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जन्मदिन विशेष – आजादी से पहले ही बलिया को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय!

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बलिया डेस्क : शेरे बलिया के नाम से दुनिया भर में मशहुर चितु पांडये की आज 156वीं जयंती है. बलिया के रट्टूचक गांव में 10 मई 1865 को जन्मे चित्तू पांडेय ने 1942 के ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में स्थानीय लोगों की फौज बना कर अंग्रेजों को खदेड दिया था।

चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया भारत में सबसे पहले आजाद हुआ था. 23 मई 1984 को बलिया में चित्तू पांडेय की प्रतिमा का अनावरण करते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि सारा देश बलिया को चित्तू पांडे के कारण जानता है.

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जवाहर लाल नेहरू ने जेल से छूटने के बाद कहा था कि ‘मैं पहले बलिया की स्वाधीन धरती पर जाऊंगा और चित्तू पांडे से मिलूंगा.’ पता नहीं कि ऐसे चित्तू पांडेय की कहानी किसी प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल है भी या नहीं?

जब कांग्रेस कार्य-समिति के सदस्य हो गए थे गिरफ्तार

स्वतंत्रता सेनानियों के सामने 19 अगस्त 1942 को बलिया जिले के कलेक्टर ने आत्मसमर्पण कर दिया था. कलेक्टर को जन दबाव के कारण जेल में बंद चित्तू पांडेय और उनके साथियों को रिहा करना पड़ा. जेल से निकलने में थोड़ी देर हुई तो लोगों ने फाटक तोड़ दिया था.

इसके बाद आंदोलनकारियों ने कलेक्टरी पर कब्जा कर लिया और चित्तू पांडेय को वहां का जिलाधिकारी घोषित कर दिया.

चित्तू पांडेय का जन्म बलिया  के रत्तू-चक गांव में 1865 में हुआ था. उनका निधन आज ही के दिन (6 दिसंबर ) 1946 में हुआ. आजादी की लड़ाई के दौरान चित्तू पांडेय अपने साथियों जगन्नाथ सिंह और परमात्मानंद सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिए गये थे. इससे बलिया की जनता क्षुब्ध थी.

इस बीच नौ अगस्त 1942 को गांधी और नेहरू के साथ-साथ कांग्रेस कार्य समिति के सभी सदस्य गिरफ्तार कर अज्ञात जगह भेज दिए गए. इससे जनता उत्तेजित हुई.

बलिया जिले के हर प्रमुख स्थान पर प्रदर्शन व हड़तालें शुरू हो गईं. तार काटने, रेल लाइन उखाड़ने, पुल तोड़ने, सड़क काटने, थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमला करके उन पर राष्ट्रीय झंडा फहराने के काम में जनता जुट गई थी.

चौदह अगस्त को वाराणसी कैंट से विश्व विद्यालय के छात्रों की ‘आजाद ट्रेन’ बलिया पहुंची. इससे जनता में जोश की लहर दौड़ गई. 15 अगस्त को पांडेय पुर गांव में गुप्त बैठक हुई .उसमें यह तय हुआ कि 17 और 18 अगस्त तक तहसीलों तथा जिले के प्रमुख स्थानों पर कब्जा कर 19 अगस्त को बलिया पर हमला किया जाएगा.

धोखे से 19 स्वतंत्रता सेनानियों की हत्या

17 अगस्त की सुबह रसड़ा बैरिया, गड़वार, सिकंदरपुर , हलधरपुर, नगरा, उभांव आदि स्थानों पर जनता ने धावा बोल दिया. बैरिया थाने पर जनता ने जब राष्ट्रीय झंडा फहराने की मांग की तो थानेदार राम सुंदर सिंह तुरंत तैयार हो गया.

यही नहीं, उसने स्वयं गांधी टोपी पहन ली. झंडा फहराने के बाद जब जनता ने हथियार मांगे तो थानेदार ने दूसरे दिन देने की बात करके समस्या को टाल दिया.

दूसरे दिन करीब 40-50 हजार लोगों की भीड़ थाने पहुंची. थानेदार ने धोखा देकर करीब 19 स्वतंत्रता सेनानियों को मार डाला. गोली-बारूद खत्म हो जाने के बाद थानेदार ने अपने सिपाहियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. पर जनता ने किसी पुलिसकर्मी पर आक्रमण नहीं किया.

