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बलियाः ट्रेन से उतर कर अचानक स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंच गए डीआरएम

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बेल्थरारोड। स्पेशल ट्रेन में सवार पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल के डीआरएम रामाश्रय पाण्डेय अचानक ही ट्रेन से बेल्थरारोड रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने उतर गए। डीआरएम के औचक निरीक्षण से पूरे स्टेशन पर हड़कंप मच गया। अधिकारियों और स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई।

स्टेशन के औचक निरीक्षण पर पहुंचे डीआरएम पांडेय ने अधिकारियों के साथ स्टेशन की साफ-सफाई देखी, जिसमें अव्यवस्था पाए जाने पर नाराजगी जताई। इसके साथ ही डीआरएम के स्टेशन आते ही बाहरी परिसर में एक व्यक्ति ने झाडू लगाना शुरु कर दिया। लेकिन स्टेशन की अनियमितताएं डीआरएम से छुपी नहीं रही।

डीआरएम के साथ डीआरयूसीसी के सदस्य देवेन्द्र कुमार गुप्त एडवोकेट भी रहे। उन्होंने बताया कि डीआरएम पाण्डेय ने प्लेटफार्म से बाहर स्टेशन परिसर को चिन्हित कर बाउण्ड्री कर सुरक्षित करने का आदेश जहां दिया, वहीं रेल परिधि में आने वाले डांकबंगला-मालगोदाम के अत्यन्त जर्जर मार्ग का भी निरीक्षण किया। कहा कि यह मार्ग आगामी मार्च तक रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा बनाकर पूर्ण कर दिया जायेगा। इस मार्ग के किनारे बिखरी गंदगी को देखकर उन्होंने जमकर नाराजगी जताई।

स्टेशन के सामने की आवंटित दुकानों को डाकबंगला-मालगोदाम मार्ग पटरी के किनारे हटाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा दुकानों के सामने की चौड़ाई बढ़ाई जाए। यात्रियों के पैदल आने जाने में हो रही कठिनाईयों को देखते हुए वाहनों की पार्किंग स्थल बदलने, अवैध अतिक्रमणों को तीन दिन के अन्दर हटाने का भी आदेश दिया।

वहीं पैसेंजर हाल की छत से पानी टपकने और रिसने की तरफ ध्यान दिलाते हुए उसका निरीक्षण कराया। साथ ही सांसद निधि से स्थापित आरओ प्लांट स्टेशन प्लेट फार्म से गायब हो जाने के तरफ भी गुप्त ने ध्यान आकृष्ट कराया। जीआरपी पुलिस चौकी को यथा स्थान सुरक्षित करने का आदेश दिया।

डीआरएम पाण्डेय ने विभागीय सुधार व समस्या का मामला बताते हुए सुधार के लिए आंदरुनी तौर पर आवश्यक निर्देश दिए जाने की जानकारी दी। कहा कि स्टेशन यात्री सुविधाओं में कोई कमी नही है। अन्य समस्याओं के निवारण व सुधार के लिए आन्दरुनी निर्देश दिये गये हैं। कुछ दिनों में परिवर्तन दिखने लगेगा। कहा कि कुछ दिनों में सारे ट्रेन के आगे से जीरो हट जायेगा और किराया नार्मल रुप से लगने लगेगा।

डीआरएम की स्पेशल ट्रेन बेल्थरारोड स्टेशन पर 10ः12 बजे पहुंची थी तथा डीआरएम के निरीक्षण उपरान्त 11ः30 में सलेमपुर के लिए प्रस्थान कर गयी।
इस मौके पर एडीआरएम ज्ञानेश पाण्डेय, सीनियर डीओएम नरेन्द्र कुमार जोशी, वरिष्ठ मण्डल वाणिज्य प्रबन्धक संजीव शर्मा, वरिष्ठ मण्डल विद्युत इंजीनियर एके सिंह, वरिष्ठ मण्डल इंजीनियर मनोज कुमार सिंह व स्टेशन अधीक्षक दिनेश मौर्य मोजूद रहे।

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बलिया – पावर ट्रांसफार्मर हुआ खराब, ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 8-10 घंटे मिलेगी बिजली

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बलिया के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कई कई घंटो बिजली कटौती की जा रही है। अब इस परेशानी को 25 दिन और झेलना पड़ेगा। बिजली विभाग ने सूचित किया है कि ट्रांसमिशन सबस्टेशन का 63 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर खराब हो गया है।  जिसके काराण रोस्टर के मुताबिक आपूर्ति की जा  रही है। इससे शहरी क्षेत्र में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 8-10 घंटे की बिजली की आपूर्ति की जा रही है। बिजली विभाग के मुताबिक इस क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को बदलने में लगभग 25 दिन का समय लगेगा। यानि कि अब से लगभग 1 महीने शहरवासियों व ग्रामीणों को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।

