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बलिया में बिजली कटौती से मिलेगी मुक्ती, है कोई शिकायत तो इस नंबर पर करें फोन

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बलिया जिले में हर दिन अतिरिक्त चार घंटे की बिजली कटौती पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

बलिया जिले में बिजली की अतिरिक्त कटौती से राहत मिलने की उम्मीद है। जिले में हर दिन अतिरिक्त चार घंटे की बिजली कटौती पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश पर विद्युत विभाग की ओर से यह पहल की गई है। कोयला संकट के कारण विद्युत उत्पादन में आई कमी के बाद बलिया को दो भागों में बांटकर अलग-अलग फीडरों से चार घंटे बिजली काटने की व्यवस्था की गई थी।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। अब जिले में पहले की ही तरह शहरी और ग्रामीण इलाकों में रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति की जाएगी। बिजली विभाग के जिला नोडल अधिकारी और विद्युत वितरण खंड (द्वितीय) के अधिशासी अभियंता चंद्रेश उपाध्याय के मुताबिक “बिजली आपूर्ति की समस्या अब जल्द ही खत्म हो जाएगी। पहले की ही तरह रोस्टर के अनुसार शहर में चौबीस घंटे और गांवों में अठारह घंटे विद्युत सप्लाई की जाएगी। जिले को दो भागों में बांटकर चार-चार घंटे की अतिरिक्त कटौती को अब खत्म कर दिया गया है।”

चंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि बिजली आपूर्ति में किसी भी वजह से कोई बाधा न आए इसके लिए बलिया में एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी की जिम्मेदारी है कि शाम छह बजे से सुबह सात बजे तक बिना किसी रोक-टोक के लगातार बिजली आपूर्ति हो। इसमें तार टूटने, पोल की गड़बड़ी या फिर ट्रांसफार्मर में आई सभी समस्याओं का समाधान कमेटी ही करेगी। इसके अलावा जिले में बिजली से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण भी कमेटी के जिम्मे है। जिले का कोई भी व्यक्ति 1912 पर फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

गोरतलब है कि कोयले के संकट के कारण विद्युत उत्पादन में कमी आई है। इसे लेकर चारों तरफ बहस छिड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पिछले दिनों इस बाबत एक ट्वीट कर जानकारी दी थी। श्रीकांत शर्मा ने बताया था कि कोयला खनन कम होने के कारण बिजली उत्पादन में कमी आई है। लेकिन केंद्र सरकार इस मसले को निपटाने में लगी है। बता दें कि देश भर में सत्तर फीसदी बिजली का उत्पादन आज भी कोयले से ही होती है।

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बलिया की लोकगाथाओं के बारे में ये बातें आपको नहीं मालूम होंगी!

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लोकगाथाएँ जनसमुदाय की सांस्कृतिक स्मृतियों का अक्षय भंडार होती हैं। इतिहास, समाज और संस्कृति के साथ-साथ लोक के विविध स्वरूपों की झलक इन लोकगाथाओं में हमें सहज ही प्राप्त होती है। सत्यव्रत सिन्हा के अनुसार, ‘लोकसाहित्य वह लोकरंजनी साहित्य है जो सर्वसाधारण समाज की मौखिक रूप में भावमय अभिव्यक्ति करता है।’

भोजपुरी क्षेत्र में नौ प्रमुख लोकगाथाएँ प्रचलित हैं, जिन्हें आम जन द्वारा बड़े ही चाव से सुना जाता है। ये लोकगाथाएँ हैं : आल्हा, लोरिकी, विजयमल, कुँवर सिंह, शोभानयका बनजारा, सोरठी, बिहुला, राजा भरथरी और राजा गोपी चंद। इन लोकगाथाओं में जहाँ कुछ वीरगाथाएँ हैं, मसलन आल्हा, लोरिकी, विजयमल और कुँवर सिंह। वहीं शोभानयका बनजारा की लोकगाथा प्रेमकथात्मक है। सोरठी और बिहुला को रोमांचकथा की श्रेणी में रख सकते हैं। वहीं राजा भरथरी और राजा गोपी चंद की लोकगाथा में योग, दर्शन और वैराग्य की प्रधानता है।

इनमें से लोरिकी और शोभानयका बनजारा की कथा सीधे तौर पर बलिया से जुड़ी हुई है। इन लोकगाथाओं के नायक लोरिक और शोभानायक बलिया की भूमि से जुड़े हुए हैं और जन-स्मृतियों में आज भी उनकी वीरता की गाथाएँ सुरक्षित हैं। वहीं 1857 के विद्रोह के नायक वीर कुँवर सिंह से जुड़ी लोकगाथाओं में कुँवर सिंह के जीवन से जुड़े घटनाक्रमों का विवरण देने के क्रम में बलिया का उल्लेख प्रमुखता से आता है।

