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बलिया की इकलौती सरकारी अल्ट्रासाउंड मशीन खराब, CMS का आरोप कंपनी नहीं भेज रही इंजीनियर

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बलिया जिले के सरकारी अस्पताल की एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सरकारी अस्पताल की एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई है। जिला अस्पताल की इकलौती अल्ट्रासाउंड मशीन बीते एक महीने से खराब चल रही है। हर दिन बड़ी संख्या में मरीज अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने की वजह से जिले के मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड मशीन प्रोब खराब हो गया है। जिसे बनाने में लगभग सात लाख रुपए का खर्च आ रहा है।

जिले की स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रोब ठीक करने के लिए लखनऊ की साइरिक्स कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। लेकिन अभी तक कंपनी ने अभी तक अल्ट्रासाउंड मशीन के प्रोब की आपूर्ति नहीं की गई है। मशीन लगभग एक महीने से खराब पड़ी है। मशीन खराब होने की वजह से जिले के मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड कराने आए मरीजों को बाहर किसी न किसी निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। जिसकी वजह से लोगों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।बलिया जिला अस्पताल के सीएमएस ने बलिया खबर के साथ बातचीत में कहा कि “हम लगातार साइरिक्स कंपनी से मशीन ठीक करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन कंपनी टालमटोल कर रही है। लेकिन आज हमने कंपनी से कहा है कि अगर जल्द से जल्द मशीन ठीक नहीं किया गया तो हम मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।” उन्होंने बताया कि मशीन को बनाने में लगभग सात लाख रुपए का खर्च है।

सीएमएस ने कहा कि “जिला अस्पताल में जो मरीज आ रहे हैं और उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत है तो उसका सीटी स्कैन कराया जाता है। लेकिन कुछ लोगों को बाहर भेज दिया जाता है। वैसे कंपनी ने इंजीनियर भेजने की बात कही है। हो सकता है कि जल्दी ही मशीन बन जाए।”बलिया जिले की आबादी लगभग 32 लाख से अधिक है। 32 लाख से ज्यादा आबादी वाला बलिया की स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ एक अल्ट्रासाउंड मशीन के भरोसे चल रही है। और अब वो इकलौती मशीन भी खराब हो चुकी है। जिला अस्पताल के अधिकारी मशीन बनाने वाली कंपनी पर आरोप लगा रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर पूरे जिले के लिए केवल एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन क्यों है?

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पानी में डूबा चिलकहर विकासखंंड, चौराहों पर घुटनों- घुटनों तक पानी, लोग परेशान

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बलिया इस वक्त बारिश के कहर से जूझ रहा है। हर जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है। सड़के तालाब बन गई हैं। पैदल चलने को भी जगह नहीं है। लोगों के घरों में पानी भर गया है। इसी बीच जिले के चिलकहर विकासखंड की तस्वीरें सामने आई है। जहां बारिश का कहर और अधिकारियों की लापरवारी एक दम ठीक तरीके से नजर आ सकती है।पूरा चिलकहर विकासखंड पानी में डूब गया है। हर जगह जलजमाव है। लोगों को आने-जाने में परेशान हो रही है। हालात यह है कि नगर में जलनिकासी की कोई दुरुस्त व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते पूरे नगर में पानी भर गया है। सड़के नजर नहीं आ रही है। घुटनों-घुटनों तक पानी में चौराहे डूब चुके हैं।

ऐसे में लोग, खासकर छोटे- बच्चों और महिलाओं को खासी परेशानी आ रही है। ब्लॉक परिसर में लगभग करोड़ों रुपए का काम करवाने के अधिकारी दावे करते हैं लेकिन कुछ देर आई बारिश ने इन सभी दावों की पोल खोल कर रख दी है।

रिपोर्ट- कृष्ण मोहन पांडे

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शासन ने दी बलिया में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति, मिलेगा बेहतर इलाज

