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नाबालिग से रेप केस में आसाराम दोषी करार, थोड़ी देर में हो सकता है सजा का ऐलान

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जोधपुर: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी आसाराम को जोधपुर की अदालत ने बुधवार को दोषी करार दिया है। जोधपुर की विशेष अदालत ने बलात्कार मामले में आसाराम समेत 5 में से तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं दो सह आरोपियों को बरी कर दिया गया है। आसाराम समेत बाकी दोषियों पर अभी सजा का ऐलान नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि कुछ ही देर में सजा का ऐलान हो सकता है।

इस फैसले के बाद आसाराम की प्रवक्ता ने कहा कि हम आगे की कार्रवाई के लिए अपने लीगल टीम से चर्चा कर रहे हैं, हमें अपनी न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है।

उधर कोर्ट का फैसला आने के बाद पीड़िता के पिता ने कहा कि हमें न्याय मिल गया। मैं उन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने इस लड़ाई में हमारा साथ दिया। मुझे उम्मीद है कि जिन गवाहों की हत्याएं हुईं उन्हें भी न्याय मिलेगा।

बता दें कि केंद्र सरकार ने फैसले से पहले राजस्थान, गुजरात और हरियाणा से अतिरिक्त बल तैनात करने को कहा है। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को तीनों राज्यों को भेजी एडवायजरी में कहा कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं।

वहीँ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में भी पीड़िता के घर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक केबी सिंह ने बताया कि पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है। आसाराम के शाहजहांपुर स्थित रुद्रपुर आश्रम पर भी नजर रखी जा रही हैं।

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बलिया- बिना परमिशन मेडिकल उपकरण लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गई गाड़ी, हुआ हंगामा

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बलिया के नरही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जिला मुख्यालय से एक छोड़ी गाड़ी के द्वारा मेडिकल उपकरण भेजे गए। यही गाड़ी विवाद का कारण बन गई। दरअसल गाड़ी में बिना किसी की परमिशन से मेडिकल उपकरण नरहीं पहुंचाए गए थे। जिसको लेकर मतभेद की स्थित रही।
बता दें कि दोपहर करीब 2.30 बजे एक छोटी पिकअप गाडी में बीपी मशीन, मेडिकल उपकरण और कुर्सी इत्यादि लेकर नरही सीएचसी पर ड्राइवर पहुंचा। पूरे सामान को रिसीव करने के लिए सीएचसी के फार्मासिस्ट योगेंद्र कुमार से संपर्क किया।

ड्राइवर से कागज़ लेने पर फार्मासिस्ट को कागजात पूरे न होने पर संदेह हुआ तो उसने स्टोरकीपर से फोन पर बात की तो बताया गया की स्टोर से कोई भी समान नहीं भेजा गया है। फार्मासिस्ट ने लेने से मना कर दिया। इसके बाद जह इंचार्ज वीरेंद्र प्रसाद ने सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर वेंकटेश को सामान को लेकर जानकारी ली तो अधीक्षक ने फार्मासिस्ट से बात की तो पता चला की बिना इंडेंट के ही सामान आया है और स्टोरकीपर ने बताया है की सामान स्टोर से नहीं गया है। साथ ही समान के साथ जो कागजात आए थे न उनमें सीएमओ बलिया का काउंटर साइन भी नही था। कागजात में 8 सितंबर की तारीख पड़ी हुई थी। मामला संदेहास्पद होते देख सीएचसी नरही ने सामान लेने से मना कर दिया।

इसी बीच लगभग 5 गाड़ियों से दर्जनों की संख्या में लोग सीएचसी पर पहुंचे और गाड़ी समान के संबंध में पूछताछ करने लगे। काफी देर तक सीएचसी पर हो हल्ला मचा रहा। वही घटना की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया। सीएचसी के फार्मासिस्ट योगेंद्र कुमार ने लिखित रूप से थाने को सूचना दी है की बिना इंडेंट के समान आया है संदेह के आधार पर आपको सूचना दे रहा हूं। उसके बाद पुलिस ने गाड़ी को लेकर थाने चली गई। इस संबंध में थानाध्यक्ष नरही पन्नेलाल ने बताया की सूचना के आधार पर गाड़ी थाने में खड़ी की गई है। गाड़ी को चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के महरेई निवासी संजीव यादव चला रहा था।पूछने पर बताया चितबड़ागांव में मानपुर के नजदीक किसी दूसरे गाड़ी वाले ने सामान देकर बताया की इसको सीएचसी नरही पहुंचाना है।

