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बिजली संकट से मुक्त होगा बलिया, अगले माह से भूमिगत केबल से होगी बिजली आपूर्ति

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बलिया में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए विभाग तेजी से काम कर रहा है। बिजली सप्लाई के लिए भूमिगत केबल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में विभाग ने उम्मीद जताई है कि दिसंबर में नगर को भूमिगत केबल से आपूर्ति शुरु होगी।

इसका मतलब है कि अब हवा चलने या बारिश होने पर बिजली संकट नहीं आएगा। अक्सर तेज आंधी-बारिश में पोल और तार टूट जाते हैं जिससे घंटों पर बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है और लोगों को काफी परेशानी होती है। लेकिन अब अंडरग्राउंड केबल डाली जा चुकी हैं। जिससे किसी भी मौसम में बिजली सप्लाई बाधित नहीं होगी।

अंडरग्राउंड केबल के लिए विभाग ने तेजी से काम शुरु किया और अधिकांश घरों के पास तक केबल पहुंचा दिया गया है अब कनेक्शन किए जाने हैं। अब तक 14 हजार घरों के मीटर बाहर किए जा चुके हैं और खराब मीटरों को बदला जा चुका है। विभागीय अधिकारी के अनुसार, अधिकांश लोगों के मीटर घरों के अंदर लगे थे, इन्हें बाहर करने और मीटर खराब या क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें बदलने के लिए कुल 25 लाख की लागत तय है और इस कार्य की जिम्मेदारी मिलन कंस्ट्रक्शन को दी गई है। बताया कि मीटर बाहर होने के बाद इसे कनेक्शन करने का कार्य भी इसी कार्यदायी संस्था को करना है। उम्मीद है दिसंबर में शहर में भूमिगत केबल से आपूर्ति शुरू हो जाएगी।

वहीं अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण केंद्र द्वितीय, बलिया चंद्रेश उपाध्याय का कहना है कि भूमिगत केबल का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। उपभोक्ताओं के मीटर को घरों से बाहर करने और खराब मीटरों को बदलने का कार्य अंतिम दौर में है। जल्द ही नगर में भूमिगत केबल से विद्युत आपूर्ति शुरू हो जाएगी।

 

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बलिया के छात्र नेता चंद्रभानू पांडेय की कहानी, जो पुलिस के गोली के हुए थे शिकार

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“मुझे अपने भाई पर फक्र है। मैं हर जन्म में उन्हें ही अपने भाई के रूप में चाहता हूं। बस एक ही बात है कि जितनी जल्दी वो इस सफर में हमारा साथ छोड़ गए अगले जन्म में ऐसा ना करें।” रुंधी हुई आवाज में बलिया से समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुशील पांडेय ये बात अपने भाई चंद्रभानू पांडेय के बारे में कहते हुए शोकमग्न होकर चुप हो गए।

पिछले तीस वर्षों से पांच दिसंबर का दिन बलिया के चंद्रभानू पांडेय के पुण्यतिथि के रूप में मनाई जा रही है। रविवार यानी आज जिले के मुरली मनोहर टाउन डिग्री कॉलेज (टीडी कॉलेज) के जयप्रकाश नारायण साभागार में चंद्रभानू पांडेय की तीसवीं पुण्यतिथि मनाई गई। सभागार में उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सपा के बांसडीह विधायक रामगोविंद चौधरी और सपा नेता नारद राय समेत बड़ी संख्या में छात्र नेताओं ने चंद्रभानू पांडेय को श्रद्धांजलि अर्पित की।

चंद्रभानू पांडेय का जन्म 1966 में बलिया के बांसडीह स्थित बभनौली गांव में हुआ था। चंद्रभानू पांडेय के छोटे भाई सुशील पांडेय ‘कान्हजी’ बताते हैं कि “उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गांव के ही सरकारी स्कूल से पूरी हुई। बाद में उन्होंने टीडी कॉलेज में दाखिला लिया। टीडी कॉलेज से वो छात्र संघ का चुनाव भी लड़ चुके थे। निधन के साल भी वो छात्र संघ चुनाव की तैयारी कर रहे थे।”

