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यूपी के 13 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने को मंजूरी, बलिया का हाथ खाली, विपक्ष ने बोला हमला !

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बलिया डेस्क : उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की दिशा में बेशक योगी सरकार ने प्रदेश के 14 जिलों में एम्स और मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा की है, लेकिन सूची से बलिया का नाम हटाकर बलिया की जनता को धोखा दिया है।

यहां के पांच सांसद, दो मंत्री और तीन-तीन विधायक मिलकर भी बलिया को न तो एम्स दिला पा रहे हैं और न ही मेडिकल कॉलेज । यही नहीं पूर्वंचल एक्सप्रेस-वे को भी बलिया से नहीं जोड़ पाए, जो इन जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान है।

यह वही धरती जिसने देश के प्रधानमंत्री के रूप में चंद्रशेखर को दिया, अंग्रेजी हुकूमत को उखार फेंकने के लिए 1857  के नायक शहीद मंगल पांडेय को जन्म दिया। बात करें 1942 की क्रांति की तो बलिया को सबसे पहले आजादी मिली। साहित्य के क्षेत्र में बात करें तो पंडित हजार प्रसाद द्विवेदी, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी जैसे महान विभूतियों को जन्म दिया।

इसके बावजूद भी बलिया को विकास के नक्शे से अलग करना बलिया के साथ बहुत बड़ी नांइसाफी है। इस सवाल पर विपक्ष के नेताओं ने न सिर्फ योगी कोसा बल्कि यहां के जनप्रतिनिधियों से भी इस्तीफा मांगा।  इसी पर पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने करारा हमला बोलते हुए कहा कि  बलिया के प्रति योगी सरकार हमेशा सौतेला व्यवहार करती रही है।

आसपास के जिलों में मेडिकल कालेज दिया, लेकिन बलिया को अछूता रखा, यह बलिया के लिए दुर्भाग्य है। जबकि बलिया कोरोना से पूरी तरह से प्रभावित रहा। लोगों को तरह-तरह की परेशानियां उठानी पड़ी। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि एल-2 लेवल का अस्पताल पूरे बलिया में नहीं बना।

एल-1का अस्पताल तो बना लेकिन उसमें सुविधा न के बराबर पर थी। अफसोस इस बात का है कि बलिया में विधानसभा, राज्यसभा व लोकसभा के प्रतिनिधि है, लेकिन उनके साथ भी अनदेखी की जा रही है। चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, लेकिन सरकार ने उस विश्वविद्यालय को चलाने के लिए न तो कोई फंड दिया और न ही कोई नियुक्ति की।

वहीँ पूर्व मंत्री नारद राय ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि मैं पहले से भी कहते आ रहा हूं कि भाजपा सरकार में बलिया उनके नक्शे से बाहर है। विकास, कानून व्यवस्था पूरी तरह से फेल है। व्यापार चौपट होता जा रहा है। ऐसा महसूस होता है कि ये सरकार बलिया को उत्तर प्रदेश से बाहर मानकर चल रही है।

इस सरकार में शुरू से ही बलिया विकास से अछूता रहा और यहां के भाजपा के जनप्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री के सामने बोलने का माद्दा तक नहीं है। मुख्यमंत्री ने १४ जनपदों में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिए प्राथमिकता पर रखा, लेकिन बलिया को विकास के नक्शे से अलग रखा। यह सबसे बड़ी विडंबना है।

इस मामले पर रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बलिया में एम्स और मेडिकल कालेज बहुत जरूरी है। ऐसे में पूर्वांचल के कुछ जनपदों को मेडिकल कालेज एम्स देना और बलिया को विकास से अछूता रखना कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। ऐसी स्थिति में यहां के जनप्रतिनिधियों को इस्तीफा दे देना चाहिए।

उनकी जवाबदेही बनती है कि वे अपनी बात दमदारी अपने मुखिया के यहां रखे। जबकि अन्य जनपदों के जनप्रतिनिधि अपनी बात को दमदारी से रखकर अपने जनपदों में विकास को एक नया आयाम दे रहे हैं। लेकिन बलिया के जनप्रतिनिधि ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

चयन प्रक्रिया में बलिया को क्यों नहीं रखा गया, इस सवाल पर वे विधानसभा में बात रखने की बात कही। एक सवाल के जवाब में कहा कि झूठ बोल रहे हैं वे लोग जो कह रह है कि जमीन नहीं मिल रही है। रसड़ा में कताई मिल बंद है, साठ एकड़ जमीन पड़ी है अगर उसमें भी उनका काम नहीं चल पा रही है। मैं रसड़ा सिटी में ३० एकड़ जमीन फ्री में दे दूंगा।

नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी  ने भी कहा की बलिया में एम्स और मेडिकल कालेज की सख्त जरूरत है। जिले की आबादी ४० लाख होने के बाद भी बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था न होना यह आम लोगों के जीवन के साथ सरकार खिलवार कर रही है। अन्य जनपदों में एम्स व मेडिकल कालेज की घोषणा करना उसको मजूरी देना और बलिया को अछूता रखना यह बलिया की जनता के साथ खिलवाड़ है। कहा कि अखिलेश यादव ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण जब शुरू कराया तो किसानों को दस गुना अधिक रेट देकर जमीनें खरीदने का काम किया।

क्या योगी सरकार बलिया में एम्स और मेडिकल कालेज के निर्माण के लिए किसानों की जमीन नहीं खरीद सकती। उनको मुआवजा दें बलिया में जमीन की कमी नहीं पड़ेगी। ये सरकार घोषणा और विज्ञापनों के सहारे चल रही है।

अखिलेश यादव ने राय बरेली और गोरखपुर में एम्स और मेडिकल कालेज के जमीनें खरीदी, लेकिन योगी सरकार बलिया को प्राथमिकता में न रखकर ठेंगा दिखाने का काम किया। लेकिन हम लोग चुप नहीं बैठेंगे और बलिया के विकास के लिए हमेशा लड़ते रहे और लड़ते रहेंगे।

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बलिया के साहित्यकारों ने बढ़ाया मान, मिला साहित्य अकादमी भाषा सम्मान

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बलिया के दो साहित्यकारों को संयुक्त अकादमी भाषा सम्मान की घोषणा की गई है। भोजपुरी भाषा में उत्कृष्ट लेखन के लिए साहित्यकार डॉ. अशोक द्विवेदी व अनिल ओझा ‘नीरद’ को संयुक्त रूप से साहित्य अकादमी भाषा सम्मान से नवाजा जाएगा। भोजपुरी में यह सम्मान, हरेराम द्विवेदी, मोती बीए और धरीक्षण मिसिर को पहले मिल चुका है।

साहित्य अकादमी के द्वारा शनिवार को 2020 के अनुवाद पुरस्कारों की घोषणा भी की गई है। इसमें 24 पुस्तकों को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2020 के लिए अनुमोदित किया गया। यह घोषणा साहित्या अकादमी के द्वारा कामायनी सभागार में अकादमी अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में कार्यकारी मंडल की बैठक में की गई।

आपको बता दें कि अनिल ओझा ‘नीरद’ रुद्रपुर, गायघाट, बलिया के मूल निवासी हैं। वह फिलहाल पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रहते हैं। वहीं डॉक्टर अशोक द्विवेदी बलिया शहर के निवासी है। दोनों ने बलिया का मान बढ़ाया है। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष अजित दुबे ने इस पर कहा कि विगत 8 वर्षों के बाद गैर मान्यता प्राप्त भाषा की श्रेणी में भोजपुरी के साहित्यकारों का सम्मान भोजपुरी भाषा और साहित्य के लिए प्रोत्साहित करने वाला निर्णय है। इसमें सम्मान स्वरूप एक लाख रुपया और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

24 भाषाओं के लेखक जो हुए पुरस्कृत

मान्यता प्राप्त 24 भाषाओं में पुरुस्कार दिए जाते हैं। जिसमें अपूर्व कुमार शइकीया-असमिया,  अंग्रेजी-अरुंधति सुब्रमण्यम, हिंदी-अनामिका, शंकर-बांग्ला, बोडो-स्व.धरणीधर औवारि, गुजराती-हरीश मीनाश्रू, कन्नड़-एम. वीरप्पा मोइली, कश्मीरी- स्व. हृदय कौल भारती, कोंकणी-आर. एस. भास्कर, मैथिली-कमलकान्त झा, नेपाली-शंकर देव ढकाल, उडिय़ा-यशोधरा मिश्रा, पंजाबी-गुरदेव सिंह रूपाणा, मलयालम-ओमचेरी एन.एन. पिल्लई, मणिपुरी-देवेन सिंह, राजस्थानी-भंवरसिंह सामौर,  संताली-रूपचंद हांसदा, सिंधी-जेठो लालवाणी, तमिल-इमाइयम, तेलगू-निखिलेश्वर,संस्कृत-महेश चन्द्र शर्मा गौतम, और उर्दू-हुसैन-उल-हक को सम्मानित किया गया है।

 

