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बलिया की राजनीति में मिलने जा रहा ऐसा चेहरा, जिसे है सियासत के हर रंग की पहचान!

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बलिया की राजनीति में भूचाल आ गया है। खबर है कि एक युवा नेता डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह बलिया की राजनीति में कदम रखने वाले हैं और पॉलिटिक्स में उनकी एंट्री की खबर ने राजनैतिक पार्टियों का ब्लडप्रेशर बढ़ा दिया है। हम बात कर रहे हैं बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के बेटे डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह की। जो एक युवा हैं। और बीजेपी में युवाओं को ज्यादा महत्व दिया जाता है। ऐसे में हलचल तेज है कि MLC चुनाव में विपुलेंद्र बीजेपी के उम्मीदवार भी हो सकते हैं। छात्र संघ से सफर शुरू करने वाले डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह राजनीति में कदम रख रहे हैं। हालांकि इस वक़्त डॉ. विपुलेंद्र मध्यप्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के प्रभारी हैं।

उत्तर प्रदेश की छात्र राजनीती में सियासत के मझे हुए खिलाड़ी डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह को लेकर अब बलिया राजनैतिक पार्टियों में भी घबराहट का माहौल बना हुआ है।सियासी गलियारों में हलचलें तब शुरू हुई जब डॉ. विपुलेंद्र ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। जिसमें उन्होंने पंचायत चुनाव में विजयी प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों, ब्लॉक प्रमुखों को बधाई दी। इसके अलावा जनपद मुख्यालय पर लगे होर्डिंग पर भाजपा समर्थित ब्लाक प्रमुखों के साथ उनका फोटो भी है। इतना सब कुछ देखकर एक बात तो साफ है कि विपुलेंद्र जल्द ही सियासत में एंट्री मार विरोधी पार्टियों के छक्के छुड़ाने को तैयार हैं।

यूं तो युवा नेता डॉ. विपुलेंद्र प्रताप मीडिया के सामने कम ही आते हैं लेकिन उन पर मीडिया की नज़रें हमेशा बनी रहती हैं। यही वजह है कि उनके इस पोस्ट के बाद से युवा नेता की राजनैतिक एंट्री पर कयास लगने शुरु हो गए हैं। मौजूदा हालातों की बात करें तो वर्तमान में समाजवादी पार्टी से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के प्रपौत्र रविशंकर सिंह पप्पू विधान परिषद सदस्य है। माना जा रहा है कि भाजपा और सपा के बीच इस सीट पर जमकर टक्कर हो सकती है। चर्चा तो इस बात की भी है कि अम्बिका चौधरी भी मैदान में उतरने जा रहे हैं। हालांकि इस मामले पर कोई भी नेता या कार्यकर्त्ता बोलने को तैयार नहीं है।

वैसे तो अभी विधान परिषद चुनाव की तारीखों का ऐलान तो नहीं हुआ लेकिन संभावना है कि साल के अंतिम माह में चुनाव हो सकता है। लेकिन जिले में माहोल अभी से बनने लगे हैं। सूत्रों के हवाले से बलिया ख़बर को पुख्ता जानकारी भी मिली है कि भाजपा डॉ. विपुलेंद्र को उम्मीदवार बनाने जा रही है। डॉ. विपुलेंद्र उम्मीदवार बनते हैं या नहीं यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन एक बात तो तय है कि डॉ. विपुलेंद्र के रुप में बलिया को राजनीति में एक ऐसा चेहरा मिलने जा रहा है, जिसे सियासत के हर रंग की पहचान बखूबी है।

स्कॉलर से सियासत तक का अब तक का सफर- बीएचयू से डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह ने छात्र राजनीति में कदम रखा था। राजनीति के साथ ही विपुलेंद्र सिंह पढ़ाई में भी काफी आगे रहे हैं। उन्होंने बीएचयू से ही पीएचडी की है। वहीं राजनीति की बात करें तो बीएचयू  और उत्तर प्रदेश में उनके बेहतरीन प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए उन्हें बीजेपी ने बड़ी जिम्मेदारी दी। डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह को युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया। साथ उन्हें मध्य प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया।

