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बलिया के किसान हो जाएं सावधान, जैविक उर्वरक के नाम पर बिक रही नकली खाद!

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बलिया के किसान सावधान हो जाएं! क्योंकि बाजारों में मिल रही जिस जैविक खाद को आप मंहगे दामों में खरीद कर ले जा रहे हैं वह नकली भी हो सकती है। जनपद में इन दिनों जैविक खाद के नाम पर नकली उर्वरक की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। इससे किसान काफी परेशान है।

जिले के कई हिस्सों में नकली डीएपी भी बेचे जाने की शिकायत किसानों ने की है। बता दें कि इस समय रबी की फसलों की बोआई की जा रही है। जिसको लेकर डीएपी की कमी भी आ रही है और कुछ दुकानदार अपना फायदा करने के चक्कर में जैविक खाद के नाम पर नकली खाद बेच रहे हैं।

डीएपी की तरह दिखने वाली जैविक डीएपी को लेकर भरौली के किसान रामानंद व सुनील ने बताया कि यह उर्वरक खेतों में डालते ही राख की तरह हो जा रही है। यह भी बताया कि सीमावर्ती गाजीपुर के किसी गांव से लाकर बाजारों में नकली खाद धड़ल्ले से बेची जा रही है। इसकी जांच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि तीन सप्ताह पहले जिला कृषि अधिकारी ने सीमावर्ती मऊ जिले के मोहनसराय गांव में छापा मार कर नकली डीएपी बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। इसमें एक आरोपी भी पकड़ा गया था लेकिन इसके बावजूद नकली खाद की बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रही है।

वहीं बलिया में खाद की उपलब्धता की बात करें तो जिले में एक माह में दूसरी बार 2650 मीट्रिक टन इफ्को डीएपी की खेप रविवार की देर शाम में फेफना रैक प्वाइंट पर पहुंच गई। इस उर्वरक को जिले के कुल 113 सहकारी समितियों पर भेजने का काम भी सोमवार को प्रारंभ हो गया। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जिले में लक्ष्य के सापेक्ष डीएपी प्राप्त हो चुका है और समितियों पर किसानों को डीएपी का वितरण करने का निर्देश दिया गया है।

वहीं नकली खाद मामले पर जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने कहा कि डीएपी के बिक्री की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। तीन दिनों पहले ही भरौली चौराहे पर बिहार ले जा रहे डीएपी के मामले में कार्रवाई की गई है। जल्द ही छापेमारी की जाएगी और जैविक डीएपी के नाम पर बेचे जा रहे उर्वरक की सैंपलिंग की जाएगी। जिले में डीएपी की कोई कमी नहीं है। 2650 मीट्रिक टन इफको डीएपी को सहकारी समितियों पर भेजा जा रहा है।

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बलिया

बलिया – पावर ट्रांसफार्मर हुआ खराब, ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 8-10 घंटे मिलेगी बिजली

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बलिया के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कई कई घंटो बिजली कटौती की जा रही है। अब इस परेशानी को 25 दिन और झेलना पड़ेगा। बिजली विभाग ने सूचित किया है कि ट्रांसमिशन सबस्टेशन का 63 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर खराब हो गया है।  जिसके काराण रोस्टर के मुताबिक आपूर्ति की जा  रही है। इससे शहरी क्षेत्र में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 8-10 घंटे की बिजली की आपूर्ति की जा रही है। बिजली विभाग के मुताबिक इस क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को बदलने में लगभग 25 दिन का समय लगेगा। यानि कि अब से लगभग 1 महीने शहरवासियों व ग्रामीणों को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।

शहरी क्षेत्र में केवल 4-5 घंटे की कटौती हो रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हाल बेहाल है। यहां 15 से 16 घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रहती है। जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। इस अव्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में खासी नाराजगी है।

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बलिया में सरकारी एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल, जिलेभर के मरीज परेशान

