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आखिर मिल गया हज़रत दाऊद अ.स का महल, देखने वालों की आंखें …

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अस्सलामोअलैकुम नाज़रीन भाइयों और बहनों आज हम आपको बताएंगे दाऊद अलैहिस्सलाम के महल की! कहानी हजारों साल पुराने महल की। अल्लाह ताला हमेशा से ही हम लोगों को अपनी निशानियां दिखाता है ताकि से हम लोग कुछ सीख सकें ऐसा ही एक वाकया हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम की महल का है कहते हैं कि हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम का महल बहुत खूबसूरत था बहुत बड़ी जगह पर फैला हुआ था तारीख की बहुत सी किताबों में इस महल का जिक्र किया गया है.

इस महल की शान शौकत के बारे में तारीख की किताबें भरी पड़ी है इतना बड़ा महल जो अपनी नवय्यत का इतना बड़ा शाहकार था आज कहां है दोस्तों इस वाकये में हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक मौजूद ह।ै शरायम पहले बैतूल मुकद्दस अब इसराइल का शहर है जो बैतूल मुकद्दस से 30 किलोमीटर दूर है 2007 में इस शहर में माहिरीन ने महल तलाश किया यह बुनियादी तौर पर एक बड़ी बस्ती है और इस बस्ती में 1000 मुरब्बा मीटर पर यह महल बना था असार बताते हैं कि यह बस्ती 1020 ईसवी में आबाद हुई 1980 ईस्वी में यह बस्ती उजड़ गई यह बस्ती एक पहाड़ी पर बसी हुई है खुदाई के दौरान इसके दो दो दरवाजे वाली दीवार भी पाई गई है.

माहरीन पिछले 7 वर्षों से इस बस्ती पर तहक़ीक़ करते रहे जरा सर अब जाकर पता चला कि यह महल दाऊद अलैहिस्सलाम का था। हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम का जमाना भी 1040 ईसवी से 970 ईस्वी तक बताया जाता है अरे दाऊद अलैहिस्सलाम कहिए महल बहुत मशहूर था इसका वाक्य और इसकी शान शौकत के बारे में तारीख के पन्ने भरे पड़े हैंइसके बावजूद दुनिया इसेे मानने को तैयार नहीं थी । हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम को यह महल कैसे मिला यह बहुत खूबसूरत वाक्य है हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम के वालिद का नाम एशा था जो भेड़ बकरियां चराते थे .

उनके आज बेटे थे उनके सबसे छोटे बेटे का नाम दाऊद था दरअसल बचपन से ही दाऊद अलैहिस्सलाम अपनी खूबियों और सलाहियतों के दम पर अच्छी नजरों से देखे जाते थे उनकी शख्सियत इतनी मशहूर थी जो भी उन्हें देखता उनसे मुतासिर हुए बिना नहीं रह सकता था रंग रंग सफेद खिखाल स्किन हसीन बात करने में सलीका और अहतराम था आंखों में भूरापन था।हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम यहूदा की नस्ल में से है ।हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम से हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के रिश्ते में थे आप हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम की खानदान मैं अकेले ही अकेले सर थे जो पैगंबर ए रसूल साहब ए किताब और बादशाह थे आप पानी में भी बहुत अच्छी थी आपके 1 1 अल्फ़ाज़ साफ थे ज़बूर की तिलावत बहोत अच्छी करते थे.

परिंदे भी आपका साथ देते थे आपने दो शादियां की। आपके 2 बेटे थे आपके बेटे दाऊद आपके बेटे सुलेमान अलैहिस्सलाम बनी इजरायल की बादशाह और पैगंबर गुजरे हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम हजरत दाउद अली सलाम की दूसरी बीवी से थे आप की आप की पहली बीवी से भी एक बेटा था हजरत हजरत अली सलाम का पेशा जरा गरीब था आप लोगों से सिपाहियों के लिए जरा गिरी बनाते थे लोहा आपके हाथों में नरम हो जाता है आपको किसी भट्टी या हथौड़े की जरूरत नहीं होती आपका सामान हजरत मूसा अलैहिस्सलाम से 5 साल 500 साल बाद का है आप से और इशारे सलाम तक 1200 साल से ज्यादा गुजर चुके थे .

