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बलिया में ई-श्रम पोर्टल पर 7 लाख से ज्यादा लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

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बलियाः ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में बलिया प्रदेश में 14वें स्थान पर है। यहां रजिस्ट्रेशन का काम थोड़ी धीमी गति से चल रहा है। अब तक 7 लाख 68 हजार 678 लोगों ने पोर्टल पर आवेदन किया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी जितेंद्र कुमार की मानें तो साइट धीमा चल रही है। इसकी वजह से आवेदन प्रॉसेस में हैं। वहीं ई-श्रम पोर्टल पर आवेदन के लिए मात्र दो दिन ही शेष बचे हैं। अगर साइट ठीक से रिस्पॉन्ड नहीं करती तो कई लोग योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगे।

बता दें कि ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड लोगों को सरकार पांच सौ रुपए प्रतिमाह देगी। इसलिए अब श्रमिक जल्द से जल्द पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि ई-श्रम के लिए 167 प्रकार के श्रमिक आवेदन के पात्र हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तक है। उस तिथि तक जिन श्रमिकों का पंजीकरण हो जाएगा, उन्हें सरकार की योजना के तहत पांच सौ रुपये प्रति माह मिलेंगे।

बता दें कि जिले में भवन निर्माण (कंस्ट्रक्शन) से सम्बंधित लगभग दो लाख श्रमिकों ने पंजीकरण कराया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी की मानें तो श्रमिक पंजीकरण में कंस्ट्रक्शन से सम्बंधित जैसे राज मिस्त्री, सेटरिंग मिस्त्री, टाइल्स मिस्त्री, वायरिंग करने वाले बिजली मिस्त्री, बोरिंग कराने वाले आदि हैं। इसके अलावा सरकार की नई व्यवस्था से औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों को सात योजनाओं श्रम कल्याण परिषद की प्रमुख योजनाओं में श्रवण कुमार श्रमिक परिवार धार्मिक पर्यटन योजना, महादेवी वर्मा श्रमिक पुस्तक क्रय योजना, चेतन चौहान

श्रमिक क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम श्रमिक प्राविधिक शिक्षा सहायता योजना, राजा हरिश्चंद्र श्रमिक मृतक आश्रित सहायता आदि का लाभ मिल सकेगा। साथ ही पहले की अपेक्षा अधिक सहायता राशि मिलेगी। इन योजनाओं के लिए उन फैक्ट्रियों के श्रमिक पात्र होंगे, जिस फैक्ट्री का पंजीकरण भारत सरकार के 1948 एक्ट के तहत होना अनिवार्य है। साथ ही दुकानों पर काम करने वाले वही श्रमिक पात्र होंगे, जिस दुकान या प्रतिष्ठान का पंजीकरण भारत सरकार के 1962 एक्ट के तहत होगा। साथ ही उनका वेतन 15 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं होना चाहिए।

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जिस जगह हुई थी बलिया के आजादी की घोषणा वहां लगा गंदगी का अंबार, अधिकारी बेख़बर

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बलिया। पूरे देश ने बड़ी धूमधाम से आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस है। पूरा प्रशासनिक अमला बड़े आयोजन की तैयारी में जुटा है। इस दिन सूबे के मुख्यमंत्री भी बलिदान दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। लेकिन साल 1942 में जिस स्थान पर बलिया की आजादी की घोषणा हुई, उस जगह का हाल विचलित कर देने वाला है।

जिले के क्रांति मैदान बापू भवन के बाहर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नगर पालिका का इस ओर ध्यान नहीं है। एक तरफ आजादी का जश्न मनाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ जिस जगह आजादी की घोषणा हुई, वहां गंदगी पसरी है। आजादी के अमृत महोत्सव में बलिया से सामने आई यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।

Pic Credit- Roshan

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1947 से 5 साल पहले, आज ही के दिन बांसडीह तहसील को मिली थी आज़ादी!

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बलिया डेस्क : आज 17 अगस्त है, बलियावासियों के लिए गौरव का दिन। आज ही के दिन बलिया की एक तहसील आज़ादी से पांच साल पहले अंग्रेज़ों की ग़ुलामी से आज़ाद हो गई थी। हम बात बांसडीह तहसील की कर रहे हैं, जिसे 17 अगस्त 1942 को गजाधर शर्मा के नेतृत्व में तकरीबन 20 हज़ार किसानों-नौजवानों की टीम ने अंग्रेज़ी हुकूमत से आज़ाद करा लिया था।

वीर सेनानियों की इस टीम में सकरपुरा के वृंदा सिंह, चांदपुर के रामसेवक सिंह और सहतवार के श्रीपति कुंअर भी शामिल थे। बताया जाता है कि सेनानियों की टीम ने तहसील पर कब्ज़े की तैयारी इतनी खामोशी के साथ की थी कि इसकी भनक अंग्रेज़ी हुकूसत को भी नहीं लग सकी थी। 17 अगस्त की सुबह होते ही तकरीबन 8 बजे सेनानियों की एक टोली ने तहसील और थाने को चारों तरफ़ से घेर लिया। सेनानियों की तादाद और उनके देश प्रेम के जज़्बे को देखकर तहसीलदार और थानाध्यक्ष ने सरेंडर कर दिया।

जिसके बाद सेनानियों का तहसील और थाने पर कब्ज़ा हो गया। बलिया ख़बर से बातचीत में कॉमरेड प्रणेश सिंह  एक किताब का हवाला देते हुए बताते हैं कि तहसील और थाने पर कब्ज़े के बाद सेनानियों ने वहां के ख़ज़ाने को अपने कब्ज़े में ले लिया और उसी खज़ाने से कर्मचारियों को एक महीने का वेतन देकर उन्हें 24 घंटे के भीतर बलिया छोड़ने को कहा।

तहसील पर कब्ज़े के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष गजाधर शर्मा को तहसीलदार बना दिया गया और इसी के साथ सेनानियों ने स्वदेशी सरकार की स्थापना भी कर दी। प्रणेश बताते हैं कि तहसीलदार बनने के बाद गजाधर शर्मा ने दो बड़े केस पर पंचायती राज के तहत फैसला सुनाया था। जिसमें कोरल क्षेत्र का एक खानदानी मुकदमा था और एक नरतिकी से लूट का केस था।

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बलिदान दिवस में शामिल होंगे CM योगी, प्रशासन अलर्ट

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बलिया। 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस है। साल 1942 में 19 अगस्त के दिन ही बलिया में अंग्रेजों ने घुटने टेके थे। जिले के सैंकड़ों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विद्रोह किया और अंग्रेज भाग खड़े हुए। उन्हीं वीर सपूतों की याद में बलिया बलिदान दिवस मनाया जाता है।

इस बार बलिदान दिवस के मौके पर उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ बलिया आ रहे हैं। सीएम के आगमन को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट पर है। तमाम तरह की तैयारियों की जा रही हैं।  परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने प्रेस वार्ता में कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुबह में नौ बजे आएंगे। जिला कारागार के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे। सभा स्थल के चयन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है।

वहीं कार्यक्रम को लेकर अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है। अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी अनिल कुमार अग्निहोत्री, डिप्टी कलेक्टर अरुण कुमार मिश्र, उप जिला मजिस्ट्रेट जुनैद अहमद, डिप्टी कलेक्टर अनवर राशिद फारुकी, नगर मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार, डिप्टी कलेक्टर सीमा पाण्डेय समेत तमाम अधिकारी मोर्चा संभालते नजर आएंगे। सभी अधिकारियों को अलग अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसके बाद अधिकारी मैदान में है। सीएम के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

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