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बलिया जिले में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज के संचालन की अनुमति दे दी है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने बलिया जिले में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज के संचालन की अनुमति दे दी है। प्रदेश सरकार ने बलिया समेत कुल 16 जनपदों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज शुरू करने की अनुमति दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद बलिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार आएगी। जिले के गम्भीर मरीजों को अब इलाज के लिए किसी दूसरे शहर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। बड़ी बीमारियों का उपचार भी इस मेडिकल कॉलेज में हो सकेगा।

पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने की अनुमति मिल चुकी है। लेकिन इस मेडिकल कॉलेज की नींव बलिया में कहां पड़ेगी यह अब तक सुनिश्चित नहीं हुआ है। मेडिकल कॉलेज के लिए कैसे और कब तक बनकर तैयार होगा इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मेडिकल कॉलेज के संचालन को लेकर फिलहाल कोई रोडमैप तैयार नहीं है। अभी सिर्फ इसे लेकर सरकार की ओर से स्वीकृति दी गई है।

बलिया के लोगों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा से खुशी है। माना जा रहा है कि अब अपने इलाज के लिए लोगों को कहीं भटकना नहीं पड़ेगा। अब तक जिले की जनता गम्भीर बिमारियों के उपचार के लिए वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में जाने को मजबूर थे। जिला अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त ना होने की वजह से लोगों को इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों का मानना है कि इस मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के बाद हर रोज जिला अस्पताल से मरीजों को दूसरे किसी शहर रेफर नहीं किया जाएगा।

बता दें कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर पिछले दो सालों से कवायद हो रही है। लेकिन मेडिकल कॉलेज अब तक जमीन पर नहीं उतर सका है। 2019 में प्रदेश सरकार के निर्देश पर इसे लेकर जमीन भी चिन्हित की गई थी। राजकीय निर्माण निगम की ओर से 326 करोड़ का प्रस्ताव भी बनाया गया। लेकिन फिर यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से सर्वे टीम ने कई जगह जमीन का सर्वे किया। लेकिन हर बार मानक पूरा न होने की वजह से मामला आगे न बढ़ सका। अब देखने वाली बात होगी कि पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज कब तक जमीन पर उतरती है?

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बलिया में अंधी रफ्तार का कहर, मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग को बुलेट ने मारी टक्कर, मौके पर मौत

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बलिया में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला सामने आया है बैरिया-रेवती मार्ग से, जहां गंगा पांडेय के टोला में मॉर्निंग वॉक कर घर आ रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग को बैरिया के तरफ से आ रही बुलेट सवार ने टक्कर मार दी। जिससे बुजुर्ग गंभीर रुप से घायल हो गए। जिन्हें स्थानीय लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा ले गए। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना को अंजाम देने के बाद बाइक सवार भाग गया। जिसके बाद घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बैरिया रेवती मार्ग जाम कर दिया। रेवती एसएचओ ने कार्यवाई का आश्वासन देकर जाम को समाप्त कराया। बताया जा रहा है कि घटना शुक्रवार की है जहां 70 वर्षीय बरमेश्वर पांडेय रोज की तरह शुक्रवार को भी बैरिया रेवती मार्ग पर मॉर्निंग वॉक कर अपने घर की तरफ वापस लौट रहे थे। उसी दौरान वह बैरिया की तरफ से आ रही तेज रफ्तार बुलेट की चपेट में आ गए।

घटना के बाद बुलेट चालक मौके से फरार हो गया। इस दौरान सड़क पर गिरकर बुरी तरह जख्मी बरमेश्वर पांडे को लोग इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा ले गए। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। गंगापांडे के टोला में यह सूचना पहुंचते ही आक्रोशित ग्रामीण सड़क पर उतर कर बैरिया रेवती मार्ग जाम कर दिए। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सूचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष यादवेंद्र पांडे ने ग्रामीणों को समझाया।

ग्रामीण बुलेट चालक पर कार्यवाही तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद की मांग कर रहे थे। इस दौरान विधायक सुरेंद्र सिंह ने भी फोन पर आंदोलित लोगों से बात की। रेवती एसएचओ यादवेंद्र पांण्डेय ने त्वरित कार्यवाई और परिवारजनों की मदद का आश्वासन दिया तब जाकर जाम समाप्त हुआ।

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