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पूर्वांचल में टीकाकरण में पिछड़ गया बलिया, मिला छठा स्थान

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कोविड टीकाकरण में बलिया पिछड़ गया है। पूरे पूर्वांचल के सभी दस जनपदों में टीकाकरण के मामले में बलिया का नाम छठे स्थान पर आया है। इस सूची में सबसे शीर्ष पर वाराणसी का नाम है। बलिया में अब तक आधी आबादी को भी कोविड का टीका नहीं लगाया जा सका है। स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार बलिया में अब तक महज 11,46,739 लोगों को ही कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगाई जा सकी है। यह आंकड़ा पूरे बलिया की आधी आबादी के भी बराबर नहीं है।पूरे बलिया जिले की आबादी लगभग 32 लाख से ज्यादा है। लेकिन अभी तक लगभग साढ़े ग्यारह लाख लोगों को ही कोविड की लगाई गई है। बता दें कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से पूर्वांचल के सभी जिलों में हुए टीकाकरण का आंकड़ा जारी किया। यह आंकड़ा गत सोमवार यानी 13 सितंबर के दोपहर तक हुए टीकाकरण की है। इसमें कुल दस जिलों के आंकड़े शामिल हैं। जिसमें बलिया को छठा स्थान मिला है। इस सूची में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी सबसे ऊपर काबिज है। इसके बाद आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर और मीरजापुर का नाम है। बलिया से भी कम टीकाकरण मऊ, चंदौली, भदोही और सोनभद्र में हुई है।

बलिया में ग्राम पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर लोगों को कोरोना की टीका लगाई जा रही है। इसके बावजूद भी जिले में टीकाकरण की स्थिति खराब है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही जिले की पचास फीसदी से भी कम आबादी को टीका लगाई गई है। जबकि इनमें से कई लोगों को टीका लगाए जाने का फर्जी प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।बीते अगस्त महीने की 27 अगस्त को पूरे देश में एक करोड़ लोगों को कोविड टीका लगाए जाने का दावा किया गया था। इसी दिन अकेले उत्तर प्रदेश में 29 लाख लोगों के टीकाकरण का दावा किया गया था। हालांकि उसी दिन बलिया जिले के हुसैनाबाद गांव से यह खबर आई थी कि गांव के लगभग तीस लोगों को बिना वैक्सीन लगाए ही टीकाकरण का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था। जिले में चिकित्साकर्मियों की कमी होने की वजह से टीकाकरण पर असर पड़ा है। लेकिन प्रशासन और जिले के नेताओं का ध्यान इस ओर नहीं है।

 

 

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बलिया: सफाई कार्य में लापरवाही बरतने वाले तीन सफाईकर्मचारी निलंबित

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बलिया। सफाई कार्य में लापरवाही बरतने वाले तीन सफाईकर्मियों को जिला पंचायतराज अधिकारी यतेंद्र सिंह ने सस्पेंड कर दिया है। इस कार्यवाही के बाद सफाईकर्मियों में हड़कंप मचा है। बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान तीनों कर्मचारी अनुपस्थित मिले थे और संबंधित गांवों में गंदगी फैली थी।

निलंबित सफाई कर्मचारियों में गड़वार ब्लाक की ग्राम पंचायत फेफना के सफाईकर्मी धर्मेन्द्र कुमार राम व गणेश यादव तथा हनुमानगंज ब्लाक क़ी ग्राम पंचायत सागर पाली की सफाई कर्मी श्रीमती मान्ती देवी शामिल है।

जानकारी के मुताबिक जिला पंचायतराज अधिकारी ने सोमवार को गड़वार ब्लाक की ग्राम पंचायत फेफना के सफाई तथा विकास कार्य का निरीक्षण किया था। इस दौरान सफाई कर्मी धर्मेन्द्र कुमार राम व गणेश यादव अनुपस्थित मिले थे। वहीं संबंधित जगह पर काफी ज्यादा गंदगी फैली मिली। पंचायत भवन के अंदर बड़ी-बड़ी घास मिली, जूनियर हाई स्कूल फेफना में भी गंदगी का अंबार मिला।

