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निकाय चुनाव

निकाय चुनाव में बलिया की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी JDU: अवलेश सिंह

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बलिया। निकाय चुनाव का बिगुल बजने के बाद सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है। इस बार निकाय चुनाव में बीजेपी- कांग्रेस के साथ बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी JDU भी बलिया में सभी नगर पालिका और नगर पंचायतों में अपना प्रत्याशी उतारेगी। और पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी।

गुरुवार को जिला मुख्यालय पर बैठक के दौरान यूपी के JDU प्रदेश महासचिव और निकाय चुनाव के पूर्वांचल प्रभारी अवलेश कुमार सिंह ने बताया कि जिले की कुल 12 सीटों पर JDU प्रत्याशी को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है और जल्द उनके नाम की घोषणा भी हो जाएंगे। अवलेश सिंह ने कहा कि पार्टी का मकसद है कि निकाय चुनाव में वह सफलता की तरफ रहे।

 

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बेल्थरा रोड: नगर पंचायत चुनाव जीतने के लिए बीजेपी का मास्टर प्लान ये है?

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बेल्थरा रोड नगर पंचायत चुनाव के लिए दावेदार तैयार

उत्तर प्रदेश में इन दिनों उपचुनाव की चर्चाएं तेज हैं. मैनपुरी, रामपुर और खतौली में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी पारा हाई है. लेकिन नेपथ्य में निकाय चुनाव की जमीन तैयार हो रही है. निकाय चुनाव को लेकर 29 नवंबर यानी कल का अपडेट ये है कि सीटों की आरक्षण सूची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश किया जा चुका है. सीएम योगी से हरी झंडी मिलने के बाद आरक्षण सूची जारी होने की संभावना है. बहरहाल, निकाय चुनाव स्पेशल में यहां हम बात करेंगे बलिया ज़िले के बेल्थरा रोड नगर पंचायत की. जहां जीत के लिए के लिए बीजेपी ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है. तो दूसरी पार्टियां भी राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद में जुटी हैं.

बेल्थरा रोड से फिल्हाल दिनेश कुमार गुप्ता नगर पंचायत अध्यक्ष हैं. एक बार फिर दिनेश कुमार गुप्ता चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. दिनेश कुमार गुप्ता भाजपा से पीछली बार नगर पंचायत अध्यक्ष बने थे. उनके सामने प्रवीण नारायण गुप्ता, लखी गुप्ता, भगवती राजभर,
मनीष जायसवाल, कालिका प्रसाद गुप्ता, अवधेश यादव, शेख ऐजाजुद्दीन दावेदारी करते दिख सकते हैं.

बात करें बेल्थरा रोड नगर पंचायत की जनसंख्या की. यहां करीब 20 हजार से ज्यादा की आबादी रहती है. इसमें करीब 73 फीसदी जनसंख्या हिंदु समुदाय की है. तो वहीं करीब 26 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग हैं. मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या हिंदुओं की अपेक्षा जरूर कम है. लेकिन हर बार इस वर्ग के मतदाता हार-जीत के बीच खड़े होते हैं. सियासी भाषा में कहें तो किंग मेकर की भूमिका निभाते हैं.

भाजपा का मास्टर प्लान:

बलिया ज़िला पूर्वांचल का हिस्सा है. निकाय चुनाव को जब 2024 लोकसभा चुनाव के लिहाज से देखा जाता है तो इसकी अहमियत बढ़ जाता है. हालांकि निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने अब तक उम्मीदवारों के पत्ते नहीं खोले हैं. सूत्र भाजपा के एक आंतरिक सर्वे के हवाले से बताते हैं कि बलिया और खासकर बेल्थरा रोड की लड़ाई इस बार भाजपा के लिए आसान नहीं है. स्थानीय स्तर पर पार्टी की गुटबाजी, एंटी इनकम्बेंसी, बड़ी संख्या में बगावत ने भाजपा की राहों में कांटे बिछा दिए हैं.

बीते महीने यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी बलिया के दौरे पर आए थे. इसके अलावा यूपी सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी कई बार बलिया के दौरे पर आ चुके हैं. पसमांदा मुसलमानों को रिझाने के लिए दानिश आजाद अंसारी को आगे किया जा रहा है. दानिश आजाद अंसारी का गृह जिला भी बलिया ही है. भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष के पद पर पार्टी किसी मुसलमान प्रत्याशी को बैकडोर से मैदान में उतार या सपोर्ट कर सकती है. ताकि मुख्य प्रत्याशी की जीत के लिए मुस्लिम वोट के समीकरण को साधा जा सके.हालांकि मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव को कम करने के लिए भाजपा बलिया की कुछ और सीटों पर यहीं रणनीति अपनाने वाली है. वजह साफ स्थानीय स्तर पर पार्टी के नेतृ्त्व से मुस्लमान समुदाय के मतदाताओं में नाराज़गी है. देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा समेत दूसरे दल बेल्थरा रोड से किन प्रत्याशी पर दांव लगाते हैं. साथ ही भाजपा स्थानीय स्तर के आक्रोश और सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है?

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दो चरणों में होंगे निकाय चुनाव, दिसंबर के पहले सप्ताह में जारी हो सकती है अधिसूचना!

