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बलिया में विकास की बयार पर भाजपा ने जारी किया वीडियो, क्या हैं दावे देख लीजिए

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बलिया भाजपा ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से एक वीडियो ट्वीट किया है।

उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं की रैलियां शुरू होने लगी हैं। लेकिन डिजिटल इंडिया में चुनाव का माहौल सोशल मीडिया से बनाया जाता है। बलिया भाजपा ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से एक वीडियो ट्वीट किया है। इस वीडियो में बलिया में सरकार के कामों का लेखा-जोखा दिया गया है।

उत्तर प्रदेश भाजपा की ओर से दो मिनट का एक वीडियो ट्वीट किया गया है। वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा गया है “रउरा देखीं…, कइसे बहsत बा बलिया में बिकास के बयार…।” वीडियो की शुरुआत होती है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भाषण के क्लिप के साथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भाषण बलिया की धरती से ही दिया था। नरेंद्र मोदी इस वीडियो क्लिप में कहते हैं कि “बलिया की धरती क्रांतिकारी धरती है। देश के लिए जीने-मरने वाले लोग इस बलिया की धरती ने दिए हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के अंश के साथ मंगल पांडेय, चित्तू पांडेय जैसे बलिया के महान लोगों की तस्वीर दिखाई जाती है। इस के बाद अलग-अलग तस्वीरों के साथ और बैकग्राउंड में आवाज के साथ बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद बलिया तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ गया है।

भाजपा के इस वीडियो में विकास कार्यों की गिनती से पहले बताया जाता है कि पूर्ववर्ती सपा-बसपा सरकार के तीन-तीन मंत्री इसी जिले से थे। उसके बावजूद बलिया विकास से अछूता ही रहा। बताया गया है कि “प्रदेश की भाजपा सरकार और मोदी जी के कुशल नेतृत्व ने वो कर दिखाया जो मंगल पांडेय की धरती आजादी के बाद से ही मांग कर रही थी।”

वीडियो में बलिया में बनाई जा रही ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के बारे में बताया गया। जिसके बन जाने से बनारस और बलिया के बीच की दूरी आधी हो जाएगी। साथ ही बिहार का रास्ता भी आसान हो जाएगा। इसके बाद जिले में बन रहे छह लेन के सड़क निर्माण का जिक्र है। फिर बारी आती है उज्जवला योजना की। पहले बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उज्जवला योजना की शुरुआत बलिया की ही धरती पर की थी। इसके बाद किया गया है कि आज बलिया के हर घर में गैस कनेक्शन है।

हर घर नल योजना और सपा-बसपा सरकार पर सियासी हमले के साथ यह दो मिनट का वीडियो खत्म हो जाता है। अब सवाल है कि क्या यह वीडियो बलिया के विकास की पूरी हकीकत है? वीडियो में उज्जवला योजना के तहत हर घर में गैस कनेक्शन का बखान तो है लेकिन एक सिलेंडर की कीमत हजार रुपए के करीब पहुंच जाने का कोई जिक्र नहीं है।

वीडियो ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे और छह लेन की सड़कें बन रही हैं यह तो बताती है लेकिन उखड़े और जर्जर हालत में पड़े पूरे जिले की सड़कों पर चुप हो जाती है। यह हकीकत नहीं बताया गया है कि बलिया में आए दिन टूटे सड़कों की मरम्मत को लेकर लोग धरना देते रहते हैं। बलिया में विकास के हिलोर मारने की कहानी सुनाता यह वीडियो यह भी नहीं बताता है कि बलिया के जिले अस्पताल की भ्रष्ट व्यवस्था के चलते लोगों को गोरखपुर और बनारस का चक्कर काटना पड़ता है।

बलिया के विकास की किस्सागोई करता इस वीडियो में शिक्षा व्यवस्था की चर्चा तक नहीं है। क्योंकि हकीकत ये है कि जिले का एकमात्र विश्वविद्यालय जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय महीनों से बाढ़ और उसके बाद नाले के पानी से घिरा रहता है। विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी और जरूरत पड़ने पर विद्यार्थी नाव से परिसर में प्रवेश करते हैं।

देखना होगा कि बलिया में भाजपा सरकार के वादे पर जनता कितना भरोसा दिखाती है? साथ ही चुनाव के माहौल में यह वीडियो क्या रंग जमाता है? गौरतलब है कि बलिया में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा के नेता काबिज हैं। जबकि एक-एक सीट सपा और बसपा के पास है। चुनाव के नतीजे बताएंगे कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में बलिया की सात सीटों पर भाजपा के खाते में कितनी सीटें जाती हैं?