कांग्रेस की सरकार के समय उन्होंने एक मजबूत विपक्ष की भूमिका में कई मुद्दे उठाए। उनके नेतृत्व  में युवा मोर्चा ने सड़क पर उतर कर आंदोलन किए। और अब बलिया में डॉ. विपुलेंद्र प्रताप सिंह बीजेपी को मजबूत करने जा रहे हैं।

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कोरोना संक्रमण के बीच JNCU के दीक्षान्त समारोह पर छात्रों ने लगाया बड़ा आरोप !

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बलिया। देश के साथ ही उत्तरप्रदेश में भी कोरोना संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। रोजाना ढाई लाख से ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं जिसके चलते कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में बलिया में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) का दीक्षान्त समारोह 24 जनवरी को होने वाला है। जो अब सवालों के घेरे में हैं, आरोप लगाया जा रहा है कि बढ़ते संक्रमण के बीच छात्रों से रुपये वसूलने के लिए जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षान्त समारोह आयोजित किया जा रहा है।

बता दें कि, 24 जनवरी को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षान्त समारोह आयोजित होना है। जो कि कलेक्ट्रेट स्थित गंगा बहुउद्देश्यीय सभागार में होगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वर्णपदक प्राप्तकर्ता के अलावा प्रत्येक पाठ्यक्रम के टॉप 10 विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। विद्यार्थियों को सूचना देने की जिम्मेदारी संबंधित महाविद्यालयों को दी गयी है।

समारोह के लिए निमंत्रित छात्रों को कहा गया है कि वह 19, 20, 21, 22 जनवरी को दोपहर 12.00 से 4.00 बजे के बीच विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आकर 350 रुपये कॉशन मनी जमाकर पगड़ी और उत्तरीय ले सकते हैं। जिसके लिए विद्यार्थियों को एक फोटो, आधार कार्ड और अपने अंतिम वर्ष के अंक पत्र की छायाप्रति साथ लाना होगा। ये विद्यार्थी 22 जनवरी को विश्वविद्यालय में होने वाले पूर्वाभ्यास कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।

संक्रमण का ग्राफ बढ़ने के बीच दीक्षान्त समारोह कराने और छात्रों से जो कॉशन मनी लेने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि संकट के समय समारोह कराकर छात्रों की जान को खतरे में डाला जा रहा है और रुपयों की वसूली की जा रही है।

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सपा में सेंधमारी की कोशिश में बीजेपी, बलिया के दिग्गज नेता को ऑफर किया बड़ा पद!

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बलियाः उत्तरप्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन राजनैतिक गलियारों में गर्माहट बनी हुई है। वजह है आगामी विधानसभा चुनाव। चुनाव आयोग ने जब से विस चुनाव की घोषणा की है, तब से ही अलग अलग राजनैतिक पार्टियों के नेता भूख-प्यास, ठंड सब भूल कर अपनी जीत सुनिश्चित करने को ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। चुनाव को देखते हुए दलबदल की राजनीति भी जोरों पर है। बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस सभी दलों में विधायकों के आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है।

मौजूदा पार्टी से नाराजगी जताते हुए कई नेता विपक्षी पार्टियों का हाथ थाम रहे हैं। इस दल-बदल के खेल में सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी का हुआ। सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने पार्टी को अलविदा कह दिया और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। अब बीजेपी अपने जख़्मों को भरने की कोशिश कर रही है। बीजेपी की यह कोशिश अन्य पार्टियों में सेंधमारी पर आकर खत्म हो रही है। जी हां, विधायक खोने के गम में पार्टी अब सपा में सेंधमारी कर रही है।