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बलिया में बिजली चोरों पर कार्यवाही, 14 लोगों पर केस दर्ज, 25 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे

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बलिया में बिजली चोरों का आतंक है। अब इनके आतंक को कम करने के लिए बिजली विभाग ने कमर कस ली है। लगातार विभागीय अधिकारियों के द्वारा अवैध रूप से विद्युत उपयोग करने वालों पर कार्यवाही की जा रही है। शनिवार को विद्युत विभाग के अधिकारियों व विजलेंस टीम ने नगर के अस्पताल रोड पर छापामारी कर विद्युत कनेक्शनों की जांच की। इस दौरान कुल 14 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी का केस दर्ज करवाया। इसके अलावा 25 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए और बकाया बिल के एवज में साढ़े तीन लाख रुपये की वसूली की।

आपको बता दे कि बिजली चोरी पर रोक लगाने के लिए अब विभाग ने लाइन लॉस वाले फीडरों को चिन्हित किया है। इसके तहत ज़िले के विभिन्न इलाकों के फीडरों की चेकिंग की जा रही है। शनिवार को विशुनीपुर उपकेंद्र के अस्पताल रोड फीडर की जांच पड़ताल के लिए शनिवार को विद्युत विभाग के अवर अभियंता आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में विजिलेंस टीम ने अस्पताल रोड स्थित आवासों के कनेक्शनों की जांच की।

इस दौरान कुल 10 लोग चोरी से बिजली का प्रयोग करते मिले जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। चार ऐसे उपभोक्ता मिले जिनकी बिजली बिल बकाया में काटी गई थी लेकिन वह बिजली का प्रयोग कर रहे थे, इनके खिलाफ भी जेई हिमालय चौहान ने विद्युत थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। इस कार्यवाही से इलाके में हड़कंप मच गया। बिजली चोरों में अफरा तफरी का माहौल देखा गया। पूरी कार्यवाही के दौरान बिल बकाया होने के कारण 25 उपभोक्तओं की बिजली काटी गई और कुल साढ़े तीन लाख रुपये बकाया बिल के सापेक्ष वसूली भी की गई। वहीं विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि लाइन लॉस वाले फीडरों के कनेक्शन आदि की जांच की जा रही है। यह कार्रवाई लगातार चलेगी।

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डी. फार्मा. की परीक्षा में शाहीन परवीन ने किया बलिया टॉप, शहबान मेमोरियल कॉलेज ने लहराया परचम

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शाहीन परवीन ने डी. फार्मा. की परीक्षा में बलिया जनपद में टॉप किया है।

उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद ने साल 2021 के मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस साल यह परीक्षा कोरोना महामारी की वजह से ऑनलाइन ही हुई थी। डिप्लोमा इन फार्मेसी में शाहीन परवीन ने पूरे बलिया जनपद में टॉप किया है। शाहीन परवीन ने डिप्लोमा इन फार्मेसी के अंतिम वर्ष की परीक्षा 90 फीसदी अंक हासिल किया है। शाहीन परवीन बलिया के नगरा स्थित मु. शहबान मेमोरियल कॉलेज ऑफ फार्मेसी की छात्रा हैं।

उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद की 2021 के परीक्षा में मु. शहबान मेमोरियल कॉलेज ऑफ फार्मेसी के छात्र छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस साल पूरे कॉलेज का रिजल्ट 96 फीसदी रहा है। कॉलेज में सबसे अधिक अंक शाहीन परवीन को मिला है। कॉलेज में दूसरा स्थान हासिल किया है नवाज़ अहमद ने। नवाज़ को 88 फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं। संजीदा अतीक़ 86 फीसदी अंकों के साथ तीसरे स्थान पर काबिज हैं। जबकि विनीता रंजन और अभिषेक यादव क्रमशः 82.5 और 80.5 फीसदी अंकों के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।

मु. शहबान मेमोरियल कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्रबंधक मुहम्मद इमरान ने कॉलेज के विद्यार्थियों की इस सफलता पर कहा कि “मैं अपनी संस्था की ओर से शाहीन परवीन को विशेष बधाई देता हूं। साथ ही अन्य परीक्षार्थियों को भी बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। बच्चों के परिवार वालों को भी बधाई।” उन्होंने आगे कहा कि “ऐसा पहली बार हुआ कि परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की गई। इसमें इंटरनेट एक बड़ी चिंता थी। परीक्षा के दौरान भी कई बार परीक्षार्थियों को इंटरनेट की दिक्कतों से सामना करना पड़ा। लेकिन अंत में सफलता हासिल हुई।”

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