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बलिया- जंगली बाबा धाम में फिर चंदन की तस्करी, सरयू के रास्ते हो रहा कारोबार, सवालों में पुलिस !

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बलिया। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के कठौड़ा स्थित जंगली बाबा धाम पर लगे चंदन की कटाई से हड़कंप मचा हुआ है। पेड़ों को काटने और लकड़ी गायब करने की सूचना मिल रही है। बताया जा रहा तस्कर सरयू नदी के रास्ते तस्करी कर रहे हैं। क्षेत्रवासी स्थानीय पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही कार्रवाई न होने पर पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं।

रात के अंधेरे में तस्करी- बताया जा रहा है जंगली बाबा धाम में 5 दर्जन से ज्यादा चंदन के पेड़ हैं। शुक्रवार रात को चोरों ने चंदन के 4 पेड़ों पर हाथ साफ कर दिया। लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। शनिवार को दोपहर बाद मंदिर के पुजारी महामंडलेश्वर 108 श्री कृष्ण दास ब्रह्मचारी महाराज जब बगीचे में घूम रहे थे तो कटे हुए 4 पेड़ों सहित कुछ आधे कटे पेड़ों को देखा तो, उनके होश उड़ गए।

पुलिस पर गंभीर आरोप- घटना की सूचना उन्होंने गांव वालों को दी। बगीचे से चंदन के पेड़ काटने की सूचना पर काफी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए और मामले से सिकंदरपुर पुलिस को अवगत कराया। पुलिस ने मौका मुआयना कर स्थिति को देखा और कागजी कोरम पूरा कर वापस लौट गई। ग्रामीणों का आरोप है कि एक तो पुलिस सूचना देने के घंटो बाद मौके पर पहुंची और अब तक कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं की।

सरयू का फायदे उठाते तस्कर- बलिया में चंदन के पेड़ों का यह एक मात्र बगीचा है। पेड़ों को देखने के लिए दूर दराज से लोग पहुंचते हैं। ग्रामीणों की माने तो शुरू में कोई दिक्कत नहीं थी। जैसे-जैसे पेड़ बड़े होने लगे वैसे वैसे तस्करों की नजर पड़ने लगी। बेशकीमती पेड़ों को चंदन तस्कर रात के अंधेरे में काट कर आसानी से सरयू नदी के पार भेज देते हैं। बीते 3 साल में डेढ़ दर्जन से अधिक चंदन के पेड़ काटे जा चुके हैं। लेकिन किसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस से नहीं मिल रही सुरक्षा- मंदिर के पुजारी महामंडलेश्वर 108 श्रीकृष्ण दास ब्रम्हचारी ने बताया कि बेशकीमती पेड़ों की सुरक्षा के लिए कई बार पुलिस को आवेदन दिया । बावजूद कोई व्यवस्था नहीं की। कागजों में कठौड़ा में पुलिस चौकी भी स्थापित है जो थाने से ही संचालित होती है। यहां के कर्मचारियों को भी थाने से अटैच कर दिया है। वहीं एसएचओ सिकंदरपुर योगेश यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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निकाय चुनाव को लेकर फिर टली सुनवाई, अब 27 मार्च को आ सकता है फैसला

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यूपी में निकाय चुनाव को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी। आज होने वाली सुनवाई टल गई है। इसका मतलब ये है कि यूपी निकाय चुनाव में अभी और देरी हो सकती है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर मेयर और अध्यक्ष की सीटों का आरक्षण किया जाना है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें पिछड़ों को आरक्षण देने का फार्मूला दिया गया है।राज्य सरकार ने इसी रिपोर्ट को पेश करते हुए निकाय चुनाव की अनुमति मांगी है, इस मामले में अब सुनवाई 27 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर पालिका, नगर पंचायत और नगर निगम में आरक्षण बदल सकता है। अगर ऐसा होता है तो राजनितिक दलों को एक बार फिर नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी।

इधर नगर विकास विभाग अप्रैल और मई तक चुनावी प्रक्रिया को पूरी करना चाह रहा है। यूपी नगर निगम नियमावली और नगर पालिका परिषद नियमावली में संशोधन भी कर सकता है। जिससे पिछड़े को 27 फीसदी आरक्षण देने की स्थिति पूरी तरह से साफ जाए। संशोधन की स्थिति में इसे कैबिनेट से मंजूर कराया जाएगा।

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बलिया में मृत महिला की भूमि रजिस्ट्री मामले में 5 नामजद और 1 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज

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बलिया के बांसडीह तहसील में मृत महिला की भूमि रजिस्ट्री के मामले में पांच नामजद और एक अज्ञात पर मुकदमा दर्ज हुआ है। मामला 40 साल पुराना है।

बता दें कि कोतवाली क्षेत्र के किसुनीपुर निवासी तिलेश्वरी देवी पत्नी शिवनंदन लाल की मौत 1984 में हो गई थी। उनकी एक पुत्री है। तिलेश्वरी देवी की मौत के बाद उनके वारिस के द्वारी उनकी भूमि की खतौनी पर अपना नाम दर्ज नहीं कराया गया।बीत नवंबर माह में भूमाफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर मृत तिलेश्वरी देवी के स्थान पर एक महिला को खड़ा करके सुल्तानपुर चक्की दीयर स्थित 16 बीघे से ज्यादा रकबा की जमीन की रजिस्ट्री कुछ लोगों को करवा दी। इसके बाद कस्बा स्थित एक बैंक से तीन लाख का लोन भी ले लिया।