दोनों कर्मचारियों के द्वारा सफाई कार्य न करते हुए गलत तरीके से वेतन ली जा रही थी, साथ ही उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना की गई। इन्हीं लापरवाहियों को देखते हुए दोनों को निलंबित कर दिया गया है। निलम्बन अवधि में धर्मेन्द्र कुमार राम को जीवन निर्वाह भत्ता देय होगी। धर्मेन्द्र कुमार राम तथा गणेश यादव को विकास खण्ड चिलकहर से सम्बद्ध किया गया है।

इसके साथ ही सिंह ने विकास खंड हनुमानगंज की ग्राम पंचायत सागरपाली का भी निरीक्षण किया। जहां पता चला कि सफाईकर्मी मान्ती देवी कई दिनों से अनुपस्थित हैं और गांव में कोई सफाईकार्य नहीं कराए जा रहे। इस दौरान ग्राम सभा में चारो तरफ गंदगी पसरी मिली। जिसके बाद जिला पंचायत अधिकारी ने बिना किसी सूचना के ग्राम पंचायत से अनुपस्थित रहने, बिना कार्य किये फर्जी तरीके से पेरोल प्रेषित कर वेतन प्राप्त करने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना तथा जॉब चार्ट के अनुसार उपस्थित होकर कार्य न करने के आरोप में अनुशासनिक कार्यवाही करते हुए मान्ती देवी को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया है। निलम्बन अवधि में श्रीमती मान्ती देवी को विकास खण्ड गड़वार से सम्बद्ध किया गया है।

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बलिया- पूर्वांचल के यात्रियों के लिए सुविधा, गर्मियों के लिए चलाईं 2 स्पेशल ट्रेन, देखें रूट और शेड्यूल

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बलिया। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतील रेलवे मुंबई के लिए दो ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रहा है। जिनका ठहराव वाराणसी में भी है। गर्मियों में पूर्वांचल के यात्रियों की होने वाली अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए और मांग के मद्देनजर बलिया-लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष ट्रेन 3 अप्रैल से जबकि गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष ट्रेन 4 अप्रैल से शुरू हो गई है।

ट्रेन संख्या 01026 बलिया-लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल ट्रेन 3 अप्रैल से एक जुलाई तक हर बुधवार, शुक्रवार और रविवार को बलिया से चलेगी। और ट्रेन संख्या 01025 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-बलिया स्पेशल ट्रेन एक अप्रैल से 29 जून तक हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से चलाई जा रही है। जिनका रसड़ा, मऊ, औड़िहार, वाराणसी, भुसावल, नासिक रोड होते हुए कल्याण स्टेशनों पर ठहराव किया गया है।

जबकि ट्रेन संख्या 01028 गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष ट्रेन 4 अप्रैल से 2 जुलाई तक हर सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार और रविवार को गोरखपुर से चलेगी। ट्रेन संख्या 01027 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर विशेष ट्रेन 2 अप्रैल से 30 जून तक हर मंगलवार, बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से चलाई जा रही है। इस ट्रेन के यात्रा मार्ग में देवरिया सदर, भटनी, बेल्थरा रोड, मऊ, औंड़िहार, वाराणसी, ज्ञानपुर रोड, प्रयागराज जं., इटारसी, हरदा, भुसावल, नासिक रोड और कल्याण स्टेशन पड़ेंगे। जहां पर ट्रेन का ठहराव है।

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बलिया: एंबुलेंस ना होने की वजह से मौत का ये पहला मामला नहीं, इससे पहले हुआ था ये मामला

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एक साथ कितने इत्तेफाक हो सकते हैं? सवाल ज़रा दार्शनिक सा है लेकिन बलिया ज़िले में हुई एक घटना और उसकी टाइमिंग ने ये प्रश्न खड़ा कर दिया है। दो साल यही अप्रैल का महीना था। जब एक शख्स को कुछ लोग ठेले पर लादकर ले गए और अंत में उसकी मौत हो गई।
साल बाद फिर वही अप्रैल का महीना है। एक अधेड़ अपनी बीमार पत्नी को लेकर ठेले पर दौड़ता रहा लेकिन उसे बचा नहीं सका।

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीर जमकर वायरल हुई। तस्वीर में एक बुजुर्ग अपनी बीमार पत्नी को चिलचिलाती धूप में ठेले पर ले जाता दिख रहा है। ठेले पर इसलिए ले जाता देख रहा है क्योंकि बलिया में उसे सरकारी एंबुलेंस तक नहीं मिल पाई। प्राइवेट एंबुलेंस की लूट उसकी जद से बाहर की चीज थी।

