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बलिया के अनुराग ने रचा इतिहास, थल सेना के इस एग्जाम में किया टॉप, बने लेफ्टिनेंट

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बलिया डेस्क : बलिया के लाल अनुराग का चयन भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ है। उन्होंने टीजीसी (आर्किटेक) के आल इंडिया मेरिट में पहला स्थान प्राप्त किया है। अपनी इस कामयाबी से अनुराग ने ज़िले में इतिहास रचने का काम किया है। हल्दी थाना क्षेत्र के रामगढ़ निवासी अनुराग के थल सेना में लेफ्टिनेंट बनने से परिजनों के साथ समस्त जनपदवासियों में खुशी का माहौल है।

अनुराग के मुताबिक, उनका चयन थल सेना में 20 जनवरी को ही हो गया था। जुलाई से उनकी ट्रेनिंग शुरू होनी थी। लेकिन कोरोना की वजह से ट्रेनिंग शुरु नहीं हो सकी। अब उनकी ट्रेनिंग 6 अक्टूबर से देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी में होगी। अनुराग ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय माता-पिता के साथ ही गुरुजनों को दिया है। उनका कहना है कि इन्हीं लोगों के मार्गदर्शन से वह इस मुक़ाम तक पहुंचे हैं।

अनुराग के पिता गोपाल सिंह सीआरपीएफ के रिटायर्ड जवान हैं। वह सीआरपीएफ में उप सेनानायक पद पर तैनाथ थे। वहीं अनुराग की मां हाउसवाइफ हैं। अनुराग के बड़े भाई अनुपम दिल्ली में कार्यरत हैं और उनकी एकमात्र बहन कुसुम यूएसए में रहती हैं, जो शादीशुदा हैं। अनुराग की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वो बी आर्क हैं।

जो उन्होंने चेन्नई यूनिवर्सिटी से पांच वर्षों में कड़ी मेहनत के साथ किया है। इससे पहले उन्होंने इंटरमीडिएट ज़िले के ही केशरी देवी इन्टर कॉलेज से किया। वहीं दसवीं तक की पढ़ाई उन्होंने चेन्नई के सेंट्रल स्कूल से ग्रहण की है। अनुराग ने बताया कि वो शुरू से ही थल सेना में जाना चाहते थे। इस चयन से उनका सपना साकार हो गया।

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बलिया में टायर व पेट्रोल शव जलाने का वीडियो वायरल, 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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बलिया ।  बलिया में पुलिस की संवेदनहीनता सामने आई है। यहां गंगा में बहती लाशों को निकाल कर अंतिम संस्कार के समय उस पर पेट्रोल छिड़क दिया गया, जिससे वह जल्दी जल जाए। इतना ही नहीं चिता पर लकड़ी के साथ-साथ टायर भी रख दिए गए।

इसका वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने पांच सिपााहियों को सस्पेंड कर दिया है। पूरे मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार को सौंपी गई है ।

 

बताया गया है कि विडिओ यह फेफना के माल्देपुर घाट का है। यहां गंगा नदी से लाशों को निकालने के बाद सही तरीके से उनका अंतिम संस्कार नही किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि चिता पर लड़की के साथ टायर रखे गए हैं। शव को जल्दी से जलाने के लिए बीच-बीच में उसपर पेट्रोल भी छिड़का जा रहा है। यह सब सिपाहियों की मौजूदगी मे होता है।

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बुजुर्ग महिला को आवास नहीं मिला तो बलिया के बलवंत ने चंदा जुटा कर बनवा दिया घर

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बलिया। कहते हैं रोटी कपड़ा और मकान के लिए ही लोग जीवन भर संघर्ष करते रह जाते हैं। इसमें भी मकान का तो क्या ही कहना। जैसा समय है, व्यक्ति रोटी, कपड़ा का जुगाड़ कर ले बहुत है। लेकिन बलिया के एक शख्स ने कमाल का काम किया है।

