बनाए रखना. उन पर दूसरे काम लादे जा रहे हैं. इसे क्रास सेलिंग कहते हैं. इस क्रास सेलिंग ने बैंकों को खोखला कर दिया है.

बैंकों के काउंटर से insurance, life insurance, two wheeler insurance, four wheeler insurance, mutual fund बेचे जा रहे हैं. इन में 20% कमीशन होता है. जब तक कोई इन उत्पादों को नहीं ख़रीदता है, उसका लोन पास नहीं होता है. इसके लिए  ब्रांच मैनेजर से लेकर प्रबंध निदेशक तक का कमीशन बंधा है. कुछ मामलों में ऊपर के लोगों को कमीशन 10-20 करोड़ तक हो जाते हैं. ऐसा कई मेसेज से पता चला है.

एक महिला बैंक की बात सही लगी कि कमीशन का पैसा पूरे ब्रांच या बैंक के कर्मचारियों में बराबर से क्यों नहीं बंटता है? क्यों ऊपर के अधिकारी को ज़्यादा मिलता है, नीचे वाले को कम मिलता है? यही नहीं, इन उत्पादों को बेचने के लिए रीजनल आफिस से दबाव बनाया जाता है. डेली रिपोर्ट मांगी जाती है. इंकार करने पर डांट पड़ती है और तबादले का ख़ौफ़ दिखाया जाता है.

बैंक कर्मचारी प्रधानमंत्री के नाम से बनी बीमा योजनाओं को भी बेचने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं. किसान को पता नहीं मगर उसके खाते से बीमा की रकम काटी जा रही है. इसका सीधा लाभ किसे हुआ? बीमा कंपनी को. बीमा कंपनी कहां तो इन कामों के लिए हज़ारों को रोज़गार देती मगर बैंकों के स्टाफ का ही ख़ून चूस कर अपनी पॉलिसी बेच गईं. शुक्र मनाइये कि हिन्दू मुस्लिम की हवा चलाई गई वरना इन मुद्दों पर चर्चा होती तो पता चलता कि आपके खजाने पर कैसे-कैसे डाके डाले गए हैं.

बैंक शाखाओं में स्टाफ की भयंकर कमी है. नई भर्ती नहीं हो रही है. बेरोज़गार सड़क पर हैं. जहां 6 लोग होने चाहिए वहां 3 लोग काम कर रहे हैं. ज़ाहिर है दबाव में कर्मचारियों से गलती होती है. एक मामले में दो कर्मचारियों को अपनी जेब से 9 लाख रुपये भरने पड़ गए. सोचिए उनकी क्या मानसिक हालत हुई होगी.

बैंकों में नोटबंदी के समय कैशियर नहीं थे. सबको बिना काउंटिग मशीन के नोट लेने और देने के काम में लगा दिया गया. गिनती में अंतर आया तो बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारियों ने अपनी जेब से भरपाई की. काश ऐसे लोगों की संख्या और रकम का अंदाज़ा होता तो इनका भी नाम एक फर्ज़ी युद्ध के शहीदों में लिखा जाता.

बैंक कर्मचारियों से कहा जा रहा है कि आप म्यूचुअल फंड भी बेचें. आम लोगों को समझाया जा रहा है कि एफ डी से ज़्यादा पैसा फंड में हैं. एक कर्मचारी ने अपने पत्र में आशंका जाहिर की है कि आम लोगों की बचत का अरबों रुपया शेयर बाज़ार में पंप किया जा रहा है. जिस दिन यह बाजार गिरा आम लोग लुट जाएंगे.

बैंकों के बुनियादी ढांचे ख़राब हैं. कई शाखाओं में शौचालय तक ढंग के नहीं हैं. महिलाओं के लिए अलग से शौचालय तक नहीं है. कूलर नहीं है. इंटरनेट की स्पीड काफी कम है. बैंकों को 64 केबीपीएस की स्पीड दी जाती है और डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटा जाता है. बैंक कर्मचारी भयंकर तनाव में हैं. वे तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, मोटापा, विटामिन डी की कमी के शिकार हो रहे हैं.

बैंक कर्मचारियों की सैलरी नहीं बढ़ाई जा रही है. हालत ये हो गई है कि केंद्र सरकार का चपरासी भी अब बैंकों के क्लर्क से ज़्यादा कमा रहा है. काम ज़्यादा क्लर्क कर रहे हैं. दिल्ली जैसे शहर में बैंक का क्लर्क 19000 में कैसे परिवार चलाता है, हमने तो कभी सोचा भी नहीं. भयावह है.

