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बलिया के खिलाड़ियों ने किया कमाल, लखनऊ में कराटे प्रतियोगिता में जीते 4 स्वर्ण समेत 16 पदक

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बलिया जिले के खिलाड़ी किसी से कम नहीं। सफलता को अपनी मुट्ठी में रखते हुए यह खिलाड़ी हर प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं और जीत का परचम लहराते हैं। हाल ही में लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय राज्य कराते प्रतियोगिता में बलिया की 26 सदस्यीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। लखनऊ से विजयी होकर कराते टीम आज बलिया पहुंची।

लखनऊ के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में उत्तर प्रदेश ओलम्पिक संघ द्वारा मान्य कराटे एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश के संयोजन में तीन दिवसीय कराते प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें भाग लेने बलिया की 26 सदस्यीय टीम पहुंची। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 स्वर्ण 6 रजत 6 कास्य पदक समेत कुल 16 पदकों पर अपना नाम किया। टीम की इस सफलता में कोच सुमित झा व टीम मैनेजर ओम प्रकाश यादव की भी बहुत मेहनत है।

बता दें कि 10, 11 व 12 अगस्त तक चली इस प्रतियोगिता में एक तरफ जहां 12 वर्षीय आयुष सिंह ने मेरठ के वैभवकांत को 4 – 0 के अंतर से हराकर – 40 किग्रा. भारवर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया, वहीं अनुराग कुमार ने लखनऊ के वैभव पाण्डेय को 6-2 के अंतर से पछाड़ कर + 40 किग्रा. भारवर्ग का स्वर्ण अपनी झोली में डाली। 16 – 17 वर्षीय जूनियर बालिका वर्ग की गरिमा सिंह ने लखनऊ की ही खुशी यादव को मुकाबले में 1- 0 के अंतर से हरा कर – 48 किग्रा. भारवर्ग के स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में स्कूली गेम्स में रजत पदक विजेता युवराज सिंह यादव ने गाजियाबाद के राजन विश्वकर्मा को 10-05 के अंतर से पीछे कर – 67 किग्रा.भारवर्ग के स्वर्ण पदक को अपने नाम कर नेशनल गेम के लिए रास्ता साफ कर लिया।

वहीं 16 वर्षीय बालिका वर्ग में – 40 किग्रा.भारवर्ग की ऐश्वर्या गुप्ता तथा -59 किग्रा. भार वर्ग में अनन्या पाण्डेय रजत पदक विजेता बनी। वही दूसरी तरफ 15 वर्षीय बालक वर्ग के -70 किग्रा.भार वर्ग में अमीर चन्द तथा 18 वर्षीय बालक वर्ग के +84 किग्रा.भारवर्ग में कृष्णाजी सिंह एवं सीनियर वर्ग के -67 किग्रा. भारवर्ग के सुमित कुमार झा तथा काता में कमलेश को रजत पदक मिला। 15 वर्षीय बालिका वर्ग में + 54 किग्रा.भार वर्ग की ज्योत्सना यादव ,15 वर्षीय बालक वर्ग में – 68 किग्रा.भार वर्ग के मणि शंकर सिंह, 17 वर्षीय बालक वर्ग में – 75 किग्रा. भार वर्ग के अमित वर्मा तथा -75 किग्रा. भार वर्ग में राजवीर सिंह एवं अंडर 21 वर्षीय बालक वर्ग में – 50 किग्रा. भार वर्ग के रोहित राजभर तथा – 61किग्रा. भार वर्ग के विष्णुजीत ने कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

स्पोर्ट्स कराते एसोसिएशन बलिया के अध्यक्ष सिहान बाल कृष्ण मूर्ति ने बताया कि जनपद बलिया के चार खिलाड़ियो का नेशनल गेम में चयन एक शानदार उपलब्धि है।श्री मूर्ति ने बताया कि आगामी अक्टूबर माह में आयोजित नेशनल गेम से पहले बलिया के चयनित स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियो को तराशने के लिए दिल्ली स्थित नेशनल कराते एकेडमी में तकनीकी प्रशिक्षण हेतु भेजा जाएगा ताकि बलिया के खिलाड़ी राष्ट्रीय कराटे में अपना परचम फहरा सके। वहीं बलिया की टीम ने प्रतियोगिता में अपने शानदार प्रदर्शन को सबके सामने रखा। आज जब बलिया के स्टार खिलाड़ियों ने जनपद में कदम रखा तो सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। हर्ष का महौल बन गया।

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Ballia- घाटे में बिजली विभाग, उपभोक्ताओं ने नहीं चुकाए 500 करोड़, हर महीने 33 करोड़ का नुकसान

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बलिया के विद्युत विभाग के बकायेदारों की जानकारी सामने आई तो कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। बकाया का खेल इतना लंबा है कि इसमें आम उपभोक्ताओं के साथ ही सरकारी कार्यालय भी शामिल हैं, जिनसे करोड़ों की बकाया राशि वसूल होनी है।

