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दीपावली में घर लौटे सेना के जवान की बलिया में मौत, घर में पसरा मातम

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शनिवार की सुबह बलिया के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के बालूपुर रोड पर एक नाले में एक व्यक्ति का शव मिला। शव की पहचान सुनील यादव पुत्र दीनानाथ चौधरी के रूप में हुई है। सुबह टहलने के लिए निकले गांव के लोगों ने नाले में एक बाइक फंसी हुई देखी। बाइक को निकालने उतरे लोगों को वहीं एक शव भी दबा हुआ मिला। शव और बाइक को बाहर निकालकर लोगों ने पुलिस और परिजनों इत्तला किया।

परिजनों ने बताया है कि “सुनील यादव सेना के जवान थे। उनकी उम्र महज 32 वर्ष थी। सुनील यादव वर्तमान समय में पटियाला में तैनात थे। गत एक नवंबर को ही सुनील यादव दीपावली की छुट्टी लेकर घर आए थे।” परिवार वालों का कहना है कि “सुनील यादव गत शुक्रवार यानी 5 नंवबर की शाम घर से बाइक लेकर निकले। सिकंदरपुर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। देर रात तक जब सुनील घर नहीं लौटे तो घर वालों ने खोजबीन शुरू कर दी। लेकिन रात भर सुनील अता-पता नहीं चला।”

आज सुबह जब कुछ लोग बालूपुर रोड पर टहल रहे थे। तभी सिवानकला गेट के सामने एक नहर में जिसे पुलिस नाला बता रही है, में एक बाइक गिरी हुई दिखी। उनमें से कुछ लोग बाइक को बाहर निकालने के लिए नहर में उतरे तो पाया कि एक शव बाइक के नीचे दबा हुआ है। लोगों ने शव और बाइक दोनों को बाहर निकाला। इसके बाद शव की पहचान कर परिजनों की इस बात की खबर दी गई। साथ ही पुलिस को तक भी यह सूचना पहुंचाई गई।

पुलिस के मुताबिक सुबह दस बजे के लगभग सिकंदरपुर थाना के प्रभारी निरीक्षक को इस घटना की सूचना फोन के जरिए प्राप्त हुई थी। बता दें कि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सिकंदरपुर क्षेत्राधिकारी ने कहा है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगा।

सेना के जवान सुनील यादव की एक बेटी और एक बेटा है। जब यह घटना घटी तब सुनील यादव की पत्नी रजनी बेटी सृष्टि (8 वर्ष) और बेटे रौनक (5 वर्ष) के साथ अपने मायके थी। खबर मिलते ही घर में मातम पसर गया। परिजन बेसुध होकर चीत्कार रहे हैं।

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माँ बाप के नाम वीडियो छोड़कर घर से गायब हुई विवाहिता, परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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बलिया में एक नवविवाहिता घर छोड़कर लापता हो गई। घर से जाने से पहले युवती ने परिवारवालों के लिए वीडियो भी बनाया। जिसमें वह अम्मी-अब्बू से माफी मांग रही है और उसे ढूंढने के लिए मना कर रही है।

वीडियो में युवती कह रही है कि “अम्मी-अब्बू मुझे माफ कर देना, मुझे ढूंढना मत, मैं यहां से बहुत दूर जा रहीं हूं। मैं अपने साथ कुछ भी लेकर नहीं जा रही हूं। गहने अलमारी में हैं, चाबी फ्रीज पर रखकर जा रहीं हूं। मैं रोज-रोज के मारपीट से तंग आ गईं हूं।” परिजन उसकी तलाश में जुटे हैं। परिजनों ने ससुरालियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

जानकारी के मुताबिक बलिया के रेवती नगर निवासी लड़की आरजू की शादी रेवती के ही मशफ पुत्र सगीर से 15 महीने पहले हुई थी। परिवारवालों का आरोप है कि शादी के 4-5 महीने बाद ही ससुरालवाले दहेज को लेकर दबाव बनाने लगे। लड़की को मारना पीटना तथा तलाक देने की धमकी बराबर दी जाने लगी। विवाहित में अपनी वीडियो में भी तलाक का जिक्र किया है। वह वीडियो में कहती हुई नजर आ रही है कि तलाक की बदनामी मुझसे बर्दाश्त नहीं होगी, मुझे माफ कर देना।

