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बलिया- जर्जर सड़क की 3 साल बाद मरम्मत नहीं, गड्ढों से लोगों को हो रही परेशान

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बलिया डेस्क: हरिहां कला मार्ग 2.5 किलोमीटर की दूरी की सड़क जर्जर है। जगह-जगह गड्ढे होने से आवाजाही में परेशानी होती है। गड्ढों में बारिश के दिनों में जहां पानी भरता है वहीं गर्मी और ठंड के दिनों में धूल का गुबार उठता इस मार्ग का निर्माण वर्ष लगभग 2010- 12 में किया गया था, जिसके कुछ वर्षों बाद सड़क की स्थिति धीरे धीरे खराब होती गई। सड़क निर्माण के बाद आज तक सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई। राहगीरों को 2.5 किलोमीटर की दूरी को तय करने में आधा घंटा से अधिक समय लगता है। क्योंकि इस मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।

यह सड़क रेवती हरिहां रेखाहां नूरपुर गोवरही होते हुए टी एस बंधा पर मिल जाती हैं। समय-समय पर मरम्मत के अभाव में सड़क पूरी तरह खराब हो चुकी है। जिस पर आवागमन करना लोगों के लिए परेशानी से कम नहीं है। सड़क पर से डामर उखड़ने से छोटी बड़े गड्ढे बन गए हैं। जो वाहन चालक सहित राहगीरों को परेशान कर रहे हैं। वहीं बारिश के बाद गड्ढों में पूरी तरह से पानी भर जाता है । जिससे होकर आवागमन करना मुश्किल हो जाता है।

वाहन इन गड्ढों में फंसने से कई दुर्घटनाएं भी हुई है। यही कारण ग्रामीण इस मार्ग से आवागमन करने से बचते हैं। मगर मजबूरीवश उन्हें आवागमन करना पड़ता है। इसके बाद भी विभाग के अधिकारियों को इन सबसे कोई मतलब नहीं हैं और क्षेत्रवासी इस समस्या से जुझ रहे हैं।

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बलिया के नगरा सीएचसी में कैसे होगा इलाज, अस्पताल खुद ही पड़ा है बीमार

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बलिया जिले के नगरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दुर्व्यवस्था से मरीजों को दिक्कत हो रही है। (फोटो साभार: दैनिक जागरण)

बलिया जिले के नगरा में मरीजों के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थापना की गई थी। लेकिन आलम ये है कि नगरा सीएचसी खुद ही इलाज खोज रहा है। इस सामुदायिक अस्पताल में दुर्व्यवस्था इस कदर समा चुकी है कि मरीज यहां जाने से भी भय खा रहे हैं। बिजली से लेकर अस्पताल में लगे बेड तक की हालत खराब है।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक नगरा सीएचसी में कुल तीस बेड हैं। लेकिन इनमें से महज एक दर्जन बेड ही ठीक हालत में हैं। शेष सभी बेड टूटे हुए पड़े हैं। रिपोर्ट बताती है कि अस्पताल में लगे पंखे तक सुरक्षित नहीं है। वार्ड में लगे पंखे गायब हो चुके हैं और किसी दूसरे के घरों को हवा देने के काम आ रहे हैं।

हालांकि पंखा चलने के लिए जरूरी है बिजली। लेकिन अस्पताल में बिजली तक उपलब्ध नहीं है। बीमारियों का उपचार करने के लिए शुरू किया गया नगरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमारियों का अड्डा बन चुका है। सीएचसी के बाहर बाउंड्री नहीं है। इस वजह से यहां चिकित्सकों के साथ-साथ अड्डेबाजों की भी आवाजाही होती रहती है।

नगरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. टी. एन. यादव ने मीडिया में बयान दिया है कि “सीएचसी की समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता रहा है। शासन से सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो सीएचसी नगरा के लोगों के लिए वरदान सिद्ध होगा। लेकिन बजट के अभाव में सीएचसी की दुर्दशा हो गई है।”

