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बलिया: महिला ग्राम प्रधान पर अवैध कार्यों के लिए बनाया दबाव, जिलाधिकारी को पत्र

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बलिया के आराजी माफी सागरपाली ग्राम पंचायत से दबंगई की एक घटना सामने आई है। आराजी माफी सागरपाली ग्राम पंचायत की महिला ग्राम प्रधान ने अपने ही गांव के कुछ लोगों पर अवैध कार्य कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। महिला ग्राम प्रधान का आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों ने अपना काम कराने के लिए जबरन हस्ताक्षर और मुहर लगाने की कोशिश की। ग्राम प्रधान ने इस मामले में बलिया की जिलाधिकारी को एक पत्र लिखकर शिकायत की है।

जिले के हनुमानगंज विकास खंड के सागरपाली की ग्राम प्रधान कमलावती देवी ने अपने ही गांव के जयनारायण सिंह पर आरोप लगाया है। जयनारायण सिंह और उनके पुत्रों बंटी सिंह व सुगन सिंह पर आरोप है कि अवैध कार्य के लिए दस्तखत और मुहर नहीं लगाने पर प्रधान के साथ उन्होंने गाली-गलौज की। कमलावती देवी ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि जयनारायण सिंह ने अपने बेटों के साथ मिलकर उनके घर के कई सामान उठा ले गए।

बलिया खबर के साथ बातचीत में ग्राम प्रधान कमलावती देवी के पुत्र आशिष ने बताया कि “ब्लॉक से जुड़ा कुछ काम था। इसमें पैसों के लेनदेन का मामला भी था। दरअसल जयनारायण सिंह की ओर से गांव में कुछ काम कराया गया था। जिसके पैसे के लिए उन्होंने एक आवेदन ब्लॉक में दिया था। मेरी मां ग्राम प्रधान हैं। इसमें उनके हस्ताक्षर और मुहर की जरूरत थी। मां ने काम का ब्योरा मांगा था। लेकिन उन्होंने जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाना चाहा।”

आशिष का कहना है कि “जब मां ने हस्ताक्षर नहीं किया तब दबाव बनाया गया। बाद में मैं एक दिन किसी काम से घर से बाहर गया था। तभी इन लोगों ने मेरे घर पर आकर कब्जा कर लिया था। अभी आज यानी मंगलवार को भी मां जिला कार्यालय गई हुई हैं।” आशिष के अनुसार यह मामला कुछ हफ्ते पहले ही शुरू हुआ है। हालांकि वो कोई निश्चित तारीख नहीं बता सके।

जयनारायण सिंह ने बलिया खबर के साथ इस मामले पर बात की। उन्होंने अपने उपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जयनारायण सिंह का कहना है कि “ऐसा कोई मामला नहीं है। हमें उनसे कोई मतलब ही नहीं है। घर से कई सामान उठा लाने की बात सरासर झूठ है। यह सब वो किसी के कहने पर कर रही हैं।”

ग्राम प्रधान कमलावती देवी ने बलिया जिलाधिकारी से इस मामले की जांच कर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है। कमलावती देवी ने जिलाधिकारी से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग भी की है। ये पूरा मामला जांच की मांग करता है। ग्राम प्रधान कमलावती देवी ने जयनारायण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि जयनारायण सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। कमलावती देवी के पुत्र बातचीत में इस मामले के जातिगत पक्ष की भी चर्चा करते हैं। कहते हैं कि हमलोग “छोटी जाति से आते हैं और वो लोग सिंह हैं।” आरोप संगीन हैं। देखना होगा कि जिलाधिकारी इस मामले पर क्या संज्ञान लेती हैं।

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BJP विधायक सुरेंद्र सिंह ने बैरिया विधानसभा से अखिलेश यादव को दी चुनाव लड़ने की चुनौती

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बलियाः आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक संग्राम शुरु हो चुका है। नेताओं के बीच में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। तो वहीं अपनी जीत का दावा कर रहे नेता विपक्षी नेताओं को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

इसी बीच बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। मंगलवार को सुरेंद्र सिंह जिला मुख्यालय पर बीजेपी किसान मोर्चा के द्वारा आयोजित ट्रैक्टर रैली को लेकर प्रेसवार्ता कर रहे थे। तभी उन्होंने यह बयान दिया।