वहीं युवती के परिजनों ने ससुरालवालों पर उसकी हत्या कर शव गायब करने की संभावना का आरोप लगाया है। पिता ने आशंका जाहिर किया है कि मेरी लड़की के ससुराल वालों ने मेरी लड़की की हत्या कर दी है। पिता का आरोप यह भी है कि पुलिस ने तहरीर पर मुकदमा नहीं पंजीकृत किया बल्कि दूसरी तहरीर लिखवाकर गुमशुदगी दर्ज कर ली।

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बलिया में बाबा रामदल सूरजदेव हॉस्पिटल का डिप्टी सीएम ने किया उद्घाटन, पढ़ें भाषण की मुख्य बातें !

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बलिया पहुचें प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ मंत्री ब्रजेश पाठक ने बाबा रामदल सूरजदेव हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कई सारी बातें कहीं। रसड़ा क्षेत्र के पटना गांव में बुधवार को बाबा रामदल सूरजदेव हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित किया। मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मान किया गया। इसके बाद उन्होंने विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सरस्वती पूजन कर और फीट काटकर कालेज का उद्घाटन किया। कालेज की ओर से 51 किग्रा के माला से माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। कालेज की ओर से शिवेंद्र बहादुर सिंह ने सभी अतिथियों व मौजूद लोगों के प्रति आभार जताया। संचालन सुभासपा प्रवक्ता सुनील सिंह ने किया।

यहां पढ़ें डिप्टी सीएम के भाषण की 10 मुख्य बातें 

1- हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर बनाने का उद्देश्य और सोच यही होनी चाहिए कि गरीब जनता की कैसे मदद की जाए। यह ग्रामीणांचल में लोगों की सेवा करने के साथ पुनीत कार्य भी होगा।

2- यहां आने को लेकर मौसम से जुड़ी तमाम विषम परिस्थिति आने के बावजूद आने का निर्णय किया।

3- बाबा रामदल सूरजदेव ग्रुप रसड़ा व आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को पैरामेडिकल व स्नातक की पढ़ाई के लिए शिक्षा का मुख्य केंद्र है, इसके लिए संस्थान परिवार बधाई के पात्र हैं।

4- कोरोनाकाल में जिस तरह स्वास्थ्य महकमे ने काम किया, पूरे विश्व में भारत और खासकर यूपी उदाहरण बना।

5- गरीब परिवार को राशन देकर उनको समय से भोजन भी सुनिश्चित कराया गया। हमारी सरकार की सोच हमेशा से गरीब व जरूरतमंदों की सेवा रही है।

6- सीएचसी-पीएचसी में आने वाले प्रतिदिन के आंकड़े को देखा जाए तो 1.6 लाख से 1.80 हजार मरीज आते हैं। इसमें 10 से 12 हजार दुर्घटना का शिकार मरीज आते हैं।

7- प्रदेश की जनता से अपील की है कि ट्रैक्टर ट्राली पर यात्रा कत्तई न करें। आठ हजार मरीज गम्भीर रोग से ग्रसित ,आते हैं। पांच हजार ऑपरेशन रोजाना निःशुल्क हो रहा है।

8- सभी मरीजों को उच्च कोटि का इलाज निःशुल्क कराने की जिम्मेदारी हमारी है और उसका निर्वहन बखूबी सरकार रही है।

9- आज गुंडे माफिया या तो प्रदेश के बाहर हैं या जेल में हैं। एंटी रोमियो के जरिए मनचलों पर भी कार्रवाई की जा रही है। नतीजा हमारी बहन-बेटी आज सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

10- मैं आपका भाई हूँ, बेटा हूँ, जब भी किसी मुसीबत में याद करेंगे, सहयोग के लिए ततपर रहूंगा।

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बलिया में पत्रकारों की एंट्री बैन करने के लिए CHC के डॉक्टरों ने चली चाल?

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सीयर CHC की ओर से जारी की गई लिस्ट

Ballia News – बलिया के बेल्थरा रोड स्थित सीयर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर से एक लिस्ट जारी की गई. लिस्ट बाकायदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दीवार पर चस्पा की गई है. इसमें 25 पत्रकारों के नाम हैं. सभी पत्रकार अलग-अलग संस्थानों से जुड़े हुए हैं. इसके साथ एक आदेश जारी किया गया है कि अधीक्षक और प्रभारी चिकित्सक अधिकारी इन्हीं पत्रकारों के सवालों का जवाब दें. इसके अलावा ‘अनाधिकृत’ पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के लिए अधिकारी बाध्य नहीं हैं.

