खो’खला दावा- 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढा-मु’क्त करना नामुमकिन, ऐसा है बलिया का हाल

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बलिया डेस्क: धरातल पर सड़कें गड्ढामुक्त करने का लाख दावा कर लें मुख्यमंत्री, नामुमकिन है। सरकार बनने के बाद पहले 15 जून 2017 तक गड्ढामुक्त करने की कवायद और अब 15 नवंबर तक सारी सड़कें गड्ढामुक्त करने का दावा एकदम कोरा और खोखला ही साबित होने वाला है। क्योंकि यह सिर्फ कागजों में मुमकिन है। हकीक़त से कोसो दूर। किसी भी सूरत में सड़कें 15 नवंबर तक गड्ढामुक्त नहीं हो सकता।

आलम यह है कि चुनिंदा सड़कों को छोड़ दिया जाय तो मुख्य मार्ग से लेकर संपर्क मार्ग, यहां तक कि नेशनल हाईवे में भी ऐसे-ऐसे गड्ढे है जो न सिर्फ बड़ी घटना का सबब बन सकते हैं, बल्कि अधिकारियों को भी सवालों के कटघरे में खड़ा करने के काफी हैं। हल्दी विकास खंड के बेलहरी अंतर्गत पिंडारी गांव में जाने वाले मुख्य मार्ग को 2001 में तत्कालीन विधायक भरत सिंह ने बनवाया था।

आज इसकी हालत बेहद खराब है। वहीँ रसड़ा क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले अधिकांश संपर्क मार्ग जर्जर है। बलिया-लखनऊ मार्ग पर भी माधोपुर से चिंतामणि पुर तक जाने वाली सड़क की हालत बुरी है। अमर पट्टी दक्षिण से जाम को जाने वाली सड़क एवं ग्रामसभा माधोपुर के बन टोला हरिजन बस्ती में स्थित प्राइमरी स्कूल तक जाने वाली सड़क बदहाल है।

इसके अलावा मनियर बांसडीह व मनियर सिकंदरपुर के मुख्य मार्ग पर जगह-जगह गड्ढा हो गया है। बेल्थरारोड क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले लगभग सभी मार्ग जर्जर है। सीयर-पशुहारी मार्ग, कुंडैल-बहोरवा मार्ग, डीएसपी हेड मार्ग, फरसाटार-तेलमा- शाहपुर मार्ग समेत अनेक मार्ग जर्जरावस्था में दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। सहतवार क्षेत्र के बिसौली मार्ग से बरियारपुर बेउर जाले वाली संपर्क मार्ग लगभग चार साल पहले बनी थी।

आज बेहद खराब हालत में है। बैरिया क्षेत्र अंतर्गत सुरेमनपुर-नारायणगढ़, भिखाछपरा-रानीगंज बाजार आदि दर्जनों सड़के जर्जर व गड्ढायुक्त हो गयी है। बड़ी बात यह है कि प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उपेंद्र तिवारी के क्षेत्र की सड़कों की हालत भी कमोबेश ऐसी ही है। फेफना विधानसभा में कपिलेश्वरी भवानी मंदिर से गंगहरा तक लगभग डेढ़ किमी का रास्ता इतना जर्जर है कि पैदल चलना भी ख’तरे से खाली नहीं है।

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