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ग्राउंड रिपोर्ट : बलिया में हुई किसान-मज़दूर महापंचायत का रूख क्या है?

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          किसान आंदोलन के समर्थन में सिकंदरपुर तहसील के चेतन किशोर में हुई किसान मज़दूर महापंचायत की ग्राउंड रिपोर्ट।

सिकंदरपुर । पूर्वांचल के बलिया में राकेश टिकैत ने किसान-मजदूर महापंचायत की। दिल्ली के बॉर्डरों पर जमें किसानों की खबरों के बाद पूर्वांचल के दोआब में संयुक्त किसान  मोर्चा का आंदोलन से जुड़ा हुआ यह पहला बड़ा कार्यक्रम था। बलिया के तहसील सिकंदरपुर में आयोजित इस महापंचायत में हज़ारों की भीड़ जुटी।

बैठने के लिए लगाई गईं कुर्सियों और बाकी की खाली जगहों पर भी लोग मौजूद रहे। लोग राकेश टिकैत और बाकी नेताओं को सुनने आए थे। महापंचायत में आए लोगों को मालूम था कि यहां दिल्ली के किसान आंदोलन से जुड़े लोग आ रहे हैं। हमने वहां मौजूद लोगों से बात की। कृषि कानूनों को लेकर ठीक-ठाक समझ रखे वहां आए लोग इस बात से भी आश्वस्त थे कि जो बातें कही जाएंगी उसे सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।

(किसान महापंचायत में 12 बजे तक पांडाल भर चुका था। )

80 साल की लीलावती भारती महिला दीर्घा में 60-70 महिलाओं के साथ बैठी थीं। पांचवी तक पढ़ी लीलावती चार दशकों से कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) से जुड़ी हुई हैं। लीलावती खेतहीन हैं। दो बेटों और तीन बेटियों के परिवार वाली लीलावती के परिवार का हरेक व्यक्ति मजदूरी करता है। तीनों कानूनों पर काफी विस्तृत बात करने के बाद लीलावती ने कहा,

‘इस कानून से किसान तो प्रभावित होंगे ही, भारी संख्या में मजदूर प्रभावित होंगे। लॉकडाउन में यह कानून लाकर किसानों की जमीन और जिंदगी के साथ धोखा किया जा रहा है। आज हम अपने गांव की महिलाओं के साथ यहां आए हैं, पूरी बात सुनेंगे और फिर आगे की लड़ाई लडे़ंगे।’

लीलावती के भीतर कमाल का आत्मविश्वास है, वो पांचवी तक पढ़े होने का जिक्र करके खुश हो जाती हैं।

पंजाब के पटियाला के मूल निवासी और 1979 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े सरदार केसर सिंह किसान-मजदूर महापंचायत में मौजूद थे। गंभीर हाव-भाव वाले सरदार केसर सिंह बलिया के बिल्थरा से मोटर पार्ट्स की दुकान संचालित करते हैं। अपने गृह जनपद में सरदार केसर सिंह छ: एकड़ की खेती भी करते हैं। किसान-मजदूर महापंचायत के सकारात्मक प्रभाव को लेकर आश्वस्त केसर सिंह कहते हैं,

‘पूर्वांचल में मजदूर-किसानों की समस्या पर अब देश के बाकी हिस्सों का भी ध्यान जाएगा। यहां MSP जितने जरूरी मुद्दे और भी हैं। जैसे, खाद-बीज की आपूर्ति, बिचौलियों का पूर्ण हस्तक्षेप वगैरह। पूर्वांचल की समस्याओं पर इस महापंचायत में आ रहे किसान नेताओं की आगे की रणनीति भी इस किसान आंदोलन को प्रभावित करेगी। इस सरकार की नीतियों से किसान, मजदूर और व्यापारी सभी परेशान है।‘अजीत राय; अपने आधे से अधिक खेतों में मछलीपालन करने लगे हैं।

राष्ट्रीय किसान मोर्चा से पूर्वांचल के पदाधिकारी और आयोजनकर्ताओं में शामिल अजीत राय इस महापंचायत के प्रभाव को लेकर आश्वस्त दिखे। चार एकड़ की खेती कर रहे अजीत राय पूर्वांचल में बलिया को महापंचायत के लिए चुनने के पीछे का कारण बताते हुए कहते हैं, ‘चूंकि यह बिहार से सटा हुआ जिला है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे आखिरी छोर पर होने के कारण यहां से बिहार के सटे हुए जिलों में भी आंदोलन की सुगबुगाहट जाएगी। इसके अलावा भी  बलिया ‘बागी’ धरती है, यहां से शुरुआत हुई है तो लड़ाई लंबी चलेगी।’

