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बलिया में क्यों कम नहीं हो रही हादसों की संख्या, नौ महीने में हुई इतनी मौतें!

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बलिया में सड़क हादसों और उनमें जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बेहद डरावनी है। यातायात पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बावजूद जनपद में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम नहीं लग पा रही है। तेज रफ्तार गाड़ियों का आतंक सबसे ज्यादा फैला हुआ है। पिछले नौ महीनों में दौ सौ से भी ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। इस बीच डेढ़ सौ से भी ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई है। लगभग डेढ़ सौ लोग ही इन दुर्घटनाओं में बुरी तरह जख्मी हुए हैं।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार बलिया जिले में इस साल जनवरी महीने से लेकर 31 अक्टूबर तक कुल 232 सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें 162 लोगों की मौत हुई है। जबकि इन हादसों में 153 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे हैं। इन नौ महीनों में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं मार्च और अगस्त में हुए। मार्च और अगस्त में 31 सड़क हादसे हुए हैं। तो वहीं जनवरी में 28, फरवरी में 23, अप्रैल में 19, मई में 18, जून में 21, जुलाई में 21, सितंबर में 21 और अक्टूबर में कुल 19 हादसे हुए हैं।

वाहन चालकों की खतरनाक लापरवाही इन दुर्घटनाओं की जड़ में है। अनियंत्रित रफ्तार, शराब के नशे में गाड़ी चलाना, हेलमेट न पहनना, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी करना ही हादसों का मुख्य कारण है। यातायात और सिविल पुलिस लगातार यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाती है। लेकिन सड़क पर उतरने के बाद वाहन चालक इन नियमों की धज्जियां उड़ा देते हैं। जिसकी वजह से वे अपनी जान के साथ दूसरों के भी जान खतरे में डालते हैं।

बलिया के यातायात नोडल अधिकारी ने बयान दिया है कि नवंबर माह में यातायात माह चल रहा है। जिसमें वाहन व बाइक चालकों को रैली, संगोष्ठी, पम्फलेट, नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूक किया जा रहा है। यातायात नियमों को लेकर लोगों में जागरूकता की बहुत कमी है। हर कोई जब यातायात नियमों के प्रति जागरूक होगा और नियमों का पालन करेगा तभी हादसों की संख्या कम होगी।

प्रशासन यातायात नियमों का पालन करवाने के लिए लगातार सख्ती बढ़ा रहा है। बड़ी संख्या में वाहनों का चालान किया जा रहा है। यातायात नियमों की अनदेखी कर रहे लोगों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। जनवरी से अक्टूबर तक ही साठ हजार से ज्यादा चालान हुए हैं। इनसे एक करोड़ से ज्यादा की वसूली हुई है। लेकिन चालान काटने का खास असर होता नहीं दिख रहा है। प्रशासन की ओर से इस महीने में यातायात माह चलाया जा रहा है। देखना होगा कि इससे कितने लोग जागरूक होते हैं और बलिया में हादसों की संख्या में कितनी गिरावट आती है।

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बलिया में सरकारी एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल, जिलेभर के मरीज परेशान

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बलिया की एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल है। मरीज की स्थिति चाहे सामान्य हो या गंभीर, एंबुलेंस न तो समय पर पहुंचती है और न ही समय पर अस्पताल पहुंचाती हैं। हालत गंभीर होने पर मरीजों को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसे में जिलेभर में मरीज परेशान हैं।

बता दें कि जिले में मरीजों की सुविधा के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके लिए 76 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 38 एंबुलेंस 102 नंबर और 38 एंबुलेंस 108 नंबर की है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 11 मिनट तय किया गया है। यानि कि जब मरीज फोन करे तो 11 मिनट में ही एंबुलेंस पहुंचना चाहिए। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। 11 मिनट की बजाए एंबुलेंस आधे से एक घंटे से देर से पहुंच रही है। चालक दूर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार समय से न पहुंचने के कारण एंबुलेंस में ही प्रसव हो जाते हैं। कई एंबुलेंस तो मरम्मत व रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो गई हैं। जिला अस्पताल में कुछ एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। धूप, बारिश में वे खुले में सड़ रही हैं। सीएमओ आवास पर कई एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं। उनके अधिकांश पार्ट्स गायब हैं या खराब हो चुके हैं।

एम्बुलेंस प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि जिला अस्पताल से करीब 12 से 14 मरीज वाराणसी के लिए रेफर होते हैं। वहां 108 एंबुलेंस जाकर 12 घंटे तक फंस जाती है। मरीजों के लिए पास के हनुमानगंज में पांच एंबुलेंस रहती है जिन्हें तत्काल भेज दिया जाता है। वहीं सीएमओ डॉक्टर जयंत कुमार का कहना है कि कई बार हमने देरी से पहुंचने की बात को बैठकों में कहा है। रिस्पांस टाइम का पालन हो, इसके लिए सेवा प्रदाता को पत्र भेजा गया है। हर हाल में समय का पालन होना चाहिए।