गौरतलब है कि बलिया के जिले अस्पताल की स्थिति भी खराब है। अस्पताल में संसाधनों की कमी है। जब जिला अस्पताल की व्यवस्था ही सुदृढ़ नहीं है तो ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्या बात की जाए? बलिया से ही पूर्व भाजपा विधायक राम इकबाल सिंह जिला अस्पताल और सीएचसी की दुर्व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पर सवाल उठाते रहे हैं। राम इकबाल सिंह ने इस मसले पर बलिया की जिलाधिकारी को पत्र भी सौंपा था। जिसका जिला प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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बलियाः कॉलेज हॉस्‍टल के पास मिला महिला का कंकाल, दुपट्टे से बंधे मिले पैर

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बलिया के पकड़ी थाना अंतर्गत कॉलेज के पास नरकंकाल मिलने का मामला सामने आया है। इससे पूरे इलाके में हडकंप मच गया है। बताया जा रहा है कि नरकंकाल महिला का है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बता दें कि घटनास्थल के पास टूटी चूड़िया और चप्पल भी मिला है। सूत्रों के अनुसार महिला के कंकाल का पैर दुपट्टा से बंधा पाया गया। ऐसे में अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि हत्या के बाद महिला के शव को वहां फेंक दिया गया होगा। वहीं पुलिस ने नरकंकाल को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में होगा।

इस संबंध में एसएचओ पकड़ी विनोद कुमार ने बताया कि फिलहाल कुछ भी कहना सम्भव नहीं है। उक्त कंकाल की जांच कराई जाएगी। उधर सूचना पर सीओ सिकन्दरपुर राजेश तिवारी भी मौके पर पहुंच कर अपने स्तर से जांच में जुट गए ।

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बलिया: लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी का खामियाजा, NHAI के हाथ सौंपी गई परियोजना

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बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज डेवलपमेंट (यूपीडा) को सौंपी गई थी। लेकिन अब परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआइ को दे दी गई है। यूपीडा ने लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया था। जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। जिसके बाद शासन ने यह फैसला लिया है।

खबरों के मुताबिक दो दिन पहले यूपीडा और एनएचएआइ के बीच एक संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट को एनएचएआइ को सौंपने पर सहमति बन गई। एनएचएआइ अब लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएगी। अभी तक इस एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही तैयार हो सका है। जिसमें बलिया जिले के ब्लू प्रिंट में गलती पाई गई थी।

योजना के अनुसार लिंक एक्सप्रेस-वे 24.2 किलोमीटर लंबी होगी। एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई है 120 मीटर प्रस्तावित है। लिंक एक्सप्रेस-वे का चौदह किलोमीटर हिस्सा गाजीपुर में है। तो वहीं 10.2 किलोमीटर हिस्सा बलिया से होकर गुजरेगा। बलिया जिले के कुल तेरह गांवों से यह एक्सप्रेस-वे होकर जाएगा। बीते अगस्त महीने में यूपीडा ने इसके लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार कर शासन को भेजी थी।

यूपीडा के ब्लू प्रिंट में जो रूट दर्शाया गया उसमें अनियमितता पाई गई। दरअसल बलिया से होकर जाने वाले एनएच-31 के ही रूट पर लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट बना दिया गया था। शासन ने इस पर यूपीडा को ब्लू प्रिंट ठीक करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एक्सप्रेस-वे का पूरा कार्य एनएचएआइ को सौंप दिया गया है। लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए शासन की ओर से यूपीडा को पचास करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी थी। अब यूपीडा यह राशि एनएचएआइ को स्थानांतरित करेगी।

लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बलिया जिला पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा। उसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे दिल्ली पहुंचा जा सकेगा। इस तरह बलिया से दिल्ली तक का सफर आसान हो जाएगा। लेकिन ये सारी बातें भविष्य की बैताल हैं। ऐसा होगा तो वैसा हो जाएगा के फार्मेट पर पूरी कहानी टिकी हुई है। दिल्ली अभी बहुत दूर है। जब यूपीडा जैसी संस्था एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही किसी दूसरी सड़क के रूट पर बना दे तो दिल्ली की दूरी और अधिक हो जाती है।

देखना होगा कि बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़कर बारह घंटे दिल्ली पहुंचाने का ख्वाब कब तक रात के अंधेरे से निकलकर जमीन के उजाले में प्रवेश करती है?

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