सैंकड़ों मेसेज में बैंक कर्मचारियों अधिकारियों ने लिखा है कि सुबह 10 बजे से रात के 11 बजे तक काम करते हैं. छुट्टी नहीं मिलती है. रविवार को भी सरकार का टारगेट पूरा करने के लिए आना पड़ता है. ऊपर से अब ज़िलाधिकारी भी टारगेट को लेकर धमकाते हैं. जेल भेजने की धमकी देते हैं.

एक बैंक कर्मचारी ने वाजिब बात बताई. सरकारी बैंक के कर्मचारी जो राष्ट्रीय सेवा करते हैं क्या कोई दूसरा बैंक करेगा. क्या कोई प्राइवेट बैंक किसी ग़रीब मज़दूर का मनरेगा अकाउंट रखेगा? क्या प्राइवेट बैंक स्कूल फंड का खाता खोलेंगे? इन खातों में 200-300 रुपये जमा होता है. वृद्धा पेंशन से लेकर आंगनवाड़ी वर्क की सैलरी इन्हीं बैंकों में आती है जो 200 से 2500 रुपये से ज़्यादा नहीं होती है. जो गरीब बच्चा 1000 रुपये स्कॉलरशिप के लिए हर रोज बैंक के चक्कर लगता है, क्या वो 500 रुपये हर साल ATM चार्ज कटवा पाएगा.

उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक RRBs में शाखाओ की संख्या की से दृष्टि भारत का सबसे बड़ा बैंक हैं और RRBs में व्यवसाय की दृष्टि से 8वां सबसे बड़ा बैंक है. लेकिन यहां मानव संसाधन की भयंकर कमी है. 1032 शाखाओं में से 900 के आसपास शाखों में सिर्फ 2 कर्मचारी मिलेंगे जिसमें एक कार्यालय सहायक दूसरा BM. जबकि हर शाखा में औसतन 12,000 खाते हैं. जिसमें ग्राहकों को सारी सुविधाएं देने की जिम्मेवारी अकेला कार्यालय सहायक का है BM KCC renewal और अन्य ऋण खाताओ के ऋण वसूली के नाम पर 10 से 5 बजे तक क्षेत्र भ्रमण में रहते हैं. जबकि बैंकिंग नियमानुसार सभी शाखाओं में makers-checker concept पर कार्य होनी चाहिये. इस प्रकार से पूर्णत इस नियम की धज्जियां उड़ाई जाती हैं. बिहार के हिन्दुस्तान अखबार में 20 फरवरी की खबर है कि युवा बैंक कर्मी ग्रामीण बैंक छोड़ रहे हैं. 15 ने इस्तीफा दे दिया है.

सरकार को तुरंत बैंकरों की सैलरी और काम के बारे में ईमानदारी से हिसाब रखना चाहिए. आवाज़ दबा देने से सत्य नहीं दब जाता है. वो किसी और रास्ते से निकल आएगा. बैंकों का गला घोंट कर उसे प्राइवेट सेक्टर के हाथों थमा देने की यह चाल चुनाव जीतवा सकती है मगर समाज में ख़ुशियां नहीं आएंगी. बहुत से लोगों ने अपने मेसेज के साथ बैंक कर्मचारियों की आत्महत्या की ख़बरों की क्लिपिंग भेजी है. पता नहीं इस मुल्क में क्या क्या हो रहा है. मीडिया के ज़रिए जो किस्सा रचा जा रहा है वो कितना अलग है. दस लाख बैंकरों के परिवार में चालीस लाख लोग होंगे. अगर चालीस लाख के सैंपल की पीड़ा इतनी भयावह है तो आप इस तस्वीर को किसानों और बेरोज़गार नौजवानों के साथ मिलाकर देखिए. कुछ कीजिए. कुछ बोलिए. डरिए मत.

नोट: यह लेख बैंकरों की बताई पीड़ा का दस्तावेज़ है. उन्होंने जैसा कहा, हमने वैसा लिख दिया. एक हिन्दू-मुस्लिम सनक के पीछे देश के लोगों को क्या क्या सहना पड़ रहा है.

