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पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी की पौत्री ने बढ़ाया बलिया का मान, यूपीएससी में किया टॉप

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बलिया।  पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रपौत्री डॉ. अपाला मिश्रा ने UPSC में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उनके पिता आर्मी से रिटायर्ड कर्नल हैं और मां प्रोफेसर अल्पना मिश्र हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं। भाई भी आर्मी में मेजर के पद पर है। डॉ. अपाला ने आर्मी कॉलेज से डेंटिस्ट्री की पढ़ाई की है। वे एक कुशल डेंटल सर्जन हैं। 10वीं तक उनकी शिक्षा देहरादून से हुई तथा 12 वीं उन्होंने दिल्ली से किया है। बता दें डॉ. अपाला बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि रही हैं।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की नतिनी हैं अपाला- बता दें कि डॉ. अपाला मिश्रा, देश के वरिष्ठतम साहित्यकार स्व. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रपौत्री हैं।इन्होंने कड़ी मेहनत कर इस सफलता को हासिल किया। वे अब देश की आवाज बन कर देश हित में काम करना चाहती हैं। खबरों की मानेंं तो अपाला ने 2018 से घर पर रह कर तैयारी की और प्रतिदिन 7 से 8 घंटे पढ़ाई का लक्ष्य रखा। आज रिज़ल्ट आते ही बलिया और उनके गाँव ओझवलिया में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी।अपने परिणाम के बारे में अपाला कहती हैं कि  इस परीक्षा की तैयारी के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। उनका रूटीन प्रतिदिन निश्चित समय पर उठना, थोड़ा शारीरिक व्यायाम और हेल्दी खाने के साथ साथ 7 से 8 घंटे पढ़ने का लक्ष्य रहता था। स्वयं एक डॉ होने के कारण वे हेल्दी दिनचर्या के महत्व को समझती हैं। यह सफलता उन्हें अधिक बड़े स्तर पर देश और समाज के लिए काम करने का सुअवसर देती है।

अपाला मिश्रा का रिजल्ट आते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्हें और उनके अभिभावकों को बधाई देने का वाला का तांता लगा हुआ है। ज़िले के कई गणमान्य लोगों ने दिल्ली फ़ोन करके शुभकामनाएं दी हैं। अमाला ने UPSC में ऑल इंडिया में 9वीं रैंक हासिल कर बलिया जिले के साथ ही प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। अपाला का कहना है कि आत्मविश्वास और परिश्रम से हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है। और चाहे राह कितनी भी कठिन क्यों न हो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है।

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बलियाः नीलम की मौत के बाद न पति आया न परिजन, पुलिस को करवाना पड़ा अंतिम संस्कार

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बलियाः जिला कारागार में आत्महत्या का प्रयास करने वाली नीलम साहनी की मौत के बाद पुलिस ने ही उसका अंतिम संस्कार किया। युवती की मौत के बाद उसके परिजनों ने शव लेने के लिए इनकार कर दिया था।

वहीं प्रेमिका की मौत होने के बाद उसके परिजन उसकी लाश लेने से इंकार कर दिए। परिजनों द्वारा लाश न लिए जाने के चलते अंत में पुलिस द्वारा नियमानुसार मृतक का दाह संस्कार कराया गया।

जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह मुलाकात के लिए पहुंची बांसडीहरोड क्षेत्र के सरया डुमरी गांव निवासी नीलम ने अपने पति सूरज के साथ कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

नीलम की मौत के बाद दो दिनों तक पुलिस उसके मायके और ससुरालवालों की खोजबीन करती रही। लेकिन कोई परिजन सामने नहीं आया। पुलिस ने मृतका के मायके में उसके चाचा और पहली ससुराल में भी बात की, लेकिन मृतका से दोनों परिवारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। तीसरे दिन कोतवाली पुलिस ने स्वयं पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया और शिवरामपुर गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया।

 

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बलिया पुलिस का ट्विटर हैंडल 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ रिकवर !

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बलिया। बलिया पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को हैक हुए 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है.  ट्विटर अकाउंट कब तक रिकवर हो जाएगा इस पर कोई भी उच्च अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है. हालांकि बलिया पुलिस दावा है कि जांच प्रणाली तैयार कर ली गई है और हैक किए गए ट्विटर हैंडल को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा.

बता दें कि हैकर्स ने बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बृहस्पतिवार की भोर में हैक किया गया है. हैकर्स ने अकाउंट हैक करने के बाद डीपी हटा दी है और ऑनलाइन गेम से संबंधित ट्वीट रीट्वीट किए हैं. बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर हैंडल वेरिफाइड है और @balliapolice के नाम से अकाउंट हैं. अकाउंट को 53.1K हजार लोग फॉलो करते हैं.   

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जानिए कौन हैं गाजियाबाद के पहले पुलिस कमिश्नर बने बलिया के अजय कुमार मिश्र?

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बलिया के रहने वाले अजय कुमार मिश्र गाजियाबाद कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर बन चुके हैं। 2003 में आइपीएस बने अजय कुमार मिश्र को नई जिम्मेदारी मिलने पर परिवार में हर्ष का माहौल है। बलिया के सिकंदरपुर जमुई गांव के रहने वाले अजय मिश्र का बचपन से ही खाकी से नाता रहा है। उनके पिता कुबेरनाथ मिश्र पुलिस सेवा में रह चुके हैं। बेटा जब आईपीएस बना, उसी साल वह हेडकॉन्सटेबल के पद से रिटायर हुए।

अजय कुमार के बारे में बताते हुए पिता कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही पुलिस का परिवेश मिला। इसलिए अजय ने सिविल सेवा पास करने के बाद आईपीएस चुना। अजय की प्राथमिक शिक्षा गोंडा में हुई, जब पिता का तबादला लखनऊ हुआ तो अजय ने कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई लखनऊ में की। इसके बाद 1989 में वह वाराणसी आ गए।

उन्होंने यहां से 11वीं और इंटरमीडिएट करने के बाद काशी विद्यापीठ से ग्रेजुएशन किया। पैसे की किल्लत हुई तो बच्चों को ट्यूशन पढाया। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग के जरिए पहली नौकरी दिल्ली सचिवालय में ली। लेकिन अजय के मन में हमेशा से पुलिस सेवा में जाने की इच्छा थी, लिहाजा उन्होंने तैयारी की और परीक्षा पास की।वह सुल्तानपुर में नियुक्त रहे। उस समय मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के दो लोगों को गनर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। अजय पुलिस सेवा में सख्त अंदाज के लिए जाने जाते हैं, वह सिफारिशों को नजरअंदाज कर सीधे पीड़ितों की बात सुनते हैं। उनके पिता कुबेरनाथ का कहना है कि मैं चाहूंगा कि देश और समाज सुरक्षा के लिए वह सदैव कानून व्यवस्था को कायम रखने में सफल रहें।

 

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