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बलिया में कितने फीसदी लोग हैं गरीब, नीति आयोग ने बता दिया

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भारत सरकार के नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों का बहुआयामी गरीबी सूचकांक यानी एमपीआई जारी किया है। नीति आयोग के इस बहुआयामी गरीबी सूचकांक में बलिया जिले के लोगों की गरीबी का आंकड़ा भी बताया गया है। एमपीआई के मुताबिक बलिया में तेरह लाख पैंतीस हजार नौ सौ साठ (1335960) लोग गरीब हैं। बलिया की कुल आबादी लगभग 36 लाख है।

नीति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार बलिया की कुल आबादी के 37.11 प्रतिशत लोग गरीब हैं। आयोग ने सभी जिलों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी गरीबी के आंकड़े जारी किए हैं। बलिया के ग्रामीण इलाकों में गरीबी शहरी क्षेत्रों से ज्यादा है। हालांकि ये अंतर बहुत अधिक नहीं है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 37.73 फीसदी लोग गरीब हैं। तो वहीं शहरी आबादी के 31.60 फीसदी लोग गरीब हैं। आंकड़े बताते हैं कि बलिया के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है।

उत्तर प्रदेश गरीबी के मामले में बलिया 37वें स्थान पर है। जबकि पड़ोसी आजमगढ़ और मऊ क्रमशः 50वें और 51 वें पायदान पर हैं। यानी कि आजमगढ़ और मऊ के मुकाबले बलिया में गरीबी ज्यादा है। हालांकि शहरी इलाकों में गरीबी के मामले में मऊ अन्य दो जिलों से भी आगे है।

गौरतलब है कि गत शुक्रवार यानी 27 नवंबर को नीति आयोग ने एमपीआई जारी की थी। नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों में वर्ष 2015-16 के बेसलाइन सर्वे पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक तैयार की है। इस सूचकांक में लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को पैमाना बनाया गया है। इसमें पोषण, बाल किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते की संख्या को भी आधार बनाया गया है।

सूचकांक में सभी मानकों की स्थिति को अलग-अलग बताया गया है। बलिया में पोषण 40.90 प्रतिशत है। बाल और किशोर मृत्यु दर 5.92 फीसदी। प्रसव पूर्व देखभाल 41 फीसदी। स्कूली शिक्षा 11.86 प्रतिशत। स्कूल में उपस्थिति 8.47 फीसदी। खाना पकाने के ईंधन में 81.61 प्रतिशत। स्वच्छता में 76.73 फीसदी। बैंक खाते बलिया में 3.60 प्रतिशत हैं।

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ओमिक्रोन से लड़ने की क्या है बलिया स्वास्थ्य विभाग की तैयारी, जानिए यहां

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कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन को लेकर बलिया जिले का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। नए वेरिएंट से बचाव के साथ ही संक्रमण फैलने से रोकने के लिए टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने माइक्रोप्लान तैयार किया है।

एक दिसंबर यानि आज से लेकर तीन दिसंबर तक जिले के उच्च शिक्षण संस्थानों में तथा तीन से छह दिसम्बर तक सरकारी व प्राइवेट अस्पताल के स्टाफों का सेम्पलिंग किया जाएगा। इस पूरे काम पर स्वास्थ्य विभाग अपनी नजर रखेगा।

स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग हो ताकि संक्रमण का समय रहते पता लग सके। वहीं सीएमओ तन्मय कक्कड़ के मुताबिक आरटीपीसीआर जांच में तेजी लाई गई है। सीएमओ ने बताया कि  विभाग की ओर से चार टीमें रेलवे स्टेशन, दो टीमें रोडवेज बस स्टैंड व एक टीम शहर के चौक बाजार में सेम्पलिंग कर रही है। इन सभी जगहों पर बाहर से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है और उनका सेम्पलिंग किया जा रहा है।

