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बलिया : छह अभियुक्तों को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दस साल की सजा, क्या है माजरा? 

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रसड़ा: छह अभियुक्तों को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दस साल की सजा, क्या है माजरा? 

बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र के छह लोगों को अदालत ने गैर-इरादतन हत्या के मामले में दस साल की सजा सुनाई है। बलिया न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार ने छह अभियुक्तों को दस साल के सश्रम कारावास समेत दस हजार रुपए का आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला आज से चार साल पहले यानी 2017 के एक मामले में आया है।

2017 में शिमला चौहान नाम की एक महिला ने रसड़ा थाना क्षेत्र में मुकदमा दर्ज कराया था। 4 जून, 2017 को तहरीर दी थी कि गांव के ही दिलीप चौहान, दीपू चौहान, नागेंद्र चौहान, साधु चौहान, लंगड़ चौहान से विवाद है। शिमला चौहान ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया था कि 4 जून को ये सभी लोग उनके घर आए और पति राजपाल चौहान को लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा।

राजपाल चौहान को बचाने जब परिवार के दूसरे सदस्य जगदीश चौहान, जनार्दन चौहान और उमेश चौहान पहुंचे तब उन पर भी हमला किया गया। धारदार हथियारों से मार पड़ने के कारण सभी बुरी तरह घायल हो गए। इनमें से उमेश चौहान की मौत अगले ही दिन इलाज के दौरान हो गई।

पीड़िता की तहरीर के आधार पर रसड़ा थाना ने एफआईआर दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने इस मामले का आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। चार वर्षों तक अदालत में यह विवाद चलता रहा। दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें और गवाहों को अदालत के सामने पेश किया। 11 अक्टूबर, 2021 को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। न्यायालय ने दिलीप चौहान, दीपू चौहान, नागेंद्र चौहान, साधु चौहान, राजू चौहान और रविंद्र चौहान को दोषी करार दिया। सभी दोषियों को दस साल का सश्रम कारावास और दस हजार के अर्थ दंड की सजा सुनाई गई।

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रसड़ा विधायक का रिपोर्ट कार्ड, जनता से जानिए कैसा रहा कार्यकाल, पास रहे या फेल?

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रसड़ा डेस्क। लोकतंत्र का सबसे बड़ा महापर्व चुनाव है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में भी यह महापर्व आने वाला है। विधानसभा चुनाव 2022 के लिए तमाम राजनैतिक पार्टियां सक्रिय है। पार्टी प्रचार और अपनी जीत सुनिश्चित करने अलग अलग विधानसभा के विधायक मैदान में उतर चुके हैं। सभी का फोकस जनता पर है। कोई पार्टी का झंडा लिए जनता को रिझाने की कोशिश में है, तो कोई घोषणावीर बना हुआ है।

लेकिन अपना जनप्रतिनिधि चुनने से पहले यह जानना भी जरुरी है कि पिछले पांच सालों में आपकी विधानसभा में कितना काम हुआ? क्या क्षेत्रीय विधायक आपकी उम्मीदों पर खरा उतरे? यही सवालों के जवाब जानने के लिए बलिया ख़बर की टीम पहुंची अलग अलग विधानसभाओं में और जनता से जाना कि आखिर कैसा रहा विधायक का कार्यकाल, कितने हुए विकास कार्य। तो चलिए सबसे पहले शुरुआत करते हैं विधायक उमाशंकर सिह से।

बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं उमाशंकर सिंह। 2012 में सपा के सनातन पांडेय को हराकर पहली बार विधायक बने। 2017 में जब पूरे देश में भाजपा की लहर चल रही थी, तभी भी उमाशंकर सिंह ने भाजपा के रामइकबाल सिंह को करारी शिकस्त देते हुए चुनाव जीता था।रसड़ा विधानसभा चुनाव परिणामरसड़ा विधानसभा चुनाव परिणाम

उमाशंकर सिंह ने बहुत कम समय में ही राजनीति में अपना कद बहुत बड़ा कर लिया और लोगों के दिलों में भी जगह बनाई। अपशब्दों की राजनीति से दूर उमाशंकर सिंह काम करने में विश्वास रखते हैं। गरीबों तक हर सुविधा पहुंचे इसका खास ख्याल रखते हैं। रसड़ा के सौरभ सिंह ने बताया कि “आज बलिया जिला उमाशंकर सिंह द्वारा किए जा रहे तमाम नेक कार्यों का गवाह बन चुका है। कमजोर परिवार की बेटियों का घर बसाना हो, किसी जरूरतमंद की आर्थिक सहायता करनी हो, किसी गरीब बीमार का इलाज कराना हो या प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने वाले पीड़ित परिवारों को सहारा देना हो, ऐसी किसी भी स्थिति में सरकारी मदद की उम्मीद किए बिना उमाशंकर सिंह मदद के लिए आगे आ जाते हैं।”

यह भी पढ़ें: विधानसभा’वार 2012: उमाशंकर सिंह के जीत की कहानी; केरोसिन से करोड़ों का सफर! 