ये लिस्ट जिला प्रशासन बलिया, स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी की गई है. लिस्ट पर किसी अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है. ना ही कोई मुहर लगी हुई है. तो सवाल ये है कि लिस्ट की प्रमाणिकता क्या है? पहली प्रमाणिकता ये है कि इसे सीएचसी की दीवार पर चस्पा किया गया है. यानी चोरी-छिपे ये काम नहीं हुआ है. हमने पुख्ता जानकारी के लिए सीयर सीएचसी के इंचार्ज डॉ. राकेश से फोन पर बातचीत की.

सीयर सीएचसी की ओर से जारी की गई पत्रकारों की लिस्ट.

सीयर सीएचसी की ओर से जारी की गई पत्रकारों की लिस्ट.

डॉ. राकेश ने बताया कि “ये लिस्ट प्रमाणिक है. सीएमओ साहब के व्हाट्सएप ग्रुप में ये लिस्ट भेजा गया था. जिसका प्रिंट निकालकर चिपकाया गया था. लेकिन बाद में इस पर गलत तरीके से सवाल उठने लगा और गलत ढंग से लिया जाने लगा तो हमने लिस्ट हटा दी.” हमने डॉ. राकेश से पूछा कि आखिर इस सूची के जारी करने का मकसद क्या था और क्या वजहें थीं? उन्होंने कहा कि “दरअसल हम लोग कई बार पत्रकारों को पहचानते नहीं हैं. तो बस पहचान के तौर पर ऐसा किया गया था. लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई और पत्रकार हमसे बयान लेने आए तो हम जवाब नहीं देते.” “लिस्ट के पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी. इसीलिए जब मैसेज गलत गया तो लिस्ट हटा दी गई.” डॉ. राकेश ने कहा.

क्या बोले CMO ?

अब हमने मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सीएमओ डॉ. जयंत कुमार से फोन पर बातचीत की. सीएमओ बलिया ने कहा कि “हमने सूचना विभाग से पत्रकारों के नाम की सूची मांगी थी. जो हमें मिली थी. लेकिन बाद में लिस्ट में किसी ने खेल कर दिया. किसी ने जानबूझकर लिस्ट के नीचे विवादित आदेश लिख दिया और सीएचसी में लगा दिया. मामला संज्ञान में आते ही हमने आदेश जारी कर लिस्ट हटवा दिया.”

सीएमओ बलिया के कहे अनुसार सीएचसी के स्तर पर ये फर्जीवाड़ा हुआ. लेकिन सीएचसी इंचार्ज का बयान ठीक उलट है. सीयर सीएचसी इंचार्ज की मानें तो लिस्ट सीएमओ के व्हाट्सएप ग्रुप में आधिकारिक तौर पर भेजी गई थी. दोनों के बयान विरोधाभासी हैं. कौन सच है और कौन झूठ? फिलहाल ये गुत्थी नहीं सुलझी है. लेकिन सीएमओ के बयान से इस मामले का एक सिरा सूचना विभाग से जुड़ता है. तो हमने सूचना विभाग में भी बातचीत की.

ज़िला सूचना अधिकारी ने बलिया ख़बर से बातचीत में कहा कि “हमने पत्रकारों की एक सामान्य सी सूची भेजी थी. उसमें हमारी ओर से कोई आदेश नहीं लिखा गया था. बाद में लिस्ट में फर्जीवाड़ा किया गया है.”

सवालों के घेरे में सीयर CHC:

बलिया के सीएमओ डॉ. जयंत कुमार और ज़िला सूचना अधिकारी का बयान एक जैसा है. दोनों के बयान बताते हैं पत्रकारों को बयान देने वाला विवादित आदेश सीएचसी के स्तर पर लिखा गया. सवाल ये है कि क्या पत्रकारों की सूची में विवादित आदेश सीएचसी के अधिकारियों ने अलग से लिखा? क्या ये छेड़खानी इसलिए हुई ताकि सीएचसी की खामियों पर ख़बर ना हो सके? अगर दोनों सवालों के जवाब हां हैं तब बड़ा सवाल ये है कि ये काम किसने किया?

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