वहीं जिन देशों में ओमिक्रोन फैल चुका है। उन देशों से आने वाले लोगों का सैंपलिंग एयरपोर्ट पर ही करवाई जानी है। सैंपलिगं के बाद व्यक्ति की सूची जिले के स्वास्थ्य विभाग को मिलेगी। और फिर उस व्यक्ति पर निगरानी रखी जाएगी। सीएमओ का कहना है कि अपर मुख्य सचिव के आदेश आने के साथ ही तैयारी कर ली गयी है। अभी तक जिले में ऐसे लोगों की सूची नहीं है। जांच तेजी से किया जायेगा ताकि स्थिति न बिगड़े और समय पर इलाज हो सके।

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क्रिप्टो करेंसी के खतरे पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सरकार से बेहद जरूरी सवाल पूछा!

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नई दिल्ली। दुनिया भर में क्रिप्टो करेंसी को लेकर बहस चल रही है। भारत में भी आजकल क्रिप्टो पर खूब चर्चा हो रही है। लोग जमकर इसमें निवेश कर रहे हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि क्रिप्टो में निवेश करना लोगों के लिए घाटे का सौदा हो सकता है। इससे बचने की सलाह भी दी जा रही है। इसी बीच मंगलवार यानी आज बलिया जिले से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार से सवाल पूछा है।

नीरज शेखर ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रश्नकाल में क्रिप्टो करेंसी को लेकर भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से दो सवाल पूछे। नीरज शेखर ने सवाल किया कि “सभी लोग बात कर रहे हैं कि बिल आने वाला है। लेकिन क्रिप्टो करेंसी यानी बिटकॉइन जो शुरू हुआ था एक डॉलर से और आज साठ हजार डॉलर उसका मूल्य है। एक अनुमान लगाया गया है कि भारत में करोड़ों लोगों ने इसमें निवेश किया है। लाखों-करोड़ रुपया इसमें चला गया है। क्या भारत सरकार उन लोगों को बताने की कोशिश कर रही है कि ये अभी सुरक्षित नहीं है? ये ऐसा पैसा लगा रहे हैं जिसमें आगे उनका नुकसान हो सकता है। हमारा वित्त मंत्रालय इस मामले में क्या कर रहा है?”

राज्यसभा में सांसद नीरज शेखर के इस सवाल का जवाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि “हां, बिल आएगी। लेकिन सेबी व आरबीआई के जरिए और एक बार भारत सरकार की ओर से बयान जारी कर यह बताने की कोशिश की गई है कि यह एक रिस्की क्षेत्र है। जो लोग इस ओर जा रहे हैं सचेत रहना चाहिए कि वो क्या कर रहे हैं।” वित्त मंत्री ने बताया कि “यह भी कहा गया है कि ये एक ऐसा क्षेत्र है जो अभी रेगुलेटरी फ्रेम में नहीं है। हमारी ओर से अलर्ट जारी किया जा चुका है कि यह अभी एक हाई रिस्की क्षेत्र है।”

इसके बाद राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने क्रिप्टो करेंसी को लेकर ही एक और सवाल पूछा। नीरज शेखर ने कहा कि “आप कहीं भी इंटरनेट पर कोई वेबसाइट खोलिए तो क्रिप्टो करेंसी के विज्ञापन बहुत आ रहे हैं। हमारे नौजवान साथी इसमें पैसा खूब लगा रहे हैं। तो क्या जब तक बिल आएगा तब तक के लिए इन विज्ञापनों को बंद करने का कोई उपाय हो सकता है?”

इंटरनेट पर क्रिप्टो करेंसी के विज्ञापन पर रोक लगाने के सवाल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि “विज्ञापन को बंद करने का कोई उपाय अभी तक नहीं है। लेकिन युवाओं को इस बार में सावधान करने का और इसके रिस्क को लेकर ध्यान दिलाने के लिए सरकार के द्वारा कदम उठाया जा रहा है। सेबी और आरबीआई के द्वारा भी जागरुकता के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मगर अब हम इस कगार पर पहुंच चुके हैं कि इस पर हमारा जल्दी आने वाला है।”

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