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यूपी में इस बार नगरीय निकाय चुनाव दो चरणों में कराए जा सकते हैं। गुजरात चुनाव को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग दिसंबर के पहले सप्ताह में अधिसूचना जारी कर सकता है। दोनों चरणों के निकाय चुनाव दिसंबर में खत्म कर जनवरी के प्रथम सप्ताह में परिणाम घोषित करने की तैयारी है। इस बार करीब सवा चार करोड़ मतदाता 763 नगरीय निकायों के लिए अपने प्रतिनिधि चुनेंगे।

यूं तो राज्य निर्वाचन आयोग को नगरीय निकाय चुनाव कराने के लिए डेढ़ माह यानी 45 दिन की जरूरत होती है, किंतु विशेष परिस्थितियों में आयोग ने 35-36 दिनों में भी चुनाव करा लेता है। पांच वर्ष पहले 2017 में भी आयोग ने 27 अक्टूबर को चुनाव की अधिसूचना जारी कर तीन चरणों में मतदान 22, 26 व 29 नवंबर को कराए गए थे।

मत की गिनती एक दिसंबर को हुई थी। यानी 2017 में भी आयोग ने केवल 36 दिनों में चुनाव संपन्न कराया था। इस बार भी आयोग को चुनाव कराने के लिए बहुत कम समय मिल रहा है। निकायों के गठन, परिसीमन व सीमा विस्तार के काम में सरकार को बहुत समय लग गया। अब सरकार मेयर, चेयरमैन व वार्डों के आरक्षण के काम में लगी है।

इस काम में करीब एक सप्ताह का समय और लगना तय है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग के पास 20 नवंबर के बाद ही आरक्षण के बाद निकायों की सूची पहुंचेगी। चूंकि मुख्यमंत्री सहित प्रदेश सरकार के मंत्री गुजरात चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे। गुजरात मैं एक और पांच दिसंबर को मतदान होना है। इसके अलावा नवंबर में ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए निवेशकों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री व सरकार के मंत्रियों को विदेश भी जाना है। सूत्रों के अनुसार गुजरात में तीन दिसंबर की शाम को चुनाव प्रचार थम जाएगा, ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग इसके बाद कभी भी निकाय की अधिसूचना जारी कर सकता है।आयोग ने फिलहाल दो व तीन दोनों ही चरणों के चुनाव कार्यक्रम तैयार करवाया है, किंतु समय कम बचने के कारण सबसे अधिक संभावना दो चरणों में चुनाव कराने की बन रही है, क्योंकि जनवरी के पहले सप्ताह तक निकाय का गठन हो जाना चाहिए। फिलहाल आयोग मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में लगा हुआ है। वर्ष 2017 में 3.32 करोड़ मतदाता थे जबकि इस वर्ष करीब एक करोड़ मतदाता बढ़ने की उम्मीद है। 18 नवंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन के बाद मतदाताओं की असल संख्या का पता चल सकेगा।

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निकाय चुनाव: उम्मीदवारों का चुनावी खर्च तय, जानिये कौन कितना कर सकेगा खर्च ?

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बलिया। यूपी में निकाय चुनाव की तैयारी तेजी से चल रही है। चुनाव को लेकर प्रशासन भी तैयारियां कर रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के चुनावी खर्च के साथ नामांकन पत्रों का मूल्य, जमानत धनराशि भी तय कर दी है। जल्द आरक्षण निर्वाचन विभाग की ओर से जारी किया जा सकता है।

नगर पालिका अध्यक्ष 9 लाख और नगर पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार 2.50 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे। नगर पंचायत सदस्य पद के लिए 50 हजार रुपये धनराशि खर्च की सीमा तय की गई है। नगर पालिका परिषद के सभासद दो लाख रुपये चुनाव में खर्च कर पाएंगे। पिछले निकाय चुनाव से इस बार अधिक धनराशि खर्च करने की सीमा तय की गई है।
अध्यक्ष पद सामान्य के लिए नामांकन पत्र की कीमत 500 व जमानत राशि 8000, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा व महिला वर्ग की उम्मीदवार के लिए नामांकन पत्र का मूल्य 250 व जमानत राशि चार हजार निर्धारित की गई है। नगर पालिका सभासद सामान्य के लिए नामांकन पत्र की कीमत 200 व जमानत राशि दो हजार, जबकि पिछड़ा व अन्य वर्ग के लिए नामांकन पत्र की कीमत 100 रुपये व जमानत राशि 1000 रुपये तय की गई है।

नगर पंचायत अध्यक्ष पद के सामान्य पद के उम्मीदवार के लिए नामांकन पत्र की कीमत 250 व जमानत राशि पांच हजार रखी गई है। जबकि अनुसूचित जाति, पिछड़ा व महिला वर्ग के लिए नामांकन पत्र की कीमत 125 व जमानत राशि 2500 रुपये है। इसी तरह से नगर पंचायत सदस्य सामान्य पद के लिए जमानत राशि दो हजार व नामांकन पत्रों का मूल्य 100 रुपये, जबकि अनुसूचित व पिछड़ा के लिए जमानत राशि एक हजार व नामांकन पत्र की कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है।

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