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बलिया स्पेशल

मुख्य सचिव ने बलिया के कई स्थलों का निरीक्षण, सुरहा ताल को विकसित पर ध्यान देने को कहा

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बलिया। मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ जनपद के कई स्थलों का निरीक्षण किया। सबसे पहले उन्होंने विजयीपुर स्थित कटहल नाले के रेगुलेटर का निरीक्षण किया और अभियंता अरुण कुमार मिश्र से इसके संबंध में जानकारी हासिल की। इसके बाद जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय गए और वहां पर हो रहे निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति कल्पलता पांडे से विश्वविद्यालय में हो रहे निर्माण के कार्यो और समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। मुख्य सचिव श्री मिश्र सुरहा ताल गए और वहां पर उन्होंने सुरहाताल के संबंध में जानकारी हासिल की।

उन्होंने सुझाव दिया कि सुरहताल को साफ किया जाए। उसके उपरांत इसमें मछली पालन करके किसानों की आय बढ़ाई जाए। इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सुरहा ताल को अभ्यारण्य के रूप में विकसित करते समय ध्यान रखा जाए कि किसी भी किसान की जमीन इसमें ना आने पाए और किसी प्रकार का जमीनी विवाद उत्पन्न ना हो। साथ ही उन्होंने किसानों से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए भी कहा। सुरहा ताल के परिसर में मुख्य सचिव ने हरिशंकरी के पौधे का रोपण किया।

मुख्य सचिव ने अपने बचपन के स्कूल लक्ष्मी राज इंटर कॉलेज में गए और वहां पर उन्होंने विद्यालय के विद्यार्थियों और अध्यापकों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि 1972 में उन्होंने इस स्कूल में पढ़ाई की थी। इसके उपरांत में रांची चले गए, जहां आगे की उनकी पढ़ाई हुई। मुख्य सचिव ने भृगु मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना भी की।

ईसीए बाद मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी के निरीक्षण भवन गए, जहां पर उन्होंने कमपोजिट विद्यालय सोनाडीह सीयर जूनियर बालिका अंडर-17 ऑल इंडिया नेशनल चैंपियनशिप फुटबॉल टीम की सदस्य कुमारी आंचल, कुमारी नीतू पांडे, कुमारी निगम भारती को राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल टीम में चयन होने पर प्रमाण पत्र और फुटबॉल सामग्री दी। फुटबॉल टीम की इन खिलाड़ियों ने मुख्य सचिव से अनुरोध किया कि हमारे यहां फुटबॉल खेलने के लिए कोई ग्राउंड नहीं है। इस दिशा में ठोस पहल करने की बात कही। इस दौरान उनके साथ जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल, सीडीओ प्रवीण वर्मा सहित अन्य अधिकारी साथ थे।

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“कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई कि लोग रोने लगे तालियां बजाते हुए”

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कौसर उस्मान

शायरों ने हर मौके के लिए शेर लिखे हैं. अफसोस कि मातम के मौके के लिए भी बातें कही गई हैं. बलिया के हर दिल अजीज़ नेता मनीष दुबे मनन के ना होने कि ख़बर सुनने के बाद मुझे कैफ़ी आज़मी का वो शेर याद आया जिसमें उन्होंने लिखा “रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई. तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई “

बहरहाल! मनन दुबे से मेरी अकसर बात होती थी. पहली बार मेरी बात किसी खबर को लेकर झगड़े से शुरू हूई थी. बाद में मिसन्डर्स्टैन्डिंग क्लियर होने के बाद हम दोस्त तो नहीं लेकिन वो बलिया खबर और मेरे हमदर्द जरूर बन गए थे. हम सूचना आदान-प्रदान, जिले में राजनीतिक घटनाक्रम और खबरों को लेकर बात किया करते थे. मनन दुबे की इतनी कम उम्र में उनकी मकबूलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके मौत की मनहूस खबर आने के बाद बलिया और गाजीपुर में क्या नौजवान क्या उम्रदराज सबकी आंखें नम थी. अंतिम संस्कार में तो मानो पूरा बलिया ही चल पड़ा है. मैं बदनसीब हूं जो ऐसे चहेते और महबूब नौजवान नेता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका.