भोजपुरी लोकगाथाओं का गहन अध्ययन करने वाले विद्वान सत्यव्रत सिन्हा ने इन लोकगाथाओं में आए स्थानों के बारे में विस्तार से लिखा है। मसलन, लोरिक की कथा में ‘बोहा के मैदान’ का ज़िक्र आता है, जहाँ लोरिक और उसका बड़ा भाई सँवरू अपने मवेशी चराया करते थे। ‘बोहा के मैदान’ के संदर्भ में सत्यव्रत सिन्हा लिखते हैं कि ‘बलिया नगर से उत्तर दो मील की दूरी पर ‘बोहा का मैदान’ आज भी स्थित है। इसका क्षेत्रफल प्रायः चौदह मील के लगभग बतलाया जाता है। इसी ‘बोहा’ के अंतर्गत एक बड़ा ऊँचा टीला है जो ‘लोरिक डीह’ कहलाता है।’

लोरिक डीह से ही कुछ दूरी पर ‘सँवरू बांध’ गाँव है। नाम से ही स्पष्ट हो जाता है कि इस गाँव का नाम लोरिक के बड़े भाई सँवरू के नाम पर रखा गया। ‘सँवरू बांध’ से पूरब की ओर आगे बढ़ें तो ‘अखार’ नामक गाँव आता है। लोरिक की लोकगाथा में इस बात का ज़िक्र आता है कि लोरिक और उसका बड़ा भाई सँवरू इसी गाँव में स्थित अखाड़े में कुश्ती लड़ा करते थे।

उल्लेखनीय है कि चौदहवीं सदी में लिखी गई मौलाना दाऊद की प्रसिद्ध कृति ‘चंदायन’ भी लोरिक की इसी प्रसिद्ध लोकगाथा को आधार बनाकर लिखी गई है। इसकी रचना मौलाना दाऊद ने फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ के काल में वर्ष 1379 में की थी। ‘चंदायन’ को हिंदी का पहला प्रेमाख्यान माना जाता है।

इसी प्रकार वैश्य समुदाय से जुड़ी लोकगाथा ‘शोभानयका बनजारा’ का नायक शोभानायक बलिया के बाँसडीह के शंभू बनजारा का पुत्र रहता है। जिसका विवाह तिरहुत के जादूसाह की बेटी दसवंती से होता है। ‘शोभानयका बनजारा’ की लोकगाथा में बाँसडीह और तिरहुत के अलावा मोरंग, बहराइच और बरहज बाज़ार का भी ज़िक्र आता है। उल्लेखनीय है कि बाँसडीह अनाज के गल्लों के व्यापार का बड़ा केंद्र भी रहा है।

शुभनित

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बलियाः 4 साल बीते, नहीं बन पाया वेंडिंग जोन…कब मिलेगी जाम से मुक्ति?

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बलिया। शहर की सड़कों पर आप जहां नज़र घुमाएंगे, तो बेतरतीब तरीके से खड़े ठेले आपको आसानी से नजर आएंगे। शहर में अवैध तरीके से खोमचे और ठेले लगने से जाम की स्थिति बन जाती है। इन सब से निपटने के लिए वेंडिंग जोन बनाने की तैयारी थी। लेकिन वेंडिंग जोन की योजना सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई है।

18 माह पहले की कार्यदायी संस्था की ओर से वेंडिंग जोन का प्रस्ताव नगरीय विकास अभिकरण को उपलब्ध करा दिया था। चिह्नित स्थानों पर शेड, पेयजल, पार्किंग व अन्य सुविधाएं विकसित की जानी थीं ताकि दुकानदार आराम से अपना व्यापार कर सकें और ग्राहकों को भी कोई परेशानी न हो। शासन की योजना शहरी पथ विक्रेताओं को शोषण से मुक्ति दिलाने की भी थी। योजना के तहत, पटरी दुकानदारों का सर्वे कराकर उनका पंजीकरण कराकर पहचान पत्र जारी करना था। साथ ही उन्हें वेडिंग जोन में स्थापित करना था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी अभी तक इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लग पाई है।

बीते चार वर्ष में डूडा की ओर से वेंडिंग जोन एवं पार्किंग के लिए केडीएस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की शहरी पथ विक्रेताओं के पंजीकरण के साथ वेडिंग जोन को सर्वे कर चिह्नित कराया गया। इसमें संस्था की ओर से 20 स्थानों का प्रस्ताव किया गया। चौक से पानी टंकी रोड पर पहली दाएं और साथ लगी गली, इसी रोड पर पहली बायी गली रोड, अन्नपूर्णा होटल के पीछे, गुरुद्वारा रोड के पीछे और पीछे वाली गली, टाउन हाल मवेशी अस्पताल के पास सरकार स्कूल वाली गली, शनिचरी मंदिर एलआईसी होते हुए माल गोदाम तक, काली मंदिर से दुर्गा मंदिर तक, पुराने पोस्ट आफिस से नया चौक होते हुए एनएच-31 तक, एलआईसी के सामने से रामलीला मैदान चित्रगुप्त मंदिर होते हुए भृगु मंदिर तक, दुर्गा मंदिर के पास पुलिस चौकी एनएच-31 तक, चौक सुतरी पट्टी होते हुए लोहिया मार्केट तक, बस स्टैंड-गड़वार रोड पर बायीं तरफ, ओवरब्रिज के नीचे, कासिम बाजार रोड पर बायीं तरफ, गुदरी बाजार बायीं तरफ, चित्तू पांडेय चौकस, सागरपाली रोड-माल्देपुर स्टैंड, कुचेरी-मिड्ढी चौराहा होते हुए टीडी कालेज तक के स्थान शामिल थे।

