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मास्क के नहीं है पैसे पर बलिया के लोग पांच दिन में गटक गए इतने करोड़ की शराब

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बलिया डेस्क :  40 दिन लंबे इंतजार के बाद बीते चार मई सोमवार को जैसे ही शराब की दुकान खुली शराब के शौकीनों के मानो खुशी का ठिकाना नहीं था. एक दो बोतल से काम चलाने के बजाय शौकीन लोग दस-दस बोतल तक शराब की खरीद्दारी करते नजर आए.

ऐसे में आम समय औसतन 90 लाख की शराब बिक्री वाले जनपद में इस दिन एक करोड़ रुपये की दारू बेची गयी, मंगलवार को भी लगभग यही सिलसिला बदस्तूर रहा, लेकिन इसके बाद से शराब की बिक्री पर मानो ग्रहण लग गया और बिक्री दर भी काफी घट गया. आबकारी अधिकारी अनुपम राजन की मानें तो सोमवार से शुक्रवार तक लगभग साढ़े तीन करोड़ की दारू बेची गयी है.

जबकि आम समय एक दिन में औसतन 90 लाख की शराब की बिक्री होती है, इस हिसाब अब आंकड़ा कुछ और होना चाहिए था, लेकिन किन्हीं कारणों से बिक्री काफी रही है. उधर शराब के खिलाफ रहने वाले लोगों की मानें तो शराब के शौकीन कुछ दिन पहले तक मास्क और सेनेटाइजर की काफी मांग कर रहे थे, पूछने पर बताते थे कि पैसा नहीं है, लेकिन आज शराब की दुकान जैसे ही खुली वे कंधाछिलौव्वल करके शराब खरीदते नजर आए.

10 मई तक पहली खेप आने की उम्मीद
शराब दुकान के मैनेजर जगदंबा की मानें तो पहले का स्टॉक खत्म हो गया है, ऐसे में जब तक नई खेप नहीं आ जाती है तब तक दिक्कतें हैं. बताया कि आर्डर लगा दिया गया है. दस मई तक मिलने की उम्मीद है. शराब की दुकान में आलम यह है कि ब्रांडेड दारू जैसे ब्लैक डॉग, इंपैरियल ब्लू, बैगपाइपर, रॉयल स्टैग का स्टॉक खत्म हो जाने के कारण या तो लोग मायूस होकर लौट जा रहे हैं या फिर टेट्रा पैक से काम चलाने को मजबूर है.

गर्मी के कारण ह्विस्की की ज्यादा डिमांड
शराब दुकान के मैनेजर राधेश्याम ने बताया कि चूंकि मार्च महीने तक ठंड चल रहा था, लिहाजा हर दुकानदारों के पास रम का स्टॉक अधिक मात्रा में था. जबकि ह्विस्की न के बराबर रही, ऐसे में बीते सोमवार से दुकान खोलने के बाद 80 प्रतिशत लोग ह्विस्की की खरीद्दारी किए, ऐसे में जो भी स्टॉक था, वह खत्म हो गया है. जो बचा है, रम का है, जिसे लोग लेना पसंद नहीं कर रहे हैं.

शराब छोड़ रूझान ताड़ी की ओर
शराब दुकानदारों की मानें तो अभी सीजन ताड़ी का चल रहा है, ऐसे में बहुतसे शराब के शौकीन ऐसे भी है, जो शराब की जगह ताड़ी से काम चला रहे हैं. भले ही लॉक डाउन में ताड़ी कहीं भी उतारी नहीं जा रही है फिर भी शौकीन अपनी-अपनी जुगाड़ लगाकर ताड़ी जुगाड़ ले रहे हैं और उसी से अपना काम चला रहे हैं.

किस दिन कितनी हुई कमाई
सोमवार- एक करोड़.
मंगलवार- 70 लाख.
बुधवार- 60 लाख
गुरुवार- 65 लाख
शुक्रवार- 62 लाख

वहीँ जिला आबकारी अधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि आमदिनों के अपेक्षा शराब की बिक्री में कमी आई है, जहां रोजाना 90 लाख रुपये बलिया की औसतन बिक्री थी वहीं अब घटकर 50 से 60 लाख रुपये आ गया है. जिन दुकानों के पास स्टॉक खत्म हो गया है, वे आर्डर लगाए हैं. जल्द ही गोदाम से पूर्ति होने की संभावना है.

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सपा में सेंधमारी की कोशिश में बीजेपी, बलिया के दिग्गज नेता को ऑफर किया बड़ा पद!