साभार- khabar.ndtv.com

Continue Reading
Advertisement />
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code

featured

बलिया मूल के मॉरिशस के पूर्व पीएम अनिरुद्ध जगन्नाथ का निधन

Published

on

मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ का 91 साल की उम्र में 3 जून, 2021 को निधन गया है। अनिरुद्ध जगन्नाथ मॉरिशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों ही पदों पर कार्य कर चुके हैं। जगन्नाथ के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुख जताया है।

बलिया से मॉरिशस पहुंचे उनके पिता ने अपने साथी मजदूरों के साथ मिलकर ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया, जो हमेशा हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों के दिलों में धड़कता रहा है। उनके असमय जाने से बलिया ही नहीं समूचे हिन्दुस्तानियों  को आघात पहुंचा है।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ के पूर्वज उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के मूल निवासी थे। बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र का अठिलपुरा गांव उनके पुरखों का निवास स्थान रहा है। गांव वालों के अनुसार उनके पिता विदेशी यादव और चाचा झुलई यादव को अंग्रेजों ने वर्ष 1873 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में जहाज से गन्ने की खेती के लिए मारीशस भेजा था। गिरमिटिया मजदूर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक का सफर तय करने वाला परिवार आज मॉरीशस का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार भी माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री प्रविंद अपने पुरखों की भूमि बलिया तो नहीं जा सके लेकिन वाराणसी में जनवरी 2019 में आठ दिवसीय दौरे पर भारत आए तो आयोजन के बाद भी वह काशी में ठहरे और विभिन्न मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना इस भाव से किया कि कभी इन्हीं मंदिरों में उनके पुरखों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए तमाम मन्नतें मांगी होंगी।

अभिलेखों में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार 2 नवंबर, 1834 को भारतीय मजदूरों का पहला जत्था गन्ने की खेती के लिए कलकत्ता से एमवी एटलस जहाज पर सवार होकर मारीशस पहुंचा था। आज भी वहां हर साल दो नवंबर को ‘आप्रवासी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। जिस स्थान पर भारतीयों का यह जत्था उतरा था वहां आज भी आप्रवासी घाट की वह सीढ़ियां स्मृति स्थल के तौर पर मौजूद हैं।

Continue Reading

देश

संविधान, लोकतंत्र एवं भारत विषयक वेबिनार का युवा चेतना ने किया आयोजन

Published

on

नई दिल्ली डेस्क : संविधान,लोकतंत्र एवं भारत विषयक वेबिनार का आयोजन युवा चेतना ने किया। वेबिनार का उद्घाटन करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की संविधान और लोकतंत्र दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की लोकतंत्र में सब बराबर हैं और संविधान जनता का रक्षा कवच।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की संविधान की रक्षा प्रत्येक भारतीय की जवाबदेही है। मुख्य अतिथि भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने कहा की जब विश्व के अन्य देश संविधान निर्माण की प्रक्रिया में थे तो भारतीय संविधान उनके लिए मानक था।न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा की संविधान नागरिकों के लिए प्रकाश पुंज है।लोकतंत्र में सरकार अगर ग़लत करती है तो संविधान जनता का सहायक होता है।

न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा की संविधान और राष्ट्र के प्रति सबको निष्ठा रखना चाहिए। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा की प्रभु राम ने भी पत्नी का त्याग जनता को संतुष्ट करने हेतु किया था और देवी सीता ने भी जनता के मन में उत्पन्न द्वन्द को समाप्त करने हेतु प्रभु राम का सहयोग किया था।पूर्व में राजा और नेता जनभावनाओं के प्रति चिंतनशील होते थे परंतु अब स्थिति बदल गई है।

श्री सिंह ने कहा की हमारा संविधान हमें बराबरी का अधिकार देता है परंतु राष्ट्रपति के घर का बच्चा और गाँव में खेती करने वाले किसान का बच्चा एक जैसे विद्यालय में शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाता है।श्री सिंह ने कहा की 1952 से लेकर 2020 तक चुनावी मुद्दे नहीं बदले लोकतंत्र रोटी,कपड़ा और मकान से आगे नहीं निकल पाया।

श्री सिंह ने कहा की भारत के पुनर्निर्माण हेतु सबको आगे आना होगा।
वेबिनार को सम्बोधित करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जेपी सिंघल ने कहा की गरीब को ताकत भारतीय लोकतंत्र में संविधान से मिलता है। पूर्व सांसद विवेक गुप्ता ने कहा की हमारे संविधान में 125 बार संशोधन हुआ है।हमारा संविधान हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है।

श्री गुप्ता ने कहा की सरकार को संयुक्त सूची पर विचार करना चाहिए।केंद्र सरकार को राज्य सरकारों को कुछ छूट देने की आवश्यकता है।
यूईटीआर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जेसी जैन ने कहा की लोकतंत्र की सुंदरता संविधान से ही है।

Continue Reading

देश

डॉक्टर से IAS टॉपर्स की सूची में शामिल आनंद शर्मा से जानिए कैसे हासिल किया ये मुकाम !

