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बलियाः SP ताडा के नेतृत्व में पुलिस हुई एक्टिव, रिकवर किए गए 10 गुमशुदा मोबाइल फोन

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बलिया डेस्क :  पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. विपिन ताडा की तैनाती के बाद बलिया की कानून व्यवस्था सुधरती नज़र आ रही है। एसपी के नेतृत्व में ज़िले की पुलिस एक्टिव मोड में आ गई है। साइबर सेल से लेकर थानों तक के पुलिसकर्मी अपने फ़र्ज़ को बख़ूबी अंजाम देते दिखाई दे रहे हैं। एसपी के नेतृत्व में पुलिस कभी गुमशुदा मोबाइल की रिकवरी कर लोगों का दिल जीत रही है तो कभी बुज़ुर्गों के लिए सवेरा योजना शुरु कर उनके जीवन का अंधियारा दूर कर रही है।

मंगलवार को ज़िला पुलिस कार्यालय में एसपी ने रिकवर किए गए 10 गुमशुदा मोबाइल फोन को उनके धारकों को सौंप दिया। पुलिस की इस कामयाबी पर मोबाइल फोन धारकों ने ख़ुशी ज़ाहिर की और पुलिस का शुक्रिया अदा किया। दरअसल, एसपी विपिन ताडा के निर्देश पर गुमशुदा मोबाइल फोन की रिकवरी के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है। ये अभियान उन मोबाइल धारकों की शिकायत पर शुरु किया गया है, जिन्होंने पुलिस में अपने मोबाइल गुम हो जाने की तहरीर दी थी।

मोबाइल धारकों की इस शिकायत के बाद एसपी ने सर्विलांस टीम को मोबाइल की तलाश में लगा दिया और उसे कामयाबी भी मिली। सर्विलांस टीम ने अपने इस अभियान में थोड़े से वक्त में 10 मोबाइल फोन रिकवर कर लिए। मोबाइल बरामद करने वाली पुलिस टीम में उनि राजकुमार सिंह प्रभारी सर्विलांस टीम, आरक्षी शशि प्रताप सिंह, आरक्षी राकेश कुमार यादव व आरक्षी रोहित कुमार यादव सर्विलांस शामिल रहे।

वहीं दूसरी तरफ़ पुलिस की तारीफ़ सवेरा योजना को लेकर भी की जा रही है। दरअसल, बेसहारा बुज़ुर्गों को सहारा देने के लिए ज़िले में पुलिस की ओर से सवेरा योजना शुरु की गई है। इस योजना का मक़सद अकेले रह रहे बुज़र्गों को सुरक्षा मुहैया कराना है। पुलिस ने इसके लिए डायल 112 की सुविधा दी है, इसपर कॉल करके बुज़र्ग अपना रजिस्ट्रेशन आसानी से करा सकते हैं।

कौन हैं एसपी विपिन ताडा?
विपिन ताडा- 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी विपिन टाडा मूल रूप से जोधपुर के राजस्थान के रहने वाले हैं। विपिन टाडा ने एमबीबीएस की पढ़ाई की है। आईपीएस बनने के बाद वह अपने सख़्त रवैए के लिए जाने जाते हैं। उनकी जहां भी पोस्टिंग होती है अपराधी उनसे ख़ौफ खाते हैं। अपने काम और ज़िम्मेदारी को लेकर वह ट्रेनिंग के दौरान से ही काफ़ी गंभीर रहे हैं। इससे पहले उनकी पोस्टिंग रामपुर में थी। जहां कानून व्यवस्था कायम रखने के उत्कृष्ट कार्यां के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था।

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बलिया में टायर व पेट्रोल शव जलाने का वीडियो वायरल, 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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बलिया ।  बलिया में पुलिस की संवेदनहीनता सामने आई है। यहां गंगा में बहती लाशों को निकाल कर अंतिम संस्कार के समय उस पर पेट्रोल छिड़क दिया गया, जिससे वह जल्दी जल जाए। इतना ही नहीं चिता पर लकड़ी के साथ-साथ टायर भी रख दिए गए।

इसका वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने पांच सिपााहियों को सस्पेंड कर दिया है। पूरे मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार को सौंपी गई है ।

 

बताया गया है कि विडिओ यह फेफना के माल्देपुर घाट का है। यहां गंगा नदी से लाशों को निकालने के बाद सही तरीके से उनका अंतिम संस्कार नही किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि चिता पर लड़की के साथ टायर रखे गए हैं। शव को जल्दी से जलाने के लिए बीच-बीच में उसपर पेट्रोल भी छिड़का जा रहा है। यह सब सिपाहियों की मौजूदगी मे होता है।