कुल 1213 पथ विक्रेताओं का पंजीकरण किया गया था, जिनको विस्थापित किया जाना था। लेकिन वेडिंग जोन चिन्हित न होे से अब दुकानदार परेशान हैं। आए दिन दुकानों को लेकर विवाद होते हैं। पार्किंग और वेंडिंग जोन के अभाव में सड़क की पटरियों पर कहीं गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं तो कहीं ठेले लग रहे हैं। इससे जाम की स्थिति बनती है। वहीं डूडा प्रभारी पीओ का कहना है कि शहर में लेडिंग जोन के लिए 20 स्थान प्रस्तावित किए गए हैं। अभी इस पर जिलाधिकारी की मुहर नहीं लग पाई है। मुहर लगने के बाद इसे विकसित कराया जाएगा।

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Ballia- घाटे में बिजली विभाग, उपभोक्ताओं ने नहीं चुकाए 500 करोड़, हर महीने 33 करोड़ का नुकसान

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बलिया के विद्युत विभाग के बकायेदारों की जानकारी सामने आई तो कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। बकाया का खेल इतना लंबा है कि इसमें आम उपभोक्ताओं के साथ ही सरकारी कार्यालय भी शामिल हैं, जिनसे करोड़ों की बकाया राशि वसूल होनी है।

बिजली विभाग के उपभोक्ताओं पर करीब 500 करोड़ का भारी-भरकम बिल बकाया है। हैरान करने वाली बात यह है कि 50 से 60 करोड़ का बिल सरकारी कार्यालयों पर बकाया है, बाकि रकम आम उपभोक्ताओं को भरनी है। बकाया वसूली को लेकर विभाग तमामत प्रयास कर रहा है लेकिन बकायेदार बिल भरने से बचते घूम रहे हैं। विभाग ने 50 हजार रुपये से अधिक के बकाये वाले 40 हजार लोगों के खिलाफ धारा (3) की नोटिस जारी की है। यदि एक माह में इन लोगों ने भुगतान नहीं किया गया तो इनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी।

अगर बकाया की वसूली हो जाए तो जनपद में 100 नए उपकेंद्र स्थापित किए जा सकते हैं। जिले में वर्तमान में 45 उपकेंद्र हैं और पांच निर्माणाधीन हैं। क उपकेन्द्र बनाने में चार से पांच करोड़ का लागत आता है। ऐसे में केवल विभाग के बकाये की राशि 500 करोड़ की वसूली हो जाय तो 100 से अधिक उपकेंद्र स्थापित हो सकते हैं।

जिले में बिजली के कुल 3 लाख 48 हजार उपभोक्ता (सरकारी व गैर सरकारी) हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इनमें से 45 से 50 हजार उपभोक्ता ही नियमित भुगतान कर रहे हैं। यानि मात्र 15 प्रतिशत उपभोक्ता ही बिजली का बिल जमा कर रहे हैं। ऐसे में 55  करोड़ की बिजली विभाग खरीदता है लेकिन सिर्फ 12 करोड़ की वसूली हो रही है, यानि हर माह 33 करोड़ का घाटा विभाग को हो रहा है।

बिजली विभाग के नोडल अधिकारी व विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता चंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि बिल की वसूली के लिए अलग से टीम बनाई गई है। रेवेन्यू विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है। कुछ ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने लंबे समय से बिल जमा नहीं किया है।

विभाग के लिए सरकारी कार्यालयों से वसूली बड़ी टेड़ी खीर है। सबसे ज्यादा बकाया शिक्षा विभाग के ऊपर है। कई बार नोटिस देने के बाद भी जब बिल नहीं आया तो विभाग ने सरकारी परिषदीय विद्यालयों के साथ ही बीएसए दफ्तर की बिजली भी काट दी थी। हालांकि अधिकारियों की लिखा-पढ़ी के बाद बिजली चालू कर दी गयी।

वहीं बिजली विभाग के नोडल अधिकारी एक्सईएन चंद्रेश उपाध्याय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वह बिजली का अनावश्यक उपयोग बंद करें। वर्तमान में प्रदेश ऊर्जा की कमी से जूझ रहा है। त्योहारों को देखते हुए विभाग 17 रुपये प्रति यूनिट बिजली की खरीदारी कर ग्राहकों को मात्र 7 रूपये यूनिट उपलब्ध करा रहा है।

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