बिजली विभाग के उपभोक्ताओं पर करीब 500 करोड़ का भारी-भरकम बिल बकाया है। हैरान करने वाली बात यह है कि 50 से 60 करोड़ का बिल सरकारी कार्यालयों पर बकाया है, बाकि रकम आम उपभोक्ताओं को भरनी है। बकाया वसूली को लेकर विभाग तमामत प्रयास कर रहा है लेकिन बकायेदार बिल भरने से बचते घूम रहे हैं। विभाग ने 50 हजार रुपये से अधिक के बकाये वाले 40 हजार लोगों के खिलाफ धारा (3) की नोटिस जारी की है। यदि एक माह में इन लोगों ने भुगतान नहीं किया गया तो इनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी।

अगर बकाया की वसूली हो जाए तो जनपद में 100 नए उपकेंद्र स्थापित किए जा सकते हैं। जिले में वर्तमान में 45 उपकेंद्र हैं और पांच निर्माणाधीन हैं। क उपकेन्द्र बनाने में चार से पांच करोड़ का लागत आता है। ऐसे में केवल विभाग के बकाये की राशि 500 करोड़ की वसूली हो जाय तो 100 से अधिक उपकेंद्र स्थापित हो सकते हैं।

जिले में बिजली के कुल 3 लाख 48 हजार उपभोक्ता (सरकारी व गैर सरकारी) हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इनमें से 45 से 50 हजार उपभोक्ता ही नियमित भुगतान कर रहे हैं। यानि मात्र 15 प्रतिशत उपभोक्ता ही बिजली का बिल जमा कर रहे हैं। ऐसे में 55  करोड़ की बिजली विभाग खरीदता है लेकिन सिर्फ 12 करोड़ की वसूली हो रही है, यानि हर माह 33 करोड़ का घाटा विभाग को हो रहा है।

बिजली विभाग के नोडल अधिकारी व विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता चंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि बिल की वसूली के लिए अलग से टीम बनाई गई है। रेवेन्यू विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है। कुछ ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने लंबे समय से बिल जमा नहीं किया है।

विभाग के लिए सरकारी कार्यालयों से वसूली बड़ी टेड़ी खीर है। सबसे ज्यादा बकाया शिक्षा विभाग के ऊपर है। कई बार नोटिस देने के बाद भी जब बिल नहीं आया तो विभाग ने सरकारी परिषदीय विद्यालयों के साथ ही बीएसए दफ्तर की बिजली भी काट दी थी। हालांकि अधिकारियों की लिखा-पढ़ी के बाद बिजली चालू कर दी गयी।

वहीं बिजली विभाग के नोडल अधिकारी एक्सईएन चंद्रेश उपाध्याय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वह बिजली का अनावश्यक उपयोग बंद करें। वर्तमान में प्रदेश ऊर्जा की कमी से जूझ रहा है। त्योहारों को देखते हुए विभाग 17 रुपये प्रति यूनिट बिजली की खरीदारी कर ग्राहकों को मात्र 7 रूपये यूनिट उपलब्ध करा रहा है।

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CM योगी ने रामगोविंद चौधरी को आखिरी क्यों दी काले गाजर का हलवा खाने की नसीहत?

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बलिया। उत्तरप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव के चलते गरम रहा सदन का माहौल उस वक्त खुशनुमा हो गया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने नेता खन्ना से मुकाबले के लिए रामगोविंद को बलिया के काले गाजर का हलवा खिलाने की बात कही। दरअसल विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना के बीच खूब मीठी नोकझोंक हुई और इस पर हंसते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खूब चुटकी ली।

विधानसभा में करीब 6 घंटे लगातार चले सदन में माहौल खासा खुशनुमा रहा और खूब हास परिहास दोनों ओर से हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सुबह से तैश में बातें कह रहे थे लेकिन संसदीय कार्यमंत्री ने भी शाहजहांपुर का आटा खाया है और वह नेता प्रतिपक्ष का मजबूती से जवाब देते हैं। अब नेता विपक्ष को बलिया के काले गाजर का हलवा खाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष रामगोविंद संवाद में यकीन रखने वाले एक सज्जन व्यक्ति हैं लेकिन दलीय अंतर्विरोधों को झेलने की ताकत नहीं रखते, इसीलिए सदन में अनावश्यक झगड़ पड़ते हैं।

