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बेल्थरा रोड

12 साल बीते, पर अब तक नहीं हो पाया बिल्थरारोड कांशीराम व आसरा आवास का आवंटन

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उत्तरप्रदेश सरकार गरीबों को सुविधा मुहैया कराने की कोशिश कर रही तो वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की लापरवाही के चलते गरीब आवास मिलने से वंचित हैं। हम बात कर रहें हैं बलिया के बिल्थरारोड में स्वीकृत कांशीराम आवास योजना का भवन की, जो करीब 12 सालों से बनकर तैयार हैं लेकिन आजतक इसके 96 आवासीय कमरों का लाभ गरीबों को नहीं मिल पाया।इन 12 सालों में 2 सरकारें आई-गई, तीसरी सरकार का कार्यकाल भी अंतिम चरण में हैं। लेकिन इतने लंबे वक्त के दौरान भी न किसी जनप्रतिनिधि की नज़र इस भवन पर गई न ही अधिकारियों ने सुध ली। नतीजतन अब यह भवन खंडहर में तब्दील हो रहा है। हालांकि विभाग ने इसके आवंटन प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है। लाभार्थियों की सूची भी तैयार है। लेकिन अधिकारियों को इसके आवंटन पर अंतिम मुहर लगाने की फुर्सत अब भी नहीं है। जबकि बिना आवंटन अवैध रुप से रहने वाले गरीबों को अधिकारियों ने जांच और आवंटन प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर खाली कराया था तो जल्द ही गरीबों को आवास मिलने की आस जगी थी। इसके भी करीब एक वर्ष पूरे हो गए। लेकिन गरीबों को आवास नहीं मिला।

कांशीराम आवास योजना के तहत करीब 36 परिवार के लिए तीन मंजीला भवन बसपा सरकार में ही बनकर लगभग तैयार हो गया था। इसके पास 60 आवासों युक्त आसरा आवास भवन भी है। इसका काम भी सपा सरकार में पूरा हो गया। लेकिन इनके भवनों का आवंटन नहीं हो पाया। बिल्थरारोड नगर पंचायत ईओ ब्रजेश गुप्ता के प्रयास से कुछ माह पूर्व ही कांशीराम आवास योजना व आसरा के तहत लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली गई है। जिसके सापेक्ष आपत्तियां लेकर निस्तारण भी कर दिया गया। अब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही आवंटन होना है। उक्त आवास आवंटन की अंतिम प्रक्रिया बलिया सीआरओ एवं बिल्थरारोड एसडीएम के संयुक्त स्वीकृति के बाद ही पूरा होना है।ईधर गरीबों को आवास न मिलने से नाराज पैक्सफेड के पूर्व चेयरमैन छट्ठूराम ने एकबार फिर अधिकारियों को आंदोलन की चेतावनी दी है। छट्ठू राम ने डीएम को ज्ञापन देकर जल्द ही आवंटन प्रक्रिया पूरा करने की मांग किया है। एक साल पूर्व भी छट्ठू राम ने उक्त मांग को लेकर बिल्थरारोड तहसील में अनशन किया था। लेकिन तब भी अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया था। देखना होगा कि आखिर कब तक गरीबों को उनका आशियाना मिल पाता है। तिलक कुमार  

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बलिया

बलियाः उभांव थाने के प्रभारी निरीक्षक बने अविनाश कुमार सिंह

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बेलथरा रोड। बलिया में एक बार फिर पुलिस विभाग में तबादलों का दौर शुरु हुआ। जहां दो निरीक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें उभांव निरीक्षक ज्ञानेश्वर मिश्र को अपराध शाखा भेजा गया है। वहीं निरीक्षक अविनाश कुमार सिंह को पुलिस लाइन से स्थानांतरित कर प्रभारी निरीक्षक उभांव बनाया गया है। उभांव थाने के निरीक्षक ज्ञानेंद्र मिश्र के प्रयागराज जोन में स्थानांतरण हुआ है लेकिन फिलहाल उन्हे अपराध शाखा में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दोनों निरिक्षकों के ट्रांसफर का आदेश एसपी राजकरन नय्यर ने जारी किया है। जिसके अनुसार निरीक्षक ज्ञानेश्वर मिश्र व अविनाश कुमार सिंह का स्थानांतरण किया गया है। हालांकि अभी ज्ञानेश्वर मिश्र उभांव थाने से कार्यमुक्त नहीं किए गए हैं बल्कि वह छुट्टी पर चल रहे हैं। नए जारी आदेश के मुताबिक उन्हें अपराध शाखा बलिया में स्थानांतरित किया गया है।

बता दें की 2001 बैच के निरक्षक अविनाश सिंह  जौनपुर के रहने वाले हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी बलिया में अधिकारियों के तबादले हुए थे। कुलमिलाकर पुलिस व प्रशासनिक विभाग में अधिकारियों के तबादलों का दौर जारी है।

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बलिया को देवरिया से जोड़ने वाला यह पुल दे रहा है बड़ी घटना को निमंत्रण