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बुजुर्ग महिला को आवास नहीं मिला तो बलिया के बलवंत ने चंदा जुटा कर बनवा दिया घर

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बलिया। कहते हैं रोटी कपड़ा और मकान के लिए ही लोग जीवन भर संघर्ष करते रह जाते हैं। इसमें भी मकान का तो क्या ही कहना। जैसा समय है, व्यक्ति रोटी, कपड़ा का जुगाड़ कर ले बहुत है। लेकिन बलिया के एक शख्स ने कमाल का काम किया है।

पुराना मकान

सहतवार के बिसौली गांव के रहने वाले बलवन्त ने एक दिव्यांग महिला का घर बनवाने की जिम्मेदारी ले ली है। वह बीते कुछ महीनों से चंदा जुटा कर धीरजा देवी का घर बनवा रहे हैं।
देखिए कुछ तस्वीरें

मुख्यमंत्री तक ने नहीं सुनी बात
बलवंत बताते हैं कि शासन-प्रशासन के यहां वह दौड़ भाग करके थक गए। लेकिन सत्ता में बैठे किसी भी जनप्रतिनिधि का ना तो मन पसीजा और ना ही अपनी निधि से एक गरीब के लिए वह घर ही बनवा पाए।

उन्होंने धीरजा देवी का घर बनवाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। सीएम आदित्यनाथ के के जनता दरबार में कहने के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई और गरीब का घर नहीं बन सका।

बलवंत ने हमें बताया की बलिया के तत्कालीन डीएम भवानी सिंह खंगरौत तक बात गई थी। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने धीरजा देवी के घर के लिए डीएम से कहा था। बलवंत खुद कई बार जिम्मेदारी समझते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर कह चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

लगातार संपर्क और दौड़ भाग के बाद भी जब किसी ने कोई मदद नहीं की तो बलवंत ने खुद ही घर बनवाने का बीड़ा उठा लिया। बलवंत ने तय किया है कि वह चंदा जुटा कर ही धीरजा राजभर का घर बनवाएंगे। फिलहाल घर बन रहा है और इलाके में इस प्रयास की काफी चर्चा हो रही है। बलवंत ने बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो दो-तीन महीनों में ही घर तैयार भी हो जाएगा।

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बेटी के सिर से उठ गया था पिता का साया, उमाशंकर सिंह ने निभाई पिता की भूमिका, कराई शादी

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बलिया। जिले के रसड़ा विधानसभा से विधायक उमाशंकर सिंह ने क्षेत्र के एक गांव की गरीब बेटी की शादी अपने खर्च पर कराई है। जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।  बता दें कि शादी के ठीक छह महीने पहले  नेहा के पिता का साया उसके सिर से उठ गया।

छठ पूजा के दिन ही कुछ लोगों ने रसड़ा क्षेत्र के सरया गांव निवासी हीरामन यादव की गोली मारकर हत्या कर दी। पूरा परिवार बेसुध पड़ा था। पिता के शव पर बेटी का विलाप सबको झकझोर दे रहा था। भारी भीड़ के बीच रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। बेटी नेहा चीख-चीखकर कह रही थी, अब उसकी शादी कैसे होगी? मेरा कन्यादान कौन करेगा?

उसके सवाल लोगों का कलेजा चीर रहे थे। विधायक ने भरोसा दिया कि पिता को तो मैं वापस नहीं ला सकता लेकिन दोषियों पर कार्रवाई जरूर कराएंगे तथा शादी भी उसी धूमधाम से सम्पन्न कराएंगे, जैसा आपके पिता चाहते थे।

छह महीना पहले बंधायी गयी इस आस को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने 14 मई को पूरा किया। बेटी के तिलक से लेकर विवाह तक की सारी तैयारी अपनी देखरेख में करायी। बेटी के लिए उपहार व बरातियों-रिश्तेदारों के स्वागत में कोई कमी न रह जाय, इसकी सारी तैयारी खुद पूरी करायी।

तिलक के दिन ढेर सारा उपहार नेहा की ससुराल जगदीशपुर में भेजवाया तो 14 मई को शादी के दिन घंटों नेहा के घर पर एक अभिभावक की तरह मौजूद रहे। द्वारपूजा से लगायत अन्य सभी रस्मों में तत्परता से एक ‘बाबुल की भूमिका निभायी। कन्यादान नेहा के चाचा ने किया।

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