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बलिया

जिला सूचना अधिकारी पर 25,000 का जुर्माना, तीन सालों में नहीं मिला RTI का जवाब!

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जिला सूचना अधिकारी पर 25,000 का जुर्माना, तीन सालों में नहीं मिली RTI की सूचना!

बलिया के सुनील कुमार यादव को तीन साल बीत जाने पर भी आरटीआई में मांगी गई सूचना नहीं मिल सकी है। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना नहीं दिए जाने पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग बलिया के जिला सूचना अधिकारी पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगा चुका है। जिला सूचना अधिकारी पर सूचना का अधिकार – 2005 की धारा – 20(1) के अधीन 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया गया है। उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के आदेश के बावजूद अब तक सुनील कुमार यादव को उनके आरटीआई की सूचनाएं नहीं दी गई हैं।

क्या है पूरा मामला:- पूरा प्रकरण शुरू होता है आज से तीन वर्ष पहले। जब बलिया के नहिलापार गांव के निवासी सुनील कुमार यादव ने एक आरटीआई दाखिल किया। सुनील कुमार यादव ने बलिया के जिला पूर्ति कार्यालय में आरटीआई दाखिल किया था। अपने आरटीआई में सुनील ने मगुआपार ग्राम पंचायत के नहिलापार गांव के कोटेदार हरेंद्र यादव के संबंध में 10 बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी।

सुनील कुमार यादव ने 13 अगस्त, 2018 को जिला पूर्ति कार्यालय में आरटीआई दाखिल किया था। लेकिन जिला सूचना अधिकारी की ओर से आरटीआई का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस पर सुनील ने 22 फरवरी, 2019 को आजमगढ़ के संभागीय खाद्य नियंत्रक को पहली अपील भेजी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होता देख सुनील ने 8 मई, 2019 को दूसरी अपील उत्तर प्रदेश सूचना आयोग को भेजी।

उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने अपील पर सुनवाई करते हुए जिला सूचना अधिकारी को अगले 10 महीने के भीतर आरटीआई में मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। हालांकि इसके बावजूद जिला सूचना अधिकारी ने सूचनाएं नहीं दी। जिला सूचना अधिकारी ने बहाना बनाते हुए “कहा कि कोटेदार हरेंद्र यादव 20 दिसंबर, 2019 को जब सारी सूचनाएं झोले में लेकर अपने घर से सिकंदरपुर जा रहे थे तभी सारे कागजात बाजार में गिर गए।”

उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के सामने भी जिला सूचना अधिकारी ने अपना पक्ष रखते हुए सूचनाओं के कागजात बाजार में गिर जाने की बात कही। लेकिन उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने इस बहानेबाजी को खारिज कर दिया। आयोग ने 16 सितंबर, 2020 को अपने फैसले में जिला सूचना अधिकारी पर 25,000 का जुर्माना लगाया। साथ ही अगले एक हफ्ते के भीतर सारी सूचनाएं सुनील कुमार यादव को सौंपने का आदेश दिया था।

सितंबर, 2020 में एक हफ्ते का समय मिला था बलिया के जिला सूचना अधिकारी को। आयोग के इस आदेश को एक हफ्ते नहीं बल्कि एक साल बीत चुके हैं। सितंबर, 2021 आधा बीत चुका है। लेकिन अभी तक सुनील कुमार यादव द्वारा आरटीआई में मांगी गई एक भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है।

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पानी में डूबा चिलकहर विकासखंंड, चौराहों पर घुटनों- घुटनों तक पानी, लोग परेशान

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बलिया इस वक्त बारिश के कहर से जूझ रहा है। हर जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है। सड़के तालाब बन गई हैं। पैदल चलने को भी जगह नहीं है। लोगों के घरों में पानी भर गया है। इसी बीच जिले के चिलकहर विकासखंड की तस्वीरें सामने आई है। जहां बारिश का कहर और अधिकारियों की लापरवारी एक दम ठीक तरीके से नजर आ सकती है।पूरा चिलकहर विकासखंड पानी में डूब गया है। हर जगह जलजमाव है। लोगों को आने-जाने में परेशान हो रही है। हालात यह है कि नगर में जलनिकासी की कोई दुरुस्त व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते पूरे नगर में पानी भर गया है। सड़के नजर नहीं आ रही है। घुटनों-घुटनों तक पानी में चौराहे डूब चुके हैं।

ऐसे में लोग, खासकर छोटे- बच्चों और महिलाओं को खासी परेशानी आ रही है। ब्लॉक परिसर में लगभग करोड़ों रुपए का काम करवाने के अधिकारी दावे करते हैं लेकिन कुछ देर आई बारिश ने इन सभी दावों की पोल खोल कर रख दी है।