 

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बलियाः जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट का कारनामा, मरीज को खड़ा कर ही लगा दिया इंजेक्शन

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बलिया जिला अस्पताल की बदतर व्यवस्थाओं के किस्से आपने सुने होंगे। अब अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। जहां फार्मासिस्ट अशोक सिंह ने मरीज को लेटाकर इंजेक्शन लगाने के बजाय खड़ा कराकर ही इंजेक्शन लगा दिया। फार्मासिस्ट की इस लापरवाही से बुजुर्ग मरीज दर्द से कराहता रहा।

बुजुर्ग को खड़े कर इंजेक्शन लगाने की तस्वीर वायरल हुई है। जिसके बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं। जब फार्मासिस्ट से पूछा कि आपने इस तरीके से सुई क्यों लगाई, जिस पर अपनी गलती मानने के बजाए वह पत्रकारों को धमकाया। बता दें कि जिला अस्पताल में अक्सर स्टाफ मरीजों की सही से देखभाल नहीं करते और आए दिन इलाज में लापरवाही करते हैं।

इसी बीच रविवार दोपहर चार बजे फार्मासिस्ट अशोक सिंह वार्ड में गए और मरीज को खड़े-खड़े ही इंजेक्शन लगा दिया। वहां मौजूद पत्रकार ने इस लापरवाही को अपने कैमरे में कैद कर लिया। बस फिर क्या, फार्मासिस्ट अशोक सिंह पत्रकारों पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि मेरी मर्जी में कैसे भी इंजेक्शन लगाऊं, आप पत्रकार लोग वीडियो कैसे बनाएं, हम आपकी जिला अस्पताल में इंट्री बंद करवा देंगे। उधर इस संबंध में जब सीएमएस डॉक्टर दिवाकर सिंह से बात की गई तो उन्होंने छुट्टी का हवाला देकर प्रभारी सीएमएस डॉक्टर वीके सिंह के पाले में गेंद डाल दी। वहीं जब पत्रकारों ने डॉक्टर वीके सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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PM जन विकास योजना का विस्तार, बलिया में इन अल्पसंख्यक क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

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बलिया। उत्तरप्रदेश में अल्पसंख्यक वर्ग को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। जहां अब अल्पसंख्यक समाज को मजबूत और शिक्षित बनाने के लिए चल रही प्रधानमंत्री जन विकास योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। ऐसे में अब बलिया जिले के भी कुछ क्षेत्रों को योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास आदि के क्षेत्र में अल्पसंख्यकों को मजबूत बनाने के लिए भौतिक और सामाजिक ढांचे के विकास पर फोकस रहेगा।

25 फीसदी आबादी पर मिलेगा लाभ- नगरपालिका और नगर पंचायतों में जहां भी अल्पसंख्यकों की आबादी 25 प्रतिशत से अधिक है, वहां 5 किमी परिधि में सबसे अधिक आवश्यकता वाले विकास कार्यों को कराया जाएगा। सब कुछ ब्लॉक स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट पर होगा। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की देख-रेख में उन कस्बों या गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल मैदान, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, तकनीकी स्कूल, कॉलेज, लाइब्रेरी, छात्रावास आदि के विकास कार्य कराए जाएंगे। अल्पसंख्यक आबादी की गणना साल 2011 की जनगणना के अनुसार होगी

इन क्षेत्रों को मिलेगी विकास की संजीवनी- बलिया जिले में सदर तहसील, सिकंदरपुर, रसड़ा और बिल्थरारोड में अल्पसंख्यक समाज को विकास की संजीवनी मिल सकती है। क्योंकि इन क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों की आबादी 25 प्रतिशत से अधिक है।

हर जिले में होगा विकास- अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी दिव्य दुर्गेश सिन्हा ने बताया कि पहले भारत सरकार अल्पसंख्यक युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए MSDP यानि मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट के तहत अल्पसंख्यक बाहुल्य नगर, कस्बा और गांवों में बहुक्षेत्रीय विकास करती थी। उसमें जिला शामिल नहीं था । इस वजह से यहां के अल्पसंख्यक समाज को लाभ नहीं मिल पाया। अब इसका विस्तार कर दिया गया है। ब्लॉक स्तरीय रिपोर्ट के आधार पर कार्ययोजना बनाकर विकास कार्य होंगे।

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