मीडिया से बात करते हुए सुरेंद्र सिंह सपा अध्यक्ष और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जमकर बरसे। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप तो लगाए ही साथ ही उन्होंने अखिलेश को बैरिया सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दे डाली। उन्होंने कहा कि यदि वह पूर्व मुख्यमंत्री को एक लाख मतों से पराजित नहीं कर पायेंगे तो चुनावी राजनीति से सन्यास ले लेंगे।

इसी के साथ सुरेंद्र सिंह ने भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत को भी आड़े हाथों लिया और उन्हें पेशेवर राजनेता करार दिया। उन्होंने कहा कि टिकैत ‘फंडिंग’ की बदौलत ही राजनीति कर रहे हैं। वह सपा और कांग्रेस के कहने पर किसान आंदोलन करा रहे हैं। साथ ही कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है तो फिर आंदोलन जारी रखने का क्या औचित्य है।

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने राकैत टिकैत और सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर ‘बेईमान’ होने का आरोप लगाया और कहा कि यह दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी के सामने नहीं टिक पायेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी ने संसार को अपना परिवार माना है जबकि अखिलेश यादव के लिए उनका परिवार ही संसार है। परिवार को ही संसार मानने वाला ‘बेईमान’ होता है। वहीं भाजपा विधायक के इन बयानों के बाद सियासी पारा चढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

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बलियाः अनियंत्रित ट्रक ने बुजुर्ग को मारी टक्कर, गंभीर हालत में उपचार जारी

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बलियाः एनएच-31 पर एक हादसा हो गया। जहां अलसुबह एक बुजुर्ग को अनियंत्रित ट्रक ने अपनी चपेट में ले लिया। जिससे बुजुर्ग गंभीर रुप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि केहरपुर निवासी 65 वर्षीय रमाकांत ओझा किसी काम से रामगढ़ बाजार गए थे। तभी यह हादसा हुआ। ओझा अपना काम कर घर वापस आ रहे थे। तभी हल्दी थाना क्षेत्र के रामगढ़ में स्थित स्टेट बैंक के समीप ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। वहीं बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।

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बलिया में कितने फीसदी लोग हैं गरीब, नीति आयोग ने बता दिया

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भारत सरकार के नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों का बहुआयामी गरीबी सूचकांक यानी एमपीआई जारी किया है। नीति आयोग के इस बहुआयामी गरीबी सूचकांक में बलिया जिले के लोगों की गरीबी का आंकड़ा भी बताया गया है। एमपीआई के मुताबिक बलिया में तेरह लाख पैंतीस हजार नौ सौ साठ (1335960) लोग गरीब हैं। बलिया की कुल आबादी लगभग 36 लाख है।

नीति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार बलिया की कुल आबादी के 37.11 प्रतिशत लोग गरीब हैं। आयोग ने सभी जिलों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी गरीबी के आंकड़े जारी किए हैं। बलिया के ग्रामीण इलाकों में गरीबी शहरी क्षेत्रों से ज्यादा है। हालांकि ये अंतर बहुत अधिक नहीं है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 37.73 फीसदी लोग गरीब हैं। तो वहीं शहरी आबादी के 31.60 फीसदी लोग गरीब हैं। आंकड़े बताते हैं कि बलिया के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है।

उत्तर प्रदेश गरीबी के मामले में बलिया 37वें स्थान पर है। जबकि पड़ोसी आजमगढ़ और मऊ क्रमशः 50वें और 51 वें पायदान पर हैं। यानी कि आजमगढ़ और मऊ के मुकाबले बलिया में गरीबी ज्यादा है। हालांकि शहरी इलाकों में गरीबी के मामले में मऊ अन्य दो जिलों से भी आगे है।

गौरतलब है कि गत शुक्रवार यानी 27 नवंबर को नीति आयोग ने एमपीआई जारी की थी। नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों में वर्ष 2015-16 के बेसलाइन सर्वे पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक तैयार की है। इस सूचकांक में लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को पैमाना बनाया गया है। इसमें पोषण, बाल किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते की संख्या को भी आधार बनाया गया है।

सूचकांक में सभी मानकों की स्थिति को अलग-अलग बताया गया है। बलिया में पोषण 40.90 प्रतिशत है। बाल और किशोर मृत्यु दर 5.92 फीसदी। प्रसव पूर्व देखभाल 41 फीसदी। स्कूली शिक्षा 11.86 प्रतिशत। स्कूल में उपस्थिति 8.47 फीसदी। खाना पकाने के ईंधन में 81.61 प्रतिशत। स्वच्छता में 76.73 फीसदी। बैंक खाते बलिया में 3.60 प्रतिशत हैं।

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