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बलिया के शख्स की 3 महीने पहले सऊदी में हुई थी मौत, इन लोगों की बदौलत अब घर आ रहा शव

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बलिया। सिकंदरपुर के सुभाष चंद्रा चौहान का पार्थिव शरीर लगभग तीन महीने बाद अपने घर लौट रहा है। आने वाले तीन अक्टूबर को सऊदी अरब से सुभाष चंद्रा चौहान का शव लाया जाएगा। सऊदी अरब से हवाई मार्ग से सुभाष चंद्रा चौहान का शव दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचेगा। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के टर्मिनल तीन पर पार्थिव शरीर आएगा। यहां से फिर सुभाष चंद्रा का शव बलिया में उनके गांव बसारिकपुर ले जाया जाएगा।

सुभाष चंद्रा चौहान सऊदी अरब में बतौर मजदूर काम करने गए थे। लेकिन तीन महीने पहले उनकी मौत ह्रदयाघात से हो गई। सुभाष चंद्रा चौहान की मृत्यु के तीन दिनों बाद यह खबर बलिया में रह रहे उनके परिवार तक पहुंची। परिवार के लोग यह खबर सुनकर सुन्न रह गए थे। परिवार वालों को यह समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है? कैसे सुभाष चंद्रा चौहान का पार्थिव शरीर मिल पाए इसे लेकर कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।

इस घटना की खबर रामगढ़ के निवासी और समाजिक कार्यकर्ता अखिलेश चौहान तक पहुंची। अखिलेश चौहान दिल्ली में रहते हैं। अखिलेश चौहान ने इस मामले को अपने हाथ में लिया और बलिया के जिलाधिकारी को इस बाबत जानकारी दी। तय प्रक्रिया के तहत बलिया जिलाधिकारी कार्यालय से सुभाष चंद्रा चौहान की पहचान होने के बाद अखिलेश चौहान केंद्र सरकार की विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी से संपर्क किया।

केंद्र सरकार ने इस मामले को लेकर सऊदी अरब की दूतावास से संपर्क साधा। जिसके बाद सुभाष चंद्रा चौहान से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज सऊदी अरब के राजनीतिक दूतावास रियाद और वाणिज्या दूतावास जेद्दाह को उपलब्ध कराए गए। जिसके बाद सुभाष चंद्रा चौहान के पार्थिव शरीर को सऊदी अरब से भारत से भेजे जाने की अनुमति मिल सकी।

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन महीने का समय लग गया है। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के कठोर नियमों के चलते यह देरी हुई है। हालांकि अब सुभाष चंद्रा चौहान के परिवार को तीन अक्टूबर का इंतजार है। जब उनका पार्थिव शरीर बलिया में उनके घर पहुंचेगा। बता दें कि सऊदी अरब से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तक सुभाष चंद्रा चौहान के शव को लाने का सारा खर्च भारत सरकार उठाएगी। हालांकि दिल्ली से बलिया तक लाने का खर्च परिवार को ही उठाना होगा।

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बलियाः कॉलेज हॉस्‍टल के पास मिला महिला का कंकाल, दुपट्टे से बंधे मिले पैर

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बलिया के पकड़ी थाना अंतर्गत कॉलेज के पास नरकंकाल मिलने का मामला सामने आया है। इससे पूरे इलाके में हडकंप मच गया है। बताया जा रहा है कि नरकंकाल महिला का है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बता दें कि घटनास्थल के पास टूटी चूड़िया और चप्पल भी मिला है। सूत्रों के अनुसार महिला के कंकाल का पैर दुपट्टा से बंधा पाया गया। ऐसे में अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि हत्या के बाद महिला के शव को वहां फेंक दिया गया होगा। वहीं पुलिस ने नरकंकाल को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में होगा।

इस संबंध में एसएचओ पकड़ी विनोद कुमार ने बताया कि फिलहाल कुछ भी कहना सम्भव नहीं है। उक्त कंकाल की जांच कराई जाएगी। उधर सूचना पर सीओ सिकन्दरपुर राजेश तिवारी भी मौके पर पहुंच कर अपने स्तर से जांच में जुट गए ।

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बलिया: लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी का खामियाजा, NHAI के हाथ सौंपी गई परियोजना

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बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज डेवलपमेंट (यूपीडा) को सौंपी गई थी। लेकिन अब परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआइ को दे दी गई है। यूपीडा ने लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया था। जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। जिसके बाद शासन ने यह फैसला लिया है।

खबरों के मुताबिक दो दिन पहले यूपीडा और एनएचएआइ के बीच एक संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट को एनएचएआइ को सौंपने पर सहमति बन गई। एनएचएआइ अब लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएगी। अभी तक इस एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही तैयार हो सका है। जिसमें बलिया जिले के ब्लू प्रिंट में गलती पाई गई थी।

