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बलिया की करिश्मा ने किया करिश्माई प्रदर्शन, बड़ी परीक्षा में हासिल किया पहला स्थान

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बलिया की करिश्मा खानम ने यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता पद के लिए हुए चयन परीक्षा में पहला रैंक हासिल किया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की चयन परीक्षा में बलिया जिले की करिश्मा खानम ने सहायक अभियंता के पद को अपना नाम कर लिया है। करिश्मा खानम जिले के दुबहड़ ब्लॉक घोड़हरा गांव की रहने वाली हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की चयन परीक्षा में करिश्मा पहले पायदान पर काबिज हैं। करिश्मा की करिश्माई प्रदर्शन ने जिले का नाम प्रदेश भर में ऊंचा कर दिया है।

बलिया की करिश्मा ने अपनी इस सफलता को माता सदरून निशा और पिता डा. इकबाल अहमद को समर्पित किया है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन ऑफ इंडिया कहे जाने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी प्रेरणा मानने वाली करिश्मा ने सहायक अभियंता चयन परीक्षा पहला रैंक लाकर जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी इस सफलता पर जिले भर के लोग खुश हैं।

करिश्मा खानम की शुरुआती शिक्षा बलिया में ही हुई। उन्होंने बलिया के नगवा स्थित शहीद मंगल पांडेय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। 2012 में हाईस्कूल की परीक्षा में करिश्मा ने 85.6 फीसदी अंक हासिल किया था। इसके बाद करिश्म ने बलिया के टाउन पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा की डिग्री हासिल की।

करिश्मा पढ़ाई-लिखाई में हमेशा से ही होनहार रही हैं। 2015 में बीटेक में प्रवेश लेने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) की ओर से आयोजित परीक्षा में दूसरा रैंक पर अपनी जगह बनाई थी। 2018 में उन्होंने अपना इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया। कानपुर के हार्कोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) से 83.5 प्रतिशत अंकों के साथ करिश्मा ने बीटेक की डिग्री हासिल की।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता पद के लिए हुए चयन परीक्षा के पहले करिश्मा खानम ने दिल्ली में कोचिंग किया। उसके बाद स्व अध्ययन यानी सेल्फ स्टडी से ही यह सफलता प्राप्त की है। बता दें कि सहायक अभियंता के कुल ग्यारह पदों के लिए यह चयन परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें करिश्मा खानम ने पहले स्थान पर ही अपना नाम दर्ज करवा लिया है।

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बलिया- जिस चोरी बुलेट को खोज ना सके उसी से तिरंगा जुलूस में निकले थानाध्यक्ष, जांच के आदेश

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बलिया में एक बेहद ही चौकाने वाला मामला सामने आया है। जहाँ एक चोर नहीं बल्कि नरहीं थानाध्यक्ष को चोरी की बुलेट पर घुमते देखा गया। मीडिया में वीडियो आने के बाद से हड़कंप मचा है। बताया जा रहा है कि ये वही बुलेट है जो 18 महीने पहले चोरी हो गई थी जिसे खोजने में पुलिस को सफलता भी नहीं मिली। पुलिस ने बुलेट चोरी की फ़ाइल भी बंद कर दी थी। अब इन तस्वीरों के सामने आने से कई सवाल उठ रहे हैं।

बता दें नगरा में पालचंद्रहा के ओमप्रकाश यादव की बुलेट यूपी 60 एएफ 7103 21 जनवरी 2021 को चोरी हो गई थी। काफी कोशिश के बाद नगरा पुलिस ने 27 जनवरी 2021 को मुकदमा पंजीकृत किया। जांच कर कुछ दिनों बाद फाइल बंद दी। पीड़ित ने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाकर भी उम्मीद छोड़ दी। तभी नरहीं क्षेत्र में 14 अगस्त को पुलिस ने तिरंगा जुलूस निकाला था। चोरी वाली बुलेट पर नरही थानाध्यक्ष मदन पटेल सवार थे। यात्रा की फोटो और वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुई तो बुलेट मालिक ने उसकी पहचान कर ली।