सुशील पांडेय बताते हैं कि “एक समय ऐसा भी आया कि वो एयर फोर्स की नौकरी करने चले गए। एक साल तक एयर फोर्स में रहने के बाद उन्होंने इस्तिफा दे दिया और लौटकर बलिया आ गए। उन्होंने एम.ए. और बी.एड की भी डिग्री हासिल की थी। बात ये है कि वो पढ़ने में बहुत तेज थे। जान-पहचान के बच्चे उनसे आते थे पढ़ने या कभी-कभी सवाल पूछने।”

1991 का साल था। पांच दिसंबर की तारीख थी। कक्षा सात के एक बच्चे को रोडवेज के बस ने कुचल दिया। मौके पर ही बच्चे की मौत हो गई। सुशील पांडेय ने बताया कि “पुलिस ने बच्चे की लाश के साथ लावारिसों जैसा व्यवहार किया था। वहां किसी को जाने नहीं दिया जा रहा था। इसी बात को टीडी कॉलेज के छात्र आंदोलन करने लगे। इस आंदोलन का नेतृत्व चंद्रभानू पांडेय कर रहे थे।”

बकौल सुशील पांडेय छात्रों की मांग थी कि बच्चे के परिवार को मुआवजा मिले और लाश को परिवार के हवाले किया जाए। इसी आंदोलन के दौरान पुलिस ने फायरिंग की जिला कचहरी के सामने। पुलिस की गोली चंद्रभानू पांडेय को लगी और वो शहीद हो गए। तब से लेकर आज तक 5 दिसंबर का दिन एक काला दिन बन गया। लेकिन चंद्रभानू पांडेय एक शहीद की तरह अमर हो गए।टीडी कॉलेज में चंद्रभानू पांडेय को श्रद्धांजलि देते हुए नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी

चंद्रभानू पांडेय की मौत के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुशील पांडेय ने कहा कि “इस मामले में कोई विशेष जांच या कार्रवाई नहीं हुई। उस वक्त उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार थी। शासन स्तर पर उस दौरान बहुत प्रयास किया गया कि चंद्रभानू पांडेय के नाम पर बलिया में कुछ हो। लेकिन कुछ नहीं हुआ। हम लोगों ने अपने स्तर से ही बांसडीह रोड तिराहे पर उनकी मूर्ति लगाने के लिए भूमिपूजन किया है। शिलान्यास भी हो चुका है। जल्दी ही उनकी मूर्ति भी लग जाए ऐसी कोशिश की जा रही है।”

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क्या बलिया में सामूहिक विवाह साबित होगा सियासी औजार?

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बलिया के फेफना में राज्य मंत्री और विधायक उपेंद्र तिवारी ने सामूहिक विवाह का आयोजन कराया।

बलिया। रविवार को बलिया जिले में एक साथ 551 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत फेफना में सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सामूहिक के सूत्रधार थे उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री और फेफना विधानसभा सीट से विधायक उपेंद्र तिवारी। विधायक उपेंद्र तिवारी ने विवाह से पहले सभा को संबोधित किया।

सामूहिक विवाह में पंजीकृत जोड़ियों की संख्या तो 551 थी। लेकिन मौके पर विवाह के लिए 765 वर-वधू पहुंचे। बनारस से गए ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के साथ 551 जोड़ियों का विवाह संपन्न हुआ। लेकिन इस विवाह कार्यक्रम की शुरुआत हुई दिल्ली के कलाकारों द्वारा राम-सीता विवाह के नाट्य मंचन से।

जिले के बैरिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह की ओर से भी सामूहिक विवाह का आयोजन कराया गया। बैरिया के खपड़िया बाबा आश्रम पर सामूहिक विवाह का कार्यक्रम हुआ। बलिया सदर से विधायक और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि। विधायक सुरेंद्र सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत इस आयोजन में 101 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ।

