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18 नवम्बर 13 दिसम्बर तक लगेगा ददरी मेला, प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन! पढ़ें पूरी जानकारी

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बलिया: ददरी मेले के आयोजन के सम्बन्ध में सीडीओ प्रवीण वर्मा ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक की। उन्होंने कहा कि 18 नवम्बर से 13 दिसम्बर तक कुल 25 दिनों तक यह मेला लगेगा। सीडीओ ने कहा कि मेले में यह सुनिश्चित किया जाए कि प्लास्टिक का प्रयोग एकदम नहीं हो।

बताया कि मेला को चार सेक्टर में बांटा गया है। साफ सफाई के लिए 75 सफाई कर्मचारी लगे होने की जानकारी मिलने पर ईओ को निर्देश दिया कि इनकी संख्या बढ़ाकर 150 से अधिक की जाए। मेले में पर्याप्त कूड़ादान व मोबाईल शौचालय की व्यवस्था हो। गंगा घाट पर महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के लिए उचित व्यवस्था की जाए।

मेला में सड़क, पानी, प्रकाश की समुचित व्यवस्था संग फॉगिंग मशीन भी चलवाते रहें। सुरक्षा के दृष्टिगत मेले के प्रवेश व निकास द्वार के अलावा बीच में कुछ महत्वपूर्ण जगहों पर सीसीटीवी कैमरा लगवाने के भी निर्देश दिए। पुलिस कंट्रोल रूम व पूछताछ केंद्र स्थापित करने को लेकर जरूरी दिशा—निर्देश दिए।

दुकान आवंटन में नहीं मिलनी चाहिए कोई शिकायत

दुकान आवंटित करने को लेकर सीडीओ ने कहा कि पूरी पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए दुकानों का आवंटन किया जाए। इसमें कहीं कोई शिकायत मिली तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। ​स्वास्थ्य विभाग को कैंप लगाने व एंबुलेंस की व्यवस्था रखने को निर्देशित किया। मेले में लगने वाले झूलों को समय—समय तक चेक करते रहने के निर्देश दिए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि मेले में खाने—पीने की शुद्ध सामग्री ही उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित कराएं।

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बलियाः नीलम की मौत के बाद न पति आया न परिजन, पुलिस को करवाना पड़ा अंतिम संस्कार

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बलियाः जिला कारागार में आत्महत्या का प्रयास करने वाली नीलम साहनी की मौत के बाद पुलिस ने ही उसका अंतिम संस्कार किया। युवती की मौत के बाद उसके परिजनों ने शव लेने के लिए इनकार कर दिया था।

वहीं प्रेमिका की मौत होने के बाद उसके परिजन उसकी लाश लेने से इंकार कर दिए। परिजनों द्वारा लाश न लिए जाने के चलते अंत में पुलिस द्वारा नियमानुसार मृतक का दाह संस्कार कराया गया।

जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह मुलाकात के लिए पहुंची बांसडीहरोड क्षेत्र के सरया डुमरी गांव निवासी नीलम ने अपने पति सूरज के साथ कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

नीलम की मौत के बाद दो दिनों तक पुलिस उसके मायके और ससुरालवालों की खोजबीन करती रही। लेकिन कोई परिजन सामने नहीं आया। पुलिस ने मृतका के मायके में उसके चाचा और पहली ससुराल में भी बात की, लेकिन मृतका से दोनों परिवारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। तीसरे दिन कोतवाली पुलिस ने स्वयं पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया और शिवरामपुर गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया।

 

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बलिया पुलिस का ट्विटर हैंडल 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ रिकवर !

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बलिया। बलिया पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को हैक हुए 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है.  ट्विटर अकाउंट कब तक रिकवर हो जाएगा इस पर कोई भी उच्च अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है. हालांकि बलिया पुलिस दावा है कि जांच प्रणाली तैयार कर ली गई है और हैक किए गए ट्विटर हैंडल को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा.

बता दें कि हैकर्स ने बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बृहस्पतिवार की भोर में हैक किया गया है. हैकर्स ने अकाउंट हैक करने के बाद डीपी हटा दी है और ऑनलाइन गेम से संबंधित ट्वीट रीट्वीट किए हैं. बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर हैंडल वेरिफाइड है और @balliapolice के नाम से अकाउंट हैं. अकाउंट को 53.1K हजार लोग फॉलो करते हैं.   

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जानिए कौन हैं गाजियाबाद के पहले पुलिस कमिश्नर बने बलिया के अजय कुमार मिश्र?

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बलिया के रहने वाले अजय कुमार मिश्र गाजियाबाद कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर बन चुके हैं। 2003 में आइपीएस बने अजय कुमार मिश्र को नई जिम्मेदारी मिलने पर परिवार में हर्ष का माहौल है। बलिया के सिकंदरपुर जमुई गांव के रहने वाले अजय मिश्र का बचपन से ही खाकी से नाता रहा है। उनके पिता कुबेरनाथ मिश्र पुलिस सेवा में रह चुके हैं। बेटा जब आईपीएस बना, उसी साल वह हेडकॉन्सटेबल के पद से रिटायर हुए।

अजय कुमार के बारे में बताते हुए पिता कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही पुलिस का परिवेश मिला। इसलिए अजय ने सिविल सेवा पास करने के बाद आईपीएस चुना। अजय की प्राथमिक शिक्षा गोंडा में हुई, जब पिता का तबादला लखनऊ हुआ तो अजय ने कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई लखनऊ में की। इसके बाद 1989 में वह वाराणसी आ गए।

उन्होंने यहां से 11वीं और इंटरमीडिएट करने के बाद काशी विद्यापीठ से ग्रेजुएशन किया। पैसे की किल्लत हुई तो बच्चों को ट्यूशन पढाया। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग के जरिए पहली नौकरी दिल्ली सचिवालय में ली। लेकिन अजय के मन में हमेशा से पुलिस सेवा में जाने की इच्छा थी, लिहाजा उन्होंने तैयारी की और परीक्षा पास की।वह सुल्तानपुर में नियुक्त रहे। उस समय मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के दो लोगों को गनर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। अजय पुलिस सेवा में सख्त अंदाज के लिए जाने जाते हैं, वह सिफारिशों को नजरअंदाज कर सीधे पीड़ितों की बात सुनते हैं। उनके पिता कुबेरनाथ का कहना है कि मैं चाहूंगा कि देश और समाज सुरक्षा के लिए वह सदैव कानून व्यवस्था को कायम रखने में सफल रहें।

 

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