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बलिया ख़बर की ख़बर का असर, नदी में डूबे व्यापारियों की तलाश में जुटी NDRF की टीम

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तमसा नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाती NDRF की टीम

बलिया में तमसा नदी (टोंस नदी) में नाव पलटने से 6 लोग डूब गए थे। इनमें से 2 व्यापारी नदी में ही लापता हो गए हैं। इस मामले में बलिया ख़बर की ख़बर का बड़ा असर देखने को मिला है। दोनों व्यापारियों की तलाश करने के लिए वाराणसी से NDRF की टीम बुलाई गई है। व्यापारी माया यादव के परिजनों ने बताया कि टीम अब नदी में हर तरफ तलाश कर रही है।

मामला 21 अगस्त का है। जब 6 लोगों से भरी एक नाव नदी में पलट गई। 4 लोग नदी में डूबने के बाद तैर कर बाहर तो आ गए। लेकिन 2 व्यापारी माया यादव और रघुनाथ यादव का कुछ पता नहीं चला। परिजनों ने फेफना पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने अपने स्तर पर खोजबीन भी की। लेकिन कुछ पता नहीं चला।

पुलिस पर इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई ना करने का आरोप भी लगा। जिसके बाद बलिया ख़बर ने विस्तार से इस ख़बर को प्रकाशित किया था। ख़बर छपने के तत्काल बाद वाराणसी से NDRF की टीम बुलाई गई। 23 अगस्त यानी कल से NDRF की टीम नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। आज भी महावीर घाट से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाई जाएगी।

क्या है पूरा मामला ?

21 अगस्त की दोपहर 6 लोग एक छोटी नाव पर सवार होकर तमसा नदी में जा रहे थे। मुन्ना यादव नाम का शख्स नाव चला रहा था। नाव पर सवार थे दरामपुर गांव के दिलीप पासवान, अशोक यादव, धरिक्षन, बांसडीह के रघुनाथ यादव और घसौती गड़वार के माया शंकर यादव। ये सभी लोग दीयर के इलाके में जा रहे थे। रघुनाथ यादव और माया शंकर यादव गाय का बछड़ा खरीदने के लिए उसे देखने जा रहे थे।

बारिश की वजह से तमसा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। तभी ये 6 लोग नाव से बीच नदी तक पहुंचते है। तेज हवा चल रही थी। नाव पलट जाती है। सभी 6 लोग नदी में डूब गए। लेकिन इनमें से 4 लोग नदी से निकलने में कामयाब हो गए। लेकिन दोनों व्यापारी माया शंकर यादव और रघुनाथ यादव नदी से नहीं निकल पाए। दोनों के परिजनों का कहना है कि दोनों नदी में गायब हो गए हैं।

नदी में नाव पलटने की बात जैसे ही गांव में फैली हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। दीयर के इलाके में 2 चरवाहों ने पुलिस को बताया कि “नाव हमारे सामने ही पलटी थी। जिसके बाद हमने 2 लोगों को नदी के इस पार और 2 लोगों को दीयर की ओर निकलते देखा।”

हालांकि अब स्थानीय पुलिस के साथ NDRF की भी टीम तलाश में लगी। माया यादव और रघुनाथ यादव के परिजन इस उम्मीद में हैं कि जल्द से जल्द दोनों का कुछ पता चल सके।

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बलिया: नदी में डूबे 2 व्यापारी 48 घंटे बाद भी लापता, फेफना पुलिस की डूब गई साख!