11 बजे की तय समय तक लोगों का आना शुरू हो ही रहा था कि करीब 25-30 युवाओं का एक जत्था आया। उर्जा से भरे इन युवाओं ने राकेश टिकैत और जय जवान जय किसान का नारा लगाया और मंच के पास कुर्सियां ले लीं। इनमें दुरौंधा गांव के अजीत यादव भी थे। 22 साल अजीत ने बीए तक की पढ़ाई पूरी कर ली है और प्रतियोगी परीक्षाएं दे रहे हैं। बलिया में संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यक्रम की जानकारी अजीत को सोशल मीडिया से मिली। अजीत ने बताया,

‘हम लोगों ने गांव में तय किया कि चला जाएगा और फिर किसान महापंचायत थी तो ट्रैक्टर-ट्राली से आने को सोचा। सब लोगों ने चंदा लगाकर तेल डलाया और आ गए’ आगे क्या करने है के सवाल पर अजीत ने कहा, ‘आज यहां जो सुना वो जाकर गांव में लोगों को बताएंगे’ अजीत के पिता दो एकड़ की खेती करते हैं। पिता के  साथ धान, गन्ना और गेंहू उपजा रहे अजीत नौकरी को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हैं। SSC और उत्तर प्रदेश पुलिस की भर्ती परीक्षा के परिणामों का इंतज़ार कर रहे अजीत वर्तमान सरकार से नाराज़ हैं।

1985 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े अहसन सहवर्ती सुबह 9 बजे से यहां मौजूद थे। चार बीघे की खेती वाले अहसन बिल्थरा के अकोप ग्रामसभा के ईकाई अध्यक्ष हैं। 1985 से संगठन के लिए काम कर रहे अहसन बताते हैं कि इस जनसभा की जिम्मेदारी भी थी इसलिए जल्दी आए।  धान और गेंहू की खेती करने वाले अहसन अपनी फसल MSP पर नहीं बेंच पाते हैं। उन्होंने बताया,

‘हम लोग के लिए फसल का उचित दाम पाना संभव नहीं है। क्रय केंद्र पर ले जाने से पहले ही बिचौलिये आ जाते हैं और कुछ मजबूरी किसान की भी होती है। हमारी मांग यही है कि एक रेट हो जाए। उसी पर बनिया भी खरीददारी करे और सरकार भी। हमारी बस यही मांग है कि छोटा-बड़ा किसान सब एक समान रेट पर बिक्री कर सकें।’

किसान महापंचायत में सिकंदरपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर से आईं अनीता देवी स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। अनीता खेतहीन हैं लेकिन गांव की कुछ महिलाओं के साथ मिलकर स्वरोजगार में लगी थीं। अनीता ने हमसे बातचीत में बताया कि उनके समूह पर कर्ज है और लॉकडाउन की वजह से महिलाएं कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। अब उनके घरों पर बैंक नोटिस दे रहे हैं। सरिता ने कहा, ‘जब बड़े-बड़े पूंजिपतियों का कर्ज माफ हो जा रहा है तो हम समूह की महिलोओं का कुछ हज़ार का कर्ज मोदी जी क्यों नहीं माफ कर सकते हैं।’अनीता अपने पति के साथ आईं थीं, कर्ज न चुकने से चिंतित थीं

इसी सबके बीच छोटे-बड़े जत्थों में महापंचायत में लोग आते रहे। और करीब 1:30 पर राकेश टिकैत की गाड़ी आई। बनारस से सड़क मार्ग से गाज़ीपुर में प्रेसवार्ता करके सिकंदरपुर पहुंचे राकेश टिकैत के साथ 6-7 गाड़ियां थीं। उनके पहुंचते ही किसी समान्य राजनैतिक रैली में होने वाली भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई और मंच तक आते-आते सेल्फियों का दौर शुरू हो गया। पत्रकार दीर्घा में नौजवानों सहित तमाम लोग सेल्फियां लेते रहे। और फिर मंच से घोषणा की गई,

‘आप सब से अनुरोध है कि ऐसी स्थिति न लाएं, हम पुलिस को नहीं बुलाएंगे लेकिन आपलोगों को खुद पीछे जाना होगा’। मंच से कुछ लोगों ने पुलिस का हस्तक्षेप चाहा भी लेकिन संचालक दो टूक में मना कर दिया। भीड़ थोड़ी देर में सेल्फियों से थकी और राकेश टिकैत मंच पर ही एकदम पीछे चले गए। टिकैत आयोजनकर्ताओं से अपनी बारी आने तक बात करते रहे। अपने साथ आए लोगों को लगातार कुछ लिख कर देते रहे।राकेश टिकैत की इस एंट्री के बाद लगभग 15 मिनट तक माहौल में अफरातफरी रही