बलिया ख़बर सूत्रों के मुताबिक बलिया के एक दिग्गज नेता को बीजेपी ने बड़ा पद आफर किया है, वहीं इस बात की पुष्टि करने के लिए जब हमने संबंधित नेता से बात करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि उनके करीबियों का कहना है की ये एक कोरी अफवाह है। वहीं सूत्र बताते हैं की उक्त नेता ने अभी अपने पत्ते नही खोले हैं, दूसरी तरफ बीजेपी के सूत्रों का कहना है की जिले में जल्द बड़ा बदलाव  देखने को मिलेगा। वैसे अब तो आने वाला समय बताएगा कि बीजेपी अपने मकसद में कामयाब हो पाती है या नहीं।

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बलिया में कागज में ही लग गए पौधे, वृक्षारोपण के नाम पर अफसरों ने डकारे लाखों रुपए

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बलियाः महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत पौधारोपण कार्य में अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला है। पौधे लगाने के नाम पर लाखों की राशि का बंदरबाट किया। नतीजा ये है कि धरातल पर सूखी मिट्टी पड़ी है और अफसरों की जेबे भरी हैं।

बता दें कि 2019 और 2020 में पौधे रोपित करने के नाम पर 9.70 लाख रुपए निकाले गए। लेकिन सोशल ऑडिट टीम ने जब जां की तो पता चला कि पौधारोपण के नाम पर सिर्फ अफसरों की जेबे हरी हुईं, जमीन बंजर मिली। श्रमिकों ने कोई पसीना नहीं बहाया। इस मामले में मुख्य विकास  अधिकारी प्रवीण कुमार वर्मा ने इन सभी मामलों में नोटिस जारी किया है। संबंधित खंड विकास अधिकारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई है।

जिले के अलग अलग ब्लॉक में पौधारोपण के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ। इसमें सोहांव ब्लाक के रामगढ़ गांव में नहर मुख्य मार्ग पर 64,740 रुपये पौधारोपण कार्य में खर्च किए गए। जांच के दौरान यहां कोई पौधा नहीं मिला।ॉ

कुछ ऐसा है बेलहरी ब्लाक में देखने को मिला। जहां एकौन सिवान से बजरहां गांव तक खड़ंजा तक दोनों तरफ 26,750 रुपये का पौधा लगाने के लिए निकाले गए थे। लेकिन पौधे गायब दिखे। बेलहरी के मझौंआ ग्राम पंचायत में एनएच-31 के स्पर पर बाढ़ से बचाव के लिए 23575 रुपये के पौधे लगाए थे, जो धरातल पर दिखते नहीं है।

बता दें कि पौधरोपण के नाम पर सबसे ज्यादा पैसे नगरा में निकाले गए। अलग अलग ब्लॉकों की राशि देखें तो सोहांव 73,740 रुपये, बेलहरी 1,31048, पंदह 10724, नवानगर 26915, सीयर 17600, बैरिया 17175, रसड़ा 65276, नगरा 4,45790, बांसडीह 167623 व रेवती ब्लाक में 14150 रुपये निकाले गए।

इसके अलावा कृपालपुर गांव में कब्रिस्तान के चारों तरफ लगाए गए करीब 64,100 रुपये के पौधे गायब हो चुके हैं। जांच में सिद्ध हो चुका है। केस 3 : सीयर ब्लाक के कुर्हातेतरा गांव में किसान धुरंजीत के खेत में 6,725 रुपये के लगे पौधे गायब हो चुके हैं, यहां दो साल पौधे रोपित करने के दावे किए गए थे। इसी तरह रसड़ा ब्लाक के फिरोजपुर में हनुमान मंदिर के परिसर में पौधे लगाने के नाम पर 8833 रुपये निकाले गए हैं। लेकिन जांच में कहीं कोई पौधे नहीं मिले।

पौधारोपण के नाम पर हुए इस बड़े भ्रष्टाचार को लेकर सोशल ऑडिट सेल प्रभारी अवधेश चौरसिया ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों की जांच दो साल पहले हुई थी। धरातल पर पौधे नहीं मिले हैं। देखने से भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि उन स्थानों पर पहले कभी कार्य भी हुआ था। गड्ढा भी नहीं दिखाई पड़ा। रिपोर्ट मनरेगा श्रम रोजगार विभाग को भेजी गई है।

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