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बलियाः उत्तरप्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन राजनैतिक गलियारों में गर्माहट बनी हुई है। वजह है आगामी विधानसभा चुनाव। चुनाव आयोग ने जब से विस चुनाव की घोषणा की है, तब से ही अलग अलग राजनैतिक पार्टियों के नेता भूख-प्यास, ठंड सब भूल कर अपनी जीत सुनिश्चित करने को ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। चुनाव को देखते हुए दलबदल की राजनीति भी जोरों पर है। बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस सभी दलों में विधायकों के आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है।

मौजूदा पार्टी से नाराजगी जताते हुए कई नेता विपक्षी पार्टियों का हाथ थाम रहे हैं। इस दल-बदल के खेल में सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी का हुआ। सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने पार्टी को अलविदा कह दिया और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। अब बीजेपी अपने जख़्मों को भरने की कोशिश कर रही है। बीजेपी की यह कोशिश अन्य पार्टियों में सेंधमारी पर आकर खत्म हो रही है। जी हां, विधायक खोने के गम में पार्टी अब सपा में सेंधमारी कर रही है।

बलिया ख़बर सूत्रों के मुताबिक बलिया के एक दिग्गज नेता को बीजेपी ने बड़ा पद आफर किया है, वहीं इस बात की पुष्टि करने के लिए जब हमने संबंधित नेता से बात करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि उनके करीबियों का कहना है की ये एक कोरी अफवाह है। वहीं सूत्र बताते हैं की उक्त नेता ने अभी अपने पत्ते नही खोले हैं, दूसरी तरफ बीजेपी के सूत्रों का कहना है की जिले में जल्द बड़ा बदलाव  देखने को मिलेगा। वैसे अब तो आने वाला समय बताएगा कि बीजेपी अपने मकसद में कामयाब हो पाती है या नहीं।

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बलिया में कागज में ही लग गए पौधे, वृक्षारोपण के नाम पर अफसरों ने डकारे लाखों रुपए

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बलियाः महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत पौधारोपण कार्य में अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला है। पौधे लगाने के नाम पर लाखों की राशि का बंदरबाट किया। नतीजा ये है कि धरातल पर सूखी मिट्टी पड़ी है और अफसरों की जेबे भरी हैं।

बता दें कि 2019 और 2020 में पौधे रोपित करने के नाम पर 9.70 लाख रुपए निकाले गए। लेकिन सोशल ऑडिट टीम ने जब जां की तो पता चला कि पौधारोपण के नाम पर सिर्फ अफसरों की जेबे हरी हुईं, जमीन बंजर मिली। श्रमिकों ने कोई पसीना नहीं बहाया। इस मामले में मुख्य विकास  अधिकारी प्रवीण कुमार वर्मा ने इन सभी मामलों में नोटिस जारी किया है। संबंधित खंड विकास अधिकारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई है।

जिले के अलग अलग ब्लॉक में पौधारोपण के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ। इसमें सोहांव ब्लाक के रामगढ़ गांव में नहर मुख्य मार्ग पर 64,740 रुपये पौधारोपण कार्य में खर्च किए गए। जांच के दौरान यहां कोई पौधा नहीं मिला।ॉ

कुछ ऐसा है बेलहरी ब्लाक में देखने को मिला। जहां एकौन सिवान से बजरहां गांव तक खड़ंजा तक दोनों तरफ 26,750 रुपये का पौधा लगाने के लिए निकाले गए थे। लेकिन पौधे गायब दिखे। बेलहरी के मझौंआ ग्राम पंचायत में एनएच-31 के स्पर पर बाढ़ से बचाव के लिए 23575 रुपये के पौधे लगाए थे, जो धरातल पर दिखते नहीं है।

बता दें कि पौधरोपण के नाम पर सबसे ज्यादा पैसे नगरा में निकाले गए। अलग अलग ब्लॉकों की राशि देखें तो सोहांव 73,740 रुपये, बेलहरी 1,31048, पंदह 10724, नवानगर 26915, सीयर 17600, बैरिया 17175, रसड़ा 65276, नगरा 4,45790, बांसडीह 167623 व रेवती ब्लाक में 14150 रुपये निकाले गए।