सदन में जब रामगोविंद चौधरी ने उपाध्यक्ष के चुनाव में संसदीय परंपराओं का पालन न करने का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा तो बचाव में सुरेश खन्ना ने कहा कि परंपराएं हमने नहीं आप लोगों ने तोड़ी हैं। आपके यहां गुटबाजी थी, इसलिए आप लोग खुद प्रत्याशी नहीं दे पाए। वक्त परिवर्तनशील होता है परंपराएं बनती और टूटती हैं। अगली बार भी आप लोग यहीं बैठेंगे तब आपकी बात हम लोग मान लेंगे। रामगोविंद चौधरी ने हंसते हुए कहा कि हम लोग सरकार में आएंगे और खन्ना जी को उपाध्यक्ष बनाएंगे।
इस पर सुरेश खन्ना कहां चूकने वाले थे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की ओर संकेत करते हुए कहा कि एक्टिंग में आप को कोई मुकाबला नहीं कर सकता। रामगोविंद चौधरी ने एक फिल्म को याद करते हुए कहा कि उसमें एक गाना अजी रूठ कर कहां जाइएगा जहां जाइएगा हमें पाइएगा, वाली स्थिति यहां है। जब नितिन अग्रवाल उपाध्यक्ष चुन लिए गए तो नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह तो सीधे हैं। विधानसभा का मुश्किल से एक ही सत्र और होगा। उसमें अध्यक्ष ही बैठेंगे। इन उपाध्यक्ष को आसन पर बैठने का मौका तो मिलना नहीं।

इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों की हंसी छूट गई। नितिन तो सत्ता पक्ष में गए ही थे आप लोगों ने इधर भेज दिया। अरे उन्हें कैबिनेट मंत्री ही बना देते। इन्हें तो कुछ मिला नहीं। मुख्यमंत्री जब मुस्कुरा रहे थे तो नेता प्रतिपक्ष ने उनसे मास्क उतारने को कहा। मुख्यमंत्री ने मास्क नीचे कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा हमें तो आपके स्वास्थ्य की चिंता रहती है। बलिया की काली गाजर का हलुवा खाना चाहिए। रामगोविंद चौधरी ने सत्ता पक्ष पर विधायकों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया।

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गोरखपुर की महिला संविदाकर्मी के मौत के मामले में कैसे फंस गए बलिया के दारोगा?

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गोरखपुर के सरकारी अस्पताल की संविदाकर्मी शहाना निशा की मौत के मामले में एलआईयू में तैनात दारोगा पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बलिया के रहने वाले दारोगा राजेंद्र सिंह पर शहाना निशा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। कोतवाली पुलिस ने शहाना निशा की मां की तहरीर पर राजेंद्र सिंह पर धारा-306 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

कोतवाली पुलिस ने गत शुक्रवार यानी 15 अक्टूबर को ही दारोगा राजेन्द्र सिंह को हिरासत में लिया था। उसके बाद से ही राजेन्द्र सिंह से पुलिस पूछताछ कर रही है। मौत के लगभग साठ घंटे बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। शहाना निशा के परिवार वालों का कहना है कि ये आत्महत्या नहीं है। बल्कि शहाना निशा की हत्या की गई है। परिजनों ने गोरखपुर एलआईयू में तैनात बलिया के रहने वाले दारोगा राजेन्द्र सिंह पर आरोप लगाया है।

बता दें कि शहाना निशा उर्फ सुहानी बेलीपार के भीटी गांव की रहने वाली थी। गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में बतौर संविदाकर्मी काम करती थी। शहाना गोरखपुर के बक्शीपुर में एक किराए के मकान में रहती थी। उसके साथ एक दस महीने का बेटा भी था। बीते 15 अक्टूबर को किराए के कमरे में ही शहाना का शव फंदे से झूलता हुआ मिला था। सूचना मिलने पर पुलिस ने पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया था।

शहाना के सहकर्मियों का कहना है कि सात महीने से उसका वेतन नहीं मिला था। आर्थिक तंगी से परेशान होकर शहाना के आत्महत्या की बात कह जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। लेकिन उसके परिजनों ने इसे हत्या बताकर बलिया निवासी दारोगा राजेन्द्र सिंह के खिलाफ थाने में तहरीर दी। जिसके बाद पुलिस ने धारा-306 के तहत राजेन्द्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि शहाना के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की ही बात सामने आई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सारा मामला आत्महत्या का ही बना। लेकिन शहाना के घर वालों का कहना है कि उसकी हत्या करने के बाद आत्महत्या का रूप दिया गया है। पुलिस समेत एलआईयू के अधिकारी भी शहाना के परिजनों को समझाते रहे। लेकिन अंत में शहाना की मां की तहरीर पर राजेंद्र सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।

जानकारी के अनुसार दारोगा राजेंद्र सिंह और संविदाकर्मी शहाना के बीच करीबी थी। दोनों तब से एक-दूसरे को जानते हैं जब राजेंद्र सिंह कोतवाली थाने के नगर निगम चौकी पर तैनात थे। इसी चौकी क्षेत्र के अंतर्गत गोरखपुर का जिला अस्पताल भी स्थित है। जहां शहाना निशा की तैनाती थी। हालांकि बाद में राजेंद्र सिंह का तबादला किसी अन्य जनपद में हो गया था । लेकिन राजेंद्र सिंह ने अपनी पोस्टिंग एलआईयू में करा ली थी।

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