पुलिस को जब मामले की जानकारी लगी तो आनन फानन में बुलेट को थाने में मंगा लिया। हालांकि उक्त वाहन का नंबर गायब था। वाहन की पहचान होने के बाद जब बुलेट मालिक ओमप्रकाश यादव थाने में जाकर संबंधित से संपर्क किए तो उन्हें बताया गया कि उक्त वाहन के कागजात नहीं हैं। अब यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में भी आ
गया है। इससे संबंधित की परेशानी और भी बढ़ गई है।

वहीं अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी का कहना है कि बुलेट से थानाध्यक्ष के घूमने और इंटरनेट मीडिया में प्रसारित इस प्रकरण की गहनता से जांच होगी। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

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जिस जगह हुई थी बलिया के आजादी की घोषणा वहां लगा गंदगी का अंबार, अधिकारी बेख़बर

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बलिया। पूरे देश ने बड़ी धूमधाम से आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस है। पूरा प्रशासनिक अमला बड़े आयोजन की तैयारी में जुटा है। इस दिन सूबे के मुख्यमंत्री भी बलिदान दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। लेकिन साल 1942 में जिस स्थान पर बलिया की आजादी की घोषणा हुई, उस जगह का हाल विचलित कर देने वाला है।

जिले के क्रांति मैदान बापू भवन के बाहर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नगर पालिका का इस ओर ध्यान नहीं है। एक तरफ आजादी का जश्न मनाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ जिस जगह आजादी की घोषणा हुई, वहां गंदगी पसरी है। आजादी के अमृत महोत्सव में बलिया से सामने आई यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।

Pic Credit- Roshan

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1947 से 5 साल पहले, आज ही के दिन बांसडीह तहसील को मिली थी आज़ादी!

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बलिया डेस्क : आज 17 अगस्त है, बलियावासियों के लिए गौरव का दिन। आज ही के दिन बलिया की एक तहसील आज़ादी से पांच साल पहले अंग्रेज़ों की ग़ुलामी से आज़ाद हो गई थी। हम बात बांसडीह तहसील की कर रहे हैं, जिसे 17 अगस्त 1942 को गजाधर शर्मा के नेतृत्व में तकरीबन 20 हज़ार किसानों-नौजवानों की टीम ने अंग्रेज़ी हुकूमत से आज़ाद करा लिया था।

वीर सेनानियों की इस टीम में सकरपुरा के वृंदा सिंह, चांदपुर के रामसेवक सिंह और सहतवार के श्रीपति कुंअर भी शामिल थे। बताया जाता है कि सेनानियों की टीम ने तहसील पर कब्ज़े की तैयारी इतनी खामोशी के साथ की थी कि इसकी भनक अंग्रेज़ी हुकूसत को भी नहीं लग सकी थी। 17 अगस्त की सुबह होते ही तकरीबन 8 बजे सेनानियों की एक टोली ने तहसील और थाने को चारों तरफ़ से घेर लिया। सेनानियों की तादाद और उनके देश प्रेम के जज़्बे को देखकर तहसीलदार और थानाध्यक्ष ने सरेंडर कर दिया।

जिसके बाद सेनानियों का तहसील और थाने पर कब्ज़ा हो गया। बलिया ख़बर से बातचीत में कॉमरेड प्रणेश सिंह  एक किताब का हवाला देते हुए बताते हैं कि तहसील और थाने पर कब्ज़े के बाद सेनानियों ने वहां के ख़ज़ाने को अपने कब्ज़े में ले लिया और उसी खज़ाने से कर्मचारियों को एक महीने का वेतन देकर उन्हें 24 घंटे के भीतर बलिया छोड़ने को कहा।

तहसील पर कब्ज़े के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष गजाधर शर्मा को तहसीलदार बना दिया गया और इसी के साथ सेनानियों ने स्वदेशी सरकार की स्थापना भी कर दी। प्रणेश बताते हैं कि तहसीलदार बनने के बाद गजाधर शर्मा ने दो बड़े केस पर पंचायती राज के तहत फैसला सुनाया था। जिसमें कोरल क्षेत्र का एक खानदानी मुकदमा था और एक नरतिकी से लूट का केस था।

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