Published

on

यह हैं आनंद शर्मा. साल 2018 की यूपीएससी सीएसई एग्जाम में इनमा नाम टॉपर्स की सूची में नाम में शामिल था. आनंद शर्मा एमबीबीएस डॉक्टर थे, जिसके बाद यह यूपीएससी में आए. 2015 में इन्होने मुरादाबाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से एमबीबीएस किया और इसके बाद से ही यूपीएससी सीएसई में लग गए. सफलता मिली चौथे प्रयास में. 2018 में. 62वीं रैंक हासिल की. दरअसल आनदं जब तीसरी बार टॉपर बने तो बीते हर साल में उनका निबंध में ग्राफ बढ़ता गया. ऐसे में अपने अनुभव के आधार पर वह निबंध लेखन और सेलेक्शन के बारे में कुछ टिप्स दे रहे हैं. डॉ. आनंद कहते हैं कि पेपर आने के बाद निबंध लिखने में जल्दबाजी न करें.

पहले सभी विषयों को अच्छे से पढ़ें और फिर सोचे की किस पर आप सबसे अच्छा इन पुट दे सकते हैं. वह कहते हैं कि पहले वह उन दो टॉपिक को हटा देते थे जिसमे उनके पास फॉर या अगेंस्ट में प्वॉइंट्स नहीं होते थे. इसके बड़े बचे हुए दो टॉपिक में फैसला कर सकते थे कि किस पर वह बढियां लिख सकते हैं. इसके बाद रफ में वह निबंध के फॉर और अगेंस्ट में जो कुछ भी आ रहा है उनके दिमाग में, वह सब लिख देते थे. और इसी के आधार पर वह आगे एक्सप्लेन करते थे. दरअसल फ्लो में लिखने के दौरान कुछ छूट न जाये, इसलिए वह ऐसा करते थे. निबंध के तीन हिस्से होते हैं. इंट्रोडक्शन, बॉडी और कॉन्क्लूजन.

आनंद कहते हैं कि इंट्रोडक्शन में कोई कोट लिख देने से अधिक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने पहले ही मुख्य विषयों पर कोट तैयार किये हुए थे. वह कहते हैं कि अगर कोट नहीं भी मालूम तो आप किसी शानदार और प्रभावशाली लाइन से शुरुआत करें. बाद इसके अगले स्पेट में एक पैर में ऐस्से की समरी लिखते हैं. जिसमे यह बताते थे कि इस इससे में क्या-क्या है. एस्से के बॉडी में वह बिन्दुओं के अनुसार फॉर और अगेंस्ट दोनों एंगल्स लिखना चाहिए. साथ ही साथ उदाहरण भी दें.

रियल लाइफ का उदहारण हो तो और बेहतर. बाद इसके फैक्ट्स, फिगर्स, डेटा से लेकर कोट्स या जो भी हो, उसे लिखकर एस्से को वजनदार बनायें. इसके अलावा एस्से लिखने के दौरान समय बैलेंस्ड करके चले. वह बताते हों कि आपका एस्से का झुकाव फॉर की तरफ हो या अगेंस्ट की तरफ, जिस भी तरफ झुकाव हो, उसके विपरीत पॉइंट्स को भी लेकर चलें और ज़िक्र करें. चूँकि आप एक अधिकारी बनने के लिए एस्से लिख रहे हैं. ऐसे में एस्से का अंत पोजिटिव करें और समस्या का संभावित समाधान भी ज़रूर लिखें.

इसके अलावा वह कहते हैं कि एग्जाम से पहले खूब प्रैक्टिस करें. वह कहते हैं कि आपने जिस विषय पर एस्से लिखने की प्रैक्टिस की है अगर वही विषय एग्जाम में आ जाये तो हड़बड़ी में न रहें. बल्कि उसे अच्छी तरह पढ़ें और समझें कि उसमे क्या पूछा गया है. विषय से भटकना नहीं है.

Continue Reading

TRENDING STORIES

error: Content is protected !!