बैरिया की तरह नृशंस कांड रसड़ा में गुलाब चंद के अहाते में भी हुआ. पुलिसिया जुल्म में बीस लोगों की जानें गईं. इस तरह आंदोलनकारियों ने 18 अगस्त तक 15 थानों पर हमला करके आठ थानों को पूरी तरह जला दिया.

19 अगस्त को जिले में राष्ट्रीय सरकार का विधिवत गठन किया गया जिसके प्रधान चित्तू पांडेय बनाए गए. जिले के सारे सरकारी संस्थानों पर राष्ट्रीय सरकार का पहरा बैठा दिया गया.

सारे सरकारी कर्मचारी पुलिस लाइन में बंद कर दिए गए. हनुमान गंज कोठी में राष्ट्रीय सरकार का मुख्यालय कायम किया गया.

आंदोलनकारियों को सात साल की कैद और बीस बेंत की सजा

लोगों ने नई सरकार को हजारों रुपए दान दिए. चित्तू पांडे के आदेश से हफ्तों बंद दुकानें खोल दी गईं. 22 अगस्त को ढाई बजे रात में रेल गाड़ी से सेना की टुकड़ी नीदर सोल के नेतृत्व में बलिया पहुंची.

नीदर सोल ने मिस्टर वॉकर को नया जिलाधिकारी नियुक्त किया. 23 अगस्त को 12 बजे दिन में नदी के रास्ते सेना की दूसरी टुकड़ी पटना से बलिया पहुंची. इसके बाद अंग्रेजों ने लोगों पर खूब कहर ढाये.

आंदोलनकारियों को अदालत में पेश किया गया. उन्हें सात-सात साल की कैद और बीस-बीस बेंत की सजा दी गई.

किसी को नंगा करके पीटा गया तो किसी को हाथी के पांव में बांध कर घसीटा गया. उन घरों को ध्वस्त किया गया जहां सत्याग्रही जुटते थे.

अंग्रेजों ने अनेक गांवों के सैकड़ों घर जलाए. एक सौ सोलह बार गोलियां चलाई गईं जिनमें 140 नागरिकों की जानें गईं. सरकारी कर्मचारी सुबह होते ही किरोसिन लेकर गांव को फूंकने के लिए निकल पड़ते थे.

गांवों पर सामूहिक जुर्माना लगाया गया. चित्तू पांडेय भूमिगत हो गए थे. बलिया देश के उन थोड़े से स्थानों में था जहां अंग्रेजों ने सर्वाधिक जुल्म ढाये. क्या यह सच नहीं है कि ऐसे बलिदानों से मिली आजादी को आज के हमारे अधिकतर नेताओं ने अपने स्वार्थवश काफी बदरंग कर दिया है?

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‘मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे से नहीं है मंत्री का संबंध’, क्या फैलाई गई झूठी खबर?

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बलिया में चित्रगुप्त मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करने के विरोध में धरना-प्रदर्शन हुआ। भृगु मंदिर के निकट चित्रगुप्त मंदिर है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा होने का आरोप लगाया है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के डॉ. दयाल शरण वर्मा के नेतृत्व में कब्जे के खिलाफ धरना हो रहा था।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभ इस मुद्दे पर क्रमिक अनशन कर रही थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमन्त्री और बलिया सदर के विधायक आनंद स्वरूप शुक्ला का नाम घसीटा जा रहा है। कहा जा रहा है कि आनंद स्वरूप शुक्ला के समर्थन से ही मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है। कुछ खबरिया चैनलों ने लिखा है कि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला पर है। साथ ही अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का क्रमिक अनशन आनंद स्वरूप शुक्ला के खिलाफ था।

भारत समाचार द्वारा इस मसले पर किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

भारत समाचार द्वारा इस मसले पर किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस मामले को समझने के लिए हमने धरना-प्रदर्शन में मुख्य भूमिका निभा रहे अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के दयाल शरण वर्मा से बातचीत की। उन्होंने बताया कि “हमारा धरना मंदिर परिसर की जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ था। ना कि मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला जी के खिलाफ। आनंद स्वरूप शुक्ला का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।”