अल्लाह ताला ने आपको किताब जबूर अता की। मुकद्दस में उनका इंतकाल हो गया हजरत दाऊद दाऊद गुलेल चलाने में खास महारत रखते थे जंगल में शेर की सवारी करते थे सर आपके सामने शेर शेर आपके सामने सर झुका रहता एक एक मरतबा जवाब जंगल से गुजर रहे थे तो एक पत्थर से आवाज आई मैं हिज़रे हारून हूँ मुझे उठा लीजिये मैं आपके काम आऊँगा। कुछ दूर चले थे कि दूसरा पत्थर बोला था मैं हिजरे मूसा हूं मुझे अपने पास रख लीजिए मैं भी आपके काम आऊंगा आपने उस पत्थर को भी उठा लिया और अपनी थैली में डाल दिया चंद कदम चले थे कि 3सरा पत्थर बोल उठा मैं हिज़रे दाऊद हूँ मेरे ज़रिये जालूद कत्ल किया जायेगा इस पथर को भी उठाया और थैली में डाल लिया उस वक़्त जालूद ज़ुल्म करने वाला आदमी था .

उसका ज़ुल्म चारों तरफ फैला हुआ था ।फलीस्तीन का सरदार था इंसानियत की नाक में दम कररखा था वो बनी इस्राइल से काफी नफरत करता था और उनको परेशान करता था रियासत का बादशाह भी जालूद के सितम से परेशान था उसने अपने वजीर को मुझे बुलाया और उसके उससे निजात का तरीका पता किया एक शख्स ने आगे बढ़कर बताया कि बादशाह मेरा ख्याल है इस में ऐलान किया जाए जो जवान जालोद को कत्ल करेगा उसको बादशाह सल्तनत देंगे बादशाह को यह बात पसंद आ गई उसने मुल्क भर में ऐलान करवाना शुरू कर दिए यह ऐलान हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम तक भी पहुंचा जब आपने ऐलान सुना तो आपको पत्थर याद आ गया आप भागते हुए ऐलान करने वाले के पास पहुंचे और कहा जालूद को मैं कत्ल करूंगा आप को लेकर बादशाह की खिदमत में पहुंचा और बादशाह को बताया यह जवान यह चैलेंज कबूल कर लिया है ।

बादशाह ने नौजवान को बुलाया बादशाह बहुत खुश हुआ की यही नौजवान जालूद से टक्कर ले सकेगा। हजरत दाउद अलैहिस्सलाम फिलिस्तीनी और उनके बीच जंग का आगाज हो गया इसराइली के सामान और हथियार देख कर परेशान हो गए और अपने बादशाह से कहने लगे कि हम जंग में शरीक नहीं होंगे एक तरफ से दाऊद अलैहिस्सलाम आगे बढ़े और दूसरी तरफ से जालौर निकला दोनों एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे और दूसरे को दावत ए जंग दे रहे थे।

दाऊद अलैहिस्सलाम ने थैली से गुलेल और पत्थर निकाला औरजालूद उसके सर पर दे मारा यह पत्थर पड़ना था कि जालोद रेजा रेजा होकर गिर पड़ा यह देख कर के कौम दंग रह गई फिर इसराइली ओं ने मिलकर फिलिस्तीनी पर हमला कर दिया और उन्हें मार भगाया बादशाह आगे बढ़ा और उसने अपने वादे के मुताबिक दाऊद अलैहिस्सलाम को अपनी सल्तनत अदा की अपनी शहजादी अन्या से आपकी शादी भी कर दी और हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम सल्तनत के बादशाह भी बन गए हैं और यह महल आपका हो गया।

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जानिए कौन हैं सिकंदरपुर पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार डॉ प्रदीप कुमार

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बलियाः उत्तरप्रदेश में चुनावी बिगुल बच चुका है। इस बार आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। रविवार को पार्टी ने अपने 150 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें बलिया जिले से सिकंदरपुर विधानसभा सीट से पार्टी ने अपने जिलाध्यक्ष डॉक्टर प्रदीप कुमार को उम्मीदवार बनाया है।

चलिए आपको बताते हैं कौन है प्रदीप कुमार?

प्रदीप कुमार सिकंदरपुर सीमा पर बिल्थरारोड क्षेत्र के ककरी निवासी हैं। उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई करने के लिए फार्मासिस्ट का कोर्स किया। इसके बाद वह जनआंदोलन में हिस्सा लेने लगे। साल 2013 में जब अन्ना आंदोलन कर रहे थे, उसमें भी प्रदीप कुमार शामिल हुए। उन्होंने माथे पर मैं अन्ना हूं की टोपी लगाकर कई कार्यक्रमों में भाग लिया।

इसके बाद जब अरविंद केजरीवाल ने पार्टी बनाई तो डॉक्टर प्रदीप कुमार ने पार्टी की ऑनलाइन सदस्यता ली। इसके बाद वह लगातार पार्टी के लिए काम करते रहे। मार्च 2021 में वह आप पार्टी के जिलाध्यक्ष बनाओ गए और दो महीने पहले ही प्रदीप को सिकंदरपुर का प्रभारी घोषित किया गया और अब पार्टी ने उनपर विश्वास जताते हुए चुनावी मैदान में उतारा है।

डॉ प्रदीप क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं, वह सिकंदरपुर का विकास दिल्ली मॉडल पर करने के दावे के साथ जनता के बीच में पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी आदि मुद्दों को लेकर भी लोगों के बीच जाएंगे।

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जानिए कौन हैं बलिया के नए DM इंद्रविक्रम सिंह, लॉकडाउन में किया था सराहनीय काम!