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बलिया की एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल है। मरीज की स्थिति चाहे सामान्य हो या गंभीर, एंबुलेंस न तो समय पर पहुंचती है और न ही समय पर अस्पताल पहुंचाती हैं। हालत गंभीर होने पर मरीजों को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसे में जिलेभर में मरीज परेशान हैं।

बता दें कि जिले में मरीजों की सुविधा के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके लिए 76 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 38 एंबुलेंस 102 नंबर और 38 एंबुलेंस 108 नंबर की है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 11 मिनट तय किया गया है। यानि कि जब मरीज फोन करे तो 11 मिनट में ही एंबुलेंस पहुंचना चाहिए। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। 11 मिनट की बजाए एंबुलेंस आधे से एक घंटे से देर से पहुंच रही है। चालक दूर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार समय से न पहुंचने के कारण एंबुलेंस में ही प्रसव हो जाते हैं। कई एंबुलेंस तो मरम्मत व रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो गई हैं। जिला अस्पताल में कुछ एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। धूप, बारिश में वे खुले में सड़ रही हैं। सीएमओ आवास पर कई एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं। उनके अधिकांश पार्ट्स गायब हैं या खराब हो चुके हैं।

एम्बुलेंस प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि जिला अस्पताल से करीब 12 से 14 मरीज वाराणसी के लिए रेफर होते हैं। वहां 108 एंबुलेंस जाकर 12 घंटे तक फंस जाती है। मरीजों के लिए पास के हनुमानगंज में पांच एंबुलेंस रहती है जिन्हें तत्काल भेज दिया जाता है। वहीं सीएमओ डॉक्टर जयंत कुमार का कहना है कि कई बार हमने देरी से पहुंचने की बात को बैठकों में कहा है। रिस्पांस टाइम का पालन हो, इसके लिए सेवा प्रदाता को पत्र भेजा गया है। हर हाल में समय का पालन होना चाहिए।

 

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बलियाः जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट का कारनामा, मरीज को खड़ा कर ही लगा दिया इंजेक्शन

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बलिया जिला अस्पताल की बदतर व्यवस्थाओं के किस्से आपने सुने होंगे। अब अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। जहां फार्मासिस्ट अशोक सिंह ने मरीज को लेटाकर इंजेक्शन लगाने के बजाय खड़ा कराकर ही इंजेक्शन लगा दिया। फार्मासिस्ट की इस लापरवाही से बुजुर्ग मरीज दर्द से कराहता रहा।

बुजुर्ग को खड़े कर इंजेक्शन लगाने की तस्वीर वायरल हुई है। जिसके बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं। जब फार्मासिस्ट से पूछा कि आपने इस तरीके से सुई क्यों लगाई, जिस पर अपनी गलती मानने के बजाए वह पत्रकारों को धमकाया। बता दें कि जिला अस्पताल में अक्सर स्टाफ मरीजों की सही से देखभाल नहीं करते और आए दिन इलाज में लापरवाही करते हैं।

इसी बीच रविवार दोपहर चार बजे फार्मासिस्ट अशोक सिंह वार्ड में गए और मरीज को खड़े-खड़े ही इंजेक्शन लगा दिया। वहां मौजूद पत्रकार ने इस लापरवाही को अपने कैमरे में कैद कर लिया। बस फिर क्या, फार्मासिस्ट अशोक सिंह पत्रकारों पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि मेरी मर्जी में कैसे भी इंजेक्शन लगाऊं, आप पत्रकार लोग वीडियो कैसे बनाएं, हम आपकी जिला अस्पताल में इंट्री बंद करवा देंगे। उधर इस संबंध में जब सीएमएस डॉक्टर दिवाकर सिंह से बात की गई तो उन्होंने छुट्टी का हवाला देकर प्रभारी सीएमएस डॉक्टर वीके सिंह के पाले में गेंद डाल दी। वहीं जब पत्रकारों ने डॉक्टर वीके सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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