इसके अलावा कृपालपुर गांव में कब्रिस्तान के चारों तरफ लगाए गए करीब 64,100 रुपये के पौधे गायब हो चुके हैं। जांच में सिद्ध हो चुका है। केस 3 : सीयर ब्लाक के कुर्हातेतरा गांव में किसान धुरंजीत के खेत में 6,725 रुपये के लगे पौधे गायब हो चुके हैं, यहां दो साल पौधे रोपित करने के दावे किए गए थे। इसी तरह रसड़ा ब्लाक के फिरोजपुर में हनुमान मंदिर के परिसर में पौधे लगाने के नाम पर 8833 रुपये निकाले गए हैं। लेकिन जांच में कहीं कोई पौधे नहीं मिले।

पौधारोपण के नाम पर हुए इस बड़े भ्रष्टाचार को लेकर सोशल ऑडिट सेल प्रभारी अवधेश चौरसिया ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों की जांच दो साल पहले हुई थी। धरातल पर पौधे नहीं मिले हैं। देखने से भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि उन स्थानों पर पहले कभी कार्य भी हुआ था। गड्ढा भी नहीं दिखाई पड़ा। रिपोर्ट मनरेगा श्रम रोजगार विभाग को भेजी गई है।

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डेडलाइन के 2 महीने बीते, अभी भी अधूरा पड़ा है नौरंगा पीपा पुल का निर्माण

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बलिया में अधूरे निर्माण कार्यों की लंबी लिस्ट है। यहां सड़कों की मरम्मत का काम शुरु होते ही रुक जाता है, नए भवनों का निर्माण अधूरा रह जाता है। इसी लिस्ट में अब नौरंगा पीपा पुल का नाम भी शामिल हो गया है।

तय सीमा के 2 महीने बाद भी जिले के गंगा उस पार के गांवों को जोड़ने वाले नौरंगा पीपा पुल का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है। कुछ दिनों में चुनाव होने वाले हैं लिहाजा पोलिंग पार्टियों से लेकर अधिकारियों तक को यहां से आवागमन करना है। लेकिन फिर में पुल के निर्माण में फुर्ती नहीं आई।

नौरंगा गंगा घाट पर पीपा पुल का निर्माण 15 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश थे। लेकिन दिसंबर बीत गया, अब जनवरी को बीतने को है पर जिम्मेदारों की कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। पीपा पुल के अभाव में गंगा पार बैरिया तहसील के नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला की करीब 25 हजार की आबादी के साथ ही नदी इस पार के पांडेयपुर, जगदेवा, दयाछपरा, उदयीछपरा, प्रसाद छपरा, आलम राय का टोला, गंगौली, श्रीनगर आदि गांवों के हजारों की आबादी को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में ग्रामीण, खासतौर पर किसान बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि कटान के कारण नदी इस पार के किसानों का हजारों एकड़ खेत नदी उस पार चला गया है। बाढ़ के कारण खरीफ की फसल तो नष्ट हुई ही, पुल के अभाव में संसाधन नहीं पहुंच पाने से रबी की बुआई भी बाधित हो गई। उधर, नदी उस पार की पंचायत नौरंगा के ग्रामीणों को तहसील से लगायत जिला मुख्यालय आना कठिन हो गया है।

पुल पार करने नाव से आवाजाही करनी पड़ती है। ऐसे में नाविक भी किसानों की मजबूरी का भरपूर फायदा उठाते हैं और मनमाना किराया वसूलते हैं। इस पुल के न बनने से छात्र स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। बैरिया तहसील के नौरि और अन्य प्रभावित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी पुल खोलने के लिए तय दिन यानी ठीक 14 जून को पुल खोलना तो शुरू कर देते हैं, लेकिन निर्माण पूर्ण करने की अवधि 15 नवंबर विभाग हर साल भूल जाता है। नतीजा 7 महीने चलने वाला उक्त पीपा पुल 4 महीने भी नहीं चल पाता है।

गौरतलब है कि चुनाव नजदीक है, ऐसे में नौरंगा पीपा पुल का निर्माण जल्द ही करवाना चाहिए, क्योंकि अगर पुल का निर्माण नहीं हुआ तो आवागमन में भारी परेशानी होगी और इसका सामना पोलिंग पार्टियों और अधिकारियों को करना पड़ेगा। वहीं लोक निर्माण विभाग के जेई देवचंद गुप्ता का कहना है कि पुराने स्थान पर पीपा लगाने का कार्य शुरू हो गया था। ग्रामीणों के विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा। नए चयनित जगह पर पुन: पीपा लाया जा रहा है। 15 दिन के अंदर निर्माण पूरा करा दिया जाएगा।

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