इस मामले में मृत महिला के नाती गिरीशचंद्र श्रीवास्तव ने शिकायत की है। मृतका के लड़की का पुत्र गिरीशचंद्र श्रीवास्तव तहसील और बैंक से सभी दस्तावेज निकलवाने के बाद पांच नामजद व एक अज्ञात के खिलाफ शिकायत की है। थाना प्रभारी योगेन्द्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही हैं। मामला प्रकाश में आने पर अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची है। वहीं दूसरी तरफ फर्जी जमीन रजिस्ट्री कराने की जानकारी होने पर जमीन खरीदने वालों के होश उड़ गए। उन्होंने रजिस्ट्री कैंसल करवाने का आवेदन न्यायालय में दिया हैं।

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बलिया – स्वच्छता सर्वेक्षण 2023: इस बार अंक बढ़े, जानिए कैसे तय की जाती रैंकिंग

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बलिया। स्वच्छता में अव्वल आने के लिए अभी से तैयारी तेज हो गई हैं। नगर निकायों में स्वच्छता की रैंकिंग के लिए एक बार फिर से सर्वे जल्द ही शुरू होने वाला है। इस बार निकायों की रैंकिंग 9500 अंकों में प्राप्त अंकों के आधार पर होगी। जबकि पिछली बार 7500 में प्राप्त अंकों के आधार पर ही हुई थीं।

बलिया में 12 नगर निकायों में दो नगर पालिका और 10 नगर पंचायत हैं। 2022 के सर्वे में नगर पालिका ने एक लाख से 10 लाख की आबादी वाले नगर निकाय में 200 रैंक हासिल किए थे। स्टेट रैंकिंग में जिले को 33वां स्थान मिला । जबकि जोनल रैकिंग में नगर पालिका रसड़ा ने 173 के अलावा नगर पंचायत बैरिया ने 111, बांसडीह ने 136, चितबड़ा गांव 240, रेवती 32, बेल्थरारोड 90, मनियर 224, सहतवार 109 और सिंकंदरपुर ने 119वां रैक हासिल किया था।

इस आधार पर होगी रैंकिंग- स्वच्छ भारत मिशन के जिला कोआर्डिनेटर सत्यानंद के मुताबिक़ सर्विस लेवल प्रोग्रेस (SLP) के तहत नगर निकायों में स्वच्छता के लिए किए जा रहे कार्यों का आंकलन होगा। सर्टिफिकेशन में नगर निकायों को विभिन्न प्रकार के सर्टिफिकेट्स को प्राप्त करना है। जिसमें ओडीएफ, जीएफसी, सफाई मित्र जैसे प्रमाणपत्र शामिल हैं। फीडबैक में स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत एजेंसी सफाई को लेकर विभिन्न माध्यमों से आम नागरिकों की प्रतिक्रिया लेगी। इसमें निकाय की कुल आबादी के 3% प्रतिक्रिया ली जाएगी।

फीडबैक के लिए सवाल – जनता से पूछा जायेगा कि क्या आप अपने शहर को पहले से ज्यादा साफ-सुधरा पाते हैं? क्या आप डोर टू डोर कचरा प्रबंधन से संतुष्ट हैं?, क्या आप कचरा संग्रहकर्ता को अलग कचरा देते हैं?, क्या आप देखते हैं कि कचरे को जिम्मेदारी से प्रबंधन करने में लोगों का व्यवहार बदला है? क्या आप देखते हैं कि लोग अब खुले में शौच, पेशाब के प्रति अधिक संवेदनशील हैं? क्या आप पाते हैं कि सार्वजनिक-सामुदायिक शौचालय पहले की तुलना में अधिक सुलभ और स्वच्छ हैं? क्या आप देखते हैं कि सीवर लाइन बंद होने या सेप्टिक टैंकों से कीचड़ निकालने से संबंधित मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है?

सर्वेक्षण में ऐसे हो सकते शामिल – स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर के आम नागरिक स्वच्छता एप, स्वच्छ सर्वेक्षण की वेबसाइट और टीम के आने के बाद कागज पर लिखकर भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। सर्वेक्षण में उम्रवार प्रश्न पूछे जाएंगे सबसे ज्यादा भरोसा वरीय नागरिकों (60 वर्ष से ऊपर) पर किया गया है। ये 400 अंकों के लिए स्वच्छता एप पर फीडबैक देंगे।

वहीं 15-29 वर्ष के युवाओं से 11 प्रश्न पूछे जाएंगे। 30 से 59 वर्ष वालों से हर प्रकार के सवाल किए जाएंगे। इनसे मिले जवाब के आधार पर ही शहर की रैंकिंग होगी। 3 श्रेणी में 4-4 प्रश्नों का जवाब देना है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सतत स्वच्छता पर पूछे जाने वाले 4-4 सवाल 40-40 और जागरूकता पर आधारित 4 सवाल 20-20 अंकों के होते हैं। निर्धारित मापदंडों के आधार पर सर्वेक्षण होगा।

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