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ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान की मांग, बदला जाए ददरी में लगने वाले मीना बाजार का नाम

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बलिया के ऐतिहासिक और देश के दूसरे सबसे बड़े पशु मेले ददरी मेले के लिए स्थायी भूमि अधिग्रहण तथा मेले में लगने वाले कला, साहित्य, शिल्प, सांस्कृतिक, व्यवसायिक प्रदर्शनी/बाजार/मेला का मुगलकालीन अश्लील नामकरण मीना बाजार का नाम समाप्त कर ददरी मेला रखने व मेले में बनने वाले अस्थायी थाना-मीना बाजार का नाम थाना-ददरी मेला रखने की मांग ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह बबलु ने किया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर, व प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, गृह व नगरविकास, मंडलायुक्त आजमगढ व जिलाधिकारी बलिया को प्रेषित कर यह मांग रखी है। उन्होंने मांग रखते हुए कहा कि यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि पूरे देश में भारतीय संस्कृति, सांस्कृतिक परम्परा के पुनरोद्धार में भारतसरकार और उत्तरप्रदेश सरकार जी जान से जुटी है। लेकिन भृगुक्षेत्र बलिया की पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक परम्परा को बचाने व बढ़ाने के लिये किसी भी स्तर पर कोई पहल अथवा प्रयास नहीं हो रहा है।

ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह इस दौरान मीना बाजार के नाम का विरोध करते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपने इक्यावन कविताओं में से एक कविता में अश्लीलता के परिचायक मीना बाजार का उल्लेख करते हुए लिखा था कि ‘अकबर के पुत्रों से पूछो क्या याद उन्हें है मीना बाजार’ ऐसे अश्लील शब्द मीना बाजार का पौराणिक व सांस्कृतिक व संत समागम वाले ददरी मेले से जुड़ना हम बलियावासियो के लिये अपमानजनक है। इसलिए मीना बाजार का नाम बदला जाए।

उन्होंने मेले के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर कहा कि पूर्व में राज्यपाल व मुख्यमंत्री जी को प्रेषित पत्रों पर उनके कार्यालयों द्वारा जिलाधिकारी बलिया को प्रेषित पत्रों पर जिलाधिकारी बलिया द्वारा पत्र द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया गया था कि तहसीलदार सदर द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरु करने का निर्देश दिया गया है। प्रक्रिया शुरु भी हुई थी लेकिन एक वर्ष बाद भी जिला प्रशासन, नगर पालिका व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण मामला ठंढे बस्ते में चला गया और अभी तक कुछ नहीं हो पाया।

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बलिया स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा, मुख्यमंत्री को दी व्यवस्थाओं की फर्जी रिपोर्ट

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बलिया में स्वास्थ्य विभाग के अब तक कई कारनामे देखने को मिले। जहां एक स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा देखने को मिला है। जो अब मुख्यमंत्री के सामने तक झूठ पेश करने से नहीं डर रहे हैं। बलिया स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही, मनमानी और अनियमितता के कई मामले सामने आने के बाद भी मुख्य चिकित्साधिकारी मुख्यमंत्री को बलिया में सभी अस्पतालों की व्यवस्था चाक-चौबंद बता रहे हैं।

बलिया के मुख्या चिकित्साधिकारी ने मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में फर्जी रिपोर्ट लगाई है। जिसमें कहा गया है कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं। केवल चिकित्सकों की कमी है। शासन को अवगत कराया गया है। बता दें भाजपा नेता सूर्यभान सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी कि जनपद के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बदतर है।

शिकायत में कहा गया था कि जनरेटर नहीं चलते हैं। एंबुलेंस की सेवा अस्त-व्यस्त है। सीएम कार्यालय द्वारा सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई थी। मुख्य चिकित्साधिकारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित अपने रिपोर्ट में बताया कि जिले की सभी अस्पतालों पर जब बिजली नहीं रहती है तो लगातार जनरेटर चलते हैं। सभी व्यवस्था चाक-चौबंद है। केवल चिकित्सकों की कमी है।

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बलिया- स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों का एलान, जाने कब से कब तक रहेंगी छुट्टियां

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बलिया में भीषण गर्मी के बीच स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी हैं। 20 मई से 15 जून जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेंगे। जिला बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन स्कूलों में ग्रीष्मावकाश और शीतावकाश को लेकर बीएसए शिवनारायण सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किया है। 16 जून से शैक्षणिक सत्र शुरू होगा।

बीएसए ने बताया कि शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक था, जबकि ग्रीष्मावकाश 20 मई से शुरू हो रहा है, जो 15 जून तक रहेगा। ग्रीष्मावकाश के बाद सत्रारम्भ 16 जून से होगा। उप्र बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि अवकाश के संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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बलिया : 2016 में हुई हत्या के आरोपी को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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बलिया में 2016 में हुई हत्या के मामले में आरोपी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 10 हजार का अर्थदंड लगाया है। पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी को सख्त सजा मिल सकी।

पुलिस के द्वारा चिन्हित मुकदमों के त्वरित निस्तारण का अभइयान चलाया जा रहा है। इसी के तहत मानिटरिंग सेल, विशेष लोक अभियोजक, संयुक्त निदेशक अभियोजन व पैरोकारों की प्रभावी पैरवी के चलते फेफना थाने में पंजीकृत धारा 302, 323, 504 भादवि में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने अभियुक्त पवन कुमार यादव उर्फ छांगुर को धारा 302 भादवि में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही 10 हजार रूपये के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया। अर्थ दण्ड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को 02 वर्ष का  अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 323 भादवि में दोषी पाते हुए 01 वर्ष का कारावास तथा एक हजार रूपये के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया।

अर्थ दण्ड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को 02 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 504 भादवि में दोषी पाते हुए 02 वर्ष का कारावास तथा एक  हजार रुपये के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया। अर्थ दण्ड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को 02 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 

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