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“तमसा नदी में 6 लोग डूबे। इनमें से 4 तो बाहर आ गए। लेकिन बाकी दो को तैरना नहीं आता है। दोनों नदी में ही गायब हो गए हैं। पुलिस गंभीरता से तलाश नहीं कर रही है। हमें आश्वासन दिया गया कि वाराणसी से NDRF की एक टीम आएगी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए। लेकिन टीम नहीं आई है। नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। बताइए अगर जल्दी दोनों को नहीं ढूंढा गया तो धारा के साथ दोनों कहीं और बह कर चले जाएंगे। तब क्या होगा?” भारी आवाज और रूंधे हुए गले के साथ तमसा नदी में लापता माया यादव के रिश्तेदार लक्ष्मण यादव ये बात कहते हैं और मदद की गुहार लगाते हुए चुप हो जाते हैं।

बलिया का फेफना थाना पिछले दिनों की चर्चा का केंद्र बना हुआ था। वजह ये थी कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सीक्रेट रिपोर्ट में फेफना का नाम सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक फेफना सबसे ख़राब परफॉर्मेंस वाले 10 थानों में शामिल है। इस रिपोर्ट पर अब फेफना पुलिस की एक लापरवाही मुहर भी लगा रही है। तमसा नदी में एक नाव पलट जाने से 6 लोग डूब गए। इनमें 2 लोग अब तक 48 घंटे बीत जाने के बाद भी लापता हैं। आरोप है कि दोनों की तलाश में पुलिस महज खानापूर्ति कर रही है।

नदी में डूबने के बाद लापता हुए दोनों शख्स व्यापारी हैं। इनके परिजनों ने फेफना थाने में तहरीर दी है। पुलिस इस मामले में कार्रवाई करने की बात कह रही है। लेकिन परिजनों का कहना है कि पुलिस पूरी गंभीरता के साथ खोजबीन नहीं कर रही है।

पुलिस को दी गई तहरीर

पुलिस को दी गई तहरीर

क्या है पूरा मामला:

दिन रविवार, तारीख 21 अगस्त यानी कल दोपहर 6 लोग एक छोटी नाव पर सवार होकर तमसा नदी (टोंस नदी) में जा रहे थे। मुन्ना यादव नाम का शख्स नाव चला रहा था। नाव पर सवार थे दरामपुर गांव के दिलीप पासवान, अशोक यादव, धरिक्षन, बांसडीह के रघुनाथ यादव और घसौती गड़वार के माया शंकर यादव। ये सभी लोग दीयर के इलाके में जा रहे थे। रघुनाथ यादव और माया शंकर यादव गाय का बछड़ा खरीदने के लिए उसे देखने जा रहे थे।

बारिश की वजह से तमसा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। तभी ये 6 लोग नाव से बीच नदी तक पहुंचते है। तेज हवा चल रही थी। नाव पलट जाती है। सभी 6 लोग नदी में डूब गए। लेकिन इनमें से 4 लोग नदी से निकलने में कामयाब हो गए। लेकिन दोनों व्यापारी माया शंकर यादव और रघुनाथ यादव नदी से नहीं निकल पाए। दोनों के परिजनों का कहना है कि दोनों नदी में गायब हो गए हैं।

नदी में नाव पलटने की बात जैसे ही गांव में फैली हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। दीयर के इलाके में 2 चरवाहों ने पुलिस को बताया कि “नाव हमारे सामने ही पलटी थी। जिसके बाद हमने 2 लोगों को नदी के इस पार और 2 लोगों को दीयर की ओर निकलते देखा।”

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टोंस नदी में डूबे पशु व्यापारी की बाइक किनारे पर लावारिश हालत में पड़ी मिली, जिस पे सवार होकर दोनों पहुंचे थे घाट

क्या बोले परिजन:

बलिया ख़बर के साथ बातचीत में लापता व्यापारी माया शंकर यादव के रिश्तेदार लक्ष्मण यादव ने कहा कि “माया और रघुनाथ यादव नदी में डूबने के बाद से लापता हैं। दोनों नदी में ही गायब हैं। पुलिस ने हमें आश्वासन दिया था कि शाम तक वाराणसी से NDRF की एक टीम आएगी। जो नदीं में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाएगी। लेकिन कोई टीम अब तक नहीं आई है।” वहीं नाव घटना में बचे चार चरवाहों ने पुलिस पर गलत बयान देने के लिए फर्जी मुकदमा में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया।

सवाल है कि जब परिजनों को आशंका है कि माया यादव और रघुनाथ यादव नदी में ही गायब हैं तब पुलिस पूरी गंभीरता से रेस्क्यू ऑपरेशन क्यों नहीं चला रही है? जैसा लक्ष्मण यादव ने बताया कि NDRF की वाराणसी युनिट से एक टीम के आने का आश्वासन मिला था। तब टीम अब तक बलिया क्यों नहीं पहुंची?

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