लोग शांत होते तब तक मंच पर चहलकदमी बढ़ चुकी थी। इसी बीच किसान नेता युद्धवीर सिंह अचानक से मंच पर आए और शांत रहने की एक भावुकता से भरी अपील की। इसके बाद युद्धवीर सिंह ने अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कांट्रेक्ट फार्मिंग को लेकर पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा,

इन प्राइवेट कंपनियों ने पंजाब के आलू किसानों के साथ कांट्रेक्ट किया और लिखा कि कंपनी आलू के साइज़ ठीक न होने पर कांट्रेक्ट रद्द कर सकती हैं। अब बताइये, घर के दो बच्चों के हाथ पैर एक जैसे नहीं होते, गेंहू कैसे एक जैसे पैदा कर देगा? फसल के दाने मौसम पर निर्भर करते हैं। ये कहते हैं कि कांट्रेक्टर किसान की जमीन पर कब्जा नहीं ली पाएगा, ठीक बात है। लेकिन कांट्रेक्टर किसान की जिस जमीन पर फसल उगवाएगा उसपर लोन ले सकता है। अब बताइए जब कांट्रेक्टर लोन लेगा तो वो चढ़ेगा कहां? वो किसान की जमीन के खाते में जाएगा। कांट्रेक्टर तो भाग जाएगा, लेकिन लेखपाल और पटवारी तो कहेगा कि ये लोन भरो, सरकार को क्या मतलब कांट्रेक्टर कौन था।’

(युद्धवीर सिंह के भाषण को वहां मौजूद लोगों ने काफी सराहा। उन्होंने बहुत प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी)

युद्धवीर सिंह ने अपने 15 मिनट के वक्तव्य में  किसान कानूनों और किसान आंदोलन से जुड़ी सारी बातें बहुत आसान भाषा में समझायीं। लोगों ने बहुत जिम्मेदारी से सुना। पूरी बातचीत में किसान कानूनों और खेतहीन मजदूर-किसानों का जिक्र आता रहा। संघ और भाजपा पर सीधा टिप्पणी करते हुए युद्धवीर सिंह ने 26 जनवरी की लालकिला की घटना पर भी बात रखी।

इसके बाद दो तीन वक्ताओं ने अपनी बात रखी और राकेश टिकैत मंच पर आए। पत्रकार दीर्घा में फिर अफरातफरी मची लेकिन कुछ तस्वीरों के साथ मामला शांत हो गया। राकेश टिकैत ने ‘भिर्गु बाबा की जय’ का उद्घोष किया और अपने पहले ही वाक्य में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, शहीद मंगल पांडेय का जिक्र कर दिया। बलिया को एक विचारधारा बताते हुए राकेश टिकैत ने लगभग 16 मिनट का भाषण दिया। किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए राकेश टिकैत ने कहा, ‘अगर पॉलिटकल पार्टियों को भी अपनी मीटिंग करनी होगी तो किसान महापंचायत का नाम देना होगा। वो ऐसा करेंगे तो ही किसान उनकी पंचायत में जाएंगे। यह हमारी ताकत है और इसे बनाए रखना है।’ उन्होंने कहा, ‘आपके इस आंदोलन के चलते दुनिया भर में भारत के किसानों की  चर्चा है।

Pictures credit- Nirbhay Yadav

सरकार MSP पर कानून नहीं बना सकी लेकिन दुनिया में बात पहुंच रही है।’ जाते-जाते राकेश टिकैत ने क्षेत्रवाद से बचने की सलाह दी और पूर्वांचल को दिल्ली की तरफ चलने के लिए तैयार रहने को कहा, ये आंदोलन आपको चलाना है। 2021 आंदोलन का साल है। आप नहीं जगेंगे तो आपको भूमहीन होना होगा। जैसे आदिवासी जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं, हमारी स्थिति भी ऐसी हो जाएगी। बलिया आंदोलन की धरती है, यहां टिकैत साहब भी आ चुके हैं। यहां से बड़ी क्रांतियां हुई हैं। इसलिए जब जरूरत पड़ेगी अपने ट्रैक्टर-ट्राली के साथ में आपको निकलना पड़ेगा। जिस दिन दिल्ली से यहां संदेश आये और आपके बीच किसान यूनियनों के लोग दिल्ली चलने का आह्वान करने आएं, आप जो भी साधन मिले, उससे पहुंचें।’