दयाल शरण शर्मा ने बताया कि “आज नगर मजिस्ट्रेट आए थे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा रोका जाएगा। लेकिन जो कब्जा कर रहा है वो रात के समय में अवैध निर्माण करा देता है। हालांकि हमने इसे लेकर आज नगर मजिस्ट्रेट को पत्रक सौंपा है।” बता दें कि भृगु मंदिर के पीछे चित्रगुप्त मंदिर है। मंदिर की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर अवैध निर्माण करवा दिया है। जिसके खिलाफ क्रमिक अनशन हो रहा था।

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प्रियंका गांधी का ऐलान, कांग्रेस उतारेगी 40 फीसदी महिला प्रत्याशी, बलिया से इनका नाम?

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प्रियंका गांधी का ऐलान, कांग्रेस उतारेगी 40 फीसदी महिला प्रत्याशी, बलिया से इनका नाम?

मंगलवार को कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश चुनाव की प्रभारी प्रियंका गांधी ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। प्रियंका गांधी ने ऐलान किया है कि कांग्रेस पार्टी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चालीस फीसदी सीटों पर महिला प्रत्याशियों को टिकट देगी। बलिया जिले में कई महिला कांग्रेसी इस बार अपनी मेहनत अजमाने की तैयारी कर रही हैं। बलिया खबर ने प्रियंका गांधी की इस घोषणा पर बलिया के महिला कांग्रेस नेताओं से बातचीत की।

बलिया के सदर विधानसभा सीट से कांग्रेस की महिला नेता हैं पूनम पांडेय। पूनम पांडेय फिलहाल बलिया आशा संघ की जिलाध्यक्ष हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश के महिला कांग्रेस कमेटी की सचिव रह चुकीं पूनम पांडेय विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही हैं। पूनम पांडेय ने कहा कि प्रियंका गांधी के इस फैसले का बलिया में बड़ा असर देखने को मिलेगा।”

उन्होंने बताया कि “मैं खुद बलिया के नगर विधानसभा सीट(361) से दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रही हूं। अगर चालीस फीसदी सीटों में मुझे भी मौका मिलता है बलिया से हमलोग एक बड़ा संदेश देने का काम करेंगे।” बता दें कि पूनम पांडेय बलिया के महिला कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष और प्रवक्ता भी रह चुकी हैं।

बलिया जिले के सदर विधानसभा सीट के अंतर्गत ही 2021 में जिला पंचायत सदस्य बनीं रेखा कवयित्री भी सक्रिय नेता हैं। रेखा कवयित्री 2022 के समर में उतरने की तैयारी कर रही हैं। 2021 के जिला पंचायत सदस्य चुनाव में रेखा कवयित्री कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी हैं। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के बाद बलिया कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से रेखा कवयित्री की मनमुटाव की बातें भी सामने आई हैं।

रेखा कवयित्री ने बलिया खबर से बातचीत में कहा कि “मैं अपनी तैयारी कर रही हूं। अगर कांग्रेस पार्टी टिकट देगी तो अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे।” बलिया कांग्रेस के नेताओं से मनमुटाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि “पार्टी के साथ मेरी कोई नाराजगी नहीं है। लेकिन जिले में कुछ ऐसे नेता जरूर हैं जो पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहे हैं।”

बलिया से कांग्रेस की पुरानी महिला नेता उषा सिंह भी विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही हैं। बलिया खबर से बातचीत में उषा सिंह ने कहा कि “प्रियंका गांधी जी का फैसला ऐतेहासिक है। मैं बलिया के नगर विधानसभा सीट (361) से तैयारी कर रही हूं। हालांकि कई जगह मेरा नाम सदर विधानसभा सीट के लिए भी चलाया जा रहा है। लेकिन हम नगर सीट से तैयारी कर रहे हैं।”

उषा सिंह फिलहाल कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले उषा सिंह बलिया यूथ कांग्रेस जिला कांग्रेस कमेटी की जिला उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उषा सिंह का परिवार लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि उषा सिंह की दावेदारी टिकट के लिए मजबूत है।

