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पत्नी की नियुक्ति प्रकरण में बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक को राहत, क्या है पूरा मामला?

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बलिया जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ब्रजेश मिश्र को नियम के अपनी विरूद्ध पत्नी की नियुक्ति के मामले में राहत मिली है। (फोटो साभार: दैनिक जागरण)

बलिया जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ब्रजेश मिश्र को अपनी पत्नी की नियुक्ति मामले में राहत मिली है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ब्रजेश मिश्र पर आरोप था कि प्रयागराज में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रहते हुए उन्होंने नियम के विरूद्ध जाकर अपनी पत्नी अवंतिका का सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति का अनुमोदन किया था। इस मामले में बेसिक शिक्षा निदेशक ने बीएसए से रिपोर्ट मांगा था। जिसके बाद डॉ. ब्रजेश मिश्र को क्लीन चिट मिल गई है।

वर्तमान समय में बलिया जनपद में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ब्रजेश मिश्र पर अपनी पत्नी की नियुक्ति के अनुमोदन में पद का दुरुपयोग करने का आरोप गाजीपुर के शिव बचन पांडेय ने लगाया था। शिव बचन पांडेय गाजीपुर के गडार गांव के रहने वाले हैं। शिव बचन पांडेय का आरोप था कि डॉ. ब्रजेश मिश्र ने 5 अप्रैल, 2011 को अपनी पत्नी अवंतिका का ईश्वर नूरजहां बालिका जूनियर हाईस्कूल बहादुरगंज में सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति का अनुमोदन किया था।

इस प्रकरण में प्रयागराज के बेसिक शिक्षा निदेशक ने बीएसए से रिपोर्ट तलब किया था। प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने जांच के बाद कहा है कि 5 अप्रैल, 2011 को डॉ. ब्रजेश मिश्र द्वारा अवंतिका नाम का कोई अनुमोदन प्रदान नहीं किया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने जांच के बाद भेजे पत्र में यह भी कहा है कि 5 अप्रैल, 2011 को किसी प्रकार का अनुमोदन ही निर्गत नहीं हुआ है।

प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपनी जांच में गाजीपुर के शिव बचन पांडेय के आरोप को निराधार पाया है। इस तरह अब बलिया में तैनात जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ब्रजेश मिश्र को इस नियुक्ति प्रकरण में राहत मिल गई है।

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बलियाः नीलम की मौत के बाद न पति आया न परिजन, पुलिस को करवाना पड़ा अंतिम संस्कार

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बलियाः जिला कारागार में आत्महत्या का प्रयास करने वाली नीलम साहनी की मौत के बाद पुलिस ने ही उसका अंतिम संस्कार किया। युवती की मौत के बाद उसके परिजनों ने शव लेने के लिए इनकार कर दिया था।

वहीं प्रेमिका की मौत होने के बाद उसके परिजन उसकी लाश लेने से इंकार कर दिए। परिजनों द्वारा लाश न लिए जाने के चलते अंत में पुलिस द्वारा नियमानुसार मृतक का दाह संस्कार कराया गया।

जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह मुलाकात के लिए पहुंची बांसडीहरोड क्षेत्र के सरया डुमरी गांव निवासी नीलम ने अपने पति सूरज के साथ कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

नीलम की मौत के बाद दो दिनों तक पुलिस उसके मायके और ससुरालवालों की खोजबीन करती रही। लेकिन कोई परिजन सामने नहीं आया। पुलिस ने मृतका के मायके में उसके चाचा और पहली ससुराल में भी बात की, लेकिन मृतका से दोनों परिवारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। तीसरे दिन कोतवाली पुलिस ने स्वयं पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया और शिवरामपुर गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया।

 

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बलिया पुलिस का ट्विटर हैंडल 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ रिकवर !

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बलिया। बलिया पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को हैक हुए 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है.  ट्विटर अकाउंट कब तक रिकवर हो जाएगा इस पर कोई भी उच्च अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है. हालांकि बलिया पुलिस दावा है कि जांच प्रणाली तैयार कर ली गई है और हैक किए गए ट्विटर हैंडल को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा.

बता दें कि हैकर्स ने बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बृहस्पतिवार की भोर में हैक किया गया है. हैकर्स ने अकाउंट हैक करने के बाद डीपी हटा दी है और ऑनलाइन गेम से संबंधित ट्वीट रीट्वीट किए हैं. बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर हैंडल वेरिफाइड है और @balliapolice के नाम से अकाउंट हैं. अकाउंट को 53.1K हजार लोग फॉलो करते हैं.   

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जानिए कौन हैं गाजियाबाद के पहले पुलिस कमिश्नर बने बलिया के अजय कुमार मिश्र?

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बलिया के रहने वाले अजय कुमार मिश्र गाजियाबाद कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर बन चुके हैं। 2003 में आइपीएस बने अजय कुमार मिश्र को नई जिम्मेदारी मिलने पर परिवार में हर्ष का माहौल है। बलिया के सिकंदरपुर जमुई गांव के रहने वाले अजय मिश्र का बचपन से ही खाकी से नाता रहा है। उनके पिता कुबेरनाथ मिश्र पुलिस सेवा में रह चुके हैं। बेटा जब आईपीएस बना, उसी साल वह हेडकॉन्सटेबल के पद से रिटायर हुए।

अजय कुमार के बारे में बताते हुए पिता कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही पुलिस का परिवेश मिला। इसलिए अजय ने सिविल सेवा पास करने के बाद आईपीएस चुना। अजय की प्राथमिक शिक्षा गोंडा में हुई, जब पिता का तबादला लखनऊ हुआ तो अजय ने कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई लखनऊ में की। इसके बाद 1989 में वह वाराणसी आ गए।

उन्होंने यहां से 11वीं और इंटरमीडिएट करने के बाद काशी विद्यापीठ से ग्रेजुएशन किया। पैसे की किल्लत हुई तो बच्चों को ट्यूशन पढाया। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग के जरिए पहली नौकरी दिल्ली सचिवालय में ली। लेकिन अजय के मन में हमेशा से पुलिस सेवा में जाने की इच्छा थी, लिहाजा उन्होंने तैयारी की और परीक्षा पास की।वह सुल्तानपुर में नियुक्त रहे। उस समय मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के दो लोगों को गनर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। अजय पुलिस सेवा में सख्त अंदाज के लिए जाने जाते हैं, वह सिफारिशों को नजरअंदाज कर सीधे पीड़ितों की बात सुनते हैं। उनके पिता कुबेरनाथ का कहना है कि मैं चाहूंगा कि देश और समाज सुरक्षा के लिए वह सदैव कानून व्यवस्था को कायम रखने में सफल रहें।

 

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