अंतत: राकेश टिकैत का काफीला गुज़रा। लोग अपने घरों को लौटने लगे। यहां मौजूद लोग चुनावी दौर में भी रैलियों में आते रहे हैं लेकिन इस बार कुछ अलग रहा। जैसे, राजनैतिक रैलियों में राजनीतिक दलों के द्वारा भीतरखाने से लोगों को साधन और धन मुहैया कराया जाता है। मौजूद लोगों ने चंदा जुटाकर गाड़ीयां बुक की आयोजन स्थल के बाहर कार्यक्रम खत्म होने के बाद चाय या फल की दुकानों पर अफरातफरी नहीं थी। लोग घर जाते रहे, दुकानें आंख तकती रहीं। कोई सफेद कुर्ते में अपने साथ आए लोगों को नाश्ता पानी की चिंता में नहीं दिखा। यह सकारात्मक सी एक आखिरी बात थी।  इसके इतर इस महापंचायत का जिक्र मेन स्ट्रीम मीडिया में कहीं नहीं था जबकि पूर्वांचल की इस महापंचायत को इतना आसानी से नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता है।

बलिया की ग्राउंड रिपोर्ट ,जिले से जुड़े लोगों के इंटरव्यू  और तमाम ख़बरें , पढने के लिए हमें फेसबुक पेज @balliakhabar पर लाइक करें और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @BalliaKhabar पर क्लिक करें। 

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कोरोना संक्रमण के बीच JNCU के दीक्षान्त समारोह पर छात्रों ने लगाया बड़ा आरोप !

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बलिया। देश के साथ ही उत्तरप्रदेश में भी कोरोना संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। रोजाना ढाई लाख से ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं जिसके चलते कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में बलिया में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) का दीक्षान्त समारोह 24 जनवरी को होने वाला है। जो अब सवालों के घेरे में हैं, आरोप लगाया जा रहा है कि बढ़ते संक्रमण के बीच छात्रों से रुपये वसूलने के लिए जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षान्त समारोह आयोजित किया जा रहा है।

बता दें कि, 24 जनवरी को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षान्त समारोह आयोजित होना है। जो कि कलेक्ट्रेट स्थित गंगा बहुउद्देश्यीय सभागार में होगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वर्णपदक प्राप्तकर्ता के अलावा प्रत्येक पाठ्यक्रम के टॉप 10 विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। विद्यार्थियों को सूचना देने की जिम्मेदारी संबंधित महाविद्यालयों को दी गयी है।

समारोह के लिए निमंत्रित छात्रों को कहा गया है कि वह 19, 20, 21, 22 जनवरी को दोपहर 12.00 से 4.00 बजे के बीच विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आकर 350 रुपये कॉशन मनी जमाकर पगड़ी और उत्तरीय ले सकते हैं। जिसके लिए विद्यार्थियों को एक फोटो, आधार कार्ड और अपने अंतिम वर्ष के अंक पत्र की छायाप्रति साथ लाना होगा। ये विद्यार्थी 22 जनवरी को विश्वविद्यालय में होने वाले पूर्वाभ्यास कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।

संक्रमण का ग्राफ बढ़ने के बीच दीक्षान्त समारोह कराने और छात्रों से जो कॉशन मनी लेने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि संकट के समय समारोह कराकर छात्रों की जान को खतरे में डाला जा रहा है और रुपयों की वसूली की जा रही है।

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सपा में सेंधमारी की कोशिश में बीजेपी, बलिया के दिग्गज नेता को ऑफर किया बड़ा पद!

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बलियाः उत्तरप्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन राजनैतिक गलियारों में गर्माहट बनी हुई है। वजह है आगामी विधानसभा चुनाव। चुनाव आयोग ने जब से विस चुनाव की घोषणा की है, तब से ही अलग अलग राजनैतिक पार्टियों के नेता भूख-प्यास, ठंड सब भूल कर अपनी जीत सुनिश्चित करने को ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। चुनाव को देखते हुए दलबदल की राजनीति भी जोरों पर है। बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस सभी दलों में विधायकों के आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है।

मौजूदा पार्टी से नाराजगी जताते हुए कई नेता विपक्षी पार्टियों का हाथ थाम रहे हैं। इस दल-बदल के खेल में सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी का हुआ। सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने पार्टी को अलविदा कह दिया और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। अब बीजेपी अपने जख़्मों को भरने की कोशिश कर रही है। बीजेपी की यह कोशिश अन्य पार्टियों में सेंधमारी पर आकर खत्म हो रही है। जी हां, विधायक खोने के गम में पार्टी अब सपा में सेंधमारी कर रही है।