शहरी क्षेत्र में केवल 4-5 घंटे की कटौती हो रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हाल बेहाल है। यहां 15 से 16 घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रहती है। जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। इस अव्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में खासी नाराजगी है।

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बलिया में सरकारी एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल, जिलेभर के मरीज परेशान

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बलिया की एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल है। मरीज की स्थिति चाहे सामान्य हो या गंभीर, एंबुलेंस न तो समय पर पहुंचती है और न ही समय पर अस्पताल पहुंचाती हैं। हालत गंभीर होने पर मरीजों को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसे में जिलेभर में मरीज परेशान हैं।

बता दें कि जिले में मरीजों की सुविधा के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके लिए 76 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 38 एंबुलेंस 102 नंबर और 38 एंबुलेंस 108 नंबर की है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 11 मिनट तय किया गया है। यानि कि जब मरीज फोन करे तो 11 मिनट में ही एंबुलेंस पहुंचना चाहिए। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। 11 मिनट की बजाए एंबुलेंस आधे से एक घंटे से देर से पहुंच रही है। चालक दूर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार समय से न पहुंचने के कारण एंबुलेंस में ही प्रसव हो जाते हैं। कई एंबुलेंस तो मरम्मत व रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो गई हैं। जिला अस्पताल में कुछ एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। धूप, बारिश में वे खुले में सड़ रही हैं। सीएमओ आवास पर कई एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं। उनके अधिकांश पार्ट्स गायब हैं या खराब हो चुके हैं।

एम्बुलेंस प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि जिला अस्पताल से करीब 12 से 14 मरीज वाराणसी के लिए रेफर होते हैं। वहां 108 एंबुलेंस जाकर 12 घंटे तक फंस जाती है। मरीजों के लिए पास के हनुमानगंज में पांच एंबुलेंस रहती है जिन्हें तत्काल भेज दिया जाता है। वहीं सीएमओ डॉक्टर जयंत कुमार का कहना है कि कई बार हमने देरी से पहुंचने की बात को बैठकों में कहा है। रिस्पांस टाइम का पालन हो, इसके लिए सेवा प्रदाता को पत्र भेजा गया है। हर हाल में समय का पालन होना चाहिए।

 

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बलियाः जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट का कारनामा, मरीज को खड़ा कर ही लगा दिया इंजेक्शन

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बलिया जिला अस्पताल की बदतर व्यवस्थाओं के किस्से आपने सुने होंगे। अब अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। जहां फार्मासिस्ट अशोक सिंह ने मरीज को लेटाकर इंजेक्शन लगाने के बजाय खड़ा कराकर ही इंजेक्शन लगा दिया। फार्मासिस्ट की इस लापरवाही से बुजुर्ग मरीज दर्द से कराहता रहा।

बुजुर्ग को खड़े कर इंजेक्शन लगाने की तस्वीर वायरल हुई है। जिसके बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं। जब फार्मासिस्ट से पूछा कि आपने इस तरीके से सुई क्यों लगाई, जिस पर अपनी गलती मानने के बजाए वह पत्रकारों को धमकाया। बता दें कि जिला अस्पताल में अक्सर स्टाफ मरीजों की सही से देखभाल नहीं करते और आए दिन इलाज में लापरवाही करते हैं।

इसी बीच रविवार दोपहर चार बजे फार्मासिस्ट अशोक सिंह वार्ड में गए और मरीज को खड़े-खड़े ही इंजेक्शन लगा दिया। वहां मौजूद पत्रकार ने इस लापरवाही को अपने कैमरे में कैद कर लिया। बस फिर क्या, फार्मासिस्ट अशोक सिंह पत्रकारों पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि मेरी मर्जी में कैसे भी इंजेक्शन लगाऊं, आप पत्रकार लोग वीडियो कैसे बनाएं, हम आपकी जिला अस्पताल में इंट्री बंद करवा देंगे। उधर इस संबंध में जब सीएमएस डॉक्टर दिवाकर सिंह से बात की गई तो उन्होंने छुट्टी का हवाला देकर प्रभारी सीएमएस डॉक्टर वीके सिंह के पाले में गेंद डाल दी। वहीं जब पत्रकारों ने डॉक्टर वीके सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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