पुराना मकान

सहतवार के बिसौली गांव के रहने वाले बलवन्त ने एक दिव्यांग महिला का घर बनवाने की जिम्मेदारी ले ली है। वह बीते कुछ महीनों से चंदा जुटा कर धीरजा देवी का घर बनवा रहे हैं।
देखिए कुछ तस्वीरें

मुख्यमंत्री तक ने नहीं सुनी बात
बलवंत बताते हैं कि शासन-प्रशासन के यहां वह दौड़ भाग करके थक गए। लेकिन सत्ता में बैठे किसी भी जनप्रतिनिधि का ना तो मन पसीजा और ना ही अपनी निधि से एक गरीब के लिए वह घर ही बनवा पाए।

उन्होंने धीरजा देवी का घर बनवाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। सीएम आदित्यनाथ के के जनता दरबार में कहने के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई और गरीब का घर नहीं बन सका।

बलवंत ने हमें बताया की बलिया के तत्कालीन डीएम भवानी सिंह खंगरौत तक बात गई थी। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने धीरजा देवी के घर के लिए डीएम से कहा था। बलवंत खुद कई बार जिम्मेदारी समझते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर कह चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

लगातार संपर्क और दौड़ भाग के बाद भी जब किसी ने कोई मदद नहीं की तो बलवंत ने खुद ही घर बनवाने का बीड़ा उठा लिया। बलवंत ने तय किया है कि वह चंदा जुटा कर ही धीरजा राजभर का घर बनवाएंगे। फिलहाल घर बन रहा है और इलाके में इस प्रयास की काफी चर्चा हो रही है। बलवंत ने बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो दो-तीन महीनों में ही घर तैयार भी हो जाएगा।

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बेटी के सिर से उठ गया था पिता का साया, उमाशंकर सिंह ने निभाई पिता की भूमिका, कराई शादी

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बलिया। जिले के रसड़ा विधानसभा से विधायक उमाशंकर सिंह ने क्षेत्र के एक गांव की गरीब बेटी की शादी अपने खर्च पर कराई है। जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।  बता दें कि शादी के ठीक छह महीने पहले  नेहा के पिता का साया उसके सिर से उठ गया।

छठ पूजा के दिन ही कुछ लोगों ने रसड़ा क्षेत्र के सरया गांव निवासी हीरामन यादव की गोली मारकर हत्या कर दी। पूरा परिवार बेसुध पड़ा था। पिता के शव पर बेटी का विलाप सबको झकझोर दे रहा था। भारी भीड़ के बीच रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। बेटी नेहा चीख-चीखकर कह रही थी, अब उसकी शादी कैसे होगी? मेरा कन्यादान कौन करेगा?

उसके सवाल लोगों का कलेजा चीर रहे थे। विधायक ने भरोसा दिया कि पिता को तो मैं वापस नहीं ला सकता लेकिन दोषियों पर कार्रवाई जरूर कराएंगे तथा शादी भी उसी धूमधाम से सम्पन्न कराएंगे, जैसा आपके पिता चाहते थे।

छह महीना पहले बंधायी गयी इस आस को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने 14 मई को पूरा किया। बेटी के तिलक से लेकर विवाह तक की सारी तैयारी अपनी देखरेख में करायी। बेटी के लिए उपहार व बरातियों-रिश्तेदारों के स्वागत में कोई कमी न रह जाय, इसकी सारी तैयारी खुद पूरी करायी।

तिलक के दिन ढेर सारा उपहार नेहा की ससुराल जगदीशपुर में भेजवाया तो 14 मई को शादी के दिन घंटों नेहा के घर पर एक अभिभावक की तरह मौजूद रहे। द्वारपूजा से लगायत अन्य सभी रस्मों में तत्परता से एक ‘बाबुल की भूमिका निभायी। कन्यादान नेहा के चाचा ने किया।

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