“चेन्नई में जब मुझे यह मनहूस खबर मिली कि बलिया के नौजवानों के दिलों पर राज करने वाले मनीष दुबे मनन अब हमारे बीच नहीं रहे, पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ कि एक अच्छा और सच्चा नौजवान नेता हमे छोड़ कर चला गया है. दिल उदासी से भर गया आँखें बाहर आने को बेताब थी, हाथ-पाँव काप रहे थे, लेकिन मौत एक हकीकत है, इससे कोई आंख कैसे मूंद सकता है? ये सोच कर बेचैन दिल को कुछ देर बहलाया.”गाजीपुर के अमवा गांव के रहवासी मनीष दुबे उर्फ मनन समाजवादी पार्टी के नेता थे. बीते शनिवार यानि 14 जनवरी को करंट लगने से उनका निधन हो गया. गड़वा रोड स्थित निधरिया नई बस्ती आवास पर छत पर लोहे के रॉड से नाली की सफाई कर रहे थे. इसी दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आने से उन्हें करंट लग गया. जिसके बाद वो इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए. ये ख़बर कुछ ही पलों में पूरे बलिया और गाजीपुर में आग की तरह फैल गई.

ख़बर के साथ दोनों ज़िलों में मातम पसर गया. कोई भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि मनन अब इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन मृत्यु तो अटल सत्य है. उसे कौन टाल पाया है. हर किसी स्वीकार करना पड़ता है. लेकिन कहते हैं न कि सत्य से सामना यूं नहीं होना चाहिए. मनन को ऐसे नहीं जाना चाहिए था. बलिया की छात्र राजनीति में मनन वर्तमान दौर में बड़े नाम थे. मुरली मनोहर टाउन डिग्री कॉलेज में महामंत्री रह चुके थे. छात्र संघ का चुनाव लड़ने वाला हर छात्र मनन का समर्थन पाने को आतुर रहता था. कहा जाता है कि मनन जिसके कंधे पर हाथ रख देते थे छात्र संघ चुनाव वही जीतता था.

मनीष दुबे मनन को याद करते हुए मेरे मित्र और बलिया के ही छात्र नेता अतुल पाण्डेय कहते हैं “मेरे छात्रसंघ चुनाव में वो मेरे साथ नहीं थे लेकिन मुझसे भावनात्मक रूप से जुड़े थे. जिसकी वजह से वो उस चुनाव में किसी के साथ नहीं रहे. जबसे वो छात्रसंघ के चुनाव में थे या रहे उसमे ये पहली और आखिरी बार था की वो चुनाव में किसी के समर्थन में वोट नही मांग रहे थे. उन्होंने हमेशा मुझसे कहा की भाई तुम्हारे साथ हैं, विरोध नहीं करेंगे.”अतुल आगे कहते हैं कि “रागिनी दुबे हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर पूरा जनपद प्रदर्शन कर रहा था. जिसका एक हिस्सा मैं भी था. तब मैं और मनन भइया साथ लखनऊ गए और समाजवादी पार्टी की तरफ से मिले 2 लाख के आर्थिक सहयोग का चेक लाकर पीड़ित परिवार को दिए थे. छात्रवृति की समस्या थी तब भी हमने साथ मिल के आंदोलन किया जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया.”

उनके साथियों में रहे राघवेंद्र सिंह गोलू बताते हैं “2013 से ही हम मनन भइया को जानते थे. राजनीति में लाने का पूरा श्रेय उन्हीं को जाता है. नारद राय जी तक मनन भइया ही हमको ले गए. जब मैं राजनीति में आया तो घर से रिश्ता नहीं रह गया. घर वालों ने समर्थन नहीं किया. उसके बाद मैंने उन्हें देखकर सीखा कि अभाव में देखकर जीवन कैसे जीया जाता है. मनन भइया प्रेरणा थे हमारे लिए.”

ज़िले के ही साजिद कमाल कहते हैं “मनन को मैं कई सालों से जानता हूं. उसे क्रिकेट का शौक था. उसकी सबसे बड़ी खासियत थी कि वो निस्वार्थ था. वो अपने लिए कुछ नहीं करता था. लोगों के लिए सोचता था. पहली जनवरी को हमलोग साथ थे. उसने हमें कई नेताओं से मिलाया. उसका भरोसा लोगों को जोड़ने में था.”