वहीं इलाके के एक और व्यक्ति रमेश कुमार ने बताया कि “उमाशंकर सिंह के पिछले पांच सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो कई विकास कार्य क्षेत्र में हुए। चाहें पक्की सड़कें बनवाने की बात हो या कोरोनाकाल में अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था करने की। उमाशंकर सिंह ने हर मोर्चे पर अच्छे से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया। समाज को लेकर उमाशंकर सिंह हमेशा सक्रिय रहते हैं। धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना उमाशंकर सिंह सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

हमारी टीम ने कुछ महिलाओं से भी बातचीत की। रसड़ा निवासी महिला कमलवाती देवी ने बताया कि “उमाशंकर सिंह ने अपने विधायकी के दौर में गरीबों के लिए बेहद अच्छे काम किए। किसी गरीब बिटियां की शादी कराने की बात हो तो उमाशंकर सिंह सबसे पहले मदद करते हैं। उन्होंने क्षेत्र में कई सामूहिक सम्मेलन आयोजित कर हजारों गरीब लड़के-लड़कियों की शादी करवाई।”

हमारी टीम की मुलाकात इलाके के ही मनोज (बदल हुआ नाम) से हुई, मनोज विधायक के बारे में बताते हुए रो पड़ते हैं। मनोज ने कहा कि “गरीबों के मसीहा है उमाशंकर सिंह, गरीब को समय पर इलाज दिलवाया, उनके आर्थिक, सामाजिक सुधार पर ध्यान दिया। जब भी क्षेत्र में किसी तरह की कोई अनुचित घटना होती है तो उमाशंकर सिंह बिना देरी किए परिवार को हिम्मत देने उनके घर पहुंच जाते है। ऐसी स्थिति में वह पीड़ित के घर के बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी तक उठाने का वादा कर देते हैं।” 

उमाशंकर सिंह ने विधायक के रुप में अपने कार्यकाल के दौरान कई विकासकार्य किए। जिसका नतीजा यह रहा कि जनता ने उन्हें दो बार विधायक बनाया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस बार के चुनाव में उमाशंकर सिंह को फिर विजय बनाएगी और विधायक की कुर्सी पर बैठाएंगे।

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बसपा से निकाले गए नेता दूसरी पार्टियों के बन रहे गुलदस्ता: विधायक उमाशंकर सिंह

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में नेताओं के दल बदलने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता में बैठने वाली बहुजन समाज पार्टी के नेता भी दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानमंडल में बसपा के नेता और बलिया जिले के रसड़ा से विधायक उमाशंकर सिंह ने बसपा से दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं को लेकर कहा है कि पार्टी के खराब छवि वाले लोग दूसरे गुलदस्तों को सजा रहे हैं।

उमाशंकर सिंह ने सोमवार को कहा कि “बहुजन समाज पार्टी में कोई उथल-पुथल नहीं मची है। हमारे यहां जिसके आचरण में गलती पाई जाती है या जो लोग अराजकता में संलिप्त होते हैं उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती निकाल देती हैं। वो लोग महीनों सिफारिश करते रहते हैं। लेकिन बसपा एक अनुशासित पार्टी है। ऐसे लोगों को पार्टी वापस नहीं लेती है।”

बसपा से निकाले गए लोगों के भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर उमाशंकर सिंह ने कहा कि “हमारी पार्टी से निकाले गए नेता दूसरे दलों के गुलदस्ता सजा रहे हैं। रद्दी को बाहर निकाला जाता है। कचरा साफ किया जाता है। ये लोग रद्दी लेकर गए और ताली बजा दिए। तो मुबारक हो इन पार्टियों को।”

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भाजपा-सपा पर निशाना साधते हुए बसपा विधायक उमाशंकर सिंह को सचिन तेंदुलकर क्यों याद आए?

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बलिया जिले के रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधानमंडल दल के नेता उमाशंकर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधा है। उमाशंकर सिंह ने कहा है कि भाजपा और सपा ऐसे लोगों के जरिए सत्ता में आने का सपना देख रही है जिन्हें खराब छवि की वजह से बसपा से निकाला गया है।

विधायक उमाशंकर सिंह अपने गांव खनवर में गत रविवार को संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सपा और भाजपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि “जो भी नेता सपा और भाजपा में शामिल हो रहे हैं, वह बसपा से खारिज किए गए हैं। बसपा के खारिज किए गए सामान के जरिये दूसरे दल अपना गुलदस्ता सजा रहे हैं और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का मंसूबा पाल रहे हैं।”

“बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाज में खराब छवि होने की वजह से इन लोगों को पार्टी से निकाल दिया है। अब यही नेता सपा और भाजपा में शामिल हो रहे हैं। बसपा से निकाले गए विधायकों और नेताओं के विरुद्ध भूमि पर अवैध कब्जे से लेकर कई अवैध कार्यों को लेकर तमाम शिकायतें थीं। जिसकी वजह से इन्हें पार्टी से बाहर किया गया है।” उमाशंकर सिंह ने संवाददाताओं से कहा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा 2022 के चुनाव से पहले मायावती अपनी पार्टी बसपा को नए ढ़ंग से सामने रखने में जुटी हुई हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से मायावती ने अब तक कई नेताओं और विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है। पिछले दिनों ही बसपा विधानमंडल दल के पूर्व नेता लालजी वर्मा, बसपा के पूर्व अध्यक्ष रहे विधायक राम अचल राजभर समेत कई नेताओं ने सपा की साइकिल पर सवार हो गए। तो वहीं आजमगढ़ जिले की सगड़ी विधानसभा सीट से बसपा विधायक वंदना सिंह बीते दिनों भाजपा में शामिल हो गईं।

रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह बलिया जिले से एकमात्र बसपा विधायक हैं। उन्हें बीते दिनों ही बसपा विधानमंडल दल का नेता बनाया गया है। पुराने नेताओं के पार्टी से चले जाने पर सवाल पूछे जाने पर उमाशंकर सिंह ने कहा कि “सचिन तेंदुलकर के रिटायर होने से क्या भारतीय टीम समाप्त हो गई।”

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