योजना के अनुसार लिंक एक्सप्रेस-वे 24.2 किलोमीटर लंबी होगी। एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई है 120 मीटर प्रस्तावित है। लिंक एक्सप्रेस-वे का चौदह किलोमीटर हिस्सा गाजीपुर में है। तो वहीं 10.2 किलोमीटर हिस्सा बलिया से होकर गुजरेगा। बलिया जिले के कुल तेरह गांवों से यह एक्सप्रेस-वे होकर जाएगा। बीते अगस्त महीने में यूपीडा ने इसके लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार कर शासन को भेजी थी।

यूपीडा के ब्लू प्रिंट में जो रूट दर्शाया गया उसमें अनियमितता पाई गई। दरअसल बलिया से होकर जाने वाले एनएच-31 के ही रूट पर लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट बना दिया गया था। शासन ने इस पर यूपीडा को ब्लू प्रिंट ठीक करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एक्सप्रेस-वे का पूरा कार्य एनएचएआइ को सौंप दिया गया है। लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए शासन की ओर से यूपीडा को पचास करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी थी। अब यूपीडा यह राशि एनएचएआइ को स्थानांतरित करेगी।

लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बलिया जिला पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा। उसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे दिल्ली पहुंचा जा सकेगा। इस तरह बलिया से दिल्ली तक का सफर आसान हो जाएगा। लेकिन ये सारी बातें भविष्य की बैताल हैं। ऐसा होगा तो वैसा हो जाएगा के फार्मेट पर पूरी कहानी टिकी हुई है। दिल्ली अभी बहुत दूर है। जब यूपीडा जैसी संस्था एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही किसी दूसरी सड़क के रूट पर बना दे तो दिल्ली की दूरी और अधिक हो जाती है।

देखना होगा कि बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़कर बारह घंटे दिल्ली पहुंचाने का ख्वाब कब तक रात के अंधेरे से निकलकर जमीन के उजाले में प्रवेश करती है?

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बलिया- बड़े भाई की मार्कशीट लगा फर्जी तरीके से ली सिपाही की नौकरी, ऐसे खुली पोल

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बलिया: सरकारी नौकरी की चाह में युवा अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने से भी नही कतराते। इसी बीच पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया जिसने अपने बड़े भाई के शैक्षिक प्रमाणपत्र लगाकर पुलिस विभाग में फर्जी तरीक़े से नौकरी ले ली और बिना योग्यता के ही सिपाही बन बैठा। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। जिससे पूछताछ की जा रही है।

बता दे कि बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र के संवरा निवासी आरोपी रोहित कुमार अपने सगे भाई राहुल के हाईस्कूल व इंटर के अंकपत्र का लगाकर 2019 में पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद भर्ती हुआ। उसने फर्जीवाड़े से नौकरी पा ली और प्रशिक्षण के बाद उसकी पहली पोस्टिंग बस्ती जिले के हर्रैया थाने में हुई थी।

ऐसे खुली पोल-
आरोपी फर्जी तरीके से सिपाही बन नौकरी करने लगा। वर्दी की हनक दिखाने में कसर नहीं छोड़ता था। लेकिन आरोपी की पोल उस वक़्त खुली जब सिपाही छुट्टी लेकर 31 मार्च 2021 को बलिया के रसड़ा स्थित अपने गांव गया था। वहां विपक्षियों से मारपीट हो गई, जिसमें आरोपित सिपाही ने गोली चला दी थी। बलिया के ही रसड़ा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने सिपाही को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

जांच हुई तो विपक्षियों ने भाई के अंकपत्र पर फर्जी तरीके से आरक्षी की नौकरी हासिल करने की शिकायत एसपी से की। जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो आरोपी की असलियत सामने आ गई। सीओ रुधौली के अनुसार पहचान छिपाते हुए उसने नौकरी हासिल की। प्रकरण में शिकायत के बाद एसपी आशीष श्रीवास्तव ने सीओ धनंजय सिंह कुशवाहा को जांच सौंपी थी। जांच में भाई के अंकपत्र के आधार पर नौकरी की पुष्टि हुई। जिसके बाद आरोपी रोहित कुमार सिंह को पुलिस ने केंद्रीय विद्यालय, फर्टिलाइजर, गोरखपुर से दबोचा। आरोपी रोहित कुमार सिंह के खिलाफ बलिया जनपद के रसड़ा थाने में हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट समेत तीन मुकदमे दर्ज हैं।

एसपी आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि बलिया जिले के रहने वाले आरोपी रोहित कुमार सिंह को कोतवाली शिवाकांत मिश्रा की टीम ने केन्द्रीय विद्यालय फर्टिलाइजर गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

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