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बलिया।  उत्तरप्रदेश में एक बार फिर बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हुई है। बड़े स्तर अधिकारियों के तबादले हुए हैं। इसमें कई जिलों के कलेक्टर इधर से ऊधर भेजे गए हैं। इसी बीच आईएएस इंद्रविक्रम सिंह को बलिया कलेक्टर बनाया गया है।आईएएस इंद्रविक्रम सिंह लंबे समय से प्रशासनिक सेवा में हैं। वह इससे पहले उत्तरप्रदेश के कई जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शामली में डीएम का पद संभालने के साथ ही शाहजहांपुर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अब उन्हें बलिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जहां वे कलेक्टर के रूप में पदभार संभालेंगे।

इसके अलावा अमृत त्रिपाठी को आजमगढ़ कलेक्टर, शाहजहांपुर कलेक्टर उमेश प्रताप सिंह को बनाया गया है। वहीं अमेठी में राकेश मिश्रा को कलेक्टर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा अधिकारी हरि प्रताप शाही को विशेष सचिव पद पर नियुक्ति मिली है।

लॉकडाउन में इंद्रविक्रम सिंह ने किया था सराहनीय काम–  कोरोना के संक्रमण को लेकर जारी लॉकडाउन के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और ना ही उनकी पढ़ाई हो पा रही थी। ऐसे में शाहजहांपुर के डीएम (DM) यहां के बच्चों के लिए मास्टर बन कर सामने आए थे।

यहां डीएम इंद्र विक्रम सिंह (Indra Vikram Singh) बच्चों को ऑनलाइन (Online) पाठशाला के जरिए उन्हें रोजाना पाठ पढ़ा रहे थे। दरअसल, जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह अपना सरकारी काम पूरा करने के बाद शाम को ठीक 6:00 बजे अपनी एक ऑनलाइन पाठशाला शुरू करते थे। जिसमें वो नए-नए पाठ के जरिए बच्चों को पढ़ाते हैं।

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Ballia में नौजवान अपने खर्चे पर कर रहे सड़कों को गड्ढा मुक्त, सरकार के दावे फेल !

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बलिया। उत्तरप्रदेश में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होना है। सभी पार्टियां जनता के हित में काम करने का वादा कर रही हैं। लेकिन जनता से वादा कर बनी योगी सरकार की हकीकत बलिया की इन तस्वीरों में उजागर हो रही है। सड़क के गड्ढे योगी सरकार के गड्ढा मुक्त होने के दावों को तमाचा दिखा रहे हैं। कई बार मरम्मत की मांग के बाद भी गड्ढे जस के तस हैं। नतीजन प्रधान प्रतिनिधि को अपने ही खर्च पर गड्ढे भरवाने को मजबूर है।

मामला बलिया के नेशनल हाईवे-31 का है। जिसकी मरम्मत की मांग पूरी न होने पर मुबारकपुर के पास खोड़ीपाकड के प्रधान प्रतिनिधि संजीव कुमार राय और चन्द्र प्रकाश सिंह अपने ही खर्चे पर गड्ढ़ों को भरने का काम करवा रहे हैं। दरअसल NH-31 की सड़क 4 साल पहले तक 20 से 40 फीसदी तक ही खराब थी। सड़क की मरम्मत करने की मांग कई बार उठी। इतना ही नहीं मांग पूरी न होने पर आंदोलन तक किए गए। बावजूद सड़क की मरम्मत की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसकी वजह से अब 80 से 100 फीसदी तक सड़क खराब हो गई। धूल गुब्बार से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ना है।

सड़क पर गड्ढ़ों की वजह से लोगों का जीना तक मुहाल हो गया। सागरपाली, फेफना, चितबड़ागांव, नरही, भरौली आदि स्थानों पर तो सड़क का नामोनिशान नहीं है और जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं। जिसकी वजह से आए दिन हादसे हो रहे हैं। और अब प्रधान प्रतिनिधि खुद ही अपने खर्च पर गड्ढे भरवा रहे हैं। हालांकि अब देखना होगा कि इस चुनावी माहौल में कब जनता की समस्या पर ध्यान दिया जाता है।

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