बलिया ख़बर सूत्रों के मुताबिक बलिया के एक दिग्गज नेता को बीजेपी ने बड़ा पद आफर किया है, वहीं इस बात की पुष्टि करने के लिए जब हमने संबंधित नेता से बात करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि उनके करीबियों का कहना है की ये एक कोरी अफवाह है। वहीं सूत्र बताते हैं की उक्त नेता ने अभी अपने पत्ते नही खोले हैं, दूसरी तरफ बीजेपी के सूत्रों का कहना है की जिले में जल्द बड़ा बदलाव  देखने को मिलेगा। वैसे अब तो आने वाला समय बताएगा कि बीजेपी अपने मकसद में कामयाब हो पाती है या नहीं।

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बलिया में कागज में ही लग गए पौधे, वृक्षारोपण के नाम पर अफसरों ने डकारे लाखों रुपए

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बलियाः महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत पौधारोपण कार्य में अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला है। पौधे लगाने के नाम पर लाखों की राशि का बंदरबाट किया। नतीजा ये है कि धरातल पर सूखी मिट्टी पड़ी है और अफसरों की जेबे भरी हैं।

बता दें कि 2019 और 2020 में पौधे रोपित करने के नाम पर 9.70 लाख रुपए निकाले गए। लेकिन सोशल ऑडिट टीम ने जब जां की तो पता चला कि पौधारोपण के नाम पर सिर्फ अफसरों की जेबे हरी हुईं, जमीन बंजर मिली। श्रमिकों ने कोई पसीना नहीं बहाया। इस मामले में मुख्य विकास  अधिकारी प्रवीण कुमार वर्मा ने इन सभी मामलों में नोटिस जारी किया है। संबंधित खंड विकास अधिकारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई है।

जिले के अलग अलग ब्लॉक में पौधारोपण के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ। इसमें सोहांव ब्लाक के रामगढ़ गांव में नहर मुख्य मार्ग पर 64,740 रुपये पौधारोपण कार्य में खर्च किए गए। जांच के दौरान यहां कोई पौधा नहीं मिला।ॉ

कुछ ऐसा है बेलहरी ब्लाक में देखने को मिला। जहां एकौन सिवान से बजरहां गांव तक खड़ंजा तक दोनों तरफ 26,750 रुपये का पौधा लगाने के लिए निकाले गए थे। लेकिन पौधे गायब दिखे। बेलहरी के मझौंआ ग्राम पंचायत में एनएच-31 के स्पर पर बाढ़ से बचाव के लिए 23575 रुपये के पौधे लगाए थे, जो धरातल पर दिखते नहीं है।

बता दें कि पौधरोपण के नाम पर सबसे ज्यादा पैसे नगरा में निकाले गए। अलग अलग ब्लॉकों की राशि देखें तो सोहांव 73,740 रुपये, बेलहरी 1,31048, पंदह 10724, नवानगर 26915, सीयर 17600, बैरिया 17175, रसड़ा 65276, नगरा 4,45790, बांसडीह 167623 व रेवती ब्लाक में 14150 रुपये निकाले गए।

इसके अलावा कृपालपुर गांव में कब्रिस्तान के चारों तरफ लगाए गए करीब 64,100 रुपये के पौधे गायब हो चुके हैं। जांच में सिद्ध हो चुका है। केस 3 : सीयर ब्लाक के कुर्हातेतरा गांव में किसान धुरंजीत के खेत में 6,725 रुपये के लगे पौधे गायब हो चुके हैं, यहां दो साल पौधे रोपित करने के दावे किए गए थे। इसी तरह रसड़ा ब्लाक के फिरोजपुर में हनुमान मंदिर के परिसर में पौधे लगाने के नाम पर 8833 रुपये निकाले गए हैं। लेकिन जांच में कहीं कोई पौधे नहीं मिले।

पौधारोपण के नाम पर हुए इस बड़े भ्रष्टाचार को लेकर सोशल ऑडिट सेल प्रभारी अवधेश चौरसिया ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों की जांच दो साल पहले हुई थी। धरातल पर पौधे नहीं मिले हैं। देखने से भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि उन स्थानों पर पहले कभी कार्य भी हुआ था। गड्ढा भी नहीं दिखाई पड़ा। रिपोर्ट मनरेगा श्रम रोजगार विभाग को भेजी गई है।

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