क्या है मामला: बलिया ज़िले के चिल्कहर ब्लॉक में अंदौर नाम का एक गांव है। अंदौर में ही 60 साल के सुकुल प्रजापति और उनकी पत्नी जोगिनी रहते हैं। उम्र का तकाजा है तो जोगिनी की तबियत एक दिन अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में सुकुल प्रजापति अपनी पत्नी को ठेले पर लादकर ही चिल्कहर के पीएचसी लेकर पहुंचे।

सुकुल प्रजापति के अनुसार पीएचसी में जोगिनी को एक इंजेक्शन दिया गया। उसके बाद बगैर किसी रेफर पेपर के ही ज़िला अस्पताल जाने को कह दिया गया। कायदे से पीएची पर अगर जोगिनी की तबियत इतनी ख़राब थी कि उन्हें ज़िला अस्पताल भेजना पड़ा तो एंबुलेंस की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। लेकिन बगैर एंबुलेंस के ही सुकुल प्रजापति को कह दिया गया कि वो अपनी पत्नी को लेकर ज़िला अस्पताल चले जाएं।

पीएचसी से सुकुल प्रजापति अपनी पत्नी को फिर ठेले पर लादकर घर पहुंचे। पैसे का इंतजाम किया और फिर एक किराए के ऑटो से अपनी पत्नी को लेकर ज़िला अस्पताल पहुंचे। सुकुल प्रजापति ने ज़िला अस्पताल पर आरोप लगाया है कि अस्पताल में जांच के नाम पर उनसे 350 रुपए लिए गए। इसके बाद इलाज के दौरान ही सुकुल प्रजापति की पत्नी जोगिनी की मौत हो गई।

एक अदद एंबुलेंस के ना होने की वजह से जोगिनी की इलाज में देरी हुई और उनकी मौत हो गई। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश भर में घूम-घूमकर अपनी पीठ थपथपाती रहती है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है। सरकार दावा करती है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने अभूतपूर्व कार्य किए हैं। लेकिन जब बलिया में पिछले 2 की घटनाओं पर ही नजर डालते हैं तो दिखता है कि इस क्षेत्र का हाल पहले जितनी बुरी थी अब भी उतनी ही बुरी बनी हुई है।

2 साल पहले क्या हुआ था: 2 साल पहले यानी 2020 की बात है। अप्रैल का महीना था। तब भी एंबुलेंस ना होने की वजह से बलिया के स्वास्थ्य सेवाओं और ज़िला अस्पताल की पोल पट्टी खुल गई थी। मामला ये था कि एक शख्स को लेकर कुछ लोग इलाज के लिए ज़िला अस्पताल पहुंचे। पहले तो ज़िला अस्पताल में उचित इलाज ना मिलने की वजह से शख्स की मौत हो गई। उसके बाद शव को ले जाने तक के लिए अस्पताल की ओर सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई।

ठेले पर लादकर शव ले जाते लोग, 2020 का मामला

ठेले पर लादकर शव ले जाते लोग, 2020 का मामला

प्राइवेट एंबुलेंस की सेवा की लूट से हर कोई परिचित है। नतीजा ये हुआ कि अप्रैल की चिलचिलाती धूप में 3-4 लोग ठेले पर ही शव लेकर गांव के लिए निकल पड़े। ठेले पर शव ले जाते लोगों का वीडियो वायरल हुआ तो चारों ओर हंगामा कट गया। हर तरफ इसे लेकर बहस छिड़ गई। अंत में तात्कालिक जिलाधिकारी हरि प्रताप सिंह ने मामले की जांच के आदेश दिए। संयुक्त मजिस्ट्रेट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। हालांकि जांच का नतीजा क्या हुआ ये किसी को नहीं पता।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश: दो साल बाद जब एक बार फिर जब करीब एक ही तरह की घटना का दोहराव हुआ है तो सभी की भौंहे फिर खड़ी हो गई हैं। सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। उत्तर प्रदेश के नए-नवेले डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। देखना होगा कि इस मामले की जांच में क्या कुछ निकल कर सामने आता है। सवाल ये भी कि क्या जांच पूरी होगी और इस मामले में कोई कार्रवाई भी होगी? या महज खानापूर्ति के लिए के जांच के आदेश दिए गए हैं।

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