बलिया के बांसडीह विधानसभा सीट से सोनम बिंद चुनावी मैदान में उतरने का मन बना रही हैं। हमने फोन पर सोनम बिंद से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी। जिले के छात्र नेता अतुल पांडेय बताते हैं कि “सोनम बिंद को राजनीति में आए ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। लेकिन कम समय में ही उन्होंने क्षेत्र में ठीक-ठाक पकड़ बना ली है। बांसडीह में उनके खुब पोस्टर लगे हुए हैं।” अतुल के अनुसार “सोनम बिंद को उनकी जाति का अच्छा समर्थन मिलेगा और महिला उम्मीदवार के तौर पर एक बढ़िया विकल्प हो सकती हैं कांग्रेस के लिए।”

बता दें कि लखनऊ में प्रियंका गांधी ने आज कांग्रेस की पहली प्रतिज्ञा की घोषणा की। प्रियंका गांधी ने कहा कि हमने तय किया है कि “आने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी चालीस प्रतिशत टिकट महिलाओं को देगी। हमारी प्रतिज्ञा है कि महिलाएं उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह से भागीदार होंगी।”

देखने वाली बात होगी क्या कांग्रेस पार्टी बलिया के सात विधानसभा सीटों पर कितनी महिला प्रत्याशियों को टिकट देती है? सियासतगंज के सूरमाओं का कहना है कि अधर में लटकी हुई कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ी चाल चली है। प्रदेश में महिला मतदाताओं कि संख्या हालांकि यह फैसला कांग्रेस के लिए कितना कारगर साबित होता है यह चुनाव नतीजों से ही पता चलेगा।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 14.12 करोड़ थी। पूरे प्रदेश में 6.44 करोड़ महिला मतदाता हैं। पुरुष मतदाताओं की संख्य 7.68 करोड़ थी। देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस के चालीस फीसदी सीटों पर महिला प्रत्याशियों को टिकट देने के फैसला महिला मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है?

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रसड़ा विधायक ने समझा बाढ़ पीड़ितों का दर्द, सदन में रखी मुआवजे की मांग

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बलिया में बाढ़ ने इस बार तबाही मचाई। कई खेत-खलिहानों को बाढ़ के पानी ने अपनी चपेट में ले लिया। कई खेतों में कटान होने लगा। फसलें पूरी तरह चौपट हो गई। जिससे किसान काफी परेशान है। अब किसानों की परेशानी को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने समझा है। उन्होंने सोमवार को विधानसभा में नियम 51 के तहत टोंस की बाढ़ के कारण किसानों के फसल व आवास के नुकसान का मुआवजा देने की मांग रखी।

बसपा विधायक ने बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को सामने रखते हुए कहा कि बाढ़ ने कई लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त किया। विधानसभा क्षेत्र के सरायभारती, अतरसुहा, मुस्तफाबाद, कोप, खजुहा, वेसवान, तिराहीपुर, प्रधानपुर, फिरोजपुर, कोडरा, मिर्जापुर, लखुवा, जवनिया, सिलहटा, हजौली, लोहटा, सवरुपुर, बैजलपुर, संवरा आदि गांवों के अलावा खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया। फसलें चौपट हो गई। सैंकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई। कई रिहायशी मकान ध्वस्त हो गए।

विधायक ने इन गांवों का 26 व 27 सितंबर को निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि कई किसान आवास के अभाव में खुले आसमान में रहने को विवश हैं। उनके सामने भूखमरी की स्थिति आ गयी है। सरकार से मांगी की कि क्षतिपूर्ति का आंकलन कराकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं। इसी क्रम में विधायक ने नियम 301 के तहत बताया कि रसड़ा विस क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे रिंग बांध, जो गाजीपुर जनपद को जोड़ते हुए बलिया तक बना है, उमसें पांच-पांच सौ मीटर का गैप हो गया है। इसी रास्ते बाढ़ का पानी गांवों में पहुंच रहा है। कई गांवों के अस्तित्व पर ही खतरा है। उमाशंकर सिंह ने अधूरे बंधे के गैप को बनाने के साथ साथ नदी किनारे ठोकर बनवाने की भी मांग की। बाढ़ प्रभावित लंबे समय से परेशान है। ऐसे में विधायक ने उनकी परेशानी को समझा है जिससे प्रभावितों के चेहरों पर हल्की मुस्कान आई है।

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