मनन दुबे के साथ की अपनी यादें साझा करते हुए छात्र नेता धनजी यादव कहते हैं “2015 में मैं छात्र राजनीति में आया. तब मैंने सुना था कि कोई मनन दुबे महामंत्री हैं. जिनके पास जाने पर मदद करते हैं. मैं गया उनको बताया की भइया चुनाव लड़ना है. मनन भइया ने चुनाव में पूरा सहयोग किया. उन्होंने हमें सिखाया कि बगैर पैसे-रुपए के भी चुनाव लड़ा जा सकता है. व्यवहार के बूते पर चुनाव लड़ सकते हैं हम.” वो आगे कहते हैं कि “कोरोना काल में एक प्रकरण में हम जेल चले गए थे. मनन भइया को कोरोना हुआ था. फिर भी उन्होंने हमें बाहर निकलवाया.”

ज़िंदगी में बहुत सारी चीजें मिल जाती हैं. कुछ जरूरी चीजें आपको खुद अर्जीत करनी पड़ती है. कमाना पड़ता है. जिसे सम्मान कहते हैं. आदर कहते हैं. मनन ने अपनी छोटी सी उम्र में इसे कमाया था. बुजुर्ग लोग कह गए हैं कि आपकी अंतिम यात्रा की भीड़ बताती है कि आप कैसे इंसान थे? तस्वीरें जब सामने आईं मनन दुबे की अंतिम यात्रा से तो जनसैलाब दिखा. दो ज़िलों के लोग उमड़े हुए दिखे. और फिर रहमान फ़ारिस का वो शेर याद आया “कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई कि लोग रोने लगे तालियां बजाते हुए!”

कौसर उस्मान ‘बलिया ख़बर’ के संपादक हैं.

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UPSSSC Result : बलिया में किसान का बेटा बना अधिशासी अधिकारी

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बलिया। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने बहुप्रतीक्षित अवर अधीनस्थ सेवा (सामान्य चयन) भर्ती परीक्षा – 2019 का अंतिम चयन परिणाम जारी किया है। आयोग ने शुक्रवार रात परिणाम के साथ ही कट ऑफ भी जारी की है। आयोग ने 672 पदों के सापेक्ष 670 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इस परीक्षा परिणाम में  बलिया जिले के असनवार गांव के अर्जुन कुमार राजभर पुत्र मुन्ना प्रसाद का चयन अधिशासी अधिकारी के पद पर हुआ है।

अर्जुन राजभर की 12 वीं तक की शिक्षा- दीक्षा गांव के ही एल.डी.इण्टर कालेज असनवार में ही हुई है तथा बी.ए. की पढ़ाई गांव के ही पास स्थित जय माता दुल्हमी त्रिभुवन महाविद्यालय चोगड़ा से पूरी हुई है। इस परीक्षा की तैयारी इन्होने इलाहाबाद से की है। अर्जुन राजभर वर्तमान में भूमि अध्याप्ति अधिकारी बलिया के कार्यालय में कनिष्ट सहायक के पद पर कार्यरत है।

एक सामान्य परिवार से सम्बन्ध रखने वाले श्री राजभर की मां एक हाऊस वाइफ है तथा पिता मुन्ना प्रसाद गुजरात में रहकर मजदूरी करते हुए पढ़ाई का पूरा खर्च वहन किये है। इस समय गांव पर ही रहकर खेती किसानी का काम कर रहे है ।

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बलिया पुलिस का ट्विटर हैंडल 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ रिकवर !

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बलिया। बलिया पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को हैक हुए 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है.  ट्विटर अकाउंट कब तक रिकवर हो जाएगा इस पर कोई भी उच्च अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है. हालांकि बलिया पुलिस दावा है कि जांच प्रणाली तैयार कर ली गई है और हैक किए गए ट्विटर हैंडल को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा.

बता दें कि हैकर्स ने बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बृहस्पतिवार की भोर में हैक किया गया है. हैकर्स ने अकाउंट हैक करने के बाद डीपी हटा दी है और ऑनलाइन गेम से संबंधित ट्वीट रीट्वीट किए हैं. बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर हैंडल वेरिफाइड है और @balliapolice के नाम से अकाउंट हैं. अकाउंट को 53.1K हजार लोग फॉलो करते हैं.   

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