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बलिया जिले को देवरिया जिले से जोड़ने वाले तुर्तीपार-भागलपुर पुल किसी भयानक घटना को आवाज लगा रही है। पुल की यह चित्कार फिलहाल प्रशासन के आला अधिकारियों को सुनाई नहीं दे रहा है। प्रशासन का लापरवाह रवैया कभी भी इस पुल पर एंबूलेंस की आवाज का शोर मचा सकती है।

बलिया-देवरिया के लोगों का संपर्क मार्ग भागलपुर पुल बुरी तहर क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के बीच-बीच में जुड़ावों (ज्वाइंट्स) पर दरार पड़ गई है। जवाइंट ढीले पड़ गए हैं। पुल का रास्ता हमेशा व्यस्त रहता है। तुर्तीपार-भागलपुर पर गाड़ियों की आवाजाही खूब होती है। भारी वाहन का भी आना-जाना लगा रहता है।

पुल की मरम्मत के नाम पर कई बार कोरम पूरा किया जा चुका है। लेकिन प्रशासन पुल की हालात पर कोई टिकाऊ समाधान नहीं कर रहा है। पुल से गुजरने वाले राही अक्सर भागलपुर पुलिस से शिकायत भी करते हैं। शिकायतों से इतर खुद प्रशासन भी कई बार पुल की समस्या को निहार चुका है। हालांकि जांच से आगे का काम हर बार ही ठप पड़ जाता है।

बता दें कि आज से लगभग बीस साल पहले 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालिक मुख्यमंत्री और केन्द्र सरकार के वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पुल का लोकार्पण किया था। पुल की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर है। पूरा पुल अठारह खंभों पर टिका हुआ है। पुल की खराबी को लेकर मुंबई की पुल निर्माण की विशेषज्ञ टीम आकर निरिक्षण कर चुकी है। टीम ने पुल की समस्याओं को लेकर रिपोर्ट भी दी थी। हालांकि रिपोर्ट पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

सीयर के ब्लॉक प्रमुख तुर्तीपार-भागलपुर पुल के मरम्मत को लेकर मांग कर चुके हैं। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक एसपी सिंह ने मीडिया में बयान दिया है कि पुल की बेयरिंग बार-बार खराब हो जा रही है। इस बार आधुनिक तकनीक की बेयरिंग मंगाई गई है। ताकि वह टिक सके। बाकि पुल पर जो गड्ढे बने हुए उन्हें भरने का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा।

सवाल है कि अब तक प्रशासन हाथ-हाथ धरे क्यों बैठी थी? क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? देखना होगा कि सेतु निगम के अधिकारी के बयान अनुसार पुल की मरम्मत कब तक पूरी होती है? काम होगा भी या अधिकारी का बयान एक पारंपरिक सरकारी आश्वासन साबित होगा?

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बलिया: सहयोग राशि देने में वादा खिलाफी के आरोप पर क्या बोले विधायक धनंजय कन्नौजिया?

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बलिया के बेल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया पर एक राम कथा कार्यक्रम में मंच से 11 हजार रुपए का वादा करके सिर्फ 1 हजार देने का आरोप लगा है। राम कथा कार्यक्रम के आयोजकों ने विधायक धनंजय कन्नौजिया से नाराज होकर उन्हें 1 हजार रुपया लौटा दिया। साथ ही उन्हें दिया गया स्मृति चिन्ह भी वापस ले लिया। इस पूरे बखेड़े पर भाजपा विधायक ने चुप्पी तोड़ी है।

मंच से 11 हजार देने का वादा करके 1 हजार रुपए देने के आरोप पर विधायक धनंजय कन्नौजिया ने कहा है कि “मैंने ऐसी कोई घोषणा नहीं की थी। मंच से 11 रुपए देने की बात अफवाह है। लोग बेवजह मेरी छवि खराब करने के लिए इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। मैं कभी भी धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग राशि देने की घोषणा नहीं करता हूं।”

पूरा बखेड़ा समझिए: बलिया के बेल्थरारोड में पूरा और पतोई गांव द्वारा हर साल नवरात्र के समय राम कथा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। गांव के ही एक दुर्गा मंदिर पर इस साल भी यह आयोजन किया गया था। राम कथा कार्यक्रम में बेल्थरारोड से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया को बतौर अतिथि बुलाया गया था। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर मंच से धनंजय कन्नौजिया ने ग्यरह हजार की सहयोग राशि देने की घोषणा की। लेकिन बाद में पलट गए और सिर्फ एक हजार रुपया ही दिया। दिलचस्प बात यह है कि राम कथा कार्यक्रम का आयोजक खुद भारतीय जनता पार्टी का ही एक बूथ अध्यक्ष है।ग्यारह हजार का वादा कर एक हजार रुपया थमाने पर कार्यक्रम के आयोजक नाराज हो गए। आयोजकों ने विधायक धनन्जय कन्नौजिया को उनका एक हजार रुपया लौटा दिया। साथ ही कार्यक्रम में दिया गया स्मृति चिन्ह भी वापस ले लिया। आयोजकों ने इस बात की घोषणा बाकायदे मंच पर चढ़ कर दिया। आयोजकों द्वारा मंच से दी गई इस जानकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर रायता फैला रहा है।

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