सवाल है कि क्या ये सामूहिक विवाह जितना सीधा दिख रहा है उतना ही सीधा है भी? उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव बहुत करीब आ चुका है। इसलिए नेताओं और राजनीतिक दलों की हर गतिविधि को सियासी के नजरिए से भी परखा जाएगा। खासकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हर कदम को इससे जोड़ा जाना तय है।

बलिया में सात विधानसभा सीटें हैं। 2017 के विधानसभा में चुनाव में पांच सीटें भाजपा के खाते में गईं थीं। लेकिन 2022 के चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। 2017 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भाजपा के साथ थी। इस बार सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी की साईकिल पर सवार हो चुके हैं। बलिया की तीन सीटों पर ओमप्रकाश राजभर का व्यापक प्रभाव में माना जाता है।

सूत्र बताते हैं कि भाजपा के आंतरिक सर्वे से पार्टी को साफ संकेत मिल चुका है कि बलिया में 2017 के प्रदर्शन को दोहरा पाना आसान नहीं है। एक बड़ी वजह है स्थानिय कार्यकर्ताओं का अपनी पार्टी के विधायको से नाराजगी। बलिया से कई ऐसे विधायक हैं जिनकी बयानबाजी अक्सर भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर देती है।

ऐसे में बलिया के फेफना और बैरिया में आयोजित हुआ सामूहिक विवाह एक सियासी यज्ञ की तरह दिखता है। जिसमें जन सेवा की खुशबु भी है और चुनावी फायदे की महक भी। 551 जोड़ों का विवाह। कार्यक्रम स्थल पर हजारों की भीड़। विवाह के बाद सभी वर-वधू को घरेलू सामान भी दिए गए। ताकि यादगार बनी रहे। मसलन बरतन और सूटकेस जैसी चीजें हर जोड़े को दी गई।

सामूहिक विवाह में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की संख्या अधिक होती है। सरकार की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह में पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ वर-वधू की शादी कराई जाती है। कार्यक्रम में आए लोगों के लिए जलपान का प्रबंध भी कराया जाता है। पूरे गाजे-बाजे के साथ यह आयोजन संपन्न होता है। चुनाव से ठीक पहले हुए विवाह लोगों को ठीक-ठीक याद रहेंगे। वैवाहिक मंडप में हुए हवन से पैदा हुए ताप के उर्जा का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में किस कदर होता है इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा।

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ऑपरेशन मुस्कान: गुम हुए बच्चों को बलिया पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द किया

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बलिया पुलिस के द्वारा खोए हुए बच्चों को उनके परिवार से मिलवाने ऑपरेशन मुस्कान चलाया जा रहा है। इसके तहत आज फिर दुबहर पुलिस ने दो भटके बच्चों को उनके परिवार के सुपुर्द किया और परिवार की खोई हुई मुस्कान वापस लौटाई।

जानकारी के मुताबिक जनपद के ग्राम बुल्लापुर के रहने वाले दुखन राजभर पुत्र स्वर्गीय देवनाथ राजभर का 10 वर्षीय पुत्र कृष्णा उर्फ बम और सोमनाथ पुत्र स्वामीनाथ राजभर उम्र 8 वर्ष दोनों बच्चे अचानक लापता हो गए।

दोनों बच्चे घूमते घूमते जनेश्वर मिश्र सेतु जनाड़ी के पास पहुंच गई। जनता की सूचना पर दुबहर थानाध्यक्ष पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे और दोनों को अपने साथ लिया। बच्चों से पूछताछ करने पर उन्होंने घर का पता बताया। जिसके बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें थाने बुलाकर बच्चों को उन्हें सौंप दिया।

बच्चों के गुम हो जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं दुबहर पुलिस ने नेक काम करते हुए उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाई। बच्चों को मिलकर परिवारजन काफी खुश दिखे और बार-बार पुलिस को धन्यवाद देते नजर आए।

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