रिपोर्ट- कृष्ण मोहन पांडे

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बलिया

शासन ने दी बलिया में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति, मिलेगा बेहतर इलाज

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बलिया जिले में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज के संचालन की अनुमति दे दी है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने बलिया जिले में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज के संचालन की अनुमति दे दी है। प्रदेश सरकार ने बलिया समेत कुल 16 जनपदों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज शुरू करने की अनुमति दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद बलिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार आएगी। जिले के गम्भीर मरीजों को अब इलाज के लिए किसी दूसरे शहर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। बड़ी बीमारियों का उपचार भी इस मेडिकल कॉलेज में हो सकेगा।

पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने की अनुमति मिल चुकी है। लेकिन इस मेडिकल कॉलेज की नींव बलिया में कहां पड़ेगी यह अब तक सुनिश्चित नहीं हुआ है। मेडिकल कॉलेज के लिए कैसे और कब तक बनकर तैयार होगा इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मेडिकल कॉलेज के संचालन को लेकर फिलहाल कोई रोडमैप तैयार नहीं है। अभी सिर्फ इसे लेकर सरकार की ओर से स्वीकृति दी गई है।

बलिया के लोगों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा से खुशी है। माना जा रहा है कि अब अपने इलाज के लिए लोगों को कहीं भटकना नहीं पड़ेगा। अब तक जिले की जनता गम्भीर बिमारियों के उपचार के लिए वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में जाने को मजबूर थे। जिला अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त ना होने की वजह से लोगों को इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों का मानना है कि इस मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के बाद हर रोज जिला अस्पताल से मरीजों को दूसरे किसी शहर रेफर नहीं किया जाएगा।

बता दें कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर पिछले दो सालों से कवायद हो रही है। लेकिन मेडिकल कॉलेज अब तक जमीन पर नहीं उतर सका है। 2019 में प्रदेश सरकार के निर्देश पर इसे लेकर जमीन भी चिन्हित की गई थी। राजकीय निर्माण निगम की ओर से 326 करोड़ का प्रस्ताव भी बनाया गया। लेकिन फिर यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से सर्वे टीम ने कई जगह जमीन का सर्वे किया। लेकिन हर बार मानक पूरा न होने की वजह से मामला आगे न बढ़ सका। अब देखने वाली बात होगी कि पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज कब तक जमीन पर उतरती है?

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बलिया में अंधी रफ्तार का कहर, मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग को बुलेट ने मारी टक्कर, मौके पर मौत

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बलिया में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला सामने आया है बैरिया-रेवती मार्ग से, जहां गंगा पांडेय के टोला में मॉर्निंग वॉक कर घर आ रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग को बैरिया के तरफ से आ रही बुलेट सवार ने टक्कर मार दी। जिससे बुजुर्ग गंभीर रुप से घायल हो गए। जिन्हें स्थानीय लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा ले गए। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना को अंजाम देने के बाद बाइक सवार भाग गया। जिसके बाद घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बैरिया रेवती मार्ग जाम कर दिया। रेवती एसएचओ ने कार्यवाई का आश्वासन देकर जाम को समाप्त कराया। बताया जा रहा है कि घटना शुक्रवार की है जहां 70 वर्षीय बरमेश्वर पांडेय रोज की तरह शुक्रवार को भी बैरिया रेवती मार्ग पर मॉर्निंग वॉक कर अपने घर की तरफ वापस लौट रहे थे। उसी दौरान वह बैरिया की तरफ से आ रही तेज रफ्तार बुलेट की चपेट में आ गए।

घटना के बाद बुलेट चालक मौके से फरार हो गया। इस दौरान सड़क पर गिरकर बुरी तरह जख्मी बरमेश्वर पांडे को लोग इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा ले गए। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। गंगापांडे के टोला में यह सूचना पहुंचते ही आक्रोशित ग्रामीण सड़क पर उतर कर बैरिया रेवती मार्ग जाम कर दिए। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सूचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष यादवेंद्र पांडे ने ग्रामीणों को समझाया।

ग्रामीण बुलेट चालक पर कार्यवाही तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद की मांग कर रहे थे। इस दौरान विधायक सुरेंद्र सिंह ने भी फोन पर आंदोलित लोगों से बात की। रेवती एसएचओ यादवेंद्र पांण्डेय ने त्वरित कार्यवाई और परिवारजनों की मदद का आश